झारखण्ड का धाम – वैद्यनाथ धाम (Vaidyanath Dham, Jharkhand)

यात्रीनामा एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहाँ आप अपने यात्रा अनुभव पाठकों के साथ साझा कर सकते हैं। इसी कड़ी में मूल रूप से झारखण्ड के रहने वाले और फ़िरहाल दिल्ली वासी अनित कुमार हमारे साथ साझा कर रहे हैं प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री वैद्यनाथ धाम से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ। हम कुछ मामूली एडिटिंग के बाद इस वृतांत को ज्यों का त्यों पब्लिश कर रहे हैं। आइये आनंद लें बाबा धाम की महिमा का।

बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक पवित्र वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग झारखण्ड राज्य के देवघर में स्थित है | इस जगह को लोग बाबा वैद्यनाथ धाम या बाबा धाम के नाम से भी जानते हैं | कहते हैं भोलेनाथ यहां आने वाले अपने सभी भक्तों की सभी मनोकामनायें पूरी करते हैं | इसलिये इस ज्योतिर्लिंग को ‘कामना लिंग’ भी कहते हैं |

बारह ज्योतिर्लिंगों के लिए कहा जाता है कि जहां-जहां महादेव साक्षात प्रकट हुए वहाँ – वहाँ ये स्थापित हो गये। इसी तरह पुराणों में वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की भी कथा है जो लंकापति रावण से जुड़ी है |

Baidynath Dham

बाबा वैद्यनाथ धाम की कथा :

भगवान शिव के महान भक्त रावण और बाबा वैद्यनाथ की कहानी बड़ी निराली है | पौराणिक कथा के अनुसार दशानन रावण भगवान शंकर को प्रसन्न करने के लिए हिमालय पर तप कर रहा था | परन्तु भोलेनाथ प्रसन्न नहीं हो रहे थे फिर वह एक-एक करके अपने सिर काटकर शिवलिंग पर चढ़ाने लगा | नौ सर चढ़ाने के बाद जब रावण दसवां सिर काटने वाला था तो भोलेनाथ ने प्रसन्न होकर उसे दर्शन दिये और उससे वर मांगने को कहा |

तब रावण ने ‘कामना लिंग’ को ही लंका ले जाने का वरदान मांग लिया | रावण के पास सोने की लंका के अलावा तीनों लोकों में शासन करने की शक्ति तो थी ही साथ ही उसने कई देवता, यक्ष और गंधर्वो को कैद कर के भी लंका में रखा हुआ था | इस वजह से रावण ने ये इच्छा जताई कि भगवान शिव कैलाश को छोड़ लंका में रहें | महादेव ने उसकी इस मनोकामना को पूरा तो किया पर साथ ही एक शर्त भी रखी | उन्होंने कहा कि अगर तुमने शिवलिंग को रास्ते में कही भी रखा तो मैं फिर वहीं रह जाऊंगा और नहीं उठूंगा। रावण ने शर्त मान ली |

इधर भगवान शिव की कैलाश छोड़ने की बात सुनते ही सभी देवता चिंतित हो गए | इस समस्या के समाधान के लिए सभी भगवान श्री विष्णु के पास गये | तब श्री हरि ने लीला रची | भगवान विष्णु ने वरुण देव को आचमन (हिन्दुओं में धार्मिक कृत्य आरम्भ करने के समय दाहिने हाथ की हथेली में थोड़ा जल लेकर मंत्र पढ़ते हुए उसे पीना) के माध्यम से रावण के पेट में प्रविष्ट करने को कहा | इसलिए जब रावण आचमन करके शिवलिंग को लेकर श्रीलंका की ओर चला तो देवघर के पास उसे लघुशंका लगी |

तभी भगवान विष्णु ने एक ब्राह्मण का रूप लेके रावण के पास आये | रहस्य से अनजान, रावण ने लिंगम को ब्राह्मण को सौंप दिया | वरुण देव के कारण रावण की लघुशंका ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही थी। इधर ब्राह्मण ने बहुत आवाज़ लगाई लेकिन रावण का कोई उत्तर पाते देख ब्राह्मण ने शिवलिंग वही धरती पर रखकर दिया |

जब रावण लौट कर आया तो लाख कोशिश के बाद भी शिवलिंग को उठा नहीं पाया | तब उसे भी भगवान की यह लीला समझ में आ गई और वह क्रोधित शिवलिंग पर अपना अंगूठा गड़ा कर चला गया | उसके बाद श्री ब्रह्मा और श्री विष्णु आदि देवताओं ने आकर उस शिवलिंग की पूजा की | शिवजी का दर्शन होते ही सभी देवी देवताओं ने शिवलिंग की उसी स्थान पर स्थापना कर दी और शिव-स्तुति करके वापस स्वर्ग को चले गए | तभी से महादेव ‘कामना लिंग’ के रूप में देवघर में विराजते हैं |

बाद मे, बैजू नाम के इंसान को वो शिवलिंग दिखा | वो थोड़ा मानसिक विक्षिप्त था | सभी बातों से अंजान, वो हर दिन उस शिवलिंग को एक डंडा मारता और अपने घर आ के भोजन करता | एक दिन जब वो भोजन करने बैठा ही था तभी उसे याद आया की आज उसने उस शिवलिंग पे डंडा तो मारा ही नही, वो खाना छोड़ कर उस शिवलिंग को डंडा मार के आया फिर अपना भोजन किया | भगवान शिव उसके इस आचरण से बहुत ख़ुश हुए और रात मे उसके सपने मे दर्शन दिए और एक वर माँगने को कहा। उसने बस इतना माँगा की आपके नाम से पहले मेरा नाम आए | तब से वो भोलेनाथ की पूजा करने लगा और इस जगह का नाम बाबा बैजनाथ धाम भी पड़ गया ।

बैद्यनाथ धाम के और भी नाम है जैसे हरितकी वन, रावणेश्वर कानन, रणखंड, चिताभूमि और हृदयपीठ। बैद्यनाथ धाम को ‘हार्दपीठ’ भी कहा जाता है और उसकी मान्यता शक्तिपीठ के रूप में है। कहते है की यहाँ पे माता सती का हृदय गिरा था | इस प्रकार भारत का यह एकमात्र स्थान है जहाँ ज्योतिर्लिंग के साथ शक्तिपीठ भी है।

बैद्यनाथ धाम मंदिर की उचाई 72 फीट है और ऐसा माना जाता है की इसे खुद भगवान विश्वकर्मा ने बनाया था | इस मंदिर की एक और विशेषता है और वो है पंचशूल जो की इसके शीर्ष पर है | बाकी सभी जगह त्रिशूल है परंतु यहाँ पे पंचशूल | इसे सुरक्षा कवच माना गया है और इसी के कारण आज तक इस मंदिर पर किसी प्राकृतिक आपदा का प्रभाव नहीं हुआ है | कुछ पंडितों का कहना है कि पंचशूल का दूसरा कार्य मानव शरीर में मौजूद पांच विकार-काम, क्रोध, लोभ, मोह व ईर्ष्या का नाश करना है और कुछ पंडितो ने इस पंचशूल को पंचतत्वों – क्षितिज, जल, पावक, गगन तथा समीर से बने मानव शरीर का द्योतक बताया है |

वैद्यनाथ धाम के प्रांगण मे कुल 22 मंदिर है |

बाबा वैद्यनाथ मंदिर
आनंद भैरव मंदिर
श्री राम मंदिर
माँ गंगा मंदिर
माँ बंगला मंदिर
सूर्या नारायण मंदिर
माँ सरस्वती मंदिर
माँ मनसा मंदिर
हनुमान मंदिर
काल भैरव मंदिर
माँ संध्या मंदिर
ब्रह्मा मंदिर
गणेश मंदिर
माँ जगत जननी मंदिर
माँ पार्वती मंदिर
नील कांता मंदिर
लक्ष्मी नारायण मंदिर
माँ अन्नपूर्णा मंदिर
माँ काली मंदिर
माँ तारा मंदिर
गौरी शंकर मंदिर
नरवदेश्वर मंदिर

 

कब जायें ?

वैसे तो आप किसी भी मौसम मे और कभी भी जा सकते हैं, परंतु सावन महीने मे इसका अलग ही महत्व है | पूरे सावन महीने यहाँ मेला लगा रहता है | लोग सुल्तानगंज (बिहार) से गंगा जल भर के, अपनी काँवर मे रख के, 105 किलोमीटर की दूरी तय करके बाबा धाम मे जल चढ़ाते है | बाबा धाम मे जल चढ़ाने के बाद वे वासुकि नाथ मन्दिर (देवघर से करीब 46 किलोमीटर) जाते है अन्यथा पवित्र यात्रा अधूरी मानी जाती है | जल लाते समय ये ध्यान रखा जाता है की ये जल ज़मीन से ना स्पर्श न करे | जब श्रद्धालु “बोल-बम!” “बोल-बम!” का जयकारा लगाते चलते है तो रास्ते की कठिनाई का पता ही नही चलता | इस समय काफ़ी भीड़ भी होती है | प्रति दिन लाखो श्रद्धालु यहाँ आते है | बाकि महीनो में आप कभी भी आराम से कम भीड़ में पूजा कार्य कर सकते है ।

कैसे पहुंचे ?

सबसे पहले जसीडीह स्टेशन पहुंचे | जसीडीह जंक्शन एक प्रमुख स्टेशन है जो पटना-हावड़ा रेल मार्ग में आता है | जसीडीह के लिए आपको राजधानी, दूरंतों, सुपरफास्ट और एक्सप्रेस ट्रैन मिल जायेंगी | जसीडीह का स्टेशन कोड JSME हैं | जसीडीह से बाबा धाम की दुरी लगभग 7 किलोमीटर है | यहाँ से आपको ऑटो, टैक्सी और ट्रैन भी मिल जायेंगे | देवघर में दो रेलवे स्टेशन है और ये जसीडीह जंक्शन से रेलवे लाइन से जुड़े हुए है |

हवाई यात्रीयों के लिये नज़दीकी हवाई अड्डा पटना, रांची, दमदम, गया और दुर्गापुर है |

यहाँ से आस पास के शहरों के लिए बस सेवा भी है |

 

विभिन्न शहरों से दूरी :

कोलकाता : 373 किलोमीटर
पटना : 281 किलोमीटर
गिरिडीह : 112 किलोमीटर
दुमका : 67 किलोमीटर
सिमुलतला : 53 किलोमीटर
धनबाद : 124 किलोमीटर
रांची : 249 किलोमीटर

 

कहाँ रुकें ?

देवघर में रुकने की कोई समस्या नहीं हैं। यहाँ आपको धर्मशाला से लेकर आलिशान होटल भी मिल जायेंगे । खाने पीने के भी कई होटल है । देवघर का पेड़ा बहुत प्रसिद्ध है । जब भी आप जाए तो पेड़ा ज़रूर अपने साथ लाए (नकली पेड़े से बचे) । साथ ही, देवघर मे जब आप जा ही रहे है तो अवन्तिका होटल ( टावर चौक के पास, मुख्य मंदिर से 10-15 मिनट की दुरी पे है ) की रसगुल्ले जरूर खाये ।

 

प्रमुख दर्शनीय स्थल :

त्रिकुट : देवघर से 16 किलोमीटर दूर दुमका रोड पर एक खूबसूरत पर्वत त्रिकूट स्थित है। इस पहाड़ पर बहुत सारी गुफाएं और झरनें हैं। यहाँ पे रोपवे भी का भी आनंद ले सकते है।
नौलखा मंदिर : देवघर के बाहरी हिस्से में स्थित यह मंदिर अपने वास्तुशिल्प की खूबसूरती के लिए जाना जाता है। इस मंदिर का निर्माण बालानंद ब्रह्मचारी के एक अनुयायी ने किया था जो शहर से 8 किलोमीटर दूर तपोवन में तपस्या करते थे।
तपोवन : तपोवन भी मंदिरों और गुफाओं से सजा एक आकर्षक स्थल है।
नंदन पहाड़ : इस पर्वत की महत्ता यहां बने मंदिरों के झुंड के कारण है जो विभिन्न भगवानों को समर्पित हैं। पहाड़ की चोटी पर कुंड भी है जहां लोग पिकनिक मनाने आते हैं। यहाँ पर नौका विहार का भी आनंद ले सकते है ।
सत्संग आश्रम : ठाकुर अनुकूलचंद्र के अनुयायियों के लिए यह स्थान धार्मिक आस्था का प्रतीक है। सर्व धर्म मंदिर के अलावा यहां पर एक संग्रहालय और चिड़ियाघर भी है।

यदि आप भी चाहते हैं की आपकी यात्रा की स्मृतियाँ यात्रीनामा पर प्रकाशित हों, तो आप अपने अनुभव हमें pandeyumesh265@gmail.com पर ई-मेल कर सकते हैं।

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kavitaROHITAnit Kumaradminसुनील कुमार Recent comment authors
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सुनील कुमार
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सुनील कुमार

जसीडीह से देवघर स्टेशन या वैद्यनाथ धाम स्टेशन मीटर गेज नहीं बल्कि, ब्रॉड गेज से जुड़ा हुआ है।

Anit Kumar
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Anit Kumar

धन्यवाद इसे प्रकाशित करने के लिए। पौराणिक कथाओ में थोड़े बहुत मतभेद होते ही है। यह कथा जहाँ तक मैंने सुनी है उस हिसाब से लिखा हूँ। पहली बार कुछ लिखा हूँ, आप लोगो के सुझाव का स्वागत है।

ROHIT
Guest
ROHIT

Deoghar me 3 railway station hai jo Jasidih se conected hai… BAIDHYANATH DHAM Station… Deoghar Station n Satsang Nagar

kavita
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kavita

बहुत ाचा लिखा है आप ने में आपकी बात से सहमत हो के घूमने का मजा बरसात में हे आता है बहुत अछि पिचिर खीचे है आप ने