चोपता – तुंगनाथ – चंद्रशिला यात्रा भाग 2 (Chopta – Tungnath – Chandrashila Trip Part 2)

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दिल्ली से ऋषिकेश (Delhi to Rishikesh)

यात्रा आरंभ

आखिर रात के 8:30 बजे। मै, देबासीसस्वप्निल और ज्योतिर्मय ऑटो द्वारा एम.जी. मेट्रो स्टेशन की ओर निकल पड़े। कुशाग्र हमें कश्मीरी गेट आई.एस.बी.टी. पर ही मिलने वाला था। दूसरी ओर रोहित और अनित भी कश्मीरी गेट की ओर निकल पड़े थे।

जैसे – जैसे मेट्रो की स्टेशन गुज़रते जा रहे थे, मन में संशय बढ़ता जा रहा था की कश्मीरी गेट पर जब सभी एक दुसरे से मिलेंगे तो क्या होगा। अब तो सब नियति ही छोड़ दिया था।

जब से दिल्ली मेट्रो में मोबाइल चार्जिंग पॉइंट लगे हैं, लोग चार्जिंग पॉइंट ढूंढते रहते हैं। जहाँ खाली पॉइंट देखा, लगा दिया अपना मोबाइल चार्जिंग में और व्यस्त हो गए इस चार इंच की दुनिया में। कोई व्हाट्सपर पर जोक्स पढ़ कर हंस रहा है, तो कोई फेसबुक पर ऑनलाइन क्रांतिकारी बना पड़ा है। छिड़ी पड़ी हैं ऑनलाइन तलवारें दक्षिण पंथ और वामपंथ के समर्थकों के बीच। वैसे मै भी इन्ही में से हूँ। अब जबकी मै दक्षिण पंथ (राइट विंग) का समर्थक हूँ तो बहुत से लोग मुझे भाजपा का समर्थक भी मान बैठते हैं। मैंने भी मोबाइल चॉर्जिंग पॉइंट में लगाया और लग गया फेसबुक में। वैसे अभी मै राइट विंग वाला कम और फेसबुकिया घुमक्कड़ ज़्यादा था।

‘यह कश्मीरी गेट स्टेशन है, दरवाज़े दायीं ओर खुलेंगे, कृपया दरवाजों से हट कर खड़े हों। ‘….. लो जी, आ गया कश्मीरी गेट। स्टेशन के बाहर थोड़ी सी खरीदारी की और पहुँच गए वेटिंग एरिया में। कुशाग्र की कॉल आयी, उसके पास शराब थी इसलिए वह बस अड्डे के मुख्य द्वार से नहीं आ सकता था, लेकिन कुछ ही देर में वह पिछले द्वार से आ गया।
वैसे यात्रा के दौरान मैं शराब आदि नशे के विरूद्ध हूँ, लेकिन अब आ गयी थी तो कुछ नहीं कहा।

ISBT Kashmiri Gate new delhi
महाराणा प्रताप अंतर्राजीय बस अड्डा – कश्मीरी गेट दिल्ली

बस का समय 11:30 बजे का था और वह अपने समय से पहले ही आ चुकी थी। हम पांचों (मैं, देबासीसस्वप्निलज्योतिर्मय और कुशाग्र) ने अपनी सीट्स पर कब्ज़ा कर लिया। तभी बस में रोहित और अनित ने प्रवेश किया और हमारी पीछे वाली सीट्स पर बैठ गए। स्वप्निल ने एक बार उनकी ओर देखा और फिर मुझे देखा। यह तो होना ही था, लेकिन जैसा सोचा था कम से कम वैसा तो नही हुआ।

बस अपने निश्चित समय 11:30 बजे चल पड़ी। वैसे इस बार बस अड्डे पर खड़ी उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश परिवहन की बसें पहले से बेहतर हालत में दिखाई दे रही थी। उत्तर प्रदेश का निज़ाम बदल चुका है और इसका असर उनकी बसों पर भी दिखाई दे रहा था। लगभग सभी बसें भगवा रंग में रंगी हुई थी। जिस बस में हम थे वह थी उत्तराखंड जनरथ सेवा। इसे आप सेमी-डीलक्स भी कह सकते हैं। सीटों पर फटे हुए पॉलीथिन कवर देख कर लग रहा थी की बस नयी ही थी। चलो, कुछ तो सुधार हुआ।

गाज़ियाबाद, मोदीनगर और मेरठ के ट्रैफिक जाम को तोड़ते बस मुज़फ्फरनगर के खतौली पहुंची। अक्सर सरकारी बसें ढाबों पर ही रूकती हैं, लेकिन इस बार आशा के विपरीत बस रुकी सागर रत्ना होटल पर। इसे हम पांच सितारा रेस्टोरेंट भी कह सकते हैं। यहाँ पर रुकने वाली सभी बसे वॉल्वो श्रेणी की ही थी। भूख तो लगी हुई थी लेकिन यहाँ खाना खाने का अर्थ था कम 500 रुपये प्रति व्यक्ति का बिल। इसलिए केवल चाय ही पी। सर्दी की रात में कांपते हुए चाय पीने का मज़ा ही कुछ और होता है।

बायें से – कुशाग्र, , देबासीस, स्वप्निल और मै

थोड़ी ही देर में बस चल पड़ी। सभी सो चुके थे लेकिन पता नहीं क्यों नींद अभी भी मुझसे रूठी हुई थी। कानों में लगे हुए इयरफोन में पुराने गाने सुनते हुए कभी – कभी झपकी आ जाती थी। हाइवे के दोनों ओर ढाबों पर लगी रंग – बिरंगी ट्यूबलाइट्स के कारण मुज़फ्फर नगर किसी देसी लॉस-वेगास से कम नहीं लग रहा था। सुबह 4:30 तक हम हरिद्वार पहुँच चुके थे और कुछ ही देर में ऋषिकेश।

सर्दी तो थी लेकिन जितना सोचा था उतनी नहीं। अब तक मै यात्रा गाइड की भूमिका में आ चुका था। यात्रा अच्छी चल रही थी.. लेकिन रोहित और अनित से अजनबियों जैसा व्यव्हार थोड़ा अखर रहा था। ऐसा नहीं है की रोहित की बाकियों के लिए अंजान था। ग्रुप में सभी उसे पहले से जानते थे। ग्रुप के बाकि सदस्यों से किये वादें के अनुसार मै भी रोहित और अनित से कम ही मेल – जोल रख रहा था। शायद आप इसे अजीब मानते हों लेकिन मेरे लिए यह बहुत दुःखद था।

ऋषिकेश बस अड्डे पर अभी मैगी खा ही रहे थे की रोहित दौड़ता हुआ आया और कहा की उसने गोपेश्वर वाली बस में 7 सीटें रिज़र्व कर ली है। पहाड़ी यात्राओं में खाना भले ही छूट जाये लेकिन बस नहीं छूटनी चाहिये। ऋषिकेश से चोपता तक पहुँचने में कम से कम आठ घंटे लगने वाले थे इसलिए मै बस के मामले में किसी तरह का रिस्क नहीं ले सकता था।

कुछ बातें ऋषिकेश के बारे में 

आगे बढ़ने से पहले ऋषिकेश के बारे में कुछ बाते हो जाये। बहुत से लोग (विशेषतः दिल्ली वाले) जब रिवर राफ्टिंग के लिए जाते हैं तो कहते हैं की ‘ऋषिकेश जा रहे हैं, राफ्टिंग करने’, लेकिन क्या आप जानते हैं ऋषिकेश तो बस अड्डे के पीछे बहने वाली चंद्रभागा तक ही सीमित है।

ऋषिकेश, देहरादून जिले का भाग है और चंद्रभागा नदी तक ही सीमित है। चंद्रभागा पार करते ही टिहरी गढ़वाल जिला आरम्भ हो जाता है और गंगा की दूसरी ओर पौड़ी गढ़वाल जिला है। उस क्षेत्र को स्वर्ग आश्रम कहा जाता है। लक्ष्मण झूला टिहरी गढ़वाल जिले के मुनि की रेती क्षेत्र में है। शिवपुरी अथार्त जहाँ से राफ़्टिंन्ग आरम्भ होती है, वह क्षेत्र भी टिहरी गढ़वाल जिले का भाग है। वैसे यह सभी तथ्य प्रशाशनिक आधार पर ही आधारित हैं। ऐतिहासिक ऋषिकेश तो वही है जिसे आप अब तक मानते आयें हैं।

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इस यात्रा के अन्य भागों को पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें।

चोपता – तुंगनाथ – चंद्रशिला यात्रा भाग 1 (तैयारी)
चोपता – तुंगनाथ – चंद्रशिला यात्रा भाग 2 (दिल्ली से ऋषिकेश)
चोपता – तुंगनाथ – चंद्रशिला यात्रा भाग 3 (ऋषिकेश से चमोली)
चोपता – तुंगनाथ – चंद्रशिला यात्रा भाग 4 (चमोली से चोपता)
चोपता – तुंगनाथ – चंद्रशिला यात्रा भाग 5 (चोपता से श्री तुंगनाथ मंदिर)
चोपता – तुंगनाथ – चंद्रशिला यात्रा भाग 6 (तुंगनाथ से चंद्रशिला और फिर गुप्तकाशी)
चोपता – तुंगनाथ – चंद्रशिला यात्रा भाग 7 (गुप्तकाशी से दिल्ली)

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