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Dalhousie and Khajjiar Trip Guide

“डलहौज़ी” Dalhousie – नाम तो सुना होगा ! हिमाचल में है। अच्छा शहर है, ऐतिहासिक है, हिल स्टेशन है, बर्फ़ भी पड़ती है लेकिन जब बात सैर सपाटे की आती है तो यह शहर हमारी लिस्ट शायद ही कभी आता है। चलिए छोड़िये डलहौज़ी को, खज्जियार तो सुना होगा न…. वही जिसे भारत का स्विट्ज़रलैंड भी कहा जाता है। खज्जियार, डलहौज़ी के पास ही है, या फिर ऐसा कहें की खज्जियार के लिये डलहौज़ी होकर ही जाया जाता है।

आज डलहौज़ी और खज्जियार की ही बात करते हैं।

डलहौज़ी Dalhousie

Dalhousie
Dalhousie

2036 मीटर की ऊंचाई पर डलहौजी धौलाधार पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य स्थित एक बहुत की खूबसूरत पर्यटक स्थल है। पांच पहाड़ों (कठलौंग, पोट्रेन, तेहरा, बकरोटा और बलुन) पर स्थित यह पर्वतीय स्थल हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले का भाग है। अंग्रेजों ने 1854 में इसे बसाया और विकसित किया और तत्कालीन वायसराय लॉर्ड डलहौजी के नाम पर इस जगह का नाम डलहौजी रखा गया। ब्रिटिश सैनिक और नौकरशाह यहां अपनी गर्मी की छुट्टियां बिताने आते थे। मनमोहक वादियों और पहाड़ों के अलावा यहां के अन्य आकर्षण प्राचीन मंदिर, चंबा और पांगी घाटी हैं।

डलहौज़ी के प्रमुख आकर्षण Attractions near Dalhousie

सेंट पैट्रिक चर्च Saint Patrick Church

यह चर्च मुख्य बस स्टैंड से 2 किलोमीटर पहले डलहौजी कैंट की मिलिटरी हॉस्पिटल रोड पर है। यह डलहौजी का सबसे बड़ा चर्च है। यहां के मुख्य हॉल में 300 लोग एक साथ बैठ सकते हैं। इस चर्च का निर्माण 1909 में किया गया था। यह चर्च ब्रिटिश सेना के अफसरों के सहयोग से बनाया गया था। चर्च के चारों ओर प्रकृति का सौंदर्य बिखरा हुआ है। यह उत्तर भारत के खूबसूरत चर्चों में से एक है। पत्थर से बनी हुई बिल्डिंग भी कुछ अलग तरह की है।

सुभाष चौक Subhash Chowk

Subhash Chowk Dalhousie
Subhash Chowk Dalhousie

डलहौज़ी से एक रास्ता ऊपर की ओर जाता है। उस रास्ते पर एक किलोमीटर चलने के बाद सुभाष चौक आता है। सुभाष चौक पर आज़ाद हिन्द फौज के सेनानायक और महान स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा स्थापित है। कुछ बेंच भी लगी हुई हैं। सर्दियों में धुप सेकते हुए यहाँ चाय पीने का अलग ही आनंद है।

लक्ष्मीनारायण मंदिर Lakshminarayan Temple

लक्ष्मीनारायण मंदिर सुभाष चौक से 200 मी. दूर सदर बाजार में है। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। 150 साल पुराने इस मंदिर में भगवान विष्णु की बहुत की सुंदर प्रतिमा देखी जा सकती है। इस मंदिर में स्थानीय लोग नियमित रूप से दर्शन करने आते रहते हैं। इसी मंदिर से अगस्त/सितंबर के महीने में मणि महेश यात्रा की शुरुआत होती है।

सेंट फ्रांसिस चर्च Saint Francis Church

Saint Francis Church Dalhousie
Saint Francis Church Dalhousie

सुभाष चौक पर स्थित सेंट फ्रांसिस चर्च का निर्माण सन 1875 में हुआ था। यह डलहौज़ी के प्रमुख और बड़े चर्चों में से एक होने के साथ – साथ सबसे पुराना चर्च भी है।

गाँधी चौक Gandhi Chowk

Gandhi Chowk Dalhousie
Gandhi Chowk Dalhousie

सुभाष चौक से एक किलोमीटर आगे है गाँधी चौक जहाँ गाँधी जी प्रतिमा स्थापित है। यहाँ टैक्सी स्टैंड भी है। यहीं से दो रास्ते अलग – अलग दिशाओं में जाते हैं – ऊपर वाला खजियार की ओर, जो की फिरहाल बंद था और नीचे वाला पंचपुला Punchpulla की ओर। इसके साथ – साथ यहाँ से विशाल हिमालयी पर्वत शृंखलाओं का शानदार दृश्य दिखाई पड़ता है।

पंचपुला Punchpulla

Punchpula Dalhousie
Punchpula Dalhousie

गाँधी चौक से नीचे की ओर जाने वाले रास्ते पर 2.5 किलोमीटर आगे बढ़ने पर आता है पंचपुला। पंचपुला में कई झरने हैं जो की फिरहाल जमे हुए थे। यह रास्ता लगभग सुनसान ही है लेकिन दोस्तों के साथ इस रास्ते पर पैदल घूमना अलग ही अनुभव देता है। पंचपुला में बच्चों के मनोरंजन का ध्यान रखते हुए झूले भी लगाए गए हैं और कुछ दुकाने हैं। स्वतंत्रता सेनानी और शहीद भगत सिंह के चाचा सरदार अजीत सिंह की मृत्यु भारत की आजादी के दिन हुई थी। उनकी समाधि पंचपुला में बनाई गई है। इस खूबसूरत जगह पर एक प्राकृतिक कुंड और छोटे-छोटे पुल हैं जिनके नाम पर इस जगह का नाम रखा गया है। पंचपुला के रास्ते में ही सातधारा है जहाँ से डलहौजी और बहलून को पानी की आपूर्ति होती है।

कालाटोप वन्यजीव अभयारण्य Kalatop Wildlife Sanctuary

Kalatop Wildlife Sanctuary
Kalatop Wildlife Sanctuary

समुद्र तल से 2440 मी. की ऊंचाई पर स्थित यह जंगल बहुत ही घना है। विभिन्न प्रकार के पक्षियों को देखने के लिए यह जगह बिल्कुल उपयुक्त है। यहां की खूबसूरती भी देखते ही बनती है। जो पर्यटक यहां रात भर रुकना चाहते हैं उनके लिए एक रेस्ट हाउस भी है। यहां ठहरने के लिए डलहौजी में आरक्षण कराना होता है। इस जंगल के पास ही लक्कड़ मंडी है।

डलहौज़ी के मुख्य स्टैंड से एक रास्ता यह कहें की गली नीचे की ओर जाती है जिसमें बहुत सारे होटल बने हुए हैं। ऐसा भी कह सकते हैं की डलहौज़ी में अधिकतर होटल इसी रास्ते पर हैं। इसी रास्ते पर ‘फारेस्ट हाउस’ Forest House नाम के होटल में हमें एक कमरा 700 रुपये में मिल गया। यहाँ मैं एक सलाह देना चाहूंगा की डलहौज़ी यात्रा के लिये ऑनलाइन होटल न ही बुक करें तो अच्छा क्योंकि रियल टाइम बुकिंग सस्ती पड़ती है।

(Click here to read Char Dham Yatra)

खज्जियार Khajjiar

Hut at Khajjiar Lake
Hut at Khajjiar Lake

बहुत से लोगों से सुना है धरती पर दूसरा स्वर्ग कहीं है (पहला वाला तो अपना कश्मीर है) तो वह है स्विट्जरलैंड में। ‘खज्जियार’ दुनिया के 160 मिनी स्विट्जरलैंड में से एक माना जाता है। किसी युरोपीय देश से कम नहीं है खज्जियार की सुंदरता। यहां का मौसम, चीड़ देवदार के ऊंचे-लंबे हरे-भरे पेड़, बर्फ़ से ढके मैदान और पहाड़ और वादियां स्वर्ग का अनुभव कराती है।

यहाँ मैदान के बीचों बीच एक तश्तरीनुमा झील है। इसी झील किनारे पहाड़ी शैली में बना खज्जी नाग का मंदिर भी है। मान्यता है की खज्जी नाग इसी झील में वास करते हैं। झील के बीच में एक छोटी सी झोपड़ी बनी हुई है जो की माहौल को रोमांटिक बनाने के लिये काफी है। कुछ लोग यहीं प्री-वेडिंग शूट भी करवाते हैं। यहाँ ठहरने के लिये कई डाक बंगले व रेस्ट हाउस हैं। यह पर्यटक स्थल छोटा भले ही है लेकिन लोकप्रियता में बड़े-बड़े हिल स्टेशनों को मात देने के लिये पर्याप्त है।

वैसे इस हिल स्टेशन को ऐसे ही मिनी स्विट्ज़रलैंड नहीं कहा जाता, यहाँ बाकायदा स्विस नेशनल टूरिस्ट ऑफिस द्वारा जारी किया गये सर्टिफिकेट को भी एक बड़े बोर्ड पर लगाया गया है जो यह दर्शाता को स्विस प्रशाशन भी इसे मिनी स्विट्ज़रलैंड मानता है। इसके साथ – साथ जिस दिशा में असली स्विट्ज़रलैंड है उस दिशा की ओर इंगित करते हुए एक चिन्ह भी लगा है जिस पर यहाँ से स्विट्ज़रलैंड की दूरी (6194 किलोमीटर) लिखी हुई है।

Mini Switzerland Signboard Khajjiar
Mini Switzerland Signboard Khajjiar

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डलहौज़ी और खज्जियार यात्रा से जुडी महत्वपूर्ण जानकारियाँ Important information related to Dalhousie and Khajjiar

  • डलहौज़ी के लिये दिल्ली और पठानकोट सीधी बस सेवा उपलब्ध है। विशेष रूप से दिल्ली / पठानकोट से चम्बा (हिमाचल प्रदेश) जाने वाली सभी बसें डलहौज़ी हो कर ही जाती हैं। डलहौज़ी पहुँच कर आप वहां से खज्जियार तक का 24 किलोमीटर का सफ़र टैक्सी द्वारा तय कर सकते हैं लेकिन यदि बर्फ़बारी के कारण रास्ता बंद हो तो यह सफ़र लगभग 72 किलोमीटर का हो जाता है क्योंकी उस स्थिती में टैक्सी चम्बा हो कर जाती है।
  • दिल्ली से डलहौज़ी और खज्जियार तक की यात्रा में कुल 4 दिन लगते हैं (आना और जाना)।
  • वैसे तो डलहौज़ी के लिये बहुत सी बसें उपलब्ध हैं लेकिन सीट की बुकिंग पहले ही ऑनलाइन कर लें तो अच्छा।
  • खज्जियार और डलहौज़ी के आस – पास अन्य स्थानों के लिये टैक्सी बुक कर रहे हैं तो डलहौज़ी बस स्टैंड स्थित टैक्सी यूनियन के ऑफिस में ही बुक करें।
  • डलहौज़ी और खज्जियार में मोबाइल नेटवर्क की कोई समस्या नहीं है। एयरटेल और जिओ आदि के नेटवर्क आते हैं।
  • खज्जियार में होटल तो हैं लेकिन कम ही हैं और महंगे भी। इसलिये बेहतर होगा की रुकना डलहौज़ी में ही करें। डलहौज़ी में बहुत सारे होटल हैं, इसलिये ऑनलाइन बुकिंग का कोई फायदा नहीं। रियल टाइम पर सस्ते कमरे मिल जाते हैं।
  • डलहौज़ी से गाँधी चौक, पंच पुला आदि के लिये भी टैक्सी मिलती है लेकिन बेहतर है की इन रास्तों पर पैदल ही चलें। उसमें ही आनंद है।
  • पहाड़ों में AMS (Acute Mountain Sickness) की समस्या होना आम बात है। इसके लक्षण हैं बुखार, तेज़ बदन दर्द, खांसी, सर दर्द, उल्टी आदि। AMS से बचाव के लिये हमारा विस्तृत लेख यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

कब जायें ? Best time to visit Dalhousie and Khajjiar

पूरे वर्ष में कभी भी जा सकते हैं। यदि बर्फ़बारी देखना चाहते हैं तो दिसंबर के अंत से फ़रवरी तक का समय बेहतर रहेगा और इस समय यहाँ ऑफ सीजन होने के कारण होटल भी सस्ते मिल जाते हैं।

रहने की सुविधा ? Stay in Dalhousie and Khajjiar

खज्जियार की अपेक्षा डलहौज़ी में अधिक होटल हैं और बहुत सारे हैं।

कैसे पहुंचे ? How to reach Dalhousie and Khajjiar ?

(यहाँ हम दिल्ली को आधार स्थल मान कर चल रहे हैं।)

सड़क द्वारा

बस यात्रियों के लिये दिल्ली के कश्मीरी गेट ISBT से डलहौज़ी के लिये सीधी बस सेवा है। कई बार बर्फ़ अधिक होने के कारण डलहौज़ी तक न जाकर 9 किलोमीटर पहले बनीखेत से ही बस चम्बा की ओर निकल जाती है। इसलिये बनीखेत उतर कर वहां से डलहौज़ी के लिये शेयर्ड टैक्सी या बस ले सकते हैं। डलहौज़ी से खज्जियार के लिये टैक्सी उपलब्ध है।

अपने वाहन से आने वाले सोनीपत – पानीपत – करनाल – अम्बाला – लुधियाना – जालंधर – पठानकोट – नैनीखड्ड और बनीखेत से होते हुए डलहौज़ी आ सकते हैं। डलहौज़ी से खज्जियार गाँधी चौक होते हुए पहुंचा जा सकता है और यदि बर्फ़बारी अधिक हुई है तो चम्बा होते हुए पहुंचना होगा।

On the way to Khajjiar via Chamba
On the way to Khajjiar via Chamba

रेल द्वारा

नज़दीकी रेलवे स्टेशन पठानकोट है। पठानकोट से डलहौज़ी के लिये बसें उपलब्ध हैं।

हवाई मार्ग

नज़दीकी हवाई अड्डा पठानकोट में और उससे आगे का सफ़र ऊपर दिये तरीकों से तय किया जा सकता है।

इस लेख में डलहौज़ी और खज्जियार यात्रा से सम्बंधित सभी जानकारियां देने का प्रयास किया गया है। यदि आपके मन में कोई प्रश्न है तो कमेंट बॉक्स में अवश्य लिखें।

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