पहाड़ बुलाये लेकिन मीडिया डराये (Mountains call but media scares)

भारतीय मीडिया इतना नकारात्मक क्यों है ?

मानसून आ चुका है… बरखा रानी भी आ चुकी हैं और साथ – साथ आरम्भ हो गया है इलेक्ट्रॉनिक मीडिया वालों का रोना – धोना।

यहाँ बाढ़ आ गयी… वहाँ बादल फट गये…
उधर लैंडस्लाइड हो गया… इधर रास्ता धंस गया…
मनाली के रास्ते बंद हो गये… अमरनाथ यात्रा रुक गयी….
उत्तरकाशी में पहाड़ टूट गया और न जाने क्या – क्या…

इनकी नेगेटिव रिपोर्टिंग के कारण ही लोग पहाड़ों में घूमने जाने से डरने लगते हैं और नतीज़ा…पर्यटन उद्योग बर्बाद।

अगर मुझसे कोई पूछता है की पहाड़ों में घूमने का सबसे अच्छा मौसम कौन सा है तो मेरा जवाब होता है बरसात का मौसम। इंटरनेट पर आप हरे – भरे पहाड़ों की जो फोटो देखते हैं उनमें से अधिकतर मानसून की ही होती हैं।
 
यदि कुछ समस्याओं से निपटना हम सीख जायें तो पहाड़ों में घुमक्कड़ी के लिए बरसात के मौसम से अच्छा कुछ नहीं
आज सभी घुमक्कड़ों को मुफ़्त का ज्ञान दिये देता हूँ ! इन न्यूज़ वालों की बकवास पर अधिक ध्यान न दें और अपने विवेक का इस्तेमाल करें।

मैं अपने अनुभवों के आधार पर कुछ बातें लिख रहा हूँ जिन्हें आप अपनी यात्रा आरंभ करने से पहले ध्यान में रख सकते हैं।

1. प्राइवेट मीडिया चैनल की भड़काऊ न्यूज़ पर अधिक विश्वास न करें। डीडी न्यूज़ विश्वशनीय समाचारों के लिए एक अच्छा विकल्प है।

2. यदि पहाड़ों से अच्छी ख़बरें नहीं आ रही हैं तो यात्रा पर निकलने से पहले सम्बंधित लोकल बॉडी, सरकारी एजेंसी या वहां के किसी होटल आदि से संपर्क कर के स्थिति के बारे में जानकारी ले लेना सही रहेगा। आज कल सभी सरकारी एजेंसियों और होटल आदि के संपर्क सूत्र गूगल पर उपलब्ध हैं।

3. यात्रा पर निकलने से पहले भी आप जहाँ जाने वाले हैं वहां के किसी स्थानीय सोशल मीडिया समूह में शामिल हो कर वहां की स्थिती आदि के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

4. यात्रा के दौरान स्थानीय लोगों के संपर्क में रहें और आगे की स्थिती की जानकारी लेते रहें। किसी भी दुर्घटना या प्राकृतिक आपदा की स्थिती में पुलिस का आदेश माने।

5. यात्रा के दौरान पर्याप्त मात्रा में कैश रखें। हमेशा कैशलेश ट्रांसेक्शन और ए.टी.एम. के भरोसे रहना सही नहीं रहता। मोबाइल चार्ज करने के लिए पॉवर बैंक, और मोबाइल में पर्याप्त बैलेंस भी रखें।

6. प्राथमिक उपचार की दवाइयाँ, छाता/ रेनकोट, टॉर्च को अपने बैग में अवश्य स्थान दें।

7. सबसे अधिक महत्वपूर्ण है आपका हौसला। फ़र्ज़ी ख़बरों और अफवाहों के झांसे में आकर अपने घुमक्कड़ी के शौक को न ख़त्म करें। मैं स्वयं बादल फटने की फ़र्ज़ी ख़बरों को दरकिनार करते हुए जुलाई 2017 में गंगोत्री यात्रा का आनंद उठा चुका हूँ। आप इस यात्रा वृतांत को यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

यदि आपकी नज़र में भी कोई सुझाव है तो कमेंट बॉक्स में अवश्य लिखें।

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rakesh kumar
rakesh kumar
July 1, 2018 1:25 am

आपकी बातो से पूर्ण सहमत हूँ,एक पहाड़ी घुमक्कड़ के लिए बारिश का मौसम सबसे बेहतरीन मौसम होता है,जब प्रकर्ति की हरियाली अपने चरम पर होती है,उतरते बादल, चारो तरफ फैली हरियाली,वातावरण में फैली वो सोंधी खुशबू केवल बारिश के दौरान देखी और महसूस की जा सकती है,ये मीडिया वाले पता नही क्यों बारिश के दौरान कुछ ज्यादा ही अफवाह फैला देते है पहाड़ो के बारे में,बारिश के दौरान लैंडस्लाइड होना प्रकति की एक हद तक स्वतः होने वाली प्रक्रिया ही है,कुछ सावधानियां जरूर रखनी चाहिए,2013 में यही हुआ था सबसे ज्यादा विपत्ति केदारनाथ में आई थी,पर मीडिया वालों की मेहरबानी से पूरा उत्तराखंड मुसीबत का द्वार बना हुआ था,इन्ही अफवाहों का कारण उत्तराखंड के प्रसिद्ध और नजदीकी हिल स्टेशन भी इन अफवाहों का शिकार बन गए थे,मैंने उसी साल जुलाई अगस्त में कितने ही जगह उत्तराखण्ड में चक्कर लगाए थे वो भी अपनी बाइक से,कोई परेशानी नही हुई मुझे…