Trip to heart of India Madhya Pradesh हिंदुस्तान के दिल मध्य प्रदेश की सैर

हरे – भरे खेतों के बीच खूबसूरत महलों, प्राचीन विरासतों से भरे मध्य प्रदेश में नदियों और जंगलों की सैर करने जाना कम से कम एक बार तो बनता ही है। ऐसे में इस बार हिन्दुस्तान का दिल कहे जाने वाले मध्य प्रदेश जाने की योजना बनायें जो आपके हॉलिडे को परफेक्ट बना देगा।

भोपाल और आसपास

Lake city bhopal Image source: Travel Triangle
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सिंघोरी वन्य जीव अभ्यारण्य: भोपाल से ढाई घंटे का सफर कर आप सिंघोरी वन्य जीव अभ्यारण्य जा सकते हैं। भोपाल से 50 किलोमीटर दूर रातापानी टाइगर रिजर्व भी एक बढ़िया विकल्प है।

झीलों का सफ़र: झीलों का शहर भोपाल बेहद सुंदर है। यहां आप आनंद लेते हुए एक या दो दिन बिता सकते हैं। यहां खूबसूरत महल हैं, पुराने किले हैं, ताज-उल-मस्जिद है और साथ ही तफरीह के लिए कई ताल। अंग्रेजों के जमाने की सचिवालय बिल्डिंग को फिर से निखारा गया है। उसके रूफ-टॉप रेस्टॉरेंट का आप आनंद ले सकते हैं जहां से पूरे भोपाल का नजारा दिखता है।

श्यामला हिल्स: श्यामला हिल्स पर झील के किनारे ही स्थित है एमपी टूरिजम का अनोखा रेल रेस्टॉरेंट ‘शान-ए-भोपाल’। यहां रेल की बॉगी को रेस्तरां में तब्दील कर दिया गया है। लजीज खाने के साथ खड़ी बॉगी में सफर करने का कुछ अलग ही आनंद है यहां। राष्ट्रीय मानव संग्रहालय और ट्राइबल म्यूजियम यहां बहुत अनोखा हैं, जहां आपको जरूर जाना चाहिए।

भीमबेटका: भोपाल से 40 किलोमीटर दूर है भीमबेटका। सहज कौतूहल से लोग यहां खिंचे चले आते हैं। जंगलों के बीच स्थित इस वर्ल्ड हेरिटेज साइट पर आप आदिमानवों के निशान देख पाएंगे। हजारों साल पहले आदि मानव यहां रहते थे और उनकी निशानी- चट्टानों पर उनकी बनाई पेंटिंग्स आज भी यहां मौजूद हैं। जब गाइड आपको यहां की गुफाओं और पेंटिंग्स जानकारी देते हैं तो आप खुद को उसी युग में खड़ा पाते हैं। यहां चट्टानों की नेचरल बैलेंसिंग भी देखने लायक है। सेल्फी खींचते-खींचते आप थक जाएंगे यहां।

भोजेश्वर का मंदिर: भोपाल से भीमबेटका के रास्ते में ही एक आश्चर्य आपका इंतजार कर रहा होता है। यह है यहां का भोजेश्वर शिव मंदिर। पूरब का 11वीं सदी का यह मंदिर कभी पूरा नहीं हो पाया। यहां भारत का सबसे बड़ा शिवलिंग आप देख सकते हैं। तीन दिन में आराम से यह सब आप देख सकते हैं।

कैसे जायें ?

भोपाल दिल्ली और देश के सभी प्रमुख शहरों से फ्लाइट और ट्रेन के जरिये जुड़ा हुआ है।

 

सतपुड़ा

Satpura Image source: NatGeo Traveller
Satpura Image source: NatGeo Traveller

अगर आपको प्रकृति और जंगली जीवन पसंद हैं तो होशंगाबाद जिला स्थित सतपुड़ा नैशनल पार्क (जो टाइगर रिजर्व भी है) जा सकते हैं। सतपुड़ा पर्वत श्रेणियों के दक्षिणी इलाके में ही स्थित है पेंच बाघ अभयारण्य। जंगल सफारी का जो रोमांच यहां है, वह दूसरे अभ्यारण्यों में कम ही मिलता है। विशेषता यह है कि सतपुड़ा में टाइगर और तेंदुए ज्यादा आसानी से दिख जाते हैं। यहां के देनवा नदी में आप बोटिंग कर सकते हैं तो सतपुड़ा हिल्स में ट्रेकिंग भी।

कैसे जायें ?

यहां जाने के लिए आपको मढ़ई जाना होगा जो भोपाल से करीब 140 किलोमीटर दूर है। आप नदी किनारे स्थित एमपी टूरिजम के बायसन रिसॉर्ट में ठहर सकते हैं। आप भोपाल से सड़क मार्ग से मढ़ई ज्यादा आसानी से पहुंच सकते हैं। भोपाल के लिए दिल्ली से फ्लाइट या ट्रेन ले सकते हैं।

 

ओरछा

Orchha Image source: NatGeo Traveller
Orchha Image source: NatGeo Traveller

ओरछा के राजाओं की कहानियां जितनी शानदार हैं, उतना ही शानदार हैं उनके बनाये महल और छतरियां भी। झांसी से 16 किलोमीटर दूर ओरछा की खासियत यह है कि यहां का किला शहर के कोलाहल से दूर नदी और फसलों से लदे खेतों के किनारे है। इसलिए यहां ज्यादा शांति है। राजस्थान के किलों से यह किसी भी तरह से कम नहीं है। यहां रोज शाम होने वाला लाइट एंड साउंड शो आपको सैकड़ों वर्ष पहले के ओरछा में ले जाता है। यह एक अलग तरह का अनुभव होता है।

यहां का ओरछा भी अभ्यारण्य बेहद विशेष है। यहां लुप्तप्राय गिद्धों की चार प्रजातियां पाई जाती हैं और उनकी संख्या दिनोंदिन बढ़ रही हैं।

एमपी टूरिजम का यहां हेरिटेज होटल भी है जहां टूरिस्ट ठहर सकते हैं। एमपी टूरिजम के बेतवा रिट्रीट में टेंट में रुकने का आनंद भी आप ले सकते हैं। यहां का रामराजा मंदिर बेहद प्रसिद्ध है। यह इस मामले में अनोखा है कि यहां भगवान को सलामी दी जाती है।

कैसे जायें ?

नजदीकी रेलवे स्टेशन झांसी है। दिल्ली से झांसी के लिए कई ट्रेन हैं। आप भोपाल के रास्ते भी यहां पहुंच सकते हैं।

 

खजुराहो

Khajuraho Image source: 1zoom.me
Khajuraho Image source: 1zoom.me

झांसी से 175 किलोमीटर दूर खजुराहो अपने भव्यतम मंदिरों की श्रृंखला के लिए जाना जाता है। करीब हजार साल पुराने वर्ल्ड हेरिटेज ये मंदिर अपनी बोलती मूर्तियों की वजह से आपकी आँखों में बस सकते हैं। जिस बारीकी से यहां के मंदिरों पर विभिन्न प्रकार की कलात्मक मुद्राएं उकेरी गई हैं, वह अद्वितीय हैं। दुनिया भर के लोग इसे देखने आते हैं। यहां का लाइट एंड साउंड शो भी खास है। खजुराहो के वैभवशाली इतिहास को अमिताभ बच्चन की आवाज में सुनना अच्छा लगता है। यहां का स्टेट म्यूजियम भी खास है।

खजुराहो से उत्तर-पूर्व दिशा से 18 किलोमीटर दूरी पर स्थित केन घड़ियाल अभ्यारण्य भी आप जा सकते हैं। खजुराहो से 45 किमी दूर पन्ना नैशनल पार्क टाइगर देखने की सबसे खूबसूरत जगह है। यहां आप तमाम तरह के और जीव भी देख सकते हैं।

कैसे जायें ?

खजुराहो हवाई और रेल मार्ग से दिल्ली से जुड़ा हुआ है। हालांकि दिल्ली से यहां के लिए फ्लाइट बेहद कम हैं।

 

ग्वालियर

Gwalior Fort Image source: Culture Trip
Gwalior Fort Image source: Culture Trip

ग्वालियर किसी परिचय का मोहताज नहीं है। यहाँ स्थित ग्वालियर का किला अपनी अलग ही पहचान रखता है। पहाड़ों पर स्थित इस किले से पुरे शहर का शानदार दृश्य दिखायी देता है। इसे इतिहास में अभेद्य किले के रूप में भी जाना जाता रहा है।

जय विलास पैलेस: यहाँ स्थित जय विलास पैलेस को जय विलास महल के नाम से भी जाना जाता है। इसकी स्थापना 1874 में ग्वालियर के महाराजा जयजीराव सिंधिया द्वारा की गई थी और अब भी यह उनके वंशजों का निवास स्थान है।

मान मंदिर महल: ग्वालियर किले के उत्तर-पूर्वी छोर पर स्थित मान मंदिर महल 1486 और 1516 के बीच तोमर शासक मान सिंह तोमर द्वारा बनवाया गया था। महल समय के साथ टिक नहीं सका, हालाँकि महल के अवशेष अभी भी उस युग की खूबसूरत नक्काशी और डिज़ाइन को दर्शाते हैं।

तान सेन का मकबरा: मध्यकाल में अकबर के दरबार में भारत के महान संगीतकारों और प्रख्यात गायक में से एक तानसेन का मकबरा भी एक दर्शनीय स्थल है।

तेली का मंदिर: ग्वालियर किले में स्थित, यह मंदिर 9 वीं शताब्दी का है। ग्वालियर किले पर अंग्रेजों के कब्जे से पहले इस मंदिर का इस्तेमाल तेल बनाने के लिए किया जाता था।

सास बहु मन्दिर: 9 वीं शताब्दी में निर्मित, सास बहू मंदिर पर्यटकों और भक्तों को समान रूप से आकर्षित करता है। वैसे सास बहू मंदिर का अर्थ सास और बहू नहीं है, अपितु भगवान विष्णु के एक अन्य नाम सहस्त्रबाहु का अपभ्रंश है।

पदावली और बटेश्वर: ग्वालियर के मुख्य शहर से लगभग 40 किमी दूर स्थित, पदावली एक किला है जिसमें कई प्राचीन मंदिर हैं। मंदिरों में की गयी खूबसूरत नक्काशी के कारण इसे मिनी खजुराहो के रूप में जाना जाता है। यह भारतीय वास्तुकला की भव्यता को देखने की इच्छा रखने वालों के लिए यह एक अच्छा गंतव्य है। इन मंदिरों को 2005 में ए.एस.आई द्वारा परिणाम स्वरूप खोजा गया था और यह खोज का कार्य अभी भी चल रहा है।

Bateshwar Image source: Flickr
Bateshwar Image source: Flickr

यहां के अधिकांश मंदिर शिव और विष्णु को समर्पित हैं। माना जाता है कि मंदिर 8 वीं -10 वीं शताब्दी ईस्वी के आसपास निर्मित हैं और इन्हें मुख्य रूप से लाल बलुआ पत्थर का उपयोग करके बनाया गया है।

तिघरा डैम: तिघरा बांध मुख्य शहर के ठीक बाहर स्थित है और यहाँ स्थित झील में बोटिंग आदि होती है।

गोपाचल पर्वत: गोपाचल पर्वत 7 वीं और 15 वीं शताब्दी के रॉक-कट जैन स्मारकों के लिए प्रसिद्ध है। स्मारक जैन तीर्थंकरों – आदिनाथ, महावीर, नेमिनाथ और ऋषभनाथ को समर्पित हैं – जिनकी मूर्तियाँ ध्यान मुद्रा में देखी जा सकती हैं। ये शहर में और उसके आसपास स्थित 100 स्मारकों का एक हिस्सा हैं।

कैसे जायें ?

ग्वालियर दिल्ली से ट्रेन और बस के जरिये जुड़ा हुआ है।

 

ओम्कारेश्वर और उज्जैन

Omkareshwar Image source: Google Image
Omkareshwar Image source: Google Image

श्री महाकालेश्वर, उज्जैन: उज्जैन की रूद्र सागर झील के तट पर स्थित है श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग। उज्जैन एक प्राचीन शहर है जिसे प्राचीन भारत में अवन्ती के नाम से जाना जाता था। मंदिर दक्षिणामूर्ति है अथार्त मंदिर का मुख दक्षिण की ओर है, जिसके कारण बहुत से तांत्रिक तंत्र साधना के लिए आते हैं। यहाँ की एक विशेषता है चिता भस्म से होने वाला भगवान शिव का श्रृंगार। मंदिर का इतिहास 7वीं शताब्दी का है।

श्री ओम्कारेश्वर, खंडवा: मध्य प्रदेश की नर्मदा नदी के बीच स्थित शिवपुरी द्वीप पर स्थित हैं भगवान श्री ओम्कारेश्वर। इन्हे श्री ममलेश्वर के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ भगवान् शिव के दो मंदिर स्थित हैं। एक हैं श्री ओम्कारेश्वर जो की शिवपुरी द्वीप पर स्थित हैं और दूसरे हैं नर्मदा के दक्षिणी तट पर स्थित श्री अमरेश्वर। मंदिर के बारे में कथा प्रचलित है की इक्ष्वाकु वंश के राजा मानधाता ने अपने पुत्र अम्ब्रीश सहित भगवान को प्रसन्न करने के लिए यहाँ तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव यहाँ ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापीत हो गए।

कैसे जायें ?

उज्जैन और ओम्कारेश्वर रेल और बसों द्वारा पहुंचा जा सकता है।

मध्य प्रदेश में पर्यटन से सम्बंधित अन्य जानकारियों के लिए मध्य प्रदेश पर्यटन की वेबसाइट या http://www.floatingshoes.com/ पर विज़िट कर सकते हैं।

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