Ladakh Buddhist Vihar Delhi

Mini Ladakh in Delhi

आपने भारत का स्विट्ज़रलैंड तो सुना ही होगा… और यह स्विट्जरलैंड कहाँ – कहाँ हैं और कितने हैं यह तो मुझे भी नही पता। आपने भारत का स्कॉटलैंड सुना होगा, आपने भारत का वेनिस सुना होगा… लेकिन क्या आपको पता है की दिल्ली में लद्दाख Ladakh in Delhi कहाँ हैं ?

कश्मीरी गेट ISBT के पास ही है लद्दाख बुध विहार Ladakh Budh Vihar कॉलोनी जिसे आम तौर पर मोनेस्ट्री मार्केट (Monestry Market Delhi) के रूप में जाना जाता है। पहले मैं भी यही समझता था की यहां कम दामों पर जैकेट्स, जीन्स आदि ही मिलते होंगे…

अभी कुछ दिन पहले, शायद मकर संक्रांति के अगले दिन एक दोस्त के व्हाट्सएप स्टेटस में किसी मंदिर में हो रहे राम नाम कीर्तन का वीडियो देखा और साथ – साथ ही उसमें दिखाई दी नीम करौली बाबा की तस्वीर। आम तौर पर आज – कल जब भी कोई कहीं जाता है तो फेसबुक पर सिंहनाद करके जाता है की – ‘फलाना इज़ ट्रेवलिंग टू फलाना सिटी’। जहां तक मुझे पता था, बाबा नीम करौली का आश्रम नैनीताल के आगे है लेकिन अपने दोस्त उत्तराखण्ड जायें और जाने से पहले ऐलान न करें… ऐसा तो संभव ही नहीं।

फिर यह कौन सा मंदिर था ? आखिर जिज्ञासा को शांत करने के लिये उसी व्हाट्सएप स्टेटस पर रिप्लाई किया – “?.. 🤔🤔”

जवाब भी आया – ‘दिल्ली में ही है… नीम करौली बाबा आश्रम और हनुमान मंदिर… कश्मीरी गेट के पास… मोनेस्ट्री की तरफ… मंगलवार और रविवार को बड़ा कीर्तन होता है’।

अगले दिन छुट्टी थी… सोचा की हो आया जाये बाबा के धाम… लेकिन सोचते – सोचते ही दोपहर के 12 बज गये। आखिर मेट्रो में सवार हुए और पहुंच गए कश्मीरी गेट। गूगल मैप मेट्रो स्टेशन से मंदिर की दूरी 1.9 km दिखा रहा था।

ISBT के पास वाले फ्लाईओवर के नीचे ही छोटा सा गेट है लद्दाख बुध विहार कॉलोनी में प्रवेश के लिये। जैसे ही प्रवेश किया देखा की यह तो दिल्ली का अलग ही रूप है। यहां जैकेट्स और जीन्स आदि का बड़ा बाज़ार है जिसे लद्दाखी लोग चलाते हैं।

इसके अतिरिक्त यहां अधिकांश मकान लद्दाखी शैली में बने हुए हैं। यमुना के किनारे स्थित होने के कारण कभी – कभी मानसून में बाढ़ का पानी भी यहाँ तक आ जाता है।

खैर…. मैं तो निकला था नीम करौली आश्रम की तलाश में और कुछ ही देर में वहां पहुंच भी गया लेकिन अफ़सोस…. दोपहर का समय होने के कारण मंदिर बंद था। बाबा नीम करौली का आश्रम होने के साथ – साथ यह हनुमान जी का मंदिर भी है। मंदिर दोपहर 1 बजे से सायं 4 बजे तक बंद रहता है।

अब यहां आ गये ही थे तो थोड़ा घूमना – फिरना तो बनता था। पतली गलियों से होते हुए थोड़ा ही आगे पहुंचा था की बायीं ओर दिखा ‘लद्दाख बौद्ध विहार’ Ladakh Buddhist Vihar । बाहर कुछ लद्दाखी बुज़ुर्ग और छात्र बैठे हुए थे… कुछ लोग तिब्बती प्रेयर व्हील घुमा रहे थे।

Tibten Prayer Wheel
Tibten Prayer Wheel
Tibten Prayer Wheel
Tibten Prayer Wheel

मैं कभी भी बौद्ध मंदिर में नही गया हूँ, या फिर ऐसा कहें की बौद्ध मंदिर वास्तविकता में देखा ही पहली बार था (टीवी पर तो बहुत बार देख चुका हूं :D, इसलिये अंदर जाने में थोड़ी सी झिझक हो रही थी।

एक बुज़ुर्ग से कुछ जानकारी लेने के बाद बौद्ध विहार में प्रवेश किया। यहाँ दोनों ओर छोटे – छोटे पार्क हैं और उनके साथ ही बौद्ध धर्मावलंबियों के लिये बने हुए दो मंजिला घर। ठीक सामने बना हुआ है भगवान बुद्ध का भव्य मंदिर।

Ladakh Buddhist Vihar Delhi
Ladakh Buddhist Vihara Delhi

(कैलाश मानसरोवर यात्रा पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें।)

मंदिर में भगवान बुद्ध की सुंदर प्रतिमा और बनावट देख कर लगता ही नही की आप दिल्ली में हैं। बौद्ध मंदिरों में पारम्परिक वाद्य यंत्रों का ही संगीत के लिये इस्तेमाल होता है और ऐसे ही वाद्य यंत्र यहां भी थे।

Lord Buddha in Ladakh Buddhist Vihar
Lord Buddha in Ladakh Buddhist Vihar

मंदिर के दोनों ओर तिब्बती प्रेयर व्हील्स लगे हुए हैं। मुझे नही पता था की इन्हें घुमाने के पीछे क्या कारण है। लोग उन्हें घुमा रहे थे… तो मैंने भी घुमा दिये। वैसे इन्हें भगवान तक अपनी प्रार्थना पहुंचाने के लिये घुमाया जाता है।

(आदि कैलाश यात्रा पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें।)

यहीं एक लाइब्रेरी भी है जहाँ लद्दाख और बौद्ध धर्म के बारे में पढ़ा जा सकता है। प्रांगण में ही मंदिर के पीछे लद्दाखी युवा किसी डांस प्रोग्राम के रिहर्सल में लगे हुए थे। लद्दाखी शैली में नृत्य आदि कार्यक्रम यहां आम तौर पर होते रहते हैं। यह बौद्ध विहार यमुना के किनारे स्थित है, इसलिए यहां से यमुना नदी का भी शानदार दृश्य दिखता है… बस नदी में सफाई की कमी अखरती है।

Prayer Wheels
Prayer Wheels
Prayer wheels
Prayer wheels

‘लद्दाख बौद्ध विहार’ Ladakh Budhhist Vihar से 50 मीटर की दूरी पर ही स्थित है तारा देवी का मंदिर जो की बौद्ध धर्म में प्रमुख देवी हैं। यहीं पास में ही है डोलमा हाउस जिससे लद्दाखी व्यंजनों के लिये जाना जाता है और यहां के मोमोज़ तो पूरी दिल्ली में प्रसिद्ध हैं। इसके अतिरिक्त यहां कुछ अन्य रेस्टॉरेंट हैं जो लद्दाखी व्यंजन परोसते हैं।

(जागेश्वर यात्रा पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें।)

कुल मिला कर यहां ऐसा बहुत – कुछ है जो इसे मिनी लद्दाख कहलाने के लिये काफी है । अब मिनी लद्दाख कहा है तो यहां आकर पहाड़ और मरमोट ढूँढने मत निकल जाना। वैसे लद्दाख पहुंचने के लिये 5 दर्रों और बेहद मुश्किल भरे रास्तों को पार करना पड़ता है…. मुझे लगता नही की दिल्ली की सड़कें आपको उन रास्तों और मुश्किलों की कमी का अनुभव होने देंगे।

खैर… मेरी अन्य यात्राओं की तरह यह यात्रा भी कुछ वैसी थी की जाना था कहीं और पहुंचे कहीं… जाना तो था हनुमान जी के दर्शन करने और पहुंच गये लद्दाख।

चलते – चलते कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां साझा किये चलते हैं :-

नीम करौली बाबा हनुमान मंदिर के सुबह 5 बजे से दोपहर 1 बजे तक और सायं 4 बजे रात 8 बजे तक दर्शन हेतु खुला रहता है।

‘लद्दाख बौद्ध विहार’ Ladakh Buddhist Vihara में आप दिन में किसी भी समय जा सकते हैं। तारा देवी मंदिर में दर्शन करने हों तो दोपहर में न जायें।

यह लद्दाख बुध विहार कॉलोनी मुख्य रूप से मोनेस्ट्री मार्केट रूप में जानी जाती है। यहां गर्म कपड़े कम दामों पर मिल जाते हैं। अतः इस मिनी लद्दाख में खरीदारी का भी मौका है आपके पास। बाज़ार सुबह 10 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है।

खाने के शौकीनों के लिये यहाँ बहुत से विकल्प हैं। यहां स्थित “डोलमा हाउस” लद्दाखी व्यंजनों और मुख्य रूप से मोमोज़ के लिये प्रसिद्ध है। इसके अतिरिक्त लेह जखांग, ग्यूदमेद मोनेस्ट्री और ज़ोमसा रेस्टॉरेंट भी यहां के प्रसिद्ध रेस्टॉरेंट हैं।

कैसे पहुंचे ? How to reach ?

यदि आप मेट्रो से आ रहे हैं तो कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 5 या फिर ISBT की तरफ वाले गेट बाहर निकलें और फ्लाईओवर वाला चौराहा पार करके रिंग रोड पर आ जायें। लद्दाख बुध विहार कॉलोनी का रास्ता यहीं एक फ्लाईओवर के नीचे से है। वैसे आम तौर पर इसे मोनेस्ट्री मार्केट के रूप में जाना जाता है, अतः रास्ता पूछने के लिये इसी शब्द का प्रयोग करें।

लद्दाख बौद्ध विहार से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिये आप कमेंट कर सकते हैं।

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