Yana

गर्मियों की छुट्टियों का आनंद लें इन गाँवों में भाग 2 (Enjoy summer vacations in these villages Part 2)

गर्मी का मौसम अपने चरम पर है। घर से बाहर निकलो तो धुप इतनी तेज़ है की यदि बाहर कोई काम निपटाना हो तो हम उसे कल और फिर कल से परसो तक टाल रहते हैं। इस मौसम में बच्चों की छुट्टियां हो जाती है और वे ज़िद करने लगते हैं घूमने जाने की। बच्चे ही क्यों, हम बड़ों का भी तो यही हाल है ! क्यों सही कहा न ? इसलिये हम खोज के लाये हैं ऐसे चुनिंदा गाँवों को जहाँ आप कुछ दिन सुकून से गुज़ार सकते हैं। इस श्रंखला के पिछले भाग में हम आपको लेकर गये थे कालप, खाती, अस्कोट, गुनेह और मालदेवता गावों के सैर पर जिसे आप यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं। चलिये बढ़ते हैं आगे।

1. ग्वालदम (चमोली, उत्तराखण्ड) Gwaldam (Chamoli, Uttarakhand)

Gwaldam
ग्वालदम, इमेज स्रोत: गूगल इमेज

निम्न हिमालयी क्षेत्र में स्थित ग्वालदम आपको वह सुकून देगा जिसकी तलाश आपको पहाड़ों में ले जाती है। हिमालयी क्षेत्र में स्थित होने के कारण यहाँ सर्दियों में भयंकर सर्दी और बरसात के मौसम में खूब बारिश होती है किन्तु मई और जून का महीने की गुलाबी ठण्ड और हलकी बारिश आपका मन मोह लेगी। कोहरे के से ढके पहाड़ और थोड़ी ट्रैकिंग के बाद खुद को बादलों के बीच पाना किसी जन्नत के एहसास के कम नहीं। चीड़ के पेड़ों से घिरा हुआ यह स्थान समुद्रतल से 1700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहाँ से हिमालय का वृहद दृश्य दिखाई देता है जिसके कारण विभिन्न हिमालयी चोटियाँ जैसे की नंदा देवी (7817 मीटर), त्रिशूल (7120 मीटर) और नंदा घूंटी (6309 मीटर) आदि को आप अपने समीप ही पाते हैं। ग्वालदम को रूपकुंड, कुआरी पास और, नंदा देवी यात्रा के बेस कैम्प के रूप में भी जाना जाता है।

कैसे पहुंचे ?
हवाई मार्ग: नज़दीकी हवाई अड्डा पंत नगर में है जो की यहाँ से 205 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
रेल मार्ग: नज़दीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम में है जो की यहाँ से 165 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और वहां से ग्वालदम के लिए बस और टैक्सी सेवा उपलब्ध है।
सड़क मार्ग: ग्वालदम गढ़वाल और कुमाउ के सभी बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है। दिल्ली से यहाँ पहुँचने के दो मार्ग हैं।
पहला मार्ग: दिल्ली – मेरठ – मुज़फ्फर नगर – रूड़की – हरिद्वार – ऋषिकेश – देवप्रयाग – श्रीनगर – रुद्रप्रयाग – गौचर – कुलसारी – थराली – ग्वालदम।
दूसरा मार्ग: दिल्ली – गाज़ियाबाद – मुरादाबाद – रामपुर – रुद्रपुर – हल्द्वानी – भोवाली – अल्मोड़ा – सोमेश्वर – कौसानी – गरुड़ – ग्वालदम।

क्या है विशेष ?
प्रसिद्ध बैजनाथ मंदिर यहाँ से केवल 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। खम्बा के बौद्ध तीर्थ भी यहाँ स्थित हैं। इसके अतिरिक्त आप यहाँ मच्छी ताल, बाधानगढ़ी मंदिर, ग्वालनाग, फॉरेस्ट ट्रेकिंग, विलेज वॉक, वृहद् हिमालयी दृश्य आदि देख हैं ।

कहां ठहरे?
यहाँ होटल, रेस्ट हाउस और होम स्टे आदि उपलब्ध हैं। जिनमे कुछ के बारे में आप यहाँ क्लिक करके पता कर सकते हैं।

 

2. मुक्तेश्वर (नैनीताल, उत्तराखंड) Mukteshawar (Nainital, Uttarakhand)

Mukteshwar
मुक्तेश्वर, इमेज स्रोत: गूगल इमेज

मुक्तेश्वर उत्तराखण्ड के नैनीताल जिले में 2285 मीटर पर स्थित एक यह सुखद और शांत स्थान है। मुक्तेश्वर का नाम 350 वर्ष पुराने श्री मुक्तेश्वर धाम के नाम पर पर पड़ा जो भगवान शिव को समर्पित है। एक पर्वत शिखर पर स्थित मुक्तेश्वर मंदिर से आप हिमालय पर्वत माला आश्चर्यजनक दृश्य देख सकते हैं। वर्ष 1893 में मुक्तेश्वर को ब्रिटिश सरकार द्वारा मुक्तेश्वर को शोध एवं शिक्षा संस्थान (IVRI) के रूप में विकसित किया गया था। मुक्तेश्वर आज भी शहरी सभ्यता लगभग अछूता है।

कैसे पहुंचे ?
हवाई मार्ग: नज़दीकी हवाई अड्डा पंत नगर में है जो की यहाँ से 94 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
रेल मार्ग: नज़दीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम में है जो की यहाँ से 62 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और वहां से मुक्तेश्वर के लिए बस और टैक्सी सेवा उपलब्ध है।
सड़क मार्ग: मुक्तेश्वर गढ़वाल और कुमाउ के सभी बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है। दिल्ली से यहाँ गाज़ियाबाद, नैनीताल होते हुए पहुंचा जा सकता है।

क्या है विशेष ?
यहाँ स्थित चौली की जाली रॉक क्लाइम्बिंग के लिए प्रसिद्ध है। पैराग्लिडिंग, ट्रैकिंग, और कैम्पिंग आदि का आनंद यहाँ लिया जा सकता है।
इसके अतिरिक्त आप यहाँ फॉरेस्ट ट्रेकिंग, विलेज वॉक, वृहद् हिमालयी दृश्य आदि देख सकते हैं ।

कहां ठहरे?
यहाँ होटल, रेस्ट हाउस और होम स्टे आदि उपलब्ध हैं। जिनमे कुछ के बारे में आप यहाँ क्लिक करके पता कर सकते हैं।

 

3. ख़िर्सू (पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड) Khirsu (Pauri Garhwal, Uttarakhand)

Khirsu
ख़िर्सू, इमेज स्रोत: गूगल इमेज

पौड़ी से 15 किलोमीटर की दूरी पर और समुद्र तल से 1700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित ख़िर्सू चीड़, देवदार पेड़ों के बीच स्थित एक ख़ूबसूरत स्थान है । उत्तराखंड राज्य के पौरी गढ़वाल जिले में स्थित ख़िर्सू से हिमालयी श्रृंखलाओं का विहंगम दृश्य दिखायी देता है। कभी पर्यटकों से अछूता रहा ख़िर्सू आज पर्यटन के पटल पर एक अहम पहचान बना रहा है।

कैसे पहुंचे ?
वायु मार्ग: देहरादून का जॉली ग्रांट हवाई अड्डा यहाँ का नज़दीकी हवाई अड्डा है जो की यहाँ से 145 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। टैक्सी और बस सेवा उपलब्ध है।
रेल मार्ग: यहाँ से नज़दीकी रेलवे स्टेशन 132 किलोमीटर दूर ऋषिकेश में स्थित है, लेकिन ज़्यादातर रेलें हरिद्वार में ही रूकती हैं। इसलिए यदि आप रेल से आ रहे हैं तो हरिद्वार में ही उतर कर आगे का सफ़र बस या टैक्सी द्वारा तय करना सही रहेगा।
सड़क मार्ग: यहाँ के लिए हरिद्वार और ऋषिकेश बस अड्डे से बस उपलब्ध है।

क्या है विशेष ?
घंडियाली देवी मंदिर और विभिन्न प्रकार के पक्षियों का वास। इसके अतिरिक्त चीड़, देवदार आदि के जंगलों में चहलकदमी की जा सकती है। ख़िर्सू एक गाँव है तो यहाँ आप ग्रामीण संस्कृति से रूबरू हो सकते हैं।

कहां ठहरे?
यहाँ रुकने के लिए होम स्टे, होटल और रेस्ट हाउस आदि उपलब्ध हैं। कुछ होटलों की जानकारी आपको यहाँ क्लिक करके मिल सकती है।

 

4. याना (उत्तर कन्नड़, कर्णाटक) Yana (Uttara Kannada, Karnataka)

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याना, इमेज स्रोत: गूगल इमेज

सह्याद्रि पर्वत मालाओं से घिरा याना, प्रसिद्ध हिल स्टेशन गोकर्ण से 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कुछ अलग करने वालों के लिए यह एक मुफ़ीद जगह है। गाँव का विभूति वॉटरफॉल सैलानियों को बरबस ही अपनी ओर खींच लाता है। यहाँ पहाड़ों के बीच से होते हुए संकरे रास्तों से निकल कर शिवलिंगम मूर्ति तक पहुंचना ही बेहद रोमांचक है।

सह्याद्रि पर्वत मालाओं के बीच स्थित गुफाओं की यात्रा को भी आप को अपनी लिस्ट में शामिल कर लेना चाहिये। गुफा तक पहुंचने के लिये कोई पक्का रास्ता नहीं हैं। वहां तक आपको चट्टानों के बीच से ट्रैकिंग करके ही पहुँचना होगा। यहाँ बहने वाली नदियों की धारायें किसी भी पर्यटक को आकर्षित कर सकती हैं।

कैसे पहुंचे ?
वायुमार्ग: यहाँ का सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा गोआ अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है जो की यहाँ से 210 किलोमीटर दूर स्थित है। इसके अतिरिक्त अगला हवाई अड्डा हुबली में और बंगलुरु में केम्पेगौड़ा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है जो की यहाँ से 480 किलोमीटर दूर स्थित है।
रेल मार्ग: याना या उसके आस – पास कोई रेलवे स्टेशन नहीं है। सबसे नज़दीकी रैलवे स्टेशन यहाँ से 112 किलोमीटर दूर मडगांव में है जहाँ से बस या टैक्सी द्वारा याना पहुंचा जा सकता है।
सड़क मार्ग: यहाँ अंकोला या कुमता होते हुए पहुंचा जा सकता है।

क्या है विशेष ?
विभूति वॉटरफॉल, सह्याद्रि पर्वत मालाओं के बीच स्थित गुफाएं, शिवलिंगम मूर्ति, ट्रैकिंग और इसके अतरिक्त आप यहाँ कैम्पिंग भी कर सकते हैं।

कहां ठहरे?
यहाँ रुकने के लिए होम स्टे और कुछ होटल उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त आप कैम्पिंग भी कर सकते हैं । कुछ होटलों की जानकारी आपको यहाँ क्लिक करके भी मिल सकती है।

 

5. चितवन जंगल लॉज (मंडला, कान्हा राष्ट्रिय अभ्यारण्य, मध्य प्रदेश) Chitvan Jungle Lodge (Mandala, Kanha National Park, Madhya Pradesh)

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चितवन, इमेज स्रोत: गूगल इमेज

यदि वाइल्ड लाइफ के शौक़ीन है और नेचर वॉक को लेकर क्रेज़ी तो चितवन जंगल लॉज में आपका स्वागत है। कान्हा राष्ट्रिय अभ्यारण्य के एकदम नज़दीक लगभग 20 एकड़ में फैला यह लॉज लगभग 100 से भी ज़्यादा प्रकार के पक्षियों और रंग-बिरंगी तितलियों का बसेरा है। एक स्थानीय किसान ने अपनी खेती लायक जमीन को जंगल में बदल कर इसे प्रकृति प्रेमियों के लिए विकसित किया है। यहाँ आधुनिक सुविधाओं के साथ कॉटेज बनाये गए हैं। इन कॉटेज के छत से वन का विहंगम दृश्य देखा जा सकता है।

कैसे पहुंचे ?
चितवन, कान्हा राष्ट्रिय अभ्यारण्य से एकदम नज़दीक है और यह कान्हा के प्रवेश द्वारा (मुक्की गेट) के निकट है। सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा जबलपुर में है जहाँ के लिये देश के सभी बड़े शहरों से फ्लाइट उपलब्ध है। रेलयात्रियों के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन गोंडिया (145 किलोमीटर) और जबलपुर (165 किलोमीटर) है।

क्या है विशेष ?
वन्य जीवन, विभिन्न प्रजातियों के पक्षी और तितलियाँ, जंगल के बीच आवास आदि।

कहां ठहरे?
चितवन जंगल लॉज ।

यदि आप को लगता है की आप के गाँव में भी वो बात है जो किसी को भी अपनी ओर खींच सकती है तो आप इस बारे में कमेंट बॉक्स या हमारे फेसबुक पेज पर कमेंट कर सकते हैं।

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