Mount Chaukhamba view from Tungnath trek

सर्दियों में उत्तराखण्ड के बर्फ़ीले ठिकाने (Places to visit in Uttarakhand in winter)

सर्दियाँ आ गयी हैं और बर्फ़बारी देखने की चाह रखने वालों की योजनाएं भी बननी शुरू हो गयी होंगी। लेकिन जाये कहाँ ? अरे वहीं.. जहाँ सब जाते हैं, मतलब शिमला, मनाली, कश्मीर, मसूरी आदि। यही होता है न ?

क्या इस तरह भेड़ चाल में चलना अच्छा लगता है ? अरे यहाँ तो सभी जाते हैं जिसके कारण पीक सीज़न में बहुत ज़्यादा भीड़ हो जाती है और फ़िर जो होता है आप सब जानते ही हैं। 500 रुपये रोज़ाना वाले कमरों का किराया 2500 रुपये तक हो जाता है। होटल महंगे, टैक्सियां महँगी, खाना महंगा…. मतलब सब कुछ महंगा। ऐसे में बहुत से लोग इन स्थानों पर जाने के बारे में सोचते भी नहीं हैं और पूरी सर्दी रजाई के अंदर बैठ कर मूंगफलियां खाते हुए बिता देते हैं।

ऐसा नहीं है की बर्फ़बारी केवल इन्ही गिने चुने स्थानों पर ही होती है। मंज़िले और भी हैं। देश में ऐसे बहुत से स्थान हैं जिनके बारे में हम जानते ही नहीं हैं और सबसे अच्छी बात यह की ये स्थान कुछ विशेष महंगे भी नहीं हैं।

ऐसे में हम आपके लिये लेकर आयें हैं उत्तराखण्ड के कुछ ऐसे ऑफ बीट ठिकाने जहाँ खूब बर्फ़ पड़ती है और महंगे भी नहीं।

 

1. चोपता

चोपता
चोपता

गढ़वाल हिमालय की वादियों में बसा चोपता अपनी एक विशेष पहचान रखता है। यहाँ भगवान शिव के तुंगनाथ स्वरुप का मंदिर है जहाँ 3 किलोमीटर की पैदल पैदल यात्रा करके पहुंचा जा सकता है। तुंगनाथ से लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है चंद्रशिला जो की इस पहाड़ की चोटी है। यहाँ से विशाल हिमालय का 360 डिग्री दृश्य देखा जा सकता है। तुंगनाथ की ऊंचाई समुद्रतल से लगभग 3600 मीटर और चंद्रशिला की ऊंचाई लगभग 4000 मीटर है। तुंगनाथ मंदिर दिवाली के बाद बंद हो जाता है। इस कारण आप दर्शन तो नहीं कर पाएंगे लेकिन इसके अतिरिक्त भी प्रकृति के जिस रूप के दर्शन आपको होंगे वह अतुलनीय है। चारों और बर्फ ही बर्फ और न्यूनतम तापमान शून्य से नीचे। चोपता से कुछ ही दूरी पर स्थित है देवरिया ताल। यदि आपके पास अतिरिक्त समय है तो आप वहां भी कुछ समय बिता सकते हैं।

उपयुक्त मौसम:
यदि आप भगवान तुंगनाथ के दर्शन करना चाहते हैं तो मई से दिवाली (अक्टूबर/ नवंबर) के बीच जा सकते हैं, लेकिन यदि आप बर्फ़बारी का आनंद लेना चाहते हैं तो दिसंबर से मार्च के बीच जाएँ।

कैसे पहुंचे ?
नज़दीकी रेलवे स्टेशन हरिद्वार है और नज़दीकी एयरपोर्ट देहरादून स्थित जोली ग्रांट एयरपोर्ट है। नज़दीकी बस अड्डा ऋषिकेश में स्थित है जहाँ से चोपता पहुँचने के लिए दो मार्ग हैं।

पहला मार्ग: ऋषिकेश – देवप्रयाग – रूद्रप्रयाग – कुंड – उखीमठ – चोपता।
दूसरा मार्ग: ऋषिकेश – देवप्रयाग – रूद्रप्रयाग – कर्णप्रयाग – गोपेश्वर – चोपता।
दोनों ही मार्ग प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण हैं।

कहाँ ठहरें ?
यदि आपके पास टेंट है तो कैम्पिंग से अच्छा कुछ नहीं। अन्यथा मैगीपाई जंगल कैंपअल्पाइन एडवेंचर कैंपमयदीप हर्बल रिसोर्टमोक्ष कैफ़े, देवलोक होटल, राजू होटल आदि तो हैं ही।

 

2. औली

Auli
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औली को उत्तराखंड का कश्मीर कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। औली अब हिल स्टेशन रूप में अपनी पहचान बना चुका है। सर्दियों में यहाँ खूब बर्फ़बारी होती है। अब तो बहुत से विंटर गेम्स का आयोजन भी होने लगा है। आप यहाँ स्की और अन्य एडवेंचर एक्टिविटीज़ का आनंद ले सकते हैं। यहाँ पहुँचने के लिए केबल कार उपलब्ध है। नंदा देवी जैसे विशाल पर्वतों से घिरा औली एक मनमोहक स्थल है।

उपयुक्त मौसम:
बर्फ़बारी का आनंद लेने के इच्छुक दिसंबर के अंत से मार्च के बीच जाएँ। मानसून के मौसम में फैली हरियाली देखनी हो तो जुलाई और अगस्त का समय उपयुक्त रहेगा।

कैसे पहुंचे ?
यहाँ का नज़दीकी रेलवे स्टेशन हरिद्वार है और नज़दीकी एयरपोर्ट देहरादून स्थित जोली ग्रांट एयरपोर्ट है। ऋषिकेश से आप जोशीमठ पहुँच कर औली के टैक्सी ले सकते हैं।

कहाँ ठहरें ?
कैम्पिंग का ऑप्शन यहाँ उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त औली रिसोर्टहोटल द्रोणागिरीहोटल औली डीहोटल माउंट व्यू आदि भी हैं।

 

3. कौसानी

Kausani
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कुमाऊं की वादियों में बसे कौसानी को कभी महात्मा गाँधी ने भारत का स्विट्ज़रलैंड कहा था। दिल्ली और इसके आस पास रहने वालों के लिए कौसानी सर्वोत्तम वीकेंड डेस्टिनेशन है। कौसानी से आप विशाल हिमालय की विभिन्न चोटियों जैसे त्रिशूल, नंदा देवी और पंचाचुल्ली आदि के दर्शन कर सकते हैं। प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग से कम नहीं है यह। रुद्रहरि मंदिर, सुमित्रा नंदन पंत संग्रहालय, लक्ष्मी आश्रम आदि यहाँ के प्रमुख आकर्षण हैं।

उपयुक्त मौसम:
वैसे तो यहाँ आप पूरे वर्ष कभी भी आ सकते हैं, लेकिन जनवरी और फ़रवरी के महीने में यहाँ जम कर बर्फ़बारी होती है।

कैसे पहुंचे?
कौसानी बागेश्वर जिले के अल्मोड़ा से 52 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। दिल्ली के आनंद विहार ISBT से अल्मोड़ा और काठगोदाम के लिए बस मिल जाती है।
यहाँ पहुँचने के दो मार्ग हैं।

पहला मार्ग: दिल्ली – हापुड़ – मुरादाबाद – राम नगर (कार्बेट नेशनल पार्क) – रानी खेत – कौसानी।
दूसरा मार्ग: दिल्ली – हापुड़ – मुरादाबाद – राम नगर (कार्बेट नेशनल पार्क) – हल्द्वानी – काठगोदाम – भीमताल -भोवाली – खैरना – अल्मोड़ा – कौसानी।

नज़दीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम में हैं और नज़दीकी हवाई अड्डा पंत नगर में है। दोंनो ही स्थानों से कौसानी के लिए टैक्सी मिल जाती है।

कहाँ ठहरें: कैम्पिंग के अतिरिक्त द बुरांशहोटल सागरकौसानी होटल आदि उपलब्ध हैं।

 

4. मुनस्यारी

Munsyari
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मुनस्यारी का अर्थ है ऐसा स्थान जो बर्फ से ढका हुआ हो। समुद्रतल से 2298 मीटर की ऊंचाई पर पिथौरागढ़ की वादियों में बसा मुनस्यारी अपना अलग ही महत्व रखता है। यहाँ से हिमालय की प्रमुख चोटियों जैसे पंचाचुल्ली, नंदा देवी और नेपाल के राजारम्भा पर्वत के दर्शन किये जा सकते हैं। पर्वतारोहण प्रेमीयों के लिए यह स्थान उपयुक्त है। इसे मिलम, रलम और नामिक ग्लेशियरों के बेस कैंप के रूप में भी जाना जाता है। तिब्बत और नेपाल सीमा के नज़दीक होने के कारण पहले यहाँ भारतीयों का प्रवेश वर्जित था किन्तु अब सरकार यहाँ बढ़ – चढ़ कर पर्यटन को प्रोत्साहित करने में लगी है। यहाँ आप ट्रैकिंग, ग्रामीण पर्यटन आदि का भी आनंद ले सकते हैं।

उपयुक्त मौसम:
मार्च – अप्रैल के महीने हिमालय की बर्फ से ढकी वादियां और हर और फैले बुरांश के फूल मन मोह लेंगे। जून से सितम्बर का महीने में यहाँ खूब बारिश होती है। इसलिए इस समय यहाँ आना कुछ समस्या खड़ी कर सकता। सर्दियों का मौसम यहाँ नवम्बर से फरवरी तक रहता है। इस बीच यहाँ आप बर्फ़बारी और स्की आदि का आनंद ले सकते हैं।

कैसे पहुंचे ?
मुनस्यारी उत्तराखंड के प्रमुख शहरों और दिल्ली से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। दिल्ली स्थित आनंद विहार ISBT से आप बस द्वारा चम्पावत, अल्मोड़ा, टनकपुर आदि पहुंच कर वहां से मुनस्यारी के लिए टैक्सी ले सकते हैं। मुनस्यारी दिल्ली से 559 किलोमीटर के दूरी पर स्थित है।

सड़क मार्ग द्वारा जाने वालों के लिए तीन मार्ग हैं।

पहला मार्ग: दिल्ली – हापुड़ – गजरौला – मुरादाबाद बाई पास – रामपुर – हल्द्वानी – काठगोदाम – भीमताल – भोवाली – खैरना -अल्मोड़ा – चितई मंदिर – धौलचीना – शेर घाट – उडियारी बैंड – थल – बिर्थी फॉल – कालामुनि टॉप – मुनस्यारी।
दूसरा मार्ग: दिल्ली – हापुड़ – गजरौला – मुरादाबाद बाई पास – काशीपुर – कालाढूँगी – नैनीताल – भोवाली – खैरना -अल्मोड़ा – चितई मंदिर – धौलचीना – शेर घाट – उडियारी बैंड – थल – बिर्थी फॉल – कालामुनि टॉप – मुनस्यारी।
तीसरा मार्ग: दिल्ली – हापुड़ – गजरौला – मुरादाबाद बाई पास – काशीपुर – कालाढूँगी – नैनीताल – भोवाली – खैरना – अल्मोड़ा – कोसी – कौसानी – बैजनाथ -गरुड़ – बागेश्वर – विजयपुर – चौकोरी – उडियारी बैंड – थल – बिर्थी फॉल – कालामुनि टॉप – मुनस्यारी।

नज़दीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम और टनकपुर में है। जहाँ से मुनस्यारी के लिए टैक्सियां मिल जाती हैं। हवाई मार्ग वालों के लिए नज़दीकी हवाई अड्डा पंत नगर में है।

कहाँ ठहरें: मिलम इनविजय माउंट व्यू रिसोर्टहोटल रॉयल पैलेसबिल्जु इनहोटल पांडेय लॉज आदि उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त कैम्पिंग आदि कर सकते हैं।

 

5. हर्सिल

Harsil
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यदि आप प्रकृति की गोद में कुछ पल शांति से बिताना चाहते हैं तो हर्सिल आप के लिए है। उत्तरकाशी जिले में स्थित हर्सिल एक बेहद खूबसूरत स्थल है। देवदार के जंगल और कल – कल बहती भागीरथी इसकी सुंदरता में चार चाँद लगा देती है। यदि आपने हिंदी फ़िल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ देखी हो तो उसमे दिखाया गया हिमालयी गांव हर्सिल ही है। यहीं वह दृश्य फ़िल्माया गया था। हर्सिल के ही मुखबा गांव में माँ गंगा की शीतकालीन पूजा होती है। गंगोत्री यहाँ से 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ट्रैकिंग और योग आदि के लिए यह स्थान उपयुक्त है। यहाँ के प्रमुख आकर्षण भागीरथी का किनारा, राजा विल्सन की हवेली, मुखबा मंदिर, देवदार के जंगल और सेब के बाग़ हैं।

उपयुक्त मौसम:
गर्मियों के महीने में यहाँ का मौसम सुहावना होता है। मानसून में आना चाहते हैं तो भारी बारिश और भूस्खलन आदि का सामना करना पड़ सकता है। दिसंबर से मार्च के बीच यहाँ बर्फ़बारी होती है।

कैसे पहुंचे ?
सड़क मार्ग से आने वाले दिल्ली से ऋषिकेश या देहरादून पहुँच सकते हैं। वहां से उत्तरकाशी और उत्तरकाशी से हर्सिल पहुंचा जा सकता है।
नज़दीकी रेलवे स्टेशन देहरादून और ऋषिकेश में है। नज़दीकी हवाई अड्डा देहरादून में स्थित है।

कहाँ ठहरें ?
हर्सिल में होटल आदि की कमी नहीं है। नेलंगाना रिसोर्टहोटल हिमालय हर्सिलहर्सिल रिट्रीटप्रकृति रिट्रीटचार धाम कैंप आदि आपके ऑप्शन हो सकते हैं। बजट होटल भी उपलब्ध हैं।

 

6. चौकोरी

Chaukori
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चौकोरी एक ऐसी जगह जहाँ एक कवि अपनी कल्पना को वास्तविकता में बदलते हुए देख सकता है। कुमाऊँ क्षेत्र में बसा हुआ चौकोरी किसी स्वर्ग से कम नहीं। यहाँ से आप नंदा देवी, नंदा कोट और पंचाचुल्ली आदि विशाल हिमशिखरों को अपने नज़दीक पाते हैं। अगर आप सोचते हैं की चाय के बाग़ान केवल उत्तर – पूर्व भारत में ही है तो आप गलत हैं। चाय की खेती चौकोरी में भी होती है। ठण्ड के मौसम सुबह – सुबह चाय की पत्तियों पर पड़ती हुई सूर्य की किरणे और चिड़ियों की चहचहाहट देख कर आपका मन यही बस जाने को करेगा। सर्दियों में यहाँ खूब बर्फ पड़ती है।
यहाँ कई हिन्दू तीर्थ हैं यहाँ जैसे धौलीनाग, कालीनाग, फेनिनाग, वासुकीनाग, पिंगलनाग, हरिनाग, घुंसेरा देवी, नकुलेश्वर मंदिर और कपिलेश्वर महादेव मंदिर आदि। इसके अतरिक्त चौकोरी गाँव में आप भी कुछ दिन बिता सकते हैं।

उपयुक्त मौसम:
बर्फ़बारी देखने की चाह रखने वाले जनवरी से मार्च के बीच जायें। वैसे पूरे वर्ष ही मौसम ठंडा रहता है।

कैसे पहुंचे ?
हवाई मार्ग वालों के लिए नज़दीकी हवाई अड्डा पंत नगर में हैं जहाँ के लिए दिल्ली और देहरादून से फ्लाइट मिल जाती हैं। पंत नगर से चौकोरी के लिए टैक्सियां उपलब्ध हैं।
रेल मार्ग वाले काठगोदाम रेलवे स्टेशन से टैक्सी या बस द्वारा चौकोरी पहुँच सकते हैं। यहाँ से चौकोरी की दूरी 180 किलोमीटर है। काठगोदाम के लिए देश के सभी बड़े शहरों से रेल उपलब्ध हैं।
सड़क मार्ग वालों के लिए दिल्ली के आनंद विहार ISBT से अल्मोड़ा तक के लिए बस उपलब्ध है। अल्मोड़ा से टैक्सी द्वारा आप चौकोरी पहुँच सकते हैं। इसके अतरिक्त चौकोरी उत्तराखंड के अन्य शहरों जैसे पिथौरागढ़, कौसानी, दीदीहाट आदि से भी जुड़ा हुआ है।

कहाँ ठहरें ?
कैम्पिंग के अतिरिक्त यहाँ कई बड़े – छोटे होटल उपलब्ध हैं जैसे हिमशिखरऋषि रिसोर्टविंड्स इन्ओजस्वी रिसोर्टहरिदर्शन रिसोर्ट और KMVN टूरिस्ट रेस्ट हाउस आदि।

 

7. हर की दून

Harsil
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‘हर’ अथार्त शिव। इस प्रकार हर की दून का अर्थ शिव की घाटी है। गढ़वाल हिमालय में 3566 मीटर की ऊंचाई पर बसा हर की दून उत्तराखंड के दूरस्थ क्षेत्रों में से एक है। मानव सभ्यता के नाम पर केवल एक या दो गाँव ही हैं यहाँ। आज तक बहुत से लोगों की नज़र नहीं पड़ी यहाँ। इसलिए इसके बहुत से नज़ारे अभी भी देखे जाने बाकि हैं। नवंबर से मार्च तक यह पूरा क्षेत्र बर्फ से ढका रहता है। यद्पि 3566 मीटर की ऊंचाई एक अच्छी खासी ऊंचाई मानी जाती है लेकिन फिर भी यह ट्रेक पर्वतारोहियों के लिए आसान ट्रेक्स में से एक माना जाता है। वैसे तो यहाँ आप 2 दिन का ट्रेक करके भी पहुँच सकते हैं लेकिन 3 दिन का समय देना अच्छा रहता है। इससे आप को जी भर कर प्रकृति को निहारने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है। यहाँ से आप विभिन्न हिमालयी चोटियों के दर्शन कर सकते हैं जिनमे से प्रमुख हैं बन्दरपूँछ, स्वर्गारोहिणी – 1, 2, 3 आदि। ट्रेक की शुरुआत तालुका से होती है और यह मार्ग ओस्ला नामक गांव से होकर जाता है। यह गांव अपनी विभिन्न खूबियों को समेटे हुए है। यहाँ की परम्परायें कुछ अलग सी हैं। यहाँ दुर्योधन की पूजा होती है।

उपयुक्त मौसम:
जून और जुलाई के मौसम को छोड़ कर सभी किसी भी मौसम में यहाँ आना सुकून देता है और अगर आप बर्फ़बारी देखना चाहते हैं तो नवम्बर से मार्च के बीच आयें।

कैसे पहुंचे ?
यहाँ पहुंचने के लिए नज़दीकी रेलवे स्टेशन, बस अड्डा और हवाई अड्डा देहरादून में स्थित हैं। देहरादून से आगे का मार्ग मसूरी, नौगांव, पुरोला, मोरी, सांकरी, तालुका से होते हे जाता है।
देहरादून से सांकरी गाँव आप बस या टैक्सी द्वारा पहुँच सकते हैं। अगला पड़ाव है तालुका जहाँ के लिए संकरी से जीप आदि मिल जाती है। आप यहाँ आराम पहले दिन का पड़ाव तालुका में ही होता है।
तालुका से ट्रेकिंग आरम्भ होती है। सुपिन नदी, सीमा, ओस्ला गाँव आदि होते हुए आप पहुँचते हैं हर की दून। यदि आपकी इच्छा आगे जाने की है तो आप जौनधार ग्लैशियर भी जा सकते हैं।

कहाँ ठहरें ?
कैम्पिंग के शौकीनों के लिए यह स्थान स्वर्ग से कम नहीं। इसके अतिरिक्त ओस्ला गाँव में होम स्टे की सुविधा कम ही सही लेकिन उपलब्ध है। जो लोग होटल की तलाश में हैं उनके लिये GMVN हर की दून टूरिस्ट रेस्ट हाउसGMVN ओस्ला टूरिस्ट रेस्ट हाउसGMVN सांकरी टूरिस्ट रेस्ट हाउसGMVN तालुका टूरिस्ट रेस्ट हाउस आदि उपलब्ध हैं।

 

8. रानी खेत

Ranikhet
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रानी खेत में वह सब है जो घुमक्कड़ को चाहिये। रानी खेत का अर्थ बताने की आवश्यकता नहीं, वह तो आप जानते ही हैं। कुमाऊं हिमालय में 1829 मीटर की ऊंचाई पर बसा रानी खेत प्रकृति के अनमोल नगीनों में से एक है। चीड़ के जंगल और हरे-भरे बागों से परिपूर्ण है रानी खेत। इसकी स्थापना ब्रिटिश सरकार द्वारा वर्ष 1869 में कुमाऊं रेजिमेंट के मुख्यालय के रूप में की गयी थी। वर्तमान में यहाँ भारतीय सेना की छावनी है। गोल्फ के दीवानों के लिए यहाँ एक बेहतरीन गोल्फ कोर्स है। वैसे तो यह सेना के लिए है लेकिन आप भी यहाँ शुल्क चुका कर गोल्फ का आनंद ले सकते हैं। भालू डैम की झील मैं आप मछलियां पकड़ने का भी अनुभव ले सकते हैं। दिल्ली वालों के लिए तो रानी खेत एक परफेक्ट डेस्टिनेशन है।

उपयुक्त मौसम:
वर्ष के पूरे 12 महीने यहाँ आने के लिए उपयुक्त हैं। बर्फ़बारी बहुत ज्यादा तो नहीं लेकिन जनवरी से फरवरी के बीच होती है।

कैसे पहुंचे ?
पंत नगर यहाँ का नज़दीकी हवाई अड्डा है जो की 115 दूर स्थित है। रेल से आने वाले काठगोदाम रेलवे स्टेशन उतर कर वहां से बस या टैक्सी द्वारा आगे का मार्ग तय कर सकते हैं। बस से आने वालों के लिए नज़दीकी बस अड्डा अल्मोड़ा में है जहाँ से रानी खेत के लिए टैक्सियां उपलब्ध हैं।

कहाँ ठहरें ?
KMVN टूरिस्ट रेस्ट हाउस के अतिरिक्त मेघदूतराजदीप होटलवेस्ट व्यूसहज होटलशिवालिक रिवर रिट्रीट कोसी, आदि उपलब्ध हैं।

 

9. बिनसर

Binsar
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कुमाऊं हिमालय में 2420 मीटर की ऊंचाई पर बसा बिनसर एक ऐसा स्थान है जहाँ से हिमालय का लगभग 300 किलोमीटर में फैला नज़ारा स्पष्ट देखा जा सकता है। केदारनाथ, चौखम्बा, नंदा देवी, नंदा कोट, पंचाचुल्ली आदि वे प्रमुख चोटियां हैं जिन्हे आप बिनसर से देख सकते हैं। बिनसर वाइल्डलाइफ सेंचुरी में विभिन्न प्रकार के जीवों को आप देख सकते हैं।
कैंपिंग, ट्रैकिंग अदि गतिविधियों को लिये बिनसर उपयुक्त है। तीर्थ यात्री जागेश्वर मंदिर समूह, बिनसर महादेव मंदिर और उत्तराखंड की प्रसिद्द कसार देवी के दर्शन कर सकते हैं। इतिहास में रूचि रखने वालों के लिए भी यहाँ बहुत कुछ ऐसे हैं। कुछ शिला लेख तो ऐसे है जो हजारों वर्ष पुराने हैं।
इसके अतिरिक्त ज़ीरो पॉइंट से आप हिमालय दर्शन कर सकते हैं। प्रतिवर्ष अक्टूबर से नवंबर के बीच नंदा देवी उत्सव मनाया जाता है जिसमे आप भाग ले सकते हैं।

उपयुक्त मौसम:
वैसे तो यहाँ आप कभी भी आ सकते हैं लेकिन अप्रैल से जून और सितम्बर से नवंबर का मौसम सर्वोत्तम माना जाता है। दिसंबर से फरवरी के बीच यहाँ बर्फ़बारी होती है। इसलिए बर्फ़बारी का आनंद उठाने की चाह रखने वाले जनवरी या फ़रवरी में जायें।

कैसे पहुंचे ?
नज़दीकी हवाई अड्डा पंत नगर में है जो की यहाँ से 152 किलोमीटर दूर है। पंत नगर से टैक्सियां उपलब्ध हैं। रेलवे यात्रियों के लिए नज़दीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम में है जो की यहाँ से 119 किलोमीटर दूर है। काठगोदाम से बिनसर के लिए टैक्सी और बस सेवा उपलब्ध है।
सड़क मार्ग से आने वाले हल्द्वानी, नैनीताल या अल्मोड़ा पहुँच कर वहां से टैक्सी ले सकते हैं। इन तीनों शहरों के लिए दिल्ली और उत्तराखंड के अन्य शहरों से बस उपलब्ध है।

कहाँ ठहरें ?
वाइल्ड लाइफ सेंचुरी होने के कारण यहाँ अधिक होटल नहीं हैं। बिनसर रिट्रीट रिसोर्टग्रैंड ओक मैनरKMVN बिनसर टूरिस्ट रेस्ट हाउसबिनसर इको कैंप आदि आपके विकल्प हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त यदि आपके पास टेंट है कैंपिंग कर सकते हैं।

10. नाग टिब्बा

Nagtibba
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नाग टिब्बा अथार्त नाग चोटी। यह निम्नन गढ़वाल हिमालय की सबसे ऊँची चोटियों में से एक मानी जाती है। नाग टिब्बा समुद्र तल से 3025 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और इसे ट्रेकिंग की दृष्टि से सबसे आसान और सुरक्षित ट्रेकों में से एक माना जाता है। नाग टिब्बा का ट्रेक करने वालों के पास टेंट होना आवश्यक है क्योंकि इस चोटी पर होटल आदि उपलब्ध नहीं है। नाग टिब्बा का वर्णन ‘सेवन इयर्स इन तिब्बत’ नाम की पुस्तक में भी है। यह पुस्तक हेनरिक हेर्रेर और पीटर की वर्ष 1944 में की गयी तिब्बत यात्रा पर आधारित है।

उपयुक्त मौसम:
यहाँ अक्टूबर से मार्च का समय ट्रेकिंग के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। इस मौसम में आप हिमपात भी देख सकते हैं।

कैसे पहुंचे ?
नाग टिब्बा मसूरी से 57 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है जिसमे 13 किलोमीटर की ट्रेकिंग शामिल है। यहाँ पहुँचने के लिए नज़दीकी हवाई अड्डा और रेलवे स्टेशन देहरादून में स्थित है। आप मसूरी तक बस द्वारा भी पहुँच सकते हैं।

नाग टिब्बा ट्रेक दो मार्गों से किया जा सकता है। पहला मार्ग देवलसारी गांव से जाता है जो की 13 किलोमीटर का है। दूसरा मार्ग पंथवारी गांव से जाता है जो की 8 किलोमीटर का है। देवलसारी और पंथवारी गांवों के लिए मसूरी से साधन उपलब्ध हैं।

कहाँ ठहरें ?
यहाँ रुकने लिए आप के पास टेंट उपलब्ध होना चाहिए जो की किराये पर भी मिल जाता है।

तो यह थे वे स्थान जहाँ के लिए आप अगली यात्रा की योजना बना सकते हैं। यदि आप को किसी और स्थान के बारे में जानकारी चाहिए तो कमेंट बॉक्स में लिखें। आप के सुझावों का स्वागत है।

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बढिया जानकारी के लिए धन्यवाद