गंगोत्री से हरिद्वार (Gangotri to Haridwar)

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पिछले भागों में हमने दिल्ली से उत्तरकाशी और उत्तरकाशी से गंगोत्री तक की यात्रा की। अब यह इस यात्रा का अंतिम भाग है और इसमें आप इस यात्रा में हुए व्यय का विवरण भी पढ़ेंगे। अब बढ़ते हैं आगे …

आखिर दोपहर सवा दो बजे वापसी की यात्रा शुरू हो गयी।

यहाँ से लगभग 20 किलोमीटर आगे बढ़ने के बाद एक वीरान से क्षेत्र में बस रुकी, यहाँ दो ढाबे थे। यहाँ दोपहर का भोजन किया ! भोजन के नाम पर मैगी ही थी। पहाड़ों में दाल – चावल मिले या न मिले, लेकिन चाय और मैगी तो अवश्य मिलेगी। भोजन किया, सेब खरीदे और चल पड़े उत्तरकाशी की ओर। हर्षिल, गंगनानी, भटवारी आदि होते हुए शाम 7 बजे तक हम उत्तरकाशी पहुँच चुके थे।

On the way to Uttarkashi from Gangotri
गंगोत्री से उत्तरकाशी के रास्ते पर कहीं
Ganogtri rout
यहीं लंच किया था
Uttarkashi to Gangotri rout
आप ही कैप्शन दीजिये

एक लम्बे सफ़र की थकान के बाद अब और चलने की हिम्मत नहीं हो रही थी। एक बात राहत की थी की आज माँ की तबियत एक बार भी ख़राब नहीं हुई। रात का भोजन करने के बाद अपने बेड पड़ गये। तभी एक फेसबुक मित्र प्रशांत इशू जी मेसेंजर पर मैसेज आया। फेसबुक उनकी लोकेशन आस – पास ही दिखा रहा था। उन्होंने बताया की वे उत्तरकाशी में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पास रहते हैं और मिलने के इच्छुक हैं लेकिन एक तो रात ज़्यादा हो गयी थी और अगली सुबह हरिद्वार के लिये बस पकड़नी थी इसलिये उन्हें मना करना पड़ा । अच्छा लगता है जब एक अनजान से शहर में कोई पहचान वाला मिलने के लिये कहता है लेकिन बुरा लगता है जब की उसे मना करना पड़े।

आज इस यात्रा का अंतिम दिन अथार्त 31 जुलाई था। आज उत्तरकाशी से हरिद्वार और हरिद्वार से दिल्ली जाना था। सुबह 6 बजकर 30 मिनट वाली बस मिल गयी। पहाड़ों में अक्सर बसों में यात्री कम ही होते हैं, ऐसा ही इस बस में भी था। बरसात के कारण मौसम में ठंडक हो गयी थी। मतली, डुंडा, चिन्यालीसौड़ आदि होते बस पहुंची अगरखाल। यहाँ बस को 30 मिनट रुकना था। परांठे आदि निपटाने के बाद चल पड़े आगे की ओर।

वर्तमान में भारत सरकार की महत्वकांक्षी योजना ऑल वेदर रोड के तहत उत्तराखण्ड में सभी प्रमुख पहाड़ी मार्गों को चौड़ा किया किया जा रहा है जिसके कारण जगह – जगह मार्ग पर मलबा पड़ा हुआ है। इसी मलबे के कारण चंबा से ऋषिकेश तक जगह – जगह जाम की स्थिती उत्पन्न हो जाती है, लेकिन कार्य की प्रगति देख कर लग रहा है की यह कार्य अपने निर्धारित समय में पूरा कर लिया जायेगा। पूरा होते ही पहाड़ में यातायात की समस्या समाप्त हो जायेगी।

Starting point of Tehri lake
टिहरी झील यहीं से शुरू होती है
Chinyalisaund
होंगी कुछ मजबूरियां …. वर्ना कौन जाना चाहेगा ऐसे गांवों से दूर ?
भोले के भक्त

दोपहर डेढ़ बजे तक ऋषिकेश और तीन बजे हम लोग हरिद्वार पहुँच चुके थे। यहाँ से उत्तरकाशी और गंगोत्री की सुनहरी यादों को समेटे हुए योग एक्सप्रेस में दिल्ली की ओर रवाना हो गये।

इस यात्रा के दौरान कुछ विशेष प्रकार के भक्त पुरे रास्ते दिखे। ये वही भक्त थे जिन्हे ‘बुद्धिजीवी’ लोग, आवारा, लफ़ण्डर, लड़कियां छेड़ने वाला, नशेड़ी, ढोंगी और न जाने क्या – क्या कह देते हैं। होंगे कुछ ऐसे भी, लेकिन सभी नहीं क्योंकि जो भक्त गंगोत्री और गोमुख जैसे दुर्गम स्थानों से गंगा जल लेकर पैदल आ रहा हो उसका घमंड और बुरी आदतें तो बहुत पीछे छूट चुके होते हैं ! बच जाती है तो केवल निर्मल भक्ति। हाँ, इनकी भक्ति का तरीका कुछ अलग होता है जिसके रहस्य को शायद हम समझने में कभी – कभी गलती कर देते हैं और कभी – कभी कांवड़िये भी आवेश में आकर कुछ ऐसा कर बैठते हैं जिससे समाज में उनके प्रति गलत संदेश जाता है। ख़ैर.. भविष्य के गर्भ में क्या छुपा …. यह तो भोले ही जाने।

अब आते हैं मुख्य मुद्दे पर। कितना खर्चा हुआ ? इस यात्रा में हुए व्यय का विवरण दे रहा हूँ, इससे आपको अपना कार्यक्रम बनाने में सहायता मिल सकती है। यह विवरण व्यक्तिगत व्यय का नहीं, अपितु पुरे परिवार (चार व्यस्क और एक बच्चा) के व्यय का है।

किराया

घर से नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन : 202 रुपये (मेट्रो)
दिल्ली से देहरादून (रेल) : 765 रुपये (नॉन ए. सी. स्लीपर)
देहरादून से उत्तरकाशी (बस) : 1167 रुपये
उत्तरकाशी से गंगोत्री (बस) : 800 रुपये
गंगोत्री से उत्तरकाशी (बस) : 800 रुपये
उत्तरकाशी से हरिद्वार (बस) : 1080 रुपये
हरिद्वार से दिल्ली (रेल) : 675 रुपये (नॉन ए. सी. स्लीपर)
दिल्ली रेलवे स्टेशन से घर : 399 रुपये (टैक्सी)
कुल किराया : 5888 रुपये

रुकना

देहरादून रिटायरिंग रूम : 760 रुपये (नॉन ए. सी. फैमिली रूम)
उत्तरकाशी काली कमली धर्मशाला : 800 रुपये (नॉन ए. सी. फैमिली रूम)
कुल : 1560 रुपये

भोजन, नाश्ता, दूध आदि : 3397 रुपये
अन्य व्यय (पूजा – पाठ सहित) : 1270 रुपये

यात्रा पर हुआ कुल व्यय : 12115 रुपये

मिलते हैं किसी नये सफ़र पर।

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Hiten bhatt
Hiten bhatt
August 21, 2018 4:12 pm

विवरण बहोत अच्छा लगा । आप व्यय का ब्यौरा देते हो वह और अच्छा लगा । नये सफर के विवरण का इंतजार रहेगा। आभार ।

kavita
kavita
August 22, 2018 11:22 am

उमेश जी बहुत अच्छा लिखा है आप ने गंगोत्री के बारे मे और बहुत अछि तस्वीरें भी खींची है देख कर ऐसा लगता है जैसे सब कुछ आखो के सामने है आप के टिहरी झील की तस्वीर बहुत अछि खींची है. आप का ब्लॉग पढ़ कर ऐसा लगता है जैसे हम वही पर हो मेरा फ्रैंड सर्कल भी आप की ब्लॉग को बहुत पसंद करता है. में आपकी दूसरी यात्रा की प्रतीक्षा कर रहा हूं

riya
riya
August 22, 2018 11:25 am

उमेश जी बहुत अच्छा लिखा है आप ने गंगोत्री के बारे मे, मे आप नये सफर के विवरण का इंतजार रहेगा

Rajender
Rajender
August 22, 2018 11:39 am

सर जी बहुत अच्छा लिखा है आप ने गंगोत्री क़े बारे मे और बहुत अछि से विवरण किया है आप ने हर जगह का रेट का होटल का डिस्टेंस का सब कुछ परफेक्ट लिखा है मैंने आप का चोपता वाला ट्रिप फ्लूवप किया था कैसे जाना है ,कहा रुकना है, सब कुछ मे बहुत आसानी से वह पहुंच गया और किसी तरह क़े परशानी भी नहीं फेस करनी पड़ी बहुत अछि जगह है मुझे तो पता भी नहीं था वो तो आप ने बहुत बार चोपता का विवरण किया था तो माने प्लान बना लिया जाने का पर सही मे बहुत अछि जगह है मन खुश हो गया धनयवाद सर ऐसी जगह का हम सब से शेयर करने के लिए. में आपक़े दूसरे यात्रा की प्रतीक्षा करूंगा.::::::::