Kailash Mansarovar yatra

कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ (Important information related with Kailash Mansarovar Yatra)

यात्रा और धार्मिक यात्रा… दोनों का इतिहास बहुत पुराना रहा है। आदि काल से ही मानव जाती ने किसी न किसी को अपना आराध्य बनाया और आराध्यों के तीर्थ भी। वर्तमान में विश्व में कुल 20 प्रमुख धर्म हैं और सभी धर्मों के आराधना स्थल पुरे विश्व में फैले हैं। यदि भारत के सन्दर्भ में ही देखें तो यहाँ लगभग 7 प्रमुख धर्मों को मानने वाले लोग हैं और इनमें हिन्दू धर्म को मानने वालों की बहुलता है। हिन्दू धर्म में भी अनेक संप्रदाय और पूजा पद्धतियों को मानने वाले लोग हैं और इस प्रकार अनेकों तीर्थ भी हैं। इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है की देश के प्रत्येक जिले में कम से कम एक तीर्थ तो है ही।

भारत में प्राचीन काल से और आज भी आम लोगों के लिये यात्रा का अर्थ तीर्थ यात्रा ही है। सभी तो नहीं लेकिन ज़्यादातर घुमक्कड़ों की यात्राओं में आधी यात्रायें तो तीर्थ स्थलों से ही सम्बंधित होती हैं। ज़्यादातर घुमक्कड़ तो अपनी घुमक्कड़ी का आगाज़ ही धार्मिक यात्रा से करते हैं।

आज से हम एक नयी शृंखला आरंभ कर रहे हैं जिसमें देश के सभी धर्मों के प्रमुख तीर्थ स्थलों और बारे में जानकारी दी जायेगी। शुरुआत हम हिन्दू धर्म से कर रहे हैं।

 

कैलाश मानसरोवर यात्रा (Kailash Mansarovar Yatra)

Image source: Look4ward

”कैलाश”…. नाम ही ऐसा की सुनते ही मन शिव के ध्यान में कहीं खो जाता है। वैसे तो शिव सर्वयापी हैं और कण – कण में व्याप्त हैं लेकिन एक ऐसा स्थान है जहाँ शिव अपने परिवार सहित हमेशा विराजमान रहते हैं और वह है कैलाश पर्वत जो कभी भारतीय क्षेत्र में था, फिर तिब्बत में और अब चीन अधिकृत तिब्बत में। कैलाश के महिमा को शब्दों में समेटना असंभव है लेकिन प्रयास रहेगा की जहाँ तक संभव हो आपको इसके बारे में जानकारी दे पायें।

कैलाश पर्वत चीन अधिकृत तिब्बत में स्थित है जिसके दक्षिण – पश्चिम में मानसरोवर ताल और रक्षातल / राक्षश ताल है। यहाँ से कई बड़ी नदियाँ निकलती हैं जिनमे प्रमुख हैं ब्रह्मपुत्रो, सिंधु, सतलुज और काली। इस तीर्थ की महिमा हिन्दू धर्म के साथ – साथ अन्य धर्मों में भी कही गयी है। जैन धर्म के भगवान ऋषभदेव ने यहीं निर्वाण प्राप्त किया था। तिब्बती लोग कैलाश की तेरह अथवा तीन परिक्रमाओं का महत्त्व मानते हैं। सिख धर्म की भी इस तीर्थ में गहरी आस्था है।

कैलाश पर्वत का आकार किसी विशाल शिवलिंग की भांति हैं और इसके चारों और पर्वतों का आकार कुछ ऐसा हैं की मानों कमल दल। भगवान शिव का निवास स्थान होने के कारण यह बहुत से सिद्ध योगियों की तपोभूमि भी है। अनेक योगी यहाँ दृश्य और अदृश्य रूप में यहाँ शिव आराधना करते रहते हैं। कैलाश पर्वत के पास ही दो झीलें हैं जिनका नाम मानसरोवर और रक्षातल अथवा राक्षश ताल है। कहा जाता है की मानसरोवर को ब्रह्म देव ने अपनी मनोशक्ति से उत्पन्न किया था और रक्षातल का निर्माण रावण ने करवाया था। दोनों झीलों के बिलकुल पास – पास होने के बाद भी मानसरोवर का जल मीठा और रक्षातल का जल खारा है। धार्मिक महत्व होने के साथ – साथ यह वैज्ञानिकों के शोध का भी विषय बन चुका है । वैज्ञानिकों के अनुसार यह धरती का केंद्र बिंदु हैं जहाँ विभिन्न प्रकार की तरंगे उत्पन्न होती हैं। अनेक रहस्य और तथ्य छुपे हैं इस स्थान में जिनमे प्रमुख हैं :-

1. कैलाश पर्वत जिसे स्थानीय भाषा में गैंग रिंपोछे भी कहा जाता है, समुद्र तल से 22068 फुट की ऊंचाई पर स्थित है और यह चीन अधिकृत तिब्बत क्षेत्र में आता है।

2. यह चार धर्मों का तीर्थ स्थल है। तिबत्तियों के अनुसार एक संत कवि ने यहाँ वर्षों तपस्या की। उनकी मान्यताओं के अनुसार कैलाश में डेमचौक और दोरजे फांग्मों का निवास स्थान है। डेमचौक कोई और नहीं अपितु भगवान बुद्ध ही हैं। जैन धर्मावलम्बियों के अनुसार यह उनके आदि गुरु भगवान ऋषभदेव की निर्वाण स्थली है। यहाँ श्री गुरु नानक देव जी ने भी यहाँ कुछ दिन रुक कर ध्यान लगाया था।

3. इस अलौकिक जगह पर प्रकाश तरंगों और ध्वनि तरंगों का समागम होता है, जो ‘ॐ’ की प्रतिध्वनि करता है। इस पावन स्थल को भारतीय दर्शन के हृदय की उपमा दी जाती है, जिसमें भारतीय सभ्यता की झलक प्रतिबिंबित होती है। कैलाश पर्वत की तलछटी में कल्पवृक्ष लगा हुआ है। कैलाश पर्वत के दक्षिण भाग को नीलम, पूर्व भाग को क्रिस्टल, पश्चिम को रूबी और उत्तर को स्वर्ण रूप में माना जाता है।

4. एक अन्य पौराणिक मान्यता के अनुसार कैलाश के ऊपर स्वर्ग और नीचे मृत्यलोक है, इसकी बाहरी परिधि 52 किमी है। मानसरोवर झील पहाड़ों से घीरी झील है जो पुराणों में ‘क्षीर सागर’ के नाम से वर्णित है। क्षीर सागर कैलाश से 40 किमी की दूरी पर है व इसी में शेष शैय्या पर विष्णु व लक्ष्मी विराजित हो पूरे संसार को संचालित कर रहे हैं।

5. बौद्ध धर्मावलंबियों का मानना है कि इसके केंद्र में एक वृक्ष है, जिसके फलों के चिकित्सकीय गुण सभी प्रकार के शारीरिक व मानसिक रोगों का उपचार करने में सक्षम हैं।

अब आते हैं इस जानकारी पर की कैलाश मानसरोवर तक कैसे पहुंचे, कहाँ रुके, सरकारी प्रक्रिया आदि। प्राचीन समय में कैलाश यात्रा दो मार्गों से होकर की जाती थी। पहला था उत्तराखण्ड का लिपुलेख दर्रा और दूसरा था उत्तराखण्ड का नीति दर्रा। इसके अतिरिक्त भी कुछ जाने – अंजाने मार्ग थे जैसे की हिमाचल का शिपकी – ला दर्रा। 1962 के भारत चीन युद्ध के बाद यह यात्रा लगभग बंद सी हो गयी थी। कुछ समय बाद यह यात्रा फ़िर आरंभ हुई। यह यात्रा प्रतिवर्ष जून से आरंभ होकर सितम्बर तक चलती है।

कैलाश मानसरोवर यात्रा दो मार्गों से हो कर की जाती है :-
मार्ग-1 (लिपुलेख): धारचूला या दिल्ली
यात्रा की अनुमानित अवधि: 24 दिन
अनुमानित व्यय: 1 लाख 60 हजार

मार्ग-2: (नाथुला): गंगटोक या दिल्ली
यात्रा की अनुमानित अवधि: 21 दिन
अनुमानित व्यय: 2 लाख

आवेदकों को दोनों मार्गों में से अपनी पसंद के अनुसार वरीयता देना और यात्रा समापन स्थल बताना अनिवार्य है। जैसा की आपने पढ़ा की कैलाश मानसरोवर यात्रा दो मार्गों से होकर की जा सकती है, अब आप पढ़ेंगे इन मार्गों के बारें में।

पहला मार्ग: लिपुलेख पास (उत्तराखण्ड)

Image source: Ministry of External Affairs

इस मार्ग पर यात्रा की शुरुआत दिल्ली से की जाती है। यात्रियों को यात्रा से चार दिन पहले दिल्ली स्थित गुजराती समाज सदन में पहुंचना होता है जहाँ यात्रा सम्बन्धी औपचारिकतायें पूरी की जाती हैं। इन औपचारिकताओं में विदेश मंत्रालय में होने वाली ब्रीफिंग भी शामिल है। साथ – साथ यात्रीयों का मेडिकल चेक अप आदि भी होता है।

(यात्रा सम्बन्धी विस्तृत जानकारी के लिये आप यात्रा गाइड भी डाउनलोड कर सकते हैं। यह गाइड वर्ष 2018 में हुई यात्रा से सम्बंधित है)

इन सभी औपचारिकताओं के पूरा होने के पश्चात् ही यात्रा आरम्भ होती है।

पहला दिन: नयी दिल्ली से अल्मोड़ा
(6 am – 2 pm / 340 km / बस / 5250 फुट)
नयी दिल्ली से यात्रियों को पहले उत्तराखण्ड स्थित अल्मोड़ा ले जाया जाता है जहाँ रात्रि प्रवास होता है।

दूसरा दिन: अल्मोड़ा से धारचूला
(6 am – 4 pm / 220 km / बस / 2985 फुट)
दूसरे दिन अल्मोड़ा से धारचूला तक की यात्रा की जाती है। धारचूला शहर काली नदी के किनारे स्थित है और काली नदी के दूसरी ओर नेपाल स्थित है। धारचूला ही इस यात्रा का अंतिम बड़ा शहर है। धारचूला में एक बार फिर से ITBP बेस कैंप में आपकी ब्रीफिंग होती है।

तीसरा दिन: धारचूला से बुधी
(6 am – 5 pm / 42 km बस + 12 km पैदल / 8890 फुट)
धारचूला से बूंदी तक की यह यात्रा लगभग 42 किलोमीटर वाहन द्वारा और 12/18 किलोमीटर पैदल होती है। लखनपुर वाहन द्वारा यात्रा का अंतिम पॉइंट है। इसके बाद आपकी पैदल यात्रा आरंभ हो जाती है। इस मार्ग पर लमारी गांव पड़ता है जहाँ आप का पड़ाव होता है।

चौथा दिन: बुधी से गुंजी
(5 am – 3 pm / 17 km पैदल / 10370 फुट)
चौथे दिन यात्री भारतीय क्षेत्र की ओर से 5 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई चढ़ते हैं किंतु जैसे ही यह चढ़ाई पूरी होती है छियालेख की मनोरम घाटी आपकी सारी थकान दूर कर देती है। यहाँ आपको काली और टिंकर नदी का संगम भी देखने को मिलेगा।

पांचवा दिन: गुंजी से नाबी
(6 am – 4 pm / 3 km पैदल / 10827 फुट)
यहाँ ITBP की मेडिकल टीम आपकी जाँच करके यह तय करेगी की आप आगे की यात्रा लायक बचे हैं या नहीं। दोपहर के बाद यात्रीगण पैदल नाबी तक यात्रा करते हैं।

छठा दिन: नाबी से गुंजी
(6 am – 8 am / 3 km पैदल / 10370 फुट)
यहाँ जो यात्री मेडिकल जाँच में फिट नहीं पाये गये थे उन्हें वापस भेज दिया जाता है।

सांतवा दिन: गुंजी से कालापानी
(6 am – 12 pm / 10 km पैदल / 12067 फुट)
गुंजी से कालापानी आप पैदल भी जा सकते हैं लेकिन यह मार्ग कच्चा है। मार्ग में आपको व्यास गुफा मिलेगी जहाँ कयी वर्षों तक व्यास मुनि ने बैठ कर तपस्या की थी। यहाँ आपके कागज़ात की फ़िर से जांच की जाती है।

आंठवा दिन: गुंजी से नवीढांग
(7 am – 1 pm / 9 km पैदल / 13980 फुट)
यह रास्ता तीखी चढ़ाई वाला है और यहाँ काली नदी काफी गहरी घाटी में बहती है। नवीढांग शिविर से ही आपको ॐ पर्वत के दर्शन होते हैं। यहाँ प्राकृतिक रूप से बर्फ़ ॐ के आकार में पर्वत पर जमी रहती है। यहाँ तेज़ बर्फीली हवायें चलती हैं।

Image source: Maxresdefault

नवां दिन: नवीढांग से लिपलेख और तकलाकोट (तिब्बत)
(7 IST – 1300 IST / 12 + 15 km पैदल / 12930 फुट)
तिब्बत में प्रवेश करने से पूर्व यह आखिरी पड़ाव है। यह मार्ग बेहद जोखिम भरा है। कुछ स्थानों पर तो आपको 16000 फुट से ज़्यादा ऊँचे दर्रे पार करने पड़ते हैं। यह क्षेत्र पूर्ण रूप से वनस्पति विहीन है। लिपुलेख दर्रा पार करने के बाद तिब्बत सीमा पर चीनी अधिकारी आपका स्वागत करते हैं। एक बात ध्यान रखें के भारत और तिब्बत के समय में 2 घंटे 30 मिनट का अंतराल है। यहाँ से तिब्बत के तकलाकोट बाज़ार तक बस से ले जाया जायेगा। यह एक बड़ा बाजार है जहाँ आप आगे की यात्रा संबंधी सामान खरीद सकते हैं।

दसवां दिन: तकलाकोट (तिब्बत में विश्राम)
एक बात ध्यान रखें के भारत और तिब्बत के समय में 2 घंटे 30 मिनट का अंतराल है। लिपुलेख पास से तिब्बत के तकलाकोट बाज़ार तक बस से ले जाया जायेगा। यह एक बड़ा बाजार है जहाँ आप आगे की यात्रा संबंधी सामान खरीद सकते हैं। यात्रा सम्बन्धी सरकारी औपचारिकतायें भी यहीं पूरी की जाती हैं।

ग्यारहवां दिन: तकलाकोट से दार्चेन
(9 am – 12 pm / 102 km बस / 15320 फुट)
ग्यारहवें से सोलहवें दिन तक मानसरोवर और कैलाश की परिक्रमायें पूरी की जाती हैं। इस यात्रा मार्ग पर ही प्रसिद्ध राक्षश ताल है। राक्षश ताल की तुलना अर्ध चंद्र से की जाती है और मान्यता है की रावण ने यहाँ तपस्या की थी। इस मार्ग पर कुछ देर के लिये बस मानसरोवर झील पर भी रूकती है। कृपया ध्यान दें की यह क्षेत्र चीन में है भारत में नहीं, इसलिये अधिक सुविधाओं की आशा न करें।

बारहवां दिन: दार्चेन से डेराफुक
(8 am – 2 pm / 7 km बस + 12 km पैदल / 16600 फुट)
यह स्थान कैलाश परिक्रमा का ही भाग है। इस परिक्रमा के पहले चरण में यात्रियों को डेराफुक ले जाया जाता है। इस मार्ग पर अधिकांशतः समतल ही मार्ग है। आपके इर्द – गिर्द खड़ी पहाड़ियाँ दिखायी देती हैं। डेराफुक से कैलाश पर्वत स्पष्ट दिखायी देता है।

तेरहवां दिन: डेराफुक से जुनझुई पु
(5 am – 5 pm / 19 km पैदल / 15680 फुट)
इस दिन आपकी यात्रा सुबह पांच बजे अँधेरे में ही आरंभ हो जाती है। इस मार्ग में आपको डोलमा दर्रे (18600 फुट) को पार करना पड़ता है। यह इस यात्रा का सबसे कठिन भाग है और आपको अँधेरे में भी यात्रा करनी पड़ती है। यह शिव क्षेत्र है और मान्यता है की इस मार्ग को पार करने पर स्वयं यमराज दर्शन देते हैं। मार्ग में आपका सामना ख़तरनाक बर्फीले तूफ़ानों से होता है।

चौदहवां दिन: जुनझुई पु से कुगू
(9 am – 12 pm / 5 km पैदल + 95 km बस / 15160 फुट)
कुगु में यात्रियों की कैलाश परिक्रमा पूरी होती है और इस भाग में अधिकांश यात्रा समतल मैदानों से होते हुए ही पूरी होती है। कुगु, मानसरोवर ताल के किनारे ही स्थित है। यह एक बहुत बड़ी झील और 88 किलोमीटर में फैली है। इस ताल में कैलाश का प्रतिबिम्ब देखते ही बनता है। यात्री इस ताल में स्नान कर सकते हैं।

पन्द्रहवां दिन: कुगू
इस दिन यात्री कुगु के किनारे ही कैलाश को देखने का आनंद लेते हैं।

Image source: Saumil U. Shah

सोलहवां दिन: कुगू से तकलाकोट
(7 am – 10 am / 65 km बस / 12390 फुट)
यात्री वापस तकलाकोट लौटते हैं। इस प्रकार कैलाश मानसरोवर की परिक्रमा पूरी होती है और इमिग्रेशन सम्बन्धी प्रक्रियायें यहाँ पूरी कर ली जाती हैं।

सत्रहवाँ दिन: तकलाकोट से गुंजी
(6000 CST / 1500 IST / 15 km बस + 26 पैदल / 10370 फुट)
इस दिन यात्री लिपुलेख दर्रे से होते हुए भारत में प्रवेश करते हैं।

अठारहवाँ दिन: गुंजी से बुधी
(6 am – 5 pm / 17 km पैदल / 8890 फुट)

उन्नीसवां दिन: बुधी से धारचूला
(5 am – 1 pm / 18 km पैदल + 42 बस / 2985 फुट)

बीसवां दिन: धारचूला से जागेश्वर
(7 am – 7 pm / 185 km बस / 6140 फुट)

इक्कीसवां दिन: जागेश्वर से दिल्ली
(7 am – 8 pm / 405 km बस / 709 फुट)

 

दूसरा मार्ग: नाथू ला (सिक्किम)

Image source: Ministry of External Affairs

इस मार्ग पर भी यात्रा की शुरुआत दिल्ली से की जाती है। यात्रियों को यात्रा से चार दिन पहले दिल्ली स्थित गुजराती समाज सदन में पहुंचना होता है जहाँ यात्रा सम्बन्धी औपचारिकतायें पूरी की जाती हैं। इन औपचारिकताओं में विदेश मंत्रालय में होने वाली ब्रीफिंग भी शामिल है। साथ – साथ यात्रीयों का मेडिकल चेक अप आदि भी होता है।

(यात्रा सम्बन्धी विस्तृत जानकारी के लिये आप यात्रा गाइड भी डाउनलोड कर सकते हैं। यह गाइड वर्ष 2018 में हुई यात्रा से सम्बंधित है)

इन सभी औपचारिकताओं के पूरा होने के पश्चात् यात्रा आरम्भ होती है।

पहला दिन: नई दिल्ली से गंगटोक
(7:30 am – 6 pm / 1115 km वायुयान + 125 km बस / 5200 फुट)
इस मार्ग से यात्रा करने वाले यात्री वायु मार्ग से पहले बागडोगरा ले जाये जाते हैं जिसमे लगभग 2 घंटे लगते हैं। इसके बाद यात्रियों को बस सिलीगुड़ी होते हुए गंगटोक ले जाया जाता है जहाँ वे दोपहर का भोजन आदि करते हैं। दोपहर तक आप गंगटोक पहुँच जाते है और उस दिन आपको वहीं रहना होता है।

दूसरा दिन: गंगटोक से 15 मील
(11 am – 1 pm / 25 km बस / 1040 फुट)
इस दिन आपकी 5000 फुट ऊँचे पहाड़ों से होते हुए गुज़रती है। मार्ग में कुछ देर आपको क्लीयरेंस के लिये रोका जाता है।

तीसरा दिन: 15 मील
इस दिन अक्लीमेटिज़ेशन के लिये यात्रियों को यहीं रोका जाता है।

चौथा दिन: 15 मील से शेराथांग
(7 am – 8 am / 20 km बस / 13500 फुट)
इस दिन अक्लीमेटिज़ेशन के लिये यात्रियों को यहीं रोका जाता है।

पांचवा दिन: शेराथांग
यात्रियों का मेडिकल चेक अप होता है और जो यात्री फिट नहीं पाये जाते हैं उन्हें वापस भेज दिया जाता है।

छठा दिन: शेराथांग से कंगमा
(7 am – 2 pm / 200 km बस / 13700 फुट)
शेराथांग में सीमा शुल्क और इमिग्रेशन सम्बन्धी औपचारिकतायें पूरी होने के बाद यात्रियों को नाथू ला के रस्ते चीन ले जाया जाता है। आगे यात्रियों को यातुंग / रिचेनचैंग वहां द्वारा भेजा जाता है।

सातवां दिन: कंगमा से लाजी
(7 am – 2 pm / 295 km बस / 13297 फुट)

आठवां दिन: लाजी से जोंगबा
(7 am – 6 pm / 477 km बस / 15512 फुट)

नवां दिन: जोंगबा से दार्चेन
(7 am – 6 pm / 475 km बस / 15322 फुट)
नौवें से चौदहवें दिन तक मानसरोवर और कैलाश की परिक्रमा की जाती है। दार्चेन कैलाश परिक्रमा का बेस कैंप है।

दसवां दिन: दार्चेन से कुगु
(7 am – 9 am / 80 km बस / 15157 फुट)
यात्री होर के रास्ते परिक्रमा के लिये कुगु जाते हैं। कुगु मानसरोवर झील के किनारे स्थित है और मानसरोवर में कैलाश का प्रतिबिंब देखना क्या आनंद देता है यह शब्दों में नहीं लिखा जा सकता।

ग्यारहवां दिन: कुगु
यह दिन यात्री मानसरोवर के किनारे ही बिताते हैं।

Image source: Wikipedia

 

बारहवां दिन: कुगु से डेराफुक
(7 am – 12 pm / 87 km बस + 12 पैदल / 16600 फुट)
इस दिन यात्री बस द्वारा दार्चेन होते हुए यमद्वार पहुँचते हैं। यहाँ से पैदल यात्रा आरंभ होती है। डेराफुक की दुरी यहाँ से 12 किलोमीटर है।

तेरहवां दिन: डेराफुक से जुनझुई पु
(5 am – 5 pm / 19 km पैदल / 15680 फुट)
इस दिन आपकी यात्रा सुबह पांच बजे अँधेरे में ही आरंभ हो जाती है। इस मार्ग में आपको डोलमा दर्रे (18600 फुट) को पार करना पड़ता है। यह इस यात्रा का सबसे कठिन भाग है और आपको अँधेरे में भी यात्रा करनी पड़ती है। यह शिव क्षेत्र है और मान्यता है की इस मार्ग को पार करने पर स्वयं यमराज दर्शन देते हैं। मार्ग में आपका सामना ख़तरनाक बर्फीले तूफ़ानों से होता है।

चौदहवां दिन: जुनझुई पु से जोंगबा
(7 am – 6 pm / 5 km पैदल + 485 km बस / 15510 फुट)
यहाँ कैलाश परिक्रमा पूरी हो जाती है।

पन्द्रहवां दिन: जोंगबा से लाजी
(7 am – 6 pm / 477 km बस / 13297 फुट)

सोलहवां दिन: लाजी से कंगमा
(7 am – 2 pm / 295 km बस / 13700 फुट)

सत्रहवाँ दिन: कंगमा से गंगटोक
(0700 CST – 1600 IST / 245 km बस / 5250 फुट)
यहाँ नाथू ला के रास्ते भारत में प्रवेश करने पर इमिग्रेशन सम्बन्धी कार्यवाही पूरी की जाती है।

अठारहवाँ दिन: गंगटोक से बागडोगरा से दिल्ली
(5 am – 5 pm / 125 km बस + 1115 km वायुयान / 705 फुट)

 

यात्रा पूर्व तैयारी

यह यात्रा दुर्गम मार्गों से होकर जाती है जिसके लिये आपका शारीरिक रूप से स्वस्थ होने के साथ – साथ मानसिक रूप से मजबूत होना भी आवश्यक है। आपका उच्च रक्तचाप, मधुमेह, दमा, ह्रदय रोग, मिर्गी जैसी बिमारियों से मुक्त होना अनिवार्य है। चयनित आवदेकों को दिल्ली हार्ट एंड लंग इंस्टिट्यूट और ITBP बेस कैंप में अपना मेडिकल चेक-अप करवाना अनिवार्य होता है और यात्रा के किसी भी चरण में यदि आप मेडिकल जाँच में फिट नहीं पाये जाते हैं तो आपको वापस भेज दिया जाता है और आपके पहले से जमा शुल्क आदि जब्त कर लिये जाते हैं। जो यात्री पहली बार जा रहे हैं उन्हें अन्य यात्रियों की तुलना में वरीयता मिलती है और जो यात्री चार बार से अधिक जा चुके हैं उनका चयन लगभग असंभव सा ही होता है।

योग्यता

  1. तीर्थयात्री भारतीय नागरिक होना चाहिए।
  2. उसके पास चालू वर्ष के 01 सितंबर को कम से कम 6 महीने की शेष वैधता अवधि वाला भारतीय पासपोर्ट होना चाहिए।
  3. उसकी आयु चालू वर्ष की 01 जनवरी को कम से कम 18 और अधिक से अधिक 70 वर्ष होनी चाहिए।
  4. उसका बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 25 या उससे कम होना चाहिए।
  5. यात्रा करने के लिए उसे शारीरिक रूप से स्वस्थ और चिकित्सा की दृष्टि से उपयुक्त होना चाहिए।
  6. विदेशी नागरिक आवेदन करने के पात्र नहीं हैं; अतः ओसीआई कार्डधारी पात्र नहीं हैं।

आवेदन कैसे करें ?

  1. प्रतिवर्ष भारत सरकार फरवरी में कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिये आवेदन करने का नोटिफिकेशन जारी करती है और आवेदन करने की अंतिम तिथि लगभग अप्रैल का पहला सप्ताह होती है। आवेदन का लिंक नीचे दिया गया है :-
    https://kmy.gov.in/kmy/howToApply.do?lang=
  2. कैलाश पर्वत चीन क्षेत्र में है और और चीन सीमित मात्रा में ही वीज़ा जारी करता है। इसलिये सभी इच्छुक यात्रियों को यात्रा की अनुमति नहीं मिल पाती। यात्रियों का चयन एक ड्रा के माध्यम से होता है। यह ड्रा एक निष्पक्ष कंप्यूटरीकृत प्रणाली के माध्यम से होता है।
  3. चयन के उपरांत यात्रियों को बैच (यात्रियों का जत्था) आवंटित कर दिये जाते हैं। आवेदन केवल ऑनलाइन ही किया जा सकता है। ड्रा के पश्चात चुने गए आवेदकों को उनके पंजीकृत ई-मेल आई डी/ मोबाईल नं. पर संदेश के माध्यम से सूचित किया जाता है।
  4. इसके अतिरिक्त भारत सरकार के हेल्पलाईन नंबर 011-24300655 के माध्यम से भी चयन की स्थिति जानी जा सकती है।
  5. एक बार बैच आवंटित हो जाने के पश्चात बैच परिवर्तन नहीं किया जा सकता है। चुने गए आवेदक को कट-ऑफ तिथि से पूर्व कुमांऊ मण्डल विकास निगम (KMVN) अथवा सिक्किम पर्यटन विकास निगम (STDC) द्वारा निर्धारित बैंक खाते में ‘यात्रियों हेतु शुल्क एवं व्यय’ में सरकार द्वारा बतायी गया शुल्क जमा करवानी होगी। यदि कट ऑफ तिथि आप शुल्क नहीं जमा करवाते हैं तो बैच से आपका नाम स्वतः ही हटा दिया जायेगा।
  6. लिपुलेख मार्ग उत्तराखण्ड होने वाली यात्रा दिल्ली से आरंभ होती है। सभी चयनित यात्रियों को दिल्ली आने से पहले एक बार फ़िर सरकारी वेबसाइट पर जा कर अपनी यात्रा की पुष्टि करना अनिवार्य है। बैच के सभी यात्रियों का एक साथ यात्रा आरंभ करना और समाप्त करना अनिवार्य है।

यदि आपके मन में यात्रा से सम्बंधित कोई भी प्रश्न हो तो नीचे दिये लिंक पर क्लिक करें।
https://kmy.gov.in/kmy/faq.do?lang=

सभी चयनित यात्रियों के लिये निम्नलिखित दस्तावेज़ अनिवार्य है :-

  1. भारतीय पासपोर्ट, जो वर्तमान वर्ष के 1 सितंबर को कम से कम छः (6) महीने के लिए वैध हो।
  2. फोटो : रंगीन, पासपोर्ट साईज (6 प्रतियां)
  3. क्षतिपूर्ति बांड, 100 रुपए या स्थानीय स्तर पर लागू राशि के गैर-न्यायिक स्टांप पेपर पर तथा प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट या नोटरी पब्लिक द्वारा सत्यापित।
  4. वचन पत्र, आपात स्थिति में हेलिकॉप्टर द्वारा निकासी हेतु।
  5. सहमति पत्र, चीनी क्षेत्र में हुई मृत्यु की स्थिति में पार्थिव शरीर के अंतिम संस्कार हेतु।

ऑनलाइन आवेदन करने से पहले निम्नलिखित दस्तावेज़ तैयार रखें :-

  1. फोटो की स्कैन प्रति (जेपीजी (JPG) फॉर्मेट में जो 300 केबी से अधिक न हो)
  2. पासपोर्ट की स्कैन प्रति (जिस पृष्ठ पर फोटो और व्यक्तिगत विवरण हो) और आखिरी पृष्ठ जिस प
  3. परिवार का विवरण हो (पीडीएफ फॉमेट में 500 केबी से अधिक न हो)
  4. यदि यात्रा में अन्य लोग भी शामिल हों तो उस व्यक्ति के उपर्युक्त दस्तावेज़ तैयार रखें।

आप यात्रा गाइड यहाँ क्लिक करके डाउनलोड कर सकते हैं। यात्रा गाइड में इस यात्रा से संबंद्धित विस्तृत जानकारी दी गयी है।

इस लेख में कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़ी सभी महत्त्वपूर्ण जानकारियां देने का प्रयास किया गया है तथा विस्तृत जानकारी के लिये आप विदेश मंत्रालय की कैलाश मानसरोवर यात्रा की वेबसाइट पर भी यहाँ क्लिक करके विज़िट कर सकते हैं।

यदि आपके मन में कोई प्रश्न या सुझाव है तो कमेंट बॉक्स में अवश्य लिखें।

हर – हर महादेव।


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Mahesh Tewari

सुना है भारत सरकार इस यात्रा के व्यय पर अनुदान भी देती है. इस सम्बन्ध में आपने उल्लेख नहीं किया है, कृपया जानकारी साझा करें…