Lachen

एक नज़र भारत के खूबसूरत गाँवो पर, जहाँ आपको एक बार तो जाना ही चाहिए भाग 1 (Beautiful Indian villages Part 1)

‘गांव’ एक ऐसा शब्द जो हमें हमेशा से आकर्षित करता रहा है। आज भारत में तेज़ी से शहरीकरण बढ़ रहा है और गाँवों के लोग रोज़गार की तलाश में शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। तेज़ी से बढ़ते आधुनिकीकरण का एक गंभीर दुष्प्रभाव प्रदुषण भी है जो शहरों के साथ – साथ गांवों के भी वातावरण को विषाक्त करता जा रहा है। इन सबके बावज़ूद, आज भी बहुत से गाँव ऐसे हैं जो अपनी ख़ूबसूरती को कायम रखे हुए हैं। चलिए, आपको ले चलते हैं ऐसे ही कुछ गांवों के सफ़र पर।

  1. मावळ्यानांग, ईस्ट खासी हिल्स मेघालय (Mawlynnong, East Khasi Hills, Meghalaya)

मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग से 100 किलोमीटर की दूरी पर बसे मावळ्यानांग गांव को वर्ष 2013 में एशिया के स्वच्छत्तम गांव का ख़िताब मिल चुका है। 100% साक्षरता दर वाले इस गांव के लोगो का मुख्य वयवसाय कृषि है। पॉलीथिन और धूम्रपान पर पूर्ण प्रतिबन्ध है। यह कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी की मावळ्यानांग पूर्वोत्तर कर स्वर्ग है। अगर आप पूर्वोत्तर की यात्रा पर आये हैं तो एक बार तो यहाँ जाना बनता ही है।

कैसे पहुंचे ?
गुवाहाटी स्थित गोपीनाथ बोरदोलोई हवाई अड्डा नज़दीकी हवाई अड्डा है जो की देश के प्रमुख नगरों से जुड़ा हुआ है।
रेल यात्रिओं के लिए नज़दीकी रेलवे स्टेशन गुवाहटी में स्थित है ।
सड़क मार्ग से जाने वाले शिलांग पहुँच कर वहां से 3 घंटे की ड्राइव करके यहाँ पहुँच सकते हैं।

Mawlynnong
मावल्यान्नॉंग, चित्र सौजन्य: http://amazingindiablog.in

 

  1. किला रायपुर, लुधियाना, पंजाब (Kila Raipur, Ludhiana, Punjab)

वैसे तो आप पंजाब के किसी भी गांव में चले जाएँ तो आपको मक्के की रोटी, सरसो का साग और लस्सी का स्वाद तो मिल ही जाएगा लेकिन किला राय पुर और गांवों से थोड़ा हट कर है। गाँव में खेलो को लेकर विशेष उत्साह है। प्रत्येक वर्ष फरवरी माह में यहाँ वार्षिक ग्रामीण ओलिंपिक का आयोजन किया जाता है जिसमे कुश्ती, मार्शल आर्ट, बैलों की दौड़ और पहलवानी आदि प्रमुख हैं। खेलों के लिए दीवानगी और गांव की मिट्टी के लिए प्यार रखने वाले लोग एक बार यहाँ आ सकते हैं।

कैसे पहुंचे ?
किला राय पुर पहुँचने के लिए आप रेल मार्ग, हवाई मार्ग और सड़क मार्ग अपना सकते हैं।
नज़दीकी रेलवे स्टेशन लुधियाना है।
हवाई मार्ग से जाने वालो को चंडीगढ़ एयरपोर्ट से टैक्सी या बस द्वारा लुधियाना पहुंचना होगा।

Kila Rai Pur
किला राय पुर, चित्र सौजन्य : http://www.watanpunjab.com

 

  1. प्रागपुर, कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश (Pragpur, Kangra, Himachal Pradesh)

प्राग पुर की स्थापना 16वीं शताब्दी में शाही परिवार की राजकुमारी प्राग देइ की याद में की गयी थी। प्राग पुर एक ऐतिहासिक गांव होने के साथ – साथ बेहद खूबसूरत गांव भी है। गांव की इमारतों, दुकानों आदि में कोई बदलाव नहीं आया है। पुरानी दुकाने, रंग – बिरंगी दीवारें, पतली गलियां, ढलवा छतें, महलों जैसे घर और हवेलियां यहाँ की पहचान हैं।

कैसे पहुंचे ?
यहाँ पहुंचने के कई मार्ग हैं। बस द्वारा पहले आप कांगड़ा पहुंचे और वहां से टैक्सी द्वारा प्राग पुर।
नज़दीकी रेलवे स्टेशन ऊना और फगवाड़ा हैं।
हवाई मार्ग से जाने वाले यात्री धर्मशाला हवाई अड्डा पहुँच कर वहां से टैक्सी ले सकते हैं।

Prag Pur
प्राग पुर, चित्र सौजन्य : https://media-cdn.tripadvisor.com

 

  1. बीर बिलिंग, कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश  (Bir billing, Kangra, Himachal Pradesh)

कांगड़ा जिले की वादियों में स्थित बीर बिलिंग एडवेंचर प्रेमियों की दुनिया में विशेष स्थान रखता है। पैराग्लाइडिंग के लिए प्रसिद्ध यह गांव प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है।

कैसे पहुंचे ?
यहाँ आप बस, रेल और हवाई मार्ग द्वारा पहुँच सकते हैं।
बस द्वारा पहले आप कांगड़ा पहुंचे और वहां से टैक्सी द्वारा बीर बिलिंग।
नज़दीकी रेलवे स्टेशन ऊना और फगवाड़ा हैं।
हवाई मार्ग से जाने वाले यात्री धर्मशाला हवाई अड्डा पहुँच कर वहां से टैक्सी ले सकते हैं।

Bir Billing
बीर बिलिंग, चित्र सौजन्य : http://www.blog.weekendthrill.com

 

  1. गोकर्ण, उत्तर कन्नड़, कर्णाटक (Gokarn, North Kannad, Karnataka)

कर्णाटक राज्य में स्थित गोकर्ण भगवान शिव का तीर्थ होने के साथ – साथ प्रकृतिक सुंदरता से भरपूर है। मान्यता है की गाय के कान पर बसे होने के कारण इसका नाम गोकर्ण पड़ा। गंगावली और अघनाशिनी नदियों के संगम पर बसे होने के कारण भी इस स्थान का आकार गाय के कान जैसा है।

कैसे पहुंचे ?
नज़दीकी हवाई अड्डा गोवा में स्थित है जो की यहाँ से 140 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह देश के प्रमुख नगरों से हवाई मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है।
रेल यात्रिओं के लिए नज़दीकी रेलवे स्टेशन अंकोला है जो की यहाँ से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
बस द्वारा आने वाले यात्री कर्नाटक के किसी भी नगर से बस द्वारा यहाँ पहुंच सकते हैं।

Gokarn
गोकर्ण, चित्र सौजन्य : https://www.holidify.com

 

  1. मिरिक, दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल (Mirik, West Bengal)

मिरिक शब्द लेपचा भाषा के शब्द मीर – योक अथार्त ‘आग से जला हुआ स्थान’ से सम्बंधित है। यह एक ऐसा स्थान है जो की अभी भी पर्यटकों से अछूता है। दार्जिलिंग की हिमालयी वादियों में बसे मिरिक से हिमालय की विभिन्न चोटियों जैसे कंचनजंघा आदि के दर्शन किये जा सकते हैं। चाय के बागानों और पाइन के पेड़ों से घिरी सुमेंदु झील एक अद्भुत दृश्य का निर्माण करती है।

कैसे पहुंचे ?
मिरीक सिलीगुड़ी शहर से 52 किमी उत्तर पश्चिम और दार्जिलिंग शहर के 49 किमी दक्षिण-दक्षिण पश्चिम में स्थित है। नज़दीकी हवाई अड्डा बागडोगरा यहाँ से 52 किमी दक्षिण में स्थित है और रेल यात्री रेल द्वारा सिलीगुड़ी के निकट न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन पहुँच सकते हैं।

Mirik
मिरिक, चित्र सौजन्य : https://www.holidify.com

 

  1. कटारमल, अल्मोड़ा, उत्तराखंड (Katarmal, Almora, Uttrakhand)

अगर आप गाँव में कुछ समय बिताना चाहते हैं किन्तु शहरी सुविधाओं को त्यागना भी नहीं चाहते तो यह गांव आपके लिए सर्वोत्तम है। नैनीताल से मात्र 70 किलोमीटर की दूरी पर बसे इस गाँव में विभिन्न सुविधाओं से युक्त लॉज और रिसोर्ट हैं। कत्यूरी राजाओं द्वारा 9वीं शताब्दी में बनवाया गया सूर्य मंदिर तीर्थ यात्रिओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।

कैसे पहुंचे ?
कटारमल उत्तराखंड की अल्मोड़ा जिले में स्थित है। हवाई मार्ग से आने वाले यात्रिओं को पहले दिल्ली स्थित एयरपोर्ट पहुंचना होगा। वहां से आप बस, और टैक्सी द्वारा यहाँ पहुँच सकते हैं। नज़दीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम है जो की देश की प्रमुख शहरों से रेलमार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है।

Katarmal
कटारमल, चित्र सौजन्य : http://www.clicksandtales.com

 

  1. लाचेन, उत्तर सिक्किम, सिक्किम (Lachen, North Sikkim, Sikkim)

समुद्रतल से 2750 मीटर की ऊंचाई पर स्थित लाचेन यहाँ प्रति वर्ष होने वाली यॉक दौड़ के लिए प्रसिद्ध है। लाचेन के अपने नियम और कानून हैं जिन्हे जुम्सा के नाम से जाना जाता है। दिन का तापमान 4 डिग्री से 12 डिग्री के बीच रहता है यहाँ। झीलों और मठों के लिए प्रसिद्ध इस गाँव में आप भेड़ और यॉक के बालों से ऊन बनते भी देख सकते हैं।

कैसे पहुंचे ?
लाचेन सिक्किम की राजधानी गंगटोक से 129 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है जहाँ गंगटोक से सड़क मार्ग द्वारा पहुंच सकते हैं। हवाई मार्ग से आने वाले यात्री बागडोगरा पहुँच सकते हैं। रेलयात्री रेल द्वारा न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन पहुँच सकते हैं जहाँ से गंगटोक के लिए टैक्सी और बस उपलब्ध है।

Lachen
लाचेन, चित्र सौजन्य : http://www.taxiinsikkim.com

ख़ूबसूरत गांवों की यात्रा जारी है। अगले भाग के लिए यहाँ क्लिक करें।

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