Kumbh Mela 2019

Kumbh Mela 2019 कुम्भ मेला 2019

विश्व का सबसे बड़ा आयोजन जिसकी प्रतीक्षा लोग 12 बारह वर्षों तक करते हैं वह अब समीप ही है और इसी के साथ बहुत से लोगों ने कुम्भ स्नान की तैयारियां आरम्भ कर दी होंगी। इस बार कुम्भ मेला का आयोजन 15 जनवरी 2019 से 4 मार्च 2019 के बीच किया जा रहा है। चूंकि यह एक बहुत बड़ा आयोजन हैं तो लोगों के मन में बहुत से प्रश्न भी होंगे की कुम्भ क्या है? शाही स्नान क्या है ? कुम्भ में पहुंचना कैसे है ? कुम्भ 2019 की प्रमुख स्नान तिथियां क्या हैं ? आपके इन्ही सब प्रश्नों के उत्तर छुपे हैं इस लेख में।

कुम्भ मेला – एक परिचय

Kumbh Mela 2019
Image source: www.kumbhmelaservices.com

कुम्भ का शाब्दिक अर्थ है कलश। कुम्भ मेले का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। यह वह समय था पृथ्वी पर केवल देव और दानव ही रहते थे, मानव नहीं। इस समय सबसे महत्वपूर्ण कार्य था धरती को रहने लायक बनाना और धरती पर मानव सहित अन्य आबादी का विस्तार करना।

धरती के विस्तार और इस पर विविध प्रकार के जीवन निर्माण के लिए त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु और शिव) ने लीला रची और उन्होंने देव तथा दानवों की शक्ति का उपयोग कर समुद्र मंथन कराया। समुद्र मंथन कराने के लिए रचा जाना आवश्यक था।

इसी के तहत ऋषि दुर्वासा ने एक बार अपना अपमान होने के कारण इन्द्र को ‘श्री’ (लक्ष्मी) से हीन हो जाने का शाप दे दिया। जिसके कारण लक्ष्मी समुद्र में चली गयी। भगवान विष्णु ने इंद्र को शाप मुक्ति के लिए असुरों के साथ ‘समुद्र मंथन’ के लिए कहा और दैत्यों को अमृत का लालच दिया। यह समुद्र था क्षीर सागर जिसे आज हिन्द महासागर कहते हैं। ऐसे में मंदराचल पर्वत मथनी बना, वासुकी नाग उसकी नेति (रस्सी) और आधार बना विष्णु का कच्छप (कछुआ) अवतार। मंथन से चौदह रत्नों की प्राप्ति हुई जिन्हें देवों और दानवों में बराबर बाँट लिया गया परन्तु जब धन्वन्तरि ने अमृत कलश देवताओं को दे दिया तो फिर युद्ध की स्थिति उत्पन्न हो गई। तब भगवान् विष्णु ने स्वयं मोहिनी रूप धारण कर सबको अमृत-पान कराने की बात कही और अमृत कलश का दायित्व इंद्र-पुत्र जयंत को सौपा। अमृत-कलश को प्राप्त कर जब जयंत दानवों से अमृत की रक्षा हेतु भाग रहा था तभी इसी क्रम में अमृत की बूंदे पृथ्वी पर चार स्थानों पर गिरी- हरिद्वार, नासिक, उजैन और प्रयागराज। चूँकि विष्णु की आज्ञा से सूर्य, चन्द्र, शनि एवं बृहस्पति भी अमृत कलश की रक्षा कर रहे थे और विभिन्न राशियों (सिंह, कुम्भ एवं मेष) में विचरण के कारण ये सभी कुम्भ पर्व के साक्षी बन गये। इस प्रकार ग्रहों एवं राशियों की सहभागिता के कारण कुम्भ पर्व ज्योतिष का पर्व भी बन गया। जयंत को अमृत कलश को स्वर्ग ले जाने में 12 दिन का समय लगा था और माना जाता है कि देवताओं का एक दिन पृथ्वी के एक वर्ष के बराबर होता है। यही कारण है कि कालान्तर में वर्णित स्थानों पर ही ग्रह-राशियों के विशेष संयोग पर 12 वर्षों में कुम्भ मेले का आयोजन होता है।

भारतीय सभ्यता में कुम्भ एक पवित्रतम पर्व है। करोड़ों महिलायें, पुरूष, आध्यात्मिक साधकगण और पर्यटक इस आयोजन में सम्मिलित होते हैं। यह विद्वानों के लिये शोध का विषय है कि कब कुम्भ आरम्भ कब हुआ किन्तु यह एक स्थापित सत्य है कि प्रयाग कुम्भ का केन्द्र बिन्दु रहा है। ऐतिहासिक साक्ष्य दर्शाते हैं की कुम्भ मेले का आरम्भ महाराज हर्षवर्धन के शासन काल (664 ईसा पूर्व) में हुआ जब कुंभ मेले को विभिन्न मतों से मान्यता प्राप्त हो गयी थी। प्रसिद्व यात्री हवेनसांग ने अपनी यात्रा वृत्तांत में कुंभ मेले की महानता का उल्लेख किया है। उन्होंने लिखा है की राजा हर्षवर्धन प्रयाग के संगम की रेत पर एक महान पंचवर्षीय सम्मेलन का आयोजन करते थे और अपनी सम्पत्ति को सभी वर्गो के गरीब एवं धार्मिक लोगों में बाँट देते थे। इस व्यवहार का अनुसरण उनके पूर्वजों के द्वारा किया जाता था। शास्त्रों के अनुसार भी ब्रह्मा जी ने पवित्रतम नदी गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर दशाश्वमेघ घाट पर अश्वमेघ यज्ञ किया था और सृष्टि का सृजन किया था।

कुम्भ का ज्योतिषीय महत्व

यदि हम कुम्भ को खगोल की कसौटी पर भी कसें तो हम पाते हैं की ग्रहों की विशेष स्थितियाँ ही कुम्भ पर्व के काल का निर्धारण करती है। कुम्भ पर्व एक ऐसा पर्व है जिसमें तिथि, ग्रह, मास आदि का अत्यन्त पवित्र योग होता है। कुम्भ का योग सूर्य, चंद्रमा, गुरू और शनि के सम्बध से सुनिश्चित होता है। अर्थात् जिस समय अमृत पूर्ण कुम्भ को लेकर देवताओं एवं दैत्यों में संघर्ष हुआ उस समय चंद्रमा ने उस अमृत कुम्भ से अमृत के छलकने से रक्षा की और सूर्य ने उस अमृत कुम्भ के टूटने से रक्षा की। देवगुरू बृहस्पति ने दैत्यों से तथा शनि ने इंद्रपुत्र जयन्त से रक्षा की। इसी लिए उस देव दैत्य कलह में जिन-जिन स्थानों में (हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन, नासिक) जिस-जिस दिन कुम्भ छलका उन्हीं-उन्हीं स्थलों में उन्हीं तिथियों में कुम्भपर्व होता है। इन देव दैत्यों का युद्ध कुम्भ को लेकर 12 दिन तक 12 स्थानों में चला और उन 12 स्थलों में अमृत कुम्भ से अमृत छलका जिनमें चार स्थल मृत्युलोक (पृथ्वी) में है शेष आठ इस मृत्युलोक में न होकर अन्य लोकों में माने जाते हैं। 12 वर्ष के मान का देवताओं का बारह दिन होता है। इसीलिए 12वें वर्ष ही सामान्यतया प्रत्येक स्थान में कुम्भ पर्व की स्थिति बनती है।

कुम्भ के प्रमुख संस्कार

  1. आरती: आम दिनों में और कुम्भ के दौरान भी प्रयागराज मेला प्राधिकरण एवं विभिन्न समितियों द्वारा बड़े धूम-धाम से यहाँ प्रति संध्या आरतियां आरती कराई जाती हैं जिनमे बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं। विशेष पर्वों पर तो यह संख्या लाखों के पार भी हो जाती है
  2. स्नान: स्नान एवं कर्मकाण्ड के साथ-साथ तीर्थयात्री संगम के तट पर पूजा आदि भी करते हैं। मकर संक्रांति (कुम्भ मेला का आरम्भ) से लेकर कुम्भ मेले के अंत तक प्रतिदिन यहाँ करोड़ो स्नान करते हैं। इसके अतरिक्त प्रतिदिन विभिन्न तिथियों पर शाही स्नान जिसे ‘राजयोगी स्नान’ के रूप में भी जाना जाता है, लगता है। शाही स्नान के अवसर पर बहुत से साधु – संत अपनी शोभा यात्रा के साथ स्नान के लिये आते हैं।
  3. कल्पवास: कुम्भ मेले के दौरान संगम तट पर कल्पवास का विशेष महत्व है। कल्पवास एक माह का होता है और इस दौरान कल्पवासी को इक्कीस नियमों का पालन करना चाहिए। ये नियम हैं – सत्यवचन, अहिंसा, इन्द्रियों का नियंत्रण, प्राणियों पर दयाभाव, ब्रह्मचर्य, व्यसन मुक्त जीवन शैली, सूर्योदय से पूर्व शैय्या-त्याग, नित्य तीन बार सुरसरि-स्न्नान, त्रिकालसंध्या, पितरों का पिण्डदान, यथा-शक्ति दान, अन्तर्मुखी जप, सत्संग, क्षेत्र संन्यास अर्थात संकल्पित क्षेत्र के बाहर न जाना, परनिन्दा त्याग, साधु सन्यासियों की सेवा, जप एवं संकीर्तन, एक समय भोजन, भूमि शयन, अग्नि सेवन न कराना।
  4. दीपदान: “दीपदान” अर्थात किसी विशेष स्थान जैसे नदी किनारे, मंदिर, धार्मिक वृक्षों के समीप, वन में, या किसी अन्य स्थल पर दीप जलाना। यह अत्यधिक सरल वैदिक विधान है जो यज्ञ जितना ही पुण्यफल दायक है। कुम्भ के दौरान गंगा में दीपों की माला अद्भुत दृश्य उत्पन्न करती है।
  5. त्रिवेणी संगम: गंगा जी, यमुना जी एवं अदृश्य सरस्वती जी का मिलन ही तीर्थराज प्रयागराज की पुण्यभूमि पर त्रिवेणी संगम कहलाता है। विभिन्न ग्रंथों में संगम स्नान का अलग-अलग महत्व बताया गया है। ब्रम्ह पुराण के अनुसार संगम स्नान से अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है तथा मत्स्य पुराण के अनुसार दस करोड़ तीर्थों का फल मिलता है। महाभारत में एक सूक्त संगम में स्नान के फल स्वरुप प्राप्त पुण्य को राजसूय एवं अश्वमेध यज्ञों के पुण्यफल के बराबर बताया गया है।
  6. प्रयागराज पंचकोसी परिक्रमा: परिक्रमा शब्द के कानों में पड़ते ही मन में जो पहली छवि बनती है, वह श्रद्धाभाव से प्रभुनाम की धुन में मगन, प्रभु दर्शन की आस में किसी निश्चित मार्ग पर निकल पड़े भक्त की होती है। आदिकाल से तीर्थराज प्रयागराज में कुम्भ मेले के दौरान विशेष रूप से पंचकोसी परिक्रमा की जाती है, जिसमें प्रयागराज के समस्त प्रमुख तीर्थों (द्वादश माधव सहित) के दर्शन के साथ-साथ तीनों अग्नि कुण्डों (झूँसी, अरैल, तथा प्रयागराज) की भी परिक्रमा हो जाती है। यहाँ एक तथ्य ध्यान देने योग्य है कि प्रयागराज पंचकोसी की परिक्रमा अन्य तीर्थों से भिन्न है। इसमें गंगा, यमुना और संगम के किनारों को मिलाकर 6 तट बनते हैं। जिनमें बहुत से तीर्थ आते हैं, अतः परिक्रमा में यह तट नहीं छूटने चाहिए इसका विशेष ध्यान देना होता है।

परिक्रमा में छह बातें ध्यान देने योग्य हैं

  1. तीनों अग्नि स्वरूप, प्रयाग, अलर्कपुरी, अरैल (तथा प्रतिष्ठानपुरी) झूँसी की परिक्रमा होनी चाहिये ।
  2. तटों का कोई प्रधान तीर्थ न छूटे।
  3. प्रयागराज के अष्टनायक त्रिवेणी, माधव, सोम, भरद्वाज, वासुकी, अक्षयवट, शेष और प्रयाग परिक्रमा में शामिल होने चाहिये।
  4. प्रजापति क्षेत्र की निर्धारित सीमा से आगे न जाये।
  5. परिक्रमा दक्षिणावर्त होनी चाहिए।

श्री माधव मंदिर तीर्थ के प्रमुख तीर्थ

  1. श्री आदि वेणी माधव: श्री आदि वेणी संगम त्रिवेणी में विलुप्त बताया जाता है। अतः इसका कोई दृश्य तीर्थ ना होते हुए सम्पूर्ण त्रिवेणी को ही इनका धाम माना गया है।
  2. श्री असि माधव: श्री असि माधव का स्थान दारागंज स्थित नागवासुकी मंदिर में बताया जाता है। श्री संकष्टहर माधव: प्रतिष्ठानपूरी (झूंसी) में गंगा तट से कुछ 200 मीटर पर स्थित परमपूज्य श्री प्रभुदत्तजी ब्रम्हचारी के आश्रम के सामने ही श्री संकष्टहर माधव जी का धाम है।
  3. श्री शंख माधव: छतनाग घाट के पास मुन्शी बगीचे में स्थापित हैं। यह स्थान संगम से ठीक पूर्व दिशा में है।
  4. श्री चक्र माधव: अग्नि कोण में स्थित अरैल क्षेत्र के चाक बेनीराम में कुछ पचास वर्ष पूर्व श्री चक्र माधव जी के मंदिर का निर्माण हुआ था।
  5. श्री आदि माधव: अरैल घाट के समीप श्री रामेश्वर महादेव मंदिर के पास ही श्री आदि माधव जी का स्थान है।
  6. श्री गदा माधव: श्री गदा माधव जी का स्थान श्री चक्र माधव जी के दक्षिण में बताया जाता है।
  7. श्री पद्म माधव: श्री पद्म माधव के स्थान से सम्बन्धित जो साक्ष्य प्राप्त होते हैं वो उनके स्थान को नैनी के पश्चिम में स्थित वीकर में बताया जाता हैं।
  8. श्री मनोहर माधव: कमला नेहरु मार्ग पर स्थित श्री बाबा दरेवानाथ मंदिर में ही श्री मनोहर माधव जी का स्थान बताया जाता है।
  9. श्री विन्दु माधव: यह क्षेत्र अब छावनी के अंतर्गत आता है। यहाँ द्रौपदी घाट पर कभी किसी ने श्री विन्दु माधव जी की स्थापना करवाई थी।
  10. श्री वेणी माधव: दारागंज में निराला मार्ग पर एक दो मंजिले मंदिर में श्री वेणी माधव जी का स्थान है।
  11. श्री अनंत माधव: त्रिवेणी से पश्चिम की दिशा में खुल्दाबाद से लगभग चार किलोमीटर आगे देवागिरवा में अन्नंत माधव का स्थान बताया गया है।

आध्यात्मिक गुरुजन

कुम्भ का जिक्र हो और अखाड़ों का नाम न लिया जाये, यह कैसे हो सकता है ? वैसे तो कुम्भ में असंख्य साधु सन्यासी आते ही हैं लेकिन जब अखाड़ों की शोभा यात्रा निकलती है तो समस्त कुम्भ यात्री देखते ही रह जाते हैं। “अखाड़ा” शब्द “अखण्ड” शब्द का अपभ्रंश है जिसका अर्थ न विभाजित होने वाला है।

आदि गुरु शंकराचार्य ने सनातन धर्म की रक्षा हेतु साधुओं के संघों को मिलाने का प्रयास किया था, उसी प्रयास के फलस्वरूप सनातन धर्म की रक्षा एवं मजबूती बनाये रखने एवं विभिन्न परम्पराओं व विश्वासों का अभ्यास करने वालों को एकजुट करने तथा धार्मिक परम्पराओं को अक्षुण्ण रखने के लिए विभिन्न अखाड़ों की स्थापना हुई। अखाड़ों से सम्बन्धित साधु-सन्तों की विशेषता यह होती है कि इनके सदस्य शास्त्र और शस्त्र दोनों में पारंगत होते हैं। अखाड़ा सामाजिक व्यवस्था, एकता और संस्कृति तथा नैतिकता का प्रतीक है। समाज में आध्यात्मिक महत्व मूल्यों की स्थापना करना ही अखाड़ों का मुख्य उद्देश्य है। भारतीय संस्कृति एवं एकता इन्हीं अखाड़ों के बल पर जीवित है।

वर्तमान में अखाड़ों को उनके इष्ट-देव के आधार पर निम्नलिखित तीन श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है :

  1. शैव अखाड़े: इस श्रेणी के इष्ट भगवान शिव हैं। ये शिव के विभिन्न स्वरूपों की आराधना अपनी-अपनी मान्यताओं के आधार पर करते हैं।
  2. वैष्णव अखाड़े: इस श्रेणी के इष्ट भगवान विष्णु हैं। ये विष्णु के विभिन्न स्वरूपों की आराधना अपनी-अपनी मान्यताओं के आधार पर करते हैं।
  3. उदासीन अखाड़ा: यह अखाड़ा सिक्ख सम्प्रदाय के आदि गुरु श्री नानकदेव के पुत्र श्री चंद्रदेव जी के उदासीन मत का माना जाता है। इस पन्थ के अनुयाई मुख्यतः ‘ॐ’ की उपासना करते हैं।

पेशवाई या शाही स्नान के समय में निकलने वाले जुलूस में अखाड़ों के आचार्य महामण्डलेश्वर और श्री महंत रथों पर विराजित होते हैं, उनके सचिव हाथी पर, घुड़सवार नागा अपने घोड़ों पर तथा अन्य साधु पैदल आगे रहते हैं। शाही ठाट-बाट के साथ अपनी कला प्रदर्शन करते हुए साधु-सन्त अपने लाव-लश्कर के साथ अपने-अपने गन्तव्य को पहुँचते हैं।

 

कुम्भ मेला 2019

जैसा की हजारों वर्षो से होता आया है, इस बार भी महाकुम्भ का आयोजन उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम किया जायेगा। सरकार ने इस बार कुम्भ 2019 के आयोजन को भव्य बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।

कुम्भ 2019 के मुख्य आकर्षण

  1. पेशवाई (प्रवेशाई)
    कुम्भ के आयोजनों में पेशवाई का महत्वपूर्ण स्थान है। ‘पेशवाई में साधु-सन्त अपनी टोलियों के साथ बड़े धूम-धाम से प्रदर्शन करते हुए कुम्भ में पहुँचते हैं। हाथी, घोड़ों, बग्घी, बैण्ड आदि के साथ निकलने वाली पेशवाई के स्वागत एवं दर्शन हेतु पेशवाई मार्ग के दोनों ओर भारी संख्या में श्रद्धालु एवं सेवादार खडे़ रहते हैं जो शोभायात्रा के ऊपर पुष्प वर्षा एवं नियत स्थलों पर माल्यापर्ण कर अखाड़ों का स्वागत करते हैं।
  2. सांस्कृतिक संयोजन
    कुम्भ मेला, 2019 में पांच विशाल सांस्कृतिक पंडाल स्थापित किये जायेंगे जिनमें प्रतिदिन सांगीतिक प्रस्तुति से लेकर पारंपरिक एवं लोक नृत्य के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की एक श्रृंखला आयोजित की जायेगी। सभी पंडालों में गंगा पंडाल सबसे विशाल होगा और अधिकतर बड़े समारोह यहीं आयोजित किये जायेंगे।
  3. नए और आकर्षक टूरिस्ट वॉक
    उत्तर प्रदेश सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये टूरिस्ट वॉक का आयोजन करेगी जिसमे एक टूर सर्किट बनाया गया है जो की इस प्रकार है।
    यात्रा का आरंभ बिन्दु: शंकर विमान मण्डपम
    पहला पड़ाव: बड़े हनुमान जी का मंदिर
    दूसरा पड़ाव: पतालपुरी मंदिर
    तीसरा पड़ाव: अक्षयवट
    चौथा पड़ाव: इलाहाबाद फोर्ट
    भ्रमण का अंतिम बिन्दु: रामघाट
  4. जलमार्ग
    जल परिवहन प्राचीन काल से नदियों, झीलों व समुद्र के माध्यम से मानव सभ्यता की सेवा करता आ रहा है। कुम्भ 2019 के अवसर पर भारतीय अंतर्देशीय जल मार्ग प्राधिकरण यमुना नदी पर संगम घाट के निकट फेरी सेवाओं का संचालन कर रहा है। इस सेवा के लिए जल मार्ग सुजावन घाट से शुरू होकर रेल सेतु (नैनी की ओर) के नीचे से वोट क्लब घाट व सरस्वती घाट से होता हुआ किला घाट में समाप्त होगा। इस 20 किमी0 लम्बे जल मार्ग पर अनेक टर्मिनल बनाये जायेंगे और बेहतर तीर्थयात्री अनुभवों के लिए मेला प्राधिकरण नौकायें व बोट उपलब्ध करायेगा।
  5. लेजर लाइट शो
    कुम्भ मेला 2019 में भारी संख्या में आने वाले तीर्थयात्रियों के अनुभवों को बेहतर बनाने के लिये लेज़र लाइट शो का आयोजन किया जायेगा।

प्रमुख स्नान तिथियां

कुम्भ के सभी दिन पवित्र माने गये हैं किन्तु कुछ तिथियां विशेष मानी गयी हैं और इन पर शाही स्नान का आयोजन किया जाता है। शाही स्नान कुंभ मेला का प्रमुख स्नान है एवं मुख्य आकर्षण भी हैं। केवल शाही स्नान के पश्चात् ही सर्व साधारण को स्नान की अनुमति दी जाती है। इस बार जो प्रमुख शाही स्नान की तिथियां घोषित की गयी हैं, वे हैं:

मकर संक्रान्ति (15 जनवरी, 2019)
पौष पूर्णिमा (21 जनवरी, 2019)
मौनी अमावस्या (4 फरवरी, 2019)
बसंत पंचमी (10 फरवरी, 2019)
माघी पूर्णिमा (19 फरवरी, 2019)
महाशिवरात्रि (4 मार्च , 2019)

सरकार द्वारा कुम्भ आयोजन की तैयारियां

कुम्भ 2019 को एक अद्वितीय और भव्य उत्सव बनाने के लिये उत्तर प्रदेश सरकार ने अनेक उपाय किये हैं जिनमे प्रमुख हैं:

  • पर्यटकों हेतु 4,200 प्रिमियम टेंट्
  • कुल 20,000 बिस्तरों की क्षमता के साथ जन परिसर
  • 10000 लोगों को अंतर्विष्ट करने की एक क्षमता के साथ गंगा पंडाल
  • मेला क्षेत्र में धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों के आयोजन हेतु 2000 लोगो की क्षमता का प्रवचन सभागार का निर्माण
  • 1,22,000 से अधिक शौचालय, 20,000 से अधिक डस्टबिन, पैदल सेना के रूप में 2000 से अधिक गंगा प्रहरी
  • मेला क्षेत्र में 300 कि०मी० सड़क
  • 22 पण्टून पुलों के निर्माण
  • 84 से अधिक पार्किंग स्थल
  • 524 शटल बस एवं हजारों सी.ए.जी. आटो
  • 2000 से अधिक डिजिटल पथ प्रदर्शक बोर्ड
  • 800 कि.मी. पाइप लाइन
  • 200 वाटर एटीएम, 150 वाटर टैंकर्स 100 हैण्ड पम्प्स, 5000 वॉटर स्टैण्ड पोस्ट
  • भोजन स्टालों, परचून की दूकानों, कपड़े एवं बर्तन की दूकानों हेतु भाव-आधारित विक्रय क्षेत्र

 

क्या करें एवं क्या न करें

क्या करें ?

  • हल्के सामान के साथ यात्रा करें।
  • यदि डाक्टर के द्वारा सलाह दी गयी है तो दवायें साथ लायें।
  • अस्पताल, खाद्य एवं आकस्मिक सेवायें इत्यादि सुविधाओं की जानकारी रखें।
  • इमरजेंसी नंबर की जानकारी रखें।
  • केवल उन्ही स्नान घाटों का उपयोग करें जो मेला द्वारा प्राधिकृत किये गये हैं।
  • उपलब्ध शौचालयों एवं मूत्रालयों का उपयोग करें, डस्टबिन का उपयोग करें।
  • वाहनों को खड़ा करने के लिये पार्किंग स्थलों का उपयोग करें और यातायात नियमों का पालन करें।
  • मेला क्षेत्र व शहर में रूकने के लिये स्थान के निकटतम स्नान घाटों का उपयोग करें।
  • मेला आयोजन में कार्यकारी विभागों के साथ सहयोग करें। अपने सामानों के प्रति सजग रहें और अपने प्रिय जनों एवं सामन के खोने की स्थिति में खोया पाया केन्द्र पर संपर्क करे।
  • यात्रा योजना बनाते समय पूरा समय लें।

क्या न करें ?

  • मूल्यवान, अनावश्यक खाद्य पदार्थ, कपड़े एवं सामान न लायें, अजनबी पर विश्वास न करें।
  • उकसाने वाली बात करके अनावश्यक झगड़े आमांत्रित न करें।
  • सीमाओं से परे नदी में जाने का साहस न करें।
  • नदियों को प्रदूषित न करें। यदि किसी संक्रामक रोग से ग्रसित हैं तो भीड़ भरे स्थानों पर न रूके ।
  • शहर में एवं मेला क्षेत्र में प्लास्टिक की थैलियों का उपयोग न करें।

 

प्रयागराज के बारे में

प्रयागराज का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है और यह काशी के समकक्ष ही बताया जाता है। प्रयागराज का सम्पूर्ण इतिहास आप यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

प्रयागराज के प्रमुख दर्शनीय स्थल

शंकर विमान मण्डपम, श्री वेणी माधव, संकटमोचन हनुमान मंदिर, मनकामेश्वर मंदिर, भारद्वाज आश्रम, विक्टोरिया स्मारक, प्रयाग संगीत समिति, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, पब्लिक लाइब्रेरी, गंगा गैलरी (राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी), श्री अखिलेश्वर महादेव, दशाश्वमेघ मंदिर, तक्षकेश्वर नाथ मंदिर आदि।

प्रयागराज शहर के समीपस्थ पर्यटन स्थल

विंध्याचल (दूरी: 88 किलोमीटर)

विंध्याचल गंगा नदी के किनारे मिर्जापुर जिले में स्थित शहर है। यह देवी विंध्यवासिनी का शक्तिपीठ है जो देश में 51 शक्तिपीठों में से एक है। गंगा नदी के तट पर स्थित तीर्थ यह प्रकृति प्रेमियों को को भी आकर्षित करता है।

चित्रकूट (दूरी: 130 किलोमीटर)

चित्रकूट एक प्रसिद्ध धार्मिक एवं प्राकृतिक पर्यटक स्थल है जो की उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच फैला हुआ है। भगवान राम ने यहाँ अपने वनवास का अधिकांश समय बिताया। चित्रकूट देवत्व शांति और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत मेल है।

वाराणसी (दूरी: 120 किलोमीटर)

काशी अथार्त वाराणसी किसी परिचय का मोहताज़ नहीं है। यह प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृतिए दर्शन, परंपराओं और अध्यात्म का एक आदर्श केंद्र रहा है। यह शहर गंगा नदी के किनारे पर स्थित है। गंगा की दो सहायक नदियाँ वरुणा और अस्सी के नाम पर इसका नाम वाराणसी हुआ।

अयोध्या (दूरी: 169 किलोमीटर)

भगवान राम की जन्म स्थली अयोध्या सरयू नदी के तट पर स्थित है। भारत की गौरवशाली आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परम्परा का प्रतिनिधित्व करने वाली अयोध्या प्राचीनकाल से ही धर्म और संस्कृति की परम .पावन नगरी के रूप में सम्पूर्ण विश्व में विख्यात रही है।

प्रयागराज कुम्भ टूर पैकेज

सरकार द्वारा एवं विभिन्न संस्थाओं द्वारा टूर पैकेज उपलब्ध कराये गये हैं जिन्हें आप यहाँ क्लिक करके जान सकते हैं।

 

कैसे पहुंचे ?

रेल मार्ग

प्रयागराज शहर भारतीय रेल के माध्यम से भारत के सभी शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। प्रयागराज में एवं इसके चारों ओर 10 रेलवे स्टेशन है :

इलाहाबाद छिवकी (ACOI)
नैनी जंक्शन (NYN)
इलाहाबाद जंक्शन (ALD)
फाफामऊ जंक्शन (PFM)
सूबेदारगंज (SFG)
इलाहाबाद सिटी (ALY)
दारागंज (DRGJ)
झूसी (JI)
प्रयाग घाट (PYG)
प्रयाग जंक्शन (PRJ)

सभी गंतव्य स्थानों से रेल मार्ग आसान है और उनसे सम्बन्धित बुकिंग IRCTC बेवसाइट www.irctc.co.in एवं रेलकुम्भ ऐप (विशेष रेल) से की जा सकेगी ।

सड़क मार्ग

प्रयागराज शहर राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। राज्य संचालित बसें सम्पूर्ण देश में कई बड़े स्थानों से उपलब्ध हैं और इनकी बुकिंग UPSRTC (उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम) से बुकिंग की जा सकती है। निजी बस सेवायें भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।

वायु मार्ग

प्रयागराज एयरपोर्ट बमरौली में शहर के केन्द्र से 12 किलोमीटर दूर स्थित है। देश के सभी प्रमुख शहरों से यहाँ के लिये फ्लाइट उपलब्ध है इसके अतिरिक्त वाराणसी एयरपोर्ट से भी यहाँ पहुंचा जा सकता है।

 

कहाँ ठहरें ?

चूंकि कुम्भ विश्व का सबसे बड़ा आयोजन होता है और इसमें करोड़ों की संख्या में यात्री भाग लेते हैं, इसलिये सरकार ने यात्रियों के ठहरने के लिये विभिन्न प्रकार की सुविधाओं का प्रबंध किया है।

कुम्भ मेला टेंट सिटी

कल्प वृक्ष
www.kalpavriksh.in
+919415247600
lallooji@gmail.com

कुम्भ कैनवास
www.kumbhcanvas.com
+9163889-33340
enquiry@kumbhcanvas.com

वैदिक टेंट सिटी
www.kumbhtent.com
+9199099 00776, +9199099 00778
inquiryvedic@gmail.com

इन्द्रप्रस्थम सिटी
www.indraprasthamcity.com
+918588857881/83
info@indraprasthamcity.com

प्रयागराज के प्रमुख होटल

राही इलार्वत, सिविल लाइन्स
rahiilawart@up-tourism.com
+91 9415311133, +91 532-2102784,

त्रिवेणी दर्शन, यू.पी.आर.पी.वी.एन.
rahitrivenialahabad@up- tourism.com
+91 9415311133

कान्हा श्याम, सिविल-लाईन्स
info@hotelkanhashyam.com
+91 532-2560123

ग्राउंड कॉन्टिनेंटल, सिविल-लाईन्स
info@birhotel.com
+91 532-2260631, 22606335

यात्रिक, सरदार पटेल मार्ग
yatrik_hotel@rediffmail.com
+91 532-2260921, 22, 23, +91 99356909256

मिलन पैलेस
Info@hotelmilanpalace.com
+91 532-2421506

होटल रविशा
hotelravishacontinental@gmail.com
+91 7388200886

प्रयागराज रीजेंसी
Info@hotelallahabadregency.in
+91 5322407835, +91 94153163219

सम्राट, सिविल-लाईन्स
hotelsamrat@gmail.com
+91 532-2561200

प्रयाग, स्टेशन रोड
prayaghotel1959@gmail.com
+91 532-2656416

प्रयाग ईन
prayaginn2010@gmail.com
+91 532-26224451

होटल हर्ष आनंदा
mail@HotelHarshAnanda.com
91 532-2427697/91

साकेत, सिविल-लाईन्स
Iqbal@hotelsaket.inIqbal9335@gmail.com
+91 7905020091

विलास, सिविल-लाईन्स
hotelvilas@gmail.com
+91 532-3209984, 2260878

अमन पैलेस, पुलिस लाइन
hotelamanpalaceallahabad@gmail.com
+91 9389568981

गैलेक्सी, सिविल-लाईन्स
contact@GalaxyHotel.com
+91 9918901108

डी०पी०एस०, कानपूर रोड
hoteldpsinn@gmail.com
+91 532-2420888

सुन्दरा, जोहन्सटन गंज
Hotelsundaram@gmail.com
+91 9648957039

कोहिनूर, स्टेशन रोड
qhotelkohinoor@rediffmail.com
+91 532-2655501

ब्लेसिंग्स, सिविल-लाईन्स
quest@blessingstheultimate.com
+91 532-2406875

वैलेंटाइन्स
gmvalentines@gmail.com
+91 9415215912

यू०आर०, सिविल-लाईन्स
gmurhotel@gmail.com
+91 99839686876

न्यू टेप्सो, सिविल-लाईन्स, प्रयागराज
hoteltepso@gmail.com
+91 9415216572

मयूर गेस्ट हाउस, सिविल-लाईन्स
hoteltepso@gmail.com
+91 9956767676, +91 9935501162

जे के पैलेस, सिविल-लाईन्
azamik@rediffmail.com
+91 9307090405, +91 532-2261526

जय माँ दुर्गा लॉज, निकट हीरा हलवैस
hoteljmd@rediffmail.com
+91 8081017264

इम्पीरियल हाउस, अशोक नगर
Imperialhouse2010@hotmail.com
+91 9415289340, +91 532-2622753

प्लैटिनम ईन, निकट उच्च न्यायालय
hotelplatinnuminn@gmail.com
+91 8377004514

अनुराग, स्टेशन रोड
hotelanuragald@gmail.com
+91 9935474097

मन्दिरम, रामबाग
hotelmandiram@gmail.com
+91 7388098405

वशिष्ठ, जोहन्सटन गंज
gmvashisthald@gmail.com
+91 532-2400004

रामकृष्णा, सिविल-लाईन्स
hotelramakrishna@gmail
+91 9453673439

संतोष पैलेस, स्टेशन रोड
hotelsantoshpalace@gmail.com
+91 9984266661

दि लीजेंड, निकट हीरा हलवाई
info@hotelthelegend.com
+91 532-2272200

स्टार रीजेंसी, सिविल-लाईन्स
hotlstarregency@gmail.com
+91 532-2420714

अजय इंटरनेशनल, बहादुर शास्त्री मार्ग
hotelajayinternational@rediffmail.comajayinternationalhotel@gmail.com

+91 532-2422026, 2422925, 2623843, +91 9336762824, +91 9336762825

क्राउन पैलेस
info@hotelcrownpalace.com
+91 532-2557137, +91 9336619107, +91 8765428707

सन सिटी, जोहन्सटन गंज
hotelsuncity@gmail.com
+91 9452960328

आर इन
hAllahabad_rinn@gmail.com
+91 532-3290102

एन०सी० कॉन्टिनेंटल, जोहन्सटन गंज
Hotelnc_continental@gmail.com
+91 532-2652629

पोलो मैक्स, जे० रेलवे स्टेशन
ald.polomax@hotelpolotowers.com
+91 7706001509, +91 532-256100

होटल कान्हा रेजीडेंसी
ald.polomax@hotelpolotowers.com
+91 9598744333

होटल मिलेनियम ईन
+91 7233885888

होटल ऑर्चर्ड वन, 25/3B लाल बहादुर शास्त्री मार्ग
contact@orchardone.in
+91 9999700093, +91 532-2402583

मिलन 46 लीडर रोड
Info@hotelmilanpalace.in
+91 532-24037763

होटल देवलली, 13/25 न्यू आर्मी लाईन बरहाना
+91 09453034277

वेद लक्ष्मी यात्रिक, 92 पुराना बरहाना
+91 8417968847, +91 532-2434042

शिव दयाल यात्रिक निवास, 92 पुराना बरहाना
+91 7233885888

होटल अभय, 26/16 रामबाग
+91 9415632749

होटल शिव महिमा, 348/177 बाई का बाग़
+91 9918406565

होटल पुष्पांजलि पैलेस, 331/169/1 बाई का बाग
+91 9415235299

होटल तारा, रामबाग
+91 9335554139

होटल सागर, साउथ मलाका, रामबाग
+91 7388098407

अद्धुश कॉटेज, 4ए साउथ मलाका, रामबाग
+91 9336259159

त्रिवेणी कॉटेज, 4ए साउथ मलाका, रामबाग
+91 9335317843

होटल सत्यम, 100 विवेकानन्द मार्ग
+91 7852820618

चमेली देवी रस्तोगी धर्मशाला 54/48, स्वामी विवेकानन्द मार्ग
+91 9936271153

होटल सिटी, 30 विवेकानन्द मार्ग
+91 532-2400378, +91 9235507401

होटल इण्डिया, 388 नैनी
+91 9236809328, +91 9236044453

होटल अतुल, 29 स्वामी विवेकानन्द मार्ग
+91 8707352679, +91 532-2403727

होटल लक्ष्मी, 15 स्वामी विवेकानन्द मार्ग
+91 532-2401831, +91 9935748298

होटल अमित , 13 विवेकानन्द मार्ग
+91 9452906145, +91 7355301998

होटल न्यू सूर्या, 20 विवेकानन्द मार्ग
+91 9415309777, +91 6386283903

होटल शंकर, जोहन्सटन गंज
+91 9335881670

होटल सुभाष, 74 जोहन्सटन गंज
+91 9415309904

शांति लॉज, 08/10 शाहगंज
+918539485462

यात्रिक लॉज, 13/12 शाहगंज, लीडर रोड
+91 8604634244

होटल एन०सी०, 108 लीडर रोड
+91 8429992560

होटल सीता कुंवर, 88/86 लीडर रोड
+91 9721921862

होटल गंगे, 45/82 जोहन्सटन गंज
+91 9452931023

होटल राजशिला, 46/38 शाहगंज लीडर रोड
+91 8318959779

अर्जुन, 73 लीडर रोड
+91 8318959779

त्रिवेणी लॉज, 53 लीडर रोड
+91 88303060666

श्री, 63/54 लीडर रोड
+91 9935959763, +91 7752866920

राम गंगा लॉज, 18/17 लीडर रोड
+91 8853712914, +91 532-2406504

रतन लॉज, 15/17 लीडर रोड
+91 9795661133

शारदा श्याम लॉज ,19/17A लीडर रोड
+91 9450595890

श्री गुलाब मेन्शन, लीडर रोड
+91 9793302772

राधे राधे लॉज, 82 मिन्हाजपुर, राजा रीवा का महल
+91 9305749995

अम्बरविला लॉज, 207/51 काटजू रोड, मिन्हाजपुर
+91 9335483936, +91 532-2240448

अम्बर लॉज, 207/51 काटजू रोड, मिन्हाजपुर
+91 9935334852

सत्कार लॉज, 4 काटजू रोड, मिन्हाजपुर
+91 9026259906, +91 9454838249

श्री गुरु कृपा लॉज, 16/70, 51 काटजू रोड
+91 933535567985

श्री विष्णु लॉज, 182/70/7 काटजू रोड
+91 9839564455, +91 639494831

मुकेश, 82/70/8/9 काटजू रोड
+91 9335152135, +91 532-2240228

न्यू नीलकंठ लॉज, 82/15/51 काटजू रोड
+91 99336427792, +91 9616003339

श्री साईं लॉज, 70/17 काटजू रोड
+91 9335207716, +91 9565157979

श्री बाबा लॉज, 19/51 काटजू रोड
+91 9889087121, +91 532-2242290

श्री विश्वनाथ लॉज, 215/70 I नूराल्लाह रोड
+91 8081995067, +91 7379375887

श्री बालाजी लॉज, 69/105,51 काटजू रोड
+91 8895332262

सूरज कुण्ड, 2 कमला नेहरु रोड
+91 9307039111, +91 9335057611

अक्षर लॉज, 207 R 3/70, मिन्हाजपुर
+91 9389824835, +91 9305097392

 

बेड एंड ब्रेकफास्ट के लिये यहाँ क्लिक करें।

 

कुम्भ मेला 2019 संपर्क

कुम्भ मेला अधिकारी, त्रिवेणी भवन, वेणी बाँध
दारागंज, प्रयाग, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश
+91 532 2500775 / +91 532 2504011
कुम्भ मेला वेबसाइट: https://kumbh.gov.in/
web.kumbh-up@gov.in

इमरजेंसी कॉन्टैक्ट नंबर
कुम्भ हेल्पलाइन नम्बर – 1920
पुलिस- 100
रोगी वाहन- 108
आग- 101
महिला और बाल हेल्पलाइन- 1091

कुम्भ मेला से सम्बंधित विस्तृत जानकारी के लिये आप यहाँ क्लिक कर सकते हैं।

कुम्भ मेला जानकारी स्रोत क्रेडिट: https://kumbh.gov.in/

Leave a Reply

avatar
  Subscribe  
Notify of