Kedarnath Trip Guide

प्रति वर्ष अक्षय तृतीया (अप्रैल अंत / मई आरंभ) के दिन केदारनाथ धाम के कपाट खुलते हैं (Kedarnath Dham opening date), अथार्त यात्रा आरंभ हो जाती है और यह दीपावली के दो दिन बाद अथार्त भैया दूज तक जारी रहती है (Kedarnath Dham opening date)। शीतकाल में बाबा केदारनाथ की पूजा ऊखीमठ Ukhimath के ओम्कारेश्वर मंदिर में होती है। श्री केदारनाथ को भगवान शिव को पांचवे ज्योतिर्लिंग के रूप में जाना जाता है। इसके अतिरिक्त यह धाम पञ्च केदारों में प्रथम भी है।

यहाँ पहुँचने के लिए लगभग 19 किलोमीटर की एक दुर्गम पैदल यात्रा करनी होती है जो की हिमालय की सुन्दर वादियों से होकर जाती है। भगवान भोलेनाथ का स्थान होने के साथ – साथ प्राकृतिक सुंदरता भी एक महत्वपूर्ण कारण है भक्तों के यहाँ आने का।

केदारनाथ यात्रा का वृत्तांत पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें।

Nandi in front of Kedarnath Temple
Nandi in front of Kedarnath Temple

केदारनाथ धाम का इतिहास History of Kedarnath Dham

महाभारत युद्ध Mahabharata war के बाद भाई बंधुओं की हत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए पांडवो ने द्रौपदी सहित हिमालय प्रयाण किया, अथार्त हिमालय को चले गए। मार्ग में उन्हें भगवान् शिव दिखे। शिव जी ने सोचा की कहीं पांडव मोक्ष न मांग लें, इसलिए उन्होंने ने भैंसे का रूप धारण किया और भागने लगे, किन्तु भीम ने उन्हें पहचान लिया था। भीम उनके मार्ग में दो चट्टानों पर पैर फैला कर खड़े हो गए। अब भोलेनाथ भीम के पैरों के नीचे से तो निकल नहीं सकते थे, अतः भैंसे रुपी भगवान् शिव धरती में समा गए। कुछ समय बाद उनके शरीर के अंग हिमालय में पांच अलग अलग स्थानों पर प्रकट हुए। इन्ही पांच स्थानों को पंच केदार कहा जाता है। प्रथम केदार अथार्त केदारनाथ में पृष्ट भाग, तुंगनाथ में भुजा, मध्यमहेश्वर में नाभि, चेहरा रुद्रनाथ में, और जटाएं कल्पेश्वर में। यह पांचो केदार उत्तराखंड में स्थित हैं। भगवान का शीश नेपाल में प्रगट हुआ और वहां उन्हें पशुपतिनाथ के रूप में जाना जाता है।

कहा जाता है भगवान् केदारनाथ Kedarnath का बेहद भव्य मंदिर महाबली भीम ने एक ही रात में बनवा दिया था किन्तु युग परिवर्तन के दौरान वह मंदिर नष्ट हो गया। आठवीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने केदारनाथ ज्योतिर्लिंग की खोज की और वहां वर्तमान मंदिर का निर्माण करवाया। वैसे यह आश्चर्य वाली बात हैं न की जिस बीहड़ क्षेत्र में पहुंचना आज भी इतना मुश्किल होता है वहां आज से बारह सौ वर्ष पूर्व इतने शानदार मंदिर का निर्माण कैसे संभव हुआ होगा। न केवल शानदार, अपितु बेहद मजबूत भी।

13वीं से 17वीं शताब्दी अथार्त 400 वर्षों तक यहाँ पूर्ण हिमयुग था और मंदिर पूर्ण रूप से बर्फ में समा गया था किन्तु उसके बाद भी मंदिर को कोई नुक्सान नहीं हुआ। वर्ष 2013 की हिमालयी सुनामी (Kedarnath disaster) में जहाँ पूरी केदार घाटी नष्ट हो गयी, राम बाड़ा का अस्तित्व ही समाप्त हो गया और उत्तराखण्ड ने भयानक बर्बादी झेली…. वहीं केदारनाथ मंदिर और मंदिर के सामने स्थति नंदी प्रतिमा कोई भी नुकसान नहीं पहुंचा…. अब इसे क्या कहा जाये? भगवान भोले नाथ का प्रताप या उस समय की शानदार इंजीनियरिंग ?

केदारनाथ मंदिर Kedarnath temple मजबूत पहाड़ी शिलाओं से बना हुआ है। मंदिर के मुख्य द्वार के ऊपर एक राजा की प्रतिमा उकेरी गयी है, शायद गढ़वाल के तत्कालीन राजा को दर्शाती हो यह प्रतिमा। द्वार के दोनों ओर जय और विजय की प्रतिमायें बनी हुई हैं।

Kedarnath
Kedarnath

यदि आप भी केदारनाथ यात्रा का पुण्य कमाना चाहते हैं और प्रकृति के अद्भुत नज़ारे देखना चाहते हैं तो यह लेख आपके लिये ही है।

केदारनाथ यात्रा से जुडी महत्वपूर्ण जानकारियाँ Important information related to Kedarnath yatra

  • केदारनाथ धाम Kedarnath की यात्रा आप हरिद्वार / ऋषिकेश से आरम्भ कर सकते हैं।
  • हरिद्वार / ऋषिकेश Rishikesh से केदारनाथ धाम तक यात्रा में कुल 4 दिन लगते हैं (आना और जाना) और यदि कोई समस्या या आपदा आ जाये तो कुछ दिन और भी लग सकते हैं। इसलिये अपने मन को पहले से स्थिर कर के चलें। किसी प्रकार की हड़बड़ी बिलकुल ठीक नहीं।
  • ऐसी लम्बी यात्राओं में जो सबसे पहली और बड़ी समस्या सामने आती है, वो है यातायात के साधनों की। दिल्ली से हरिद्वार और ऋषिकेश के लिये पर्याप्त मात्रा में बसें उपलब्ध हैं। रेल यात्री रेल द्वारा हरिद्वार पहुँच सकते हैं।
  • हरिद्वार और ऋषिकेश दोनों ही शहरों से श्री केदारनाथ धाम (सोनप्रयाग) Sonprayag के लिये सुबह 6 बजे तक ही बसें चलती हैं। चूँकि उत्तराखण्ड में रात में यातायात नहीं चलता, इसलिये यहाँ बस सेवायें सीमित मात्रा में ही हैं।
  • मई – जून में केदारनाथ धाम के यात्रा के लिये पर्याप्त मात्रा में हरिद्वार और ऋषिकेश से बसों का संचालन किया जाता है लेकिन फिर भी आप को सलाह दी जाती है बसों की बुकिंग पहले ही ऑनलाइन कर लें क्योंकि इन दो महीनों में यहाँ बहुत ज़्यादा भीड़ हो जाती है।
  • यदि आप सार्वजनिक परिवहन से यात्रा करना चाहते हैं तो उत्तराखण्ड परिवहन की बसें सबसे बेहतर हैं किन्तु वे सीमित मात्रा में ही उपलब्ध हैं। इसलिये प्राइवेट बसें भी बहुत अच्छा विकल्प है। इनके अतिरिक्त आप टैक्सी / टैम्पो ट्रैवलर भी बुक कर सकते हैं। यदि आप अपने वाहन द्वारा जा रहें हैं तो बहुत ही अच्छा।
  • चाहे आप कोई भी गाड़ी बुक करें या सार्वजानिक परिवहन अपनायें, वह आपको सोनप्रयाग तक ही लेकर जायेगा। उससे आगे बाहर के वाहन प्रतिबंधित हैं।
  • गौरीकुण्ड से केदारनाथ धाम की पैदल यात्रा आरंभ होती है। सोनप्रयाग से गौरीकुण्ड Sonprayag to Gaurikund की दूरी 5 किलोमीटर है जिसे आप शेयर्ड टैक्सी द्वारा मात्र 20 रुपये में पूरा कर सकते हैं।
  • ध्यान दें की सोनप्रयाग और उससे आगे नेटवर्क की विशेष समस्या है। इसलिये यदि आप बस से जा रहे हैं तो पहले ही टिकट ऑनलाइन करवा ही लें। टिकट बुक करवाने के लिये लिंक है https://utconline.uk.gov.in/ । वैसे प्राइवेट बसें भी चलती रहती हैं और उनकी ऑनलाइन बुकिंग नहीं होती।
  • यदि आप अपने वाहन से जा रहे हैं तो तो पहाड़ी मार्गों पर विशेष ध्यान रखें और यदि आप पहाड़ी मार्गों पर गाड़ी चलाने के अभ्यस्त नहीं तो बेहतर होगा की एक किसी स्थानीय ड्राइवर को किराये पर ले लें।
  • यदि आपके साथ बुज़ुर्ग भी हैं तो बेहतर रहेगा की एक दिन पहले ही हरिद्वार / ऋषिकेश पहुँच कर आराम करें और अगले दिन यात्रा आरम्भ करें। हरिद्वार और ऋषिकेश में पर्याप्त मात्रा में होटल और धर्मशालायें उपलब्ध हैं। एक विकल्प रेलवे स्टेशन स्थित रिटायरिंग रूम भी है। रिटायरिंग रूम बुकिंग के लिये लिंक है https://www.rr.irctctourism.com/#/accommodation/in/ACBooklogin
  • पहाड़ों में AMS (Acute Mountain Sickness) की समस्या होना आम बात है। इसके लक्षण हैं बुखार, तेज़ बदन दर्द, खांसी, सर दर्द, उल्टी आदि। इसके लिये यात्रा आरंभ करने से कुछ दिन पहले शारीरिक गतिविधियों को बढ़ा दें जैसे की सुबह की सैर और कुछ व्यायाम और योग आदि। AMS से बचाव के लिये हमारा विस्तृत लेख यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं
  • यदि पहाड़ों से अच्छी ख़बरें नहीं आ रही हैं तो यात्रा पर निकलने से पहले सम्बंधित लोकल बॉडी, सरकारी एजेंसी या वहां के किसी होटल आदि से संपर्क कर के स्थिति के बारे में जानकारी ले लेना सही रहेगा। आज कल सभी सरकारी एजेंसियों और होटल आदि के संपर्क सूत्र गूगल पर उपलब्ध हैं।
  • गुप्तकाशी से सोनप्रयाग Guptkashi to Sonprayag तक का रास्ता बेहद खराब और खतरे से भरा है। अतः यदि आप अपने वाहन से जा रहे हैं तो कोशिश करें की वह छोटी कार न हो, अन्यथा फंसने के आसार बहुत ज़्यादा हैं।
  • यात्रा के दौरान अपना पहचान पत्र और पर्याप्त मात्रा में कैश रखें। हमेशा कैशलेस ट्रांसेक्शन और ए.टी.एम. के भरोसे रहना सही नहीं रहता। मोबाइल चार्ज करने के लिए पॉवर बैंक, और मोबाइल में पर्याप्त बैलेंस भी रखें। साथ ही आवश्यक कांटेक्ट नंबर्स किसी डायरी में लिख कर रखें।
  • यात्रा के दौरान स्थानीय लोगों के संपर्क में रहें और आगे की स्थिती की जानकारी लेते रहें। किसी भी दुर्घटना या प्राकृतिक आपदा की स्थिती में पुलिस का आदेश माने।
  • केदारनाथ धाम Kedarnath की पैदल यात्रा बहुत कठिन है। इस मार्ग पर आप अपना शरीर संभाल लें वही बहुत है। 10 वर्ष से छोटे बच्चों को न लेकर जायें और यदि आप के साथ 50 वर्ष से ऊपर के बुजुर्ग हैं तो खच्चर या पालकी अवश्य कर लें। 70 वर्ष से ऊपर के बुजुर्ग यदि किसी विशेष शारीरिक समस्या से ग्रसित हैं तो न ही जायें तो बेहतर है।
  • पानी और हल्का – फुल्का खाने का सामान जैसे की मेवे, बिस्किट, भुने चने, चिप्स, नमकीन आदि अपने पास अवश्य रखें।
  • पूरे पैदल यात्रा मार्ग पर बारिश होती ही रहती है। अतः एक अच्छी गुणवक्ता का रैनकोट अवश्य ले जायें, वैसे रैनकोट सोनप्रयाग में भी मिल जाता है लेकिन वहां महंगे और खराब गुणवक्ता के रैनकोट मिलने के आसार अधिक रहते हैं। छाता भी होना चाहिये।
  • यात्रा में तबियत बिगड़ना स्वाभाविक है। इसलिये कुछ आवश्यक दवायें अवश्य साथ रखें।
  • छाता/ रेनकोट, टॉर्च को अपने बैग में अवश्य स्थान दें।
  • यात्रा का पंजीकरण गुप्तकाशी और सोनप्रयाग में होता है।
  • केदारनाथ धाम की पैदल यात्रा में लगभग 7 से 10 घंटे लग जाते हैं। अतः आप सुबह जितनी जल्दी हो सके यात्रा आरंभ कर दें।
  • होटल ऑनलाइन न बुक करें। ऑनलाइन की अपेक्षा रियल टाइम बुकिंग सबसे बेहतरीन विकल्प है और यह सस्ता भी पड़ता है। (रेलवे का रिटायरिंग रूम पहले ही बुक करना पड़ता है और यह केवल रेल से हरिद्वार आने वालों को ही मिलता है।)
  • केदारनाथ धाम की यात्रा पर अंतिम बड़ा शहर सोनप्रयाग Sonprayag ही है। अपनी अवश्यकताओं का सामान यहीं से खरीद लें।
  • चारो धामों के गर्भ गृह में रुकने के लिये आपको अधिक समय नहीं मिलेगा, इसलिये जितना भी समय मिले आप अपना ध्यान भगवान पर ही केंद्रित करें। वैसे आप स्वयं भी पूजा कर सकते हैं किंतु भीड़ इतनी अधिक होगी की जब तक आप कुछ समझ पायें शायद आपको बाहर कर दिया जाये। अतः वहां किसी पंडित से बात कर लें, वह कुछ दक्षिणा (लगभग 100 रुपये) लेकर आपको ज्योतिर्लिंग के समक्ष बैठा कर विधिवत पूजा करवा देगा। वैसे भी पंडित यहाँ के स्थानीय होते हैं और भीड़ को संभालने उन्हें अनुभव अच्छा होता है।
  • आपको कैमरा और मोबाइल ले जाने से कोई मना नहीं करेगा लेकिन मंदिर में फ़ोन और कैमरा का इस्तेमाल न कर मंदिर की गरिमा बनाये रखें।
  • पहाड़ों में कहीं भी आने – जाने के लिये गाड़ी सुबह ही मिलती है। इसलिये रात में जल्दी सोयें और सुबह जल्दी उठें।
  • यात्रा के दौरान हल्का भोजन करें। तले – भुने से परहेज करें।
  • उत्तराखण्ड में पॉलीथिन पर पूर्ण प्रतिबंध लग चुका है। यद्धपि दुकान वाले रीसाइकल्ड थैलियां देते हैं किंतु उसके भरोसे अधिक न रहें।
    यात्रा के दौरान किसी भी तरह का नशे जैसे की बीड़ी, शराब और सिगरेट आदि का सेवन न करें। यह आपको समस्या में तो डाल  सकते हैं।
  • ध्यान दें की आप केदारनाथ धाम की यात्रा पर हैं, किसी पिकनिक पर नहीं। इसलिये धामों की गरिमा बनाये रखें।

कब जायें ? Best time to visit Kedarnath

केदारनाथ यात्रा जाने के लिये उपयुक्त समय को हम दो भागों में बाट सकते हैं –
पहला : मई – जून अथार्त गर्मी की छुट्टियों का महीना।
दूसरा : सितम्बर से कपाट बंद होने तक का समय (अक्टूबर / नवंबर)।

मई में बच्चों के साथ – साथ बहुत से लोगों की छुट्टियां होती हैं इसलिए बहुत से यात्री मई – जून में जाना चाहते हैं लेकिन यदि बच्चे आपकी यात्रा का भाग नहीं हैं तो बेहतर है की आप अगस्त के बाद ही जायें। ध्यान दें की 10 वर्ष से नीचे के बच्चों को न ले जायें तो बेहतर है।

क्यों ?

मई – जून में चारो धामों और उनके यात्रा मार्ग पर बहुत ज़्यादा भीड़ हो जाती है। दर्शनों की पंक्ति इतनी लम्बी हो जाती है की कभी – कभी तो आपको 6 – 7 घंटे पंक्ति में ही खड़े रहना पड़ सकता है।
आधे रास्ते तक तो आपको गर्मी से मुक्ति मिलेगी ही नहीं मौसम दिल्ली जैसा ही होगा। ऊपर से आल वेदर रोड निर्माण के कारण जगह – जगह रास्ते ख़राब होने से लम्बा जाम मिलेगा।
भीड़ के कारण सब – कुछ महंगा ही मिलेगा, होटलों का किराया आम दिनों की तुलना में दोगुना हो जाता है, भोजन महंगा हो जाता है, कई बार तो होटलों में जगह भी नहीं मिलती।
इन्ही सब बातों को ध्यान में रखते हुए सितम्बर से कपाट बंद होने तक का समय बेहतरीन है यात्रा के लिये। इस समय भीड़ नहीं के बराबर मिलेगी, होटल सस्ते मिलेंगे और दर्शनों के लिये लम्बी पंक्तियों में नहीं लगना पड़ता। इन महीनो में तो, बदरीनाथ में तो आप दिन में कई बार दर्शन भी कर सकते हैं।

क्या पंजीकरण अनिवार्य है ? Is registration mandatory to visit Kedarnath ?

जी हाँ, यदि केदारनाथ धाम की ही की यात्रा कर रहे हैं, तो पंजीकरण अनिवार्य है, विशेषकर मई और जून के महीने में तो यह बिलकुल अनिवार्य है। यह आप की भलाई के लिये ही है। (वैसे जून के बाद यात्रा बिना पंजीकरण के भी संभव है और यह मेरा निजी अनुभव कहता है क्योंकि वहां कोई भी इसके लिये नहीं पूछता)। यात्रा का पंजीकरण ऋषिकेश, गुप्तकाशी और सोनप्रयाग में करवाया जा सकता है।

रहने की सुविधा ? Stay in Kedarnath 

Stay in Kedarnath
Stay in Kedarnath

गुप्तकाशी, सोनप्रयाग और गौरीकुण्ड जैसे कस्बों में तो बड़े – बड़े आश्रम, धर्मशाला, होटल, लॉज, गेस्ट हाउस आदि की सुविधा उपलब्ध है ही। केदारनाथ धाम में भी होटल, धर्मशाला और टेंट आदि की सुविधा उपलब्ध है। यदि आप का बजट थोड़ा भी कम है तो किसी आश्रम या धर्मशाला में ही ठहरें। वैसे केदारनाथ धाम में डोरमेट्री भी उपलब्ध है। अकेले यात्रियों के लिये डोरमेट्री (Dormitory in Kedarnath) सर्वोत्तम विकल्प है।

क्या केदारनाथ धाम यात्रा सुरक्षित है ? Is Kedarnath trip safe ?

उत्तराखण्ड राज्य को 2013 में भयंकर त्रासदी का सामना करना पड़ा था जिसके कारण केदारनाथ और यमुनोत्री धामों में भयानक तबाही हुई थी। लेकिन अब सरकार और प्रशाशन पूरी तरह सचेत है। सरकार ने सुरक्षित यात्रा करवाने के लिये समुचित प्रबंध किये हैं। पैदल मार्ग पर लाइट, रेन शेड, बैठने के लिये बेंच, 2 स्थानों पर वाई – फाई जोन और जगह – जगह मेडिकल यूनिट तैनात है। फिर भी यदि आप परिवार के साथ हैं तो मानसून में यात्रा न करें तो बेहतर है।

किराया ? Fare ?

ऋषिकेश से सोनप्रयाग तक बस का किराया 300 रुपये है और सोनप्रयाग से गौरीकुण्ड तक शेयर्ड टैक्सी का किराया 20 रुपये। किराये में बदलाव संभव है। आप उत्तराखण्ड परिवहन निगम की बस की बुकिंग ऑनलाइन https://utconline.uk.gov.in/ पर करवा सकते हैं। कॉल करने के लिये नंबर है +91 8476007605 ।

रहने-खाने का अनुमानित व्यय Approximate expense of stay and food in Kedarnath trip

केदारनाथ धाम यात्रा मार्ग में तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए सैकड़ों होटल, धर्मशालाएं, रेस्तरां और ढाबे हैं। अकेले व्यक्ति को सिंगल बेड 500 से 750 रुपये तक में मिल सकता है और यदि परिवार के साथ हैं तो 800 से 5000 रुपये तक प्रतिदिन के हिसाब कमरा मिल सकता है। डोरमेट्री का किराया 250 रुपये है। खाने की थाली लगभग 100 रुपये, पराठे 80 रुपये में मिल जाते हैं। मई से जून तक चार यात्रा पीक पर होती है। इस दौरान कमरों की भारी मांग के चलते ठहरने का खर्च घट – बढ़ भी सकता है । मेरी व्यक्तिगत सलाह है की आप सितम्बर – अक्टूबर में जायें तो अधिक अच्छा रहेगा क्योंकि उस समय न तो भीड़ होगी, दर्शन बहुत आराम से होंगे, खर्च भी कम होगा।

बुकिंग कहाँ करायें ? How to book hotel in Kedarnath

गढ़वाल मंडल विकास निगम GMVN के पास केदारनाथ यात्रा में होटल, बंगले, कैंटीन से लेकर टूर पैकेज तक की जिम्मेदारी रहती है। इसके लिए देश-विदेश के पर्यटक ऑनलाइन और निगम के पीआरओ के माध्यम से बुकिंग कराते हैं।

श्रद्धालु ऑनलाइन भी बुकिंग www.gmvnl.in पर कर सकेंगे। इसमें निगम के बंगलों, टेंट कॉलोनी, हट्स, कैंटीन, वाहन, ट्रेकिंग आदि की बुकिंग भी की जा सकती है। श्रद्धालु gmvn@gmvnl.in पर ईमेल भेज कर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और 0135-2747898 पर कॉल भी कर सकते हैं।

वैसे मेरी सलाह यही है की आप होटल आदि की एडवांस बुकिंग के चक्कर में न पड़ें। वहां सस्ते होटल आदि रियल टाइम पर भी मिल जाते हैं और यात्रा का यही माध्यम सस्ता और अच्छा भी है।

View from Bhimbali Bridge
View from Bhimbali Bridge

केदारनाथ धाम यात्रा का रूट का सर्वश्रेष्ठ रूट Best route to visit Kedarnath

हरिद्वार – ऋषिकेश – देवप्रयाग – कीर्तिनगर – श्रीनगर – रुद्रप्रयाग – तिलवाड़ा – अगत्स्यमुनि – कुण्ड – गुप्तकाशी – फाटा – सोनप्रयाग – गौरीकुण्ड – गौरीकुण्ड से पैदल मार्ग आरंभ होता है।

यात्रा में दर्शनीय स्थल Places to visit near Kedarnath route

ऋषिकेश : Rishikesh गंगा नदी के किनारे बसा पवित्र धार्मिक शहर जिसे ऋषियों की भूमि के रूप में भी जाना जाता है।
देवप्रयाग : Devprayag भागीरथी और अलकनंदा का संगम स्थल जहाँ से भागीरथी को गंगा के नाम से जाना जाता है।
धारी देवी मंदिर : Dhari Devi Temple गढ़वाल के सबसे बड़े शहर श्री नगर में स्थित एक प्रसिद्द मंदिर, उत्तराखण्ड में आयी आपदा को माता के क्रोध का परिणाम माना जाता है।
रूद्रप्रयाग : Rudrapryag मंदाकिनी और अलकनंदा का संगम और एक प्रसिद्ध तीर्थ। यहाँ से केदारनाथ और बदरीनाथ का रास्ते अलग हो जाते हैं।
गुप्तकाशी : Guptkashi भगवान शिव को समर्पित एक प्रसिद्ध शहर। यहाँ गुप्तेश्वर / गुप्तनाथ महादेव का मंदिर है। केदारनाथ जाने वाले ज़्यादातर यात्री यहाँ एक रात रुकते हैं। यहाँ एक बड़ा बस अड्डा भी है जहाँ से हरिद्वार, देहरादून आदि के लिये बस चलती हैं।
सोनप्रयाग : Sonprayag मंदाकिनी के किनारे बसा एक छोटा सा क़स्बा और मंदाकिनी – वासुकिगंगा का संगम।
त्रियुगीनारायण : Triyuginarayan भगवान शिव और माता पार्वती की विवाह स्थली।
गौरी कुंड : Gaurikund केदारनाथ यात्रा के लिये बेस कैंप

केदारनाथ कैसे पहुंचे ? How to reach Kedarnath 

सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है की कैसे पहुँचे ? यह यात्रा उच्च पहाड़ी क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। यहाँ हम आपको चार तरह से पहुँचने के तरीकों के बारे में बताने जा रहे हैं –

  • अपना वाहन जैसे की कार और बाइक।
  • सार्वजानिक वाहन जैसे की बस और शेयर्ड टैक्सी।
  • निजी रूप से बुक करवाया गया वाहन जैसे की कार, टैम्पो ट्रैवेलर आदि।
  • हेलीकॉप्टर सेवा।

यहाँ हम हरिद्वार को आधार मान कर चल रहे हैं।

अपने वाहन जैसे की कार / बाइक द्वारा यात्रा How to reach Kedarnath by private vehicle ? 

पहला दिन (हरिद्वार – सोनप्रयाग, 276 किलोमीटर) 

हरिद्वार – ऋषिकेश – ब्यासी – देवप्रयाग – श्रीनगर – रुद्रप्रयाग – तिलवाड़ा – अगत्स्यमुनि – कुण्ड – गुप्तकाशी – फाटा – सोनप्रयाग
आज आपको हरिद्वार से सोनप्रयाग पहुंचना है। हरिद्वार, श्रीनगर, गुप्तकाशी और सोनप्रयाग इस मार्ग के बड़े शहर हैं जहाँ आपको आवश्यकता की सभी वस्तुएं मिल सकती हैं। चार धाम परियोजना के कारण रुद्रप्रयाग से आगे मार्ग ख़राब मिल सकता और गुप्तकाशी से सोनप्रयाग का मार्ग तो ख़राब मिलेगा ही। इसिलये सावधांनी से जायें। रुद्रप्रयाग शहर से पहले ही मार्ग दो भागों में बट जाता है। सीधा बद्रीनाथ चला जाता है और बायी ओर जाता मार्ग केदारनाथ की ओर। एक बात और, यदि आप सोनप्रयाग शाम सात बजे तक पहुँच जाते हैं, तो आज ही यात्रा पंजीकरण करवा लें ताकि अगली सुबह समय व्यर्थ न हो।

दूसरा दिन (सोनप्रयाग – गौरीकुण्ड 5 किलोमीटर शेयर्ड टैक्सी द्वारा, गौरीकुण्ड से 19 किलोमीटर की पैदल यात्रा केदारनाथ तक)
यदि पिछली रात पंजीकरण करवा लिया है तो ठीक, अन्यथा शीघ्र ही पंजीकरण करवा कर यात्रा आरम्भ कर दें शाम तक केदारनाथ धाम पहुँच जायें। खच्चर और पालकी आदि की भी व्यवस्था उपलब्ध है। आज आपको केदारनाथ में ही रुकना होगा, रुकने के लिये भरपूर व्यवस्था उपलब्ध है।

तीसरा दिन (केदारनाथ – गौरी कुण्ड पैदल यात्रा 19 किलोमीटर, गौरी कुण्ड – सोनप्रयाग 5 किलोमीटर शेयर्ड टैक्सी द्वारा, सोनप्रयाग – गुप्तकाशी 40 किलोमीटर अपनी गाड़ी द्वारा)
केदारनाथ – गौरीकुण्ड – सोनप्रयाग – गुप्तकाशी
सुबह शीघ्र उठें और बाबा केदारनाथ के दर्शन करें। यदि आप सुबह 8 बजे तक भी दर्शन कर लें तो शाम तक गुप्तकाशी पहुँच सकते हैं। आज आप गुप्तकाशी में रुकें।

चौथा दिन (गुप्तकाशी – हरिद्वार 206 किलोमीटर – और आपका गंतव्य)
गुप्तकाशी – कुण्ड – अगत्स्यमुनि – तिलवाड़ा – रुद्रप्रयाग – श्रीनगर – देवप्रयाग – ब्यासी – ऋषिकेश – हरिद्वार
आज आप गुप्तकाशी से सुबह ही निकल लें तो शाम चार बजे तक हरिद्वार पहुँच सकते हैं। वैसे कुछ यात्री वापसी में ऋषिकेश में भी कुछ समय बिताना चाहते हैं तो, वापसी में रामझूला से 100 मीटर पहले एक पार्किंग हैं वहां गाड़ी खड़ी करके ऋषिकेश के सैर कर सकते हैं। वैसे भी शाम के समय ऋषिकेश में स्नान का अलग ही आनंद है लेकिन ऋषिकेश में अधिक समय न बितायें क्योंकि शाम के समय ऋषिकेश – हरिद्वार हाईवे पर भयंकर यातायात मिलता है।

सार्वजनिक परिवहन (बस, शेयर्ड टैक्सी) द्वारा यात्रा How to reach Kedarnath by bus ?

सार्वजनिक परिवहन द्वारा यात्रा करने से पहले यह जान लेना आवश्यक है की बसों और टैक्सी आदि की व्यस्था कैसी है उत्तराखण्ड में ?
मई – जून में सभी धामों के लिये सरकार बसों का संचालन करती है। हरिद्वार और ऋषिकेश से सोनप्रयाग के बीच सरकारी बसों की उपलब्धता है। किन्तु मई – जून में यात्रियों की भारी संख्या होने के कारण आप को उत्तराखण्ड परिवहन की बस मिल ही जाये, इसकी गारंटी नहीं। आप https://utconline.uk.gov.in/ पर क्लिक करके ऑनलाइन बुकिंग सकते हैं।

प्राइवेट बसें आपको निराश नहीं करेंगी और पर्याप्त मात्रा में हरिद्वार और ऋषिकेश से सोनप्रयाग के बीच उपलब्ध होती हैं। किन्तु ध्यान दें की बसें सुबह (लगभग 7 बजे तक) ही मिलती हैं।

पहला दिन (हरिद्वार – सोनप्रयाग, 276 किलोमीटर)
हरिद्वार – ऋषिकेश – ब्यासी – देवप्रयाग – श्रीनगर – रुद्रप्रयाग – तिलवाड़ा – अगत्स्यमुनि – कुण्ड – गुप्तकाशी – फाटा – सोनप्रयाग
आज आपको हरिद्वार / ऋषिकेश से सोनप्रयाग पहुंचना है। हरिद्वार, ऋषिकेश, श्रीनगर, गुप्तकाशी और सोनप्रयाग इस मार्ग के बड़े शहर हैं जहाँ आपको आवश्यकता की सभी वस्तुएं मिल सकती हैं। यदि आप सोनप्रयाग शाम सात बजे तक पहुँच जाते हैं, तो आज ही यात्रा पंजीकरण करवा लें ताकि अगली सुबह समय व्यर्थ न हो।

दूसरा दिन (सोनप्रयाग – गौरीकुण्ड 5 किलोमीटर शेयर्ड टैक्सी द्वारा, गौरीकुण्ड से 19 किलोमीटर की पैदल यात्रा केदारनाथ तक)
यदि पिछली रात पंजीकरण करवा लिया है तो ठीक, अन्यथा शीघ्र ही पंजीकरण करवा कर यात्रा आरम्भ कर दें शाम तक केदारनाथ धाम पहुँच जायें। खच्चर और पालकी आदि की भी व्यवस्था उपलब्ध है। आज आपको केदारनाथ में ही रुकना होगा, रुकने के लिये भरपूर व्यवस्था उपलब्ध है।

तीसरा दिन (केदारनाथ – गौरी कुण्ड पैदल यात्रा 19 किलोमीटर, गौरी कुण्ड – सोनप्रयाग 5 किलोमीटर शेयर्ड टैक्सी द्वारा)
केदारनाथ – गौरीकुण्ड – सोनप्रयाग)
सुबह शीघ्र उठें और बाबा केदारनाथ के दर्शन करें। यदि आप सुबह 8 बजे तक भी दर्शन कर लें तो शाम तक 4 बजे तक सोनप्रयाग पहुँच सकते हैं। सोनप्रयाग से गुप्तकाशी के लिये बसें और टैक्सियां दोपहर तक ही मिलती हैं, इसलिये आज आपको सोनप्रयाग में ही रुकना पड़ेगा।

चौथा दिन (सोनप्रयाग – हरिद्वार 276 किलोमीटर – और आपका गंतव्य)
सोनप्रयाग – गुप्तकाशी – कुण्ड – अगत्स्यमुनि – तिलवाड़ा – रुद्रप्रयाग – श्रीनगर – देवप्रयाग – ब्यासी – ऋषिकेश – हरिद्वार
सोनप्रयाग से हरिद्वार की बस सुबह ही मिलती है। अतः सुबह जल्दी उठ कर बस पकड़ लें। यह आपको शाम 5 – 6 बजे तक हरिद्वार पहुंचा देगी। हरिद्वार से दिल्ली और अन्य शहरों के लिये रात 11 बजे तक बसें मिलती रहती हैं।

निजी रूप से बुक करवाये गये वाहन जैसे की कार, टैम्पो ट्रैवेलर आदि द्वारा यात्रा How to book car or tempo traveler to visit Kedarnath ?

यह यात्रा भी ऊपर दिये गये मार्गों से ही होकर ही गुजरेगी और उतना ही समय लगेगा। हरिद्वार, ऋषिकेश में बहुत एजेंट हैं जो की आपकी यात्रा का प्रबंध कर देंगे। आप को उनकी जानकारी गूगल पर भी मिल जायेगी।

हेलीकॉप्टर सेवा How to book helicopter to visit Kedarnath ?

यदि आप केदारनाथ धाम हेलीकाप्टर से जाना चाहते हैं तो आपको फाटा से हेलीकाप्टर मिल जायेंगे। इनकी बुकिंग एजेंट के माध्यम से और डायरेक्ट भी (वहीं पर) होती है।

इस लेख में केदारनाथ यात्रा से सम्बंधित सभी जानकारियां देने का प्रयास किया गया है। यदि आपके मन में कोई प्रश्न है तो कमेंट बॉक्स में अवश्य लिखें।

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