Parmarth niketan

हरिद्वार – ऋषिकेश यात्रा (A trip to Haridwar – Rishikesh)

घुमक्कड़ी का शौक कब से लगा यह तो नहीं पता, लेकिन जब भी मौका मिलता है कहीं न कहीं निकल जाता हूँ। स्वयं तो घूमता ही रहता हूँ लेकिन बहुत दिनों से इच्छा थी की माता – पिता को भी ले जाऊँ। लेकिन उन्हें कहीं चलने के लिए तैयार करना आसान कार्य नहीं हैं। माँ तो मान भी जाए, लेकिन पिता जी को मनाना एवरेस्ट फ़तह के समान है। मानते ही नहीं है। उन्हें कहीं घूमने चलने के लिए कहो तो ऐसे घूर कर देखते हैं की फिर मेरी हिम्मत ही नही होती। आख़िर इस जुलाई 2017 में कुछ ऐसा हुआ की उन्होंने चलने के लिए हाँ कर दी।

ज़्यादा आगे तो नहीं, लेकिन ऋषिकेश तक चलने के लिए मान गए। 4 अगस्त की मसूरी एक्सप्रेस की टिकट मिल गयी और वापसी की टिकट योग एक्सप्रेस की।

कहानी ज़्यादा लम्बी नहीं है। 4 अगस्त की शाम को टैक्सी से दिल्ली स्थित सराय रोहिल्ला स्टेशन पहुँच गए। इस यात्रा में शामिल थे मेरे माता – पिता, पत्नी और मेरा 2 साल का बेटा। प्लेटफार्म खाली ही था। ट्रेन भी खाली ही थी और वो इसलिए की ज़्यादातर यात्री पुरानी दिल्ली स्टेशन वाले थे। रात के 10:30 बज चुके थे लेकिन बेटे की आँखों में नींद नहीं थी। वो रेल से बाहर जाने के लिए कह रहा था। अब उसे कैसे समझायें की ‘बेटा यह रेल हमारे घर की नहीं है की हमारी इच्छा से चलेगी।’ बगल वाली सीटों पर कुछ दक्षिण भारतीय युवा थे। पूरी तैयारी से आये थे ट्रैकिंग के लिए। ट्रैकिंग शूज़, तीन रकसैक, कुछ और बैग, मैट और इन सबके साथ खाने का भारी भरकम सामान। अब तैयारी तो उनकी पूरी थी, लेकिन उन्हें देख कर लग नहीं रहा था की वे ऋषिकेश भी पार कर पाएंगे। जब से ट्रेन में बैठे उनका मुँह बंद नहीं हुआ था, समोसे, वडा, नमकीन और भी पता नहीं क्या – क्या खाते ही जा रहे थे और ऊपर से उनका सेल्फी सेशन जो की लगातार जारी था। पुरानी दिल्ली स्टेशन आया और रेल की सभी सीटें भर गयी और थोड़ी ही देर में नींद भी आ गयी।

सुबह नींद खुली तो लक्सर पहुँच गये थे। बारिश भी तेज़ थी। चारो ओर फैली हरियाली देख कर मन हरा – हरा हो गया। अब पिता जी खुश थे और उनसे भी ज्यादा मैं क्योंकि मेरे साथ मेरा पूरा परिवार आज यात्रा पर था। कुछ ही देर में हरिद्वार पहुँच गए। बारिश अभी जारी ही थी। वहाँ पूजा आदि संपन्न करा कर घाट यात्रा पर निकल पड़े।

हरिद्वार को उत्तराखण्ड का प्रवेश द्वार माना जाता है। वर्ष 2001 में उत्तरखण्ड के राज्य बनने के बाद इसे राज्य में शामिल कर लिया गया। हरिद्वार भारत के सात प्रमुख पवित्र धार्मिक नगरों में से एक हैं। इसे मायापुरी के नाम से भी जाना जाता है। हर की पौड़ी, भारत माता मंदिर, मनसा देवी मंदिर, चंडी देवी मंदिर, शांति कुञ्ज, कनखल आदि यहाँ के प्रमुख तीर्थ हैं।

हर की पौड़ी, गंगा माता मंदिर आदि देखने के बाद हम ऋषिकेश की ओर निकल पड़े। राजा जी नेशनल पार्क के बीच से गुज़रते हुए मार्ग से होते हुए लगभग 11 बजे तक पहुँच गए। यहाँ मैं जब भी आता हूँ मेरी प्राथमिकता परमार्थ निकेतन होती है। परमार्थ निकेतन इस क्षेत्र का सबसे बड़ा आश्रम है जिसमे लगभग 1000 कमरे हैं। वैसे इस क्षेत्र को मैं ऋषिकेश कहना उचित नहीं समझता। यहाँ का प्रशासनिक क्षेत्र कुछ इस प्रकार है। ऋषिकेश देहरादून जिले का भाग है। ऋषिकेश बस अड्डे के पीछे बहने वाली चंद्रभागा तक ही ऋषिकेश क्षेत्र है। चंद्रभागा पार करते ही टिहरी गढ़वाल का क्षेत्र शुरू हो जाता है। लक्ष्मण झूला टिहरी गढ़वाल में स्थित मुनि की रेती क्षेत्र में स्थित है। गंगा पार करते ही पौड़ी गढ़वाल क्षेत्र आरम्भ हो जाता है। परमार्थ निकेतन, गीता आश्रम आदि पौड़ी गढ़वाल में आते हैं। कहने का अर्थ यह है की जिसे ज़्यादातर लोग ऋषिकेश समझते हैं, वो ऋषिकेश है ही नहीं।

यहाँ से मार्ग दो दिशाओं बट जाता है। बायीं ओर वाला मार्ग गंगोत्री और यमुनोत्री की ओर जाता है तथा दायीं ओर वाला मार्ग केदार नाथ और बद्रीनाथ की ओर। ये मार्ग आगे भी बटते हैं।

अब आते हैं यात्रा पर। बारिश अभी तक रुकी नही थी। गंगा का जल स्तर अभूतपूर्व रूप से बढ़ा हुआ था। इस कारण नावें नहीं चल रही थी। राम झूला पार करके परमार्थ निकेतन पहुंचे और वहां चेक-इन किया। परमार्थ निकेतन आध्यात्मिकता के लिए जाना जाता है। आश्रम की स्थापना स्वामी शुकदेवानंद जी ने की थी। वर्तमान में इसके प्रमुख स्वामी चिदानंद सरस्वती हैं।

आश्रम में देशी – विदेशी लोगों का जमावड़ा लगा रहता है। कुछ लोग अध्यात्म की खोज में आते हैं, कुछ योग के लिए और कुछ ऐसे होते हैं जिनके आने का कोई कारण नहीं होता और उनमे से मैं हूँ। आश्रम का मुख्य द्वार गंगा के घाट पर खुलता है, जहाँ प्रति संध्या गंगा आरती होती है। सैकड़ो लोग इस आरती का हिस्सा बनते हैं।

आश्रम में सामान रखने के बाद माँ, पत्नी और बेटे के साथ लक्ष्मण झूला की ओर निकल पड़ा। पिता जी थके होने के कारण नहीं जा सके। लक्ष्मण झूला पर भारी भीड़ थी और नीचे गंगा का तेज़ प्रवाह। अगले दिन नीलकंठ धाम जाने की भी योजना थी, लेकिन भू-स्खलन के कारण मार्ग बंद हो गया था। शाम को इसी झूला यात्रा पर पिता जी को लेकर गया। वापस लौटते समय तक आरती आरम्भ हो चुकी थी। आध्यात्म की वर्षा जोरो पर थी। आरती और भजन आदि यहाँ गुरुकुल में पढ़ने वाले छात्र ही गाते हैं। धर्मशास्त्रों के अतिरिक्त, गणित, विज्ञान, इंग्लिश आदि विषयों की भी यहाँ शिक्षा दी जाती है।

अत्यधिक वर्षा के कारण पुरे शहर में बिजली नहीं थी। इसलिए आश्रम में मुख्य स्थानों को छोड़ कर अँधेरा ही था। कुछ स्थानों पर जेनरेटर से प्रकाश की व्यवस्था की गयी थी। अगली सुबह जल्दी भी उठना था इसलिए जल्दी सो गए।

राम झूला
मेरा परिवार
परमार्थ निकेतन
परमार्थ निकेतन
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परमार्थ निकेतन के घाट पर होने वाली गंगा आरती के समय हवन

अगले दिन दिल्ली के लिए वापसी थी और इसके लिए हरिद्वार से दोपहर 3 बजे योग एक्सप्रेस में बुकिंग थी। सुबह उठकर पहले भगवान शिव के दर्शन किये और फिर गंगा के घाट पर कुछ देर बैठने के पश्चात् हम एक बार फिर लक्ष्मण झूला की ओर पैदल ही निकल पड़े। स्वर्ग आश्रम क्षेत्र वाले मार्ग से जा रहे थे। दोनों और फैली हरियाली मन मोहने वाली थी। आज गंगा का जल स्तर कुछ कम हो गया था। अब राम झूला से लक्ष्मण झूला मार्ग को पक्का कर दिया गया है और रास्ते के किनारे बेंच लगा दी गयी हैं। सुबह का नाश्ता वहीँ गंगा किनारे किया। हमे खाते देख गाय और कुत्तों ने घेर लिया। उनके सामने हमने आत्म समर्पण करना ही उचित समझा और सारा खाने का सामान उन्हें सौंप दिया। निकल पड़े आगे की ओर।

लक्ष्मण झूला पर आज हवा काफी तेज़ थी। सुबह का समय होने के कारण भीड़ नहीं थी। यहाँ बहुत से छोटे – बड़े योग आश्रम हैं।

‘यहाँ से गंगोत्री और बद्रीनाथ आदि कितनी दूर हैं? क्या एक दिन में वहां पहुँच सकते हैं ?’ पहली बार पिता जी के मुँह से यह सवाल सुना। इतना ही सुनना था की मैंने तरह – तरह की योजनाएं बतानी शुरू कर दी, जैसे की ‘बद्रीनाथ इस तरफ इतनी दूर है, गंगोत्री उस तरफ है…. आदि – आदि।’ वैसे वे बाबा तुंगनाथ (चोपता) मंदिर चलने के लिए मान गए हैं और इसकी बहुत ख़ुशी हैं। वहाँ 2018 में जाना है।

कुछ देर फोटो सेशन और इधर – उधर घूमने के बाद वापस निकल पड़े। एक रेस्टोरेंट में खाना खाया और आश्रम में पहुँच गए। अब तक 11 बज चुके थे और चेक-आउट का समय भी हो चुका था।

वैसे यहाँ राम झूला से वापसी में एक बात ख़राब लगती है। ज्यादातर ऑटो वाले बिना पूरा ऑटो बुक किये जाना ही नहीं चाहते, ऑटो भी बड़ा वाला। पुरे ऑटो के 700 रुपये मांग रहे थे। बड़ी मुश्किल से एक ऑटो मिला जो की शेयर्ड बेसिस पर जाने को तैयार हुआ। भयंकर ट्रैफिक में फंसते हुए दोपहर 2 बजे तक हरिद्वार पहुंचे। धूप तेज़ थी। कुछ ही देर में ट्रेन आयी और हम निकल पड़े अपनी प्यारी दिल्ली की ओर।

तो यह थी हमारी छोटी सी हरिद्वार – ऋषिकेश यात्रा। उम्मीद है आपको पसंद आयी होगी।

lakshman jhoola rishiksh
लक्ष्मण झूला स्थित शिव मंदिर
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Hiten Bhatt
Hiten Bhatt
May 16, 2018 9:53 am

aapka yah vivran padhkar anand aya. Rishikesh jitni bhi bar jao, man nahi bharta…..dhanavad

Priya Singh
Priya Singh
July 6, 2019 12:49 pm

Such a wonderful place!!! I can’t articulate it. Those pictures are absolutely gorgeous! I love places with amazing beauty. I will be sure to visit this location. Thank you for sharing! Wonderful post. Bharat Taxi a leading online car rental service provider in Rishikesh providing cheap and best cab service in Rishikesh. We provides Online taxi booking and affordable taxi services in Rishikesh. For Car rental in Rishikesh, call us at +919696000999

दामोदर
दामोदर
July 11, 2019 7:19 am

2017 अगस्त में , मैं भी पहली बार ऋषिकेश गया था जन्माष्टमी को वहीं थे। शिवानंद आश्रम में रुकना हुआ था।