कुछ अलग है बनारस की यह रामलीला (Ramlila of Kashi)

‘रामलीला’.. अथार्त राम की लीला। मर्यादा पुर्षोत्तम श्री राम से जुडी सभी लीलाओं का मंचन ही रामलीला है। रामलीला तो हम सभी ने देखी है । न केवल देखी है अपितु हममें से कुछ ने तो रामलीला में अभिनय भी किया है (मैं भी कभी वानर बटालियन का हिस्सा हुआ करता था)। पूरे भारत में विजयदशमी से दस दिन पहले रामलीला का मंचन आरंभ हो जाता है और इसका समापन विजयदशमी के दिन रावण वध के बाद राम के राज्याभिषेक के साथ होता है। भारत के साथ अन्य देशों जैसे की थाईलैंड, कम्बोडिया, मलेशिया, अमेरिका, ब्रिटेन, मॉरीशस, सूरीनाम आदि में भी रामलीला आयोजित की जाती है। मुस्लिम बहुत इंडोनेशिया में तो यह एक राष्ट्रिय पर्व के समान मनाया जाता है।

वैसे आपने कितने दिनों की रामलीला देखी होगी ? ज़्यादातर लोगों का जवाब होगा – ”अरे भाई दस दिन की ही तो होती है” ! लेकिन क्या आप जानते हैं के देश में एक राम लीला ऐसी भी है जो की पुरे 45 दिन तक चलती है और इसका कोई एक मंच नहीं होता। इन 45 दिनों में पूरा शहर ही रामलीला का मंच होता है। यह रामलीला है देश के सांस्कृतिक राजधानी स्थित राम नगर की रामलीला।

Credit: Divya_Kashi

आईये जानते हैं राम नगर की रामलीला से जुड़े कुछ अनोखे तथ्य :-

लगभग 245 वर्ष पुरानी इस रामलीला के मंचन में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। आज भी इस राम लीला में लाउडस्पीकर का इस्तेमाल नहीं होता लेकिन आश्चर्य की बात यह है की वहां मौजूद आखिरी दर्शक तक को भी एक – एक संवाद स्पष्ट सुनायी देता है और वो आखिरी दर्शक कोई और नहीं स्वयं काशी नरेश होते हैं जिनकी आज्ञा पर ही यह रामलीला आरम्भ और अंत होती है। इस राम लीला में बिजली के बल्बों आदि का भी इस्तेमाल नहीं होता। केवल पेट्रोमैक्स और मशालों की रौशनी में रामलीला होती है।

कहा जाता है की एक बार 17वीं शताब्दी में मिर्ज़ापुर का एक व्यापारी काशी नरेश से मिलने गया, जब उसे पता लगा की काशी में रामलीला नहीं होती तो उसे बड़ा आश्चर्य हुआ और साथ ही उसने इसी बात पर काशी नरेश को ताना भी दे दिया। यह बात काशी नरेश उदित नारायण को अंदर तक चुभ गयी और फिर उन्होंने यह रामलीला आरम्भ की। आज यह रामलीला पुरे विश्व में अपनी विशेष पहचान बना चुकी है।

इस रामलीला की तैयारियां सावन महीने से ही आरम्भ हो जाती हैं। राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघन और उनकी पत्नियों के पात्र निभाने वाले कलाकारों का चयन ब्राह्मण कुल से ही होता है और किसी की भी उम्र सोलह वर्ष से अधिक नहीं होती। पात्रों का चयन होने के उपरांत काशी नरेश उनके नाम पर मुहर लगाते हैं। मुहर लगते ही सभी कलाकारों को राज शाही के संरक्षण में भेज दिया जाता है। पुरे 2 महीने तक तैयारी होती है। तैयारी भी कोई ऐसी वैसी नहीं। पूरी रामलीला अवधी और संस्कृत भाषा में होती है, इसलिये सभी कलाकारों को अवधि भाषा सीखनी पड़ती है, यही नहीं उन्हें संस्कृत के भी कुछ श्लोक और संवाद सीखने पड़ते हैं। इन दो महीनों के दौरान कोई भी कलाकार अपने परिवार वालों से नहीं मिल सकता। सन्यासी जीवन जीते हुआ उन्हें पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है। राम केवल राम के वस्त्र धारण करके ही नहीं बना जा सकता, उनके गुण भी धारण करने होते हैं। यही कारण है इन सब परम्पराओं के पीछे। एक समय था जब की इस रामलीला में चारों भाइयों के विवाह भी वास्तविक ही होते थे लेकिन अब ऐसा नहीं है।

काशी की रामलीला का आरम्भ और समापन भी काशी नरेश ही करते हैं। पहले दिन स्वयं काशी नरेश हाथी पर सवार होकर पहुँचते हैं और चारों भाइयों और हनुमान जी की पूजा करते हैं। उसके उपरांत राम नगर के किले पर स्थित प्राचीन तोप से गोले दागे जाते हैं। इसके साथ ही रामलीला का आरम्भ भी हो जाता है।

Credit: Wikimapia

यह एक ऐसी रामलीला है जो किसी निश्चित मंच पर नहीं, अपितु पुरे शहर में होती है। लगभग पांच किलोमीटर के दायरे में अयोध्या, लंका, पंचवटी, जनक पुरी, अशोक वाटिका आदि सभी स्थान किसी मंच के रूप में नहीं अपितु वास्तविकता में हैं। इसीलिये हर दिन रामलीला अलग – अलग स्थान पर होती है। वर्ष 2004 में UNESCO इस रामलीला को भारत की ऐतिहासिक विरासत भी घोषित कर चुका है।

कैसे पहुंचे ?

बनारस पहुँचने के लिये साधनों की कमी नहीं है। देश के सभी प्रमुख शहरों से बनारस के लिये ट्रेन उपलब्ध हैं। यदि आपको बनारस जाने वाली ट्रेन में आरक्षण नहीं मिल रहा तो कोई बात नहीं। आप दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन (मुग़ल सराय) तक जाने वाली किसी भी ट्रेन में आरक्षण करा सकते हैं। मुग़ल सराय से बनारस 16 – 17 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है। मुग़ल सराय के लिये देश के कोने – कोने से ट्रेने उपलब्ध हैं।

इसके अतिरिक्त बनारस तक बस से और फ्लाइट से भी पहुंचा जा सकता है।

Credit: First post Hindi

इस वर्ष की रामलीला समाप्त होने में अब अधिक समय नहीं बचा है। 18 अक्टूबर को दशहरा है और 19 अक्टूबर को भरत मिलाप और श्री राम के राज तिलक के साथ ही यह रामलीला समाप्त हो जायेगी। इसीलिये देर न करें।

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Parveen Dua
October 15, 2018 12:48 am

Beautiful description. Thanks for adding another fact to knowledge.