Char Dham Trip Guide चार धाम यात्रा गाइड

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गर्मियाँ शुरू हो गयी हैं और बहुत से लोग कहीं बाहर यात्रा पर जाने की योजना बना रहे होंगे। ऐसी ही यात्राओं में से एक है उत्तराखण्ड के चार धाम की यात्रा। प्रति वर्ष उत्तराखण्ड में 6 माह तक चार धाम यात्रा का संचालन होता है और इस वर्ष भी 7 से 10 मई के बीच चारो धामों के कपाट खुलने जा रहे हैं। यदि आप भी यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ यात्रा का पुण्य कमाना चाहते हैं और प्रकृति के अद्भुत नज़ारे देखना चाहते हैं तो यह लेख आपके लिये ही है।

इस लेख में चारो धाम शामिल होने के कारण यह लेख बहुत बड़ा हो गया है। इसलिए आप अपनी इच्छानुसार नीचे दिये गये किसी भी लिंक पर क्लिक करके अपनी आवश्यकता वाला भाग पढ़ सकते हैं।

आगे बढ़ने से पहले जान लेते हैं इन धामों का महात्मय।

यमुनोत्री धाम

Yamunotri, Image source: Google Image
Yamunotri, Image source: Google Image

यमुनोत्री धाम गढ़वाल मंडल के उत्तरकाशी जिले में समुद्र तल से 3235 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और यह देवी यमुना को समर्पित है। यहाँ यम देव के साथ देवी यमुना की एक पाषाण प्रतिमा मंदिर में सुशोभित है। पुराणों के अनुसार यम देव, देवी यमुना के बड़े भाई हैं। इस धाम की यात्रा तो हजारों वर्षों से होती आ रही है लेकिन वर्तमान मंदिर जयपुर की महारानी गुलेरिया देवी द्वारा 19 वीं सदी में बनवाया गया था।

मंदिर के कपाट (द्वार) अक्षय तृतीया (अप्रैल अंत / मई आरम्भ) के दिन खुलते हैं और भैया दूज (दीवाली के बाद दूसरे दिन) बंद होते हैं।

यमुनोत्री के मुख्य आकर्षण गर्म जल के कुंड अर्थात् सूर्य कुंड और गौरी कुंड हैं। यमुना नदी का उद्गम स्थल अथार्त यमुनोत्री ग्लेशियर यहाँ से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। शीतकाल में माता की पूजा खरसाली में होती है।

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गंगोत्री धाम

Gangotri Temple

गंगोत्री धाम भागीरथी नदी के तट पर स्थित है। समुद्र तल से 3150 मीटर की ऊंचाई पर यह मंदिर माँ गंगा को समर्पित है। गंगा नदी का उद्गम स्थल गोमुख यहाँ से 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है किन्तु पूजा आदि कार्य गंगोत्री में ही संपन्न किये जाते हैं। वर्तमान मंदिर की स्थापना गोरखा जनरल अमर सिंह थापा द्वारा 18 वीं सदी में की गयी थी। भारी बर्फबारी के कारण यह धाम सर्दियों के दौरान बंद रहता है।

मंदिर में दर्शन अक्षय तृतीया (अप्रैल अंत / मई आरम्भ) से भैया दूज (दीवाली के बाद दूसरे दिन) तक किये जा सकते हैं। शीतकाल में माता की पूजा हर्षिल के समीप मुखबा में होती है।

गंगोत्री धाम के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें।

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केदारनाथ धाम

Kedarnath, Image source: Google Image
Kedarnath, Image source: Google Image

श्री केदारनाथ को भगवान शिव को पांचवे ज्योतिर्लिंग के रूप में जाना जाता है। इसके अतिरिक्त यह धाम पञ्च केदारों में प्रथम भी है। यहाँ पहुँचने के लिए लगभग 22 किलोमीटर की एक दुर्गम पैदल यात्रा करनी होती है जो की हिमालय की सुन्दर वादियों से होकर जाती है।

केदारनाथ धाम की स्थापना सर्वप्रथम पांडवों द्वारा की गयी थी और वर्तमान मंदिर आठवीं शताब्दी में आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा बनवाया गया है। महाभारत युद्ध में के बाद युधिष्ठिर हस्तिनापुर के राजा बने। कई वर्षों तक सफ़लतापूर्व शाशन करने के बाद पांडवों और द्रौपदी ने सन्यास के लिए हिमालय प्रयाण किया। हिमालय क्षेत्र में एक स्थान पर भगवान शिव खड़े थे जिन्होनें पांडवों को देख लिया। वे जानते थे पांडवों ने कोई वर मांग लिया तो वे मना नही कर सकते, इसलिए उन्होंने भैंसे का रूप बना कर भागना शुरू कर दिया किन्तु भीम ने उन्हें देख लिया था। शिव जी का मार्ग अवरुद्ध करने के लिए एक स्थान पर भीम दो चट्टानों पर पैर फैला कर खड़े हो गए। भैंसे रुपी शिव जी ऐसा देख कर धरती में समा गये। कुछ समय बाद उनके शरीर के विभिन्न अंग हिमालय में अलग – अलग स्थानों पर प्रकट हुए। उन स्थानों को पञ्च केदारों के नाम से जाना गया। इस प्रकार भगवान की पूजा रुद्रनाथ में मुख, केदारनाथ में पृष्ठ भाग, मध्य महेश्वर में उदर (पेट), कल्पेशर में जटायें और तुंगनाथ में भुजा के रूप में होती हैं।

केदारनाथ धाम के कपाट अक्षय तृतीया पर या उसके दो दिन बाद खुलते हैं और दीवाली के बाद भैया दूज पर बंद हो जाते हैं। शीतकाल में केदारनाथ भगवान की पूजा ऊखीमठ के ओम्कारेश्वर मंदिर में होती है।

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बदरीनाथ धाम

Badrinath
Badrinath

श्री बद्रीनाथ धाम जिसे भू-वैकुण्ठ भी कहा जाता है, चमोली जिले में समुद्र तल से 3133 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। वैसे तो भगवान का स्नेह सभी मनुष्यों पर हमेशा ही बना रहता है लेकिन भौतिक रूप से श्री बद्रीनाथ धाम वर्ष में केवल छः महीनें (अक्षय तृतीया से भैया दूज के कुछ दिन बाद तक) तक ही खुला रहता है। सनातन धर्म में इसे सर्वोच्च धाम का दर्जा भी प्राप्त है। भारत के चार प्रमुख धामों में यह धाम प्रथम है।

मंदिर परिसर में कुल 15 प्रतिमायें हैं जिनमें प्रमुख है भगवान् बद्रीनाथ जी की शालिग्राम प्रतिमा। इस प्रतिमा को आठवीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य द्वारा नारद कुण्ड से निकाल कर स्थापित किया गया था। शीतकाल में भगवान बदरीनाथ की पूजा जोशीमठ में होती है।

बदरीनाथ धाम के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें।

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अब आते हैं इन चारों धामों की यात्रा पर जो की इस वर्ष 7 मई शुरू हो रही है। वर्ष 2019 में चारो धामों के कपाट खुलने और बंद होने की तिथियां इस प्रकार है।

यमुनोत्री
कपाट खुलने की तिथी : 7 मई 2019
कपाट बंद होने की तिथी : 27 अक्टूबर 2019

गंगोत्री
कपाट खुलने की तिथी : 7 मई 2019
कपाट बंद होने की तिथी : 27 अक्टूबर 2019

केदारनाथ
कपाट खुलने की तिथी : 9 मई 2019
कपाट बंद होने की तिथी : 27 अक्टूबर 2019

बदरीनाथ
कपाट खुलने की तिथी : 10 मई 2019
कपाट बंद होने की तिथी : 9 नवंबर 2019

इन्ही तिथियों के अनुसार आप यात्रा पर जायें।

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यात्रा से जुडी महत्वपूर्ण जानकारियाँ

  • यदि आप चार धामों में से किसी एक या दो धाम की यात्रा पर जाना चाहते हैं तो किसी भी धाम से यात्रा आरम्भ कर सकते हैं किन्तु यदि आप चारो धाम की यात्रा करना चाहते हैं तो यात्रा का क्रम यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और फिर बदरीनाथ ही होना चाहिये।
  • चार धाम की यात्रा एक लम्बे समय तक चलने वाली यात्रा है जो की 11 दिनों तक चलती है और यदि कोई समस्या या आपदा आ जाये तो और दिन भी लग सकते हैं। इसलिये अपने मन को पहले से स्थिर कर के चलें। किसी प्रकार की हड़बड़ी बिलकुल ठीक नहीं।
  • यात्रा आप देहरादून से भी शुरू कर सकते हैं और हरिद्वार/ ऋषिकेश से भी लेकिन हरिद्वार ही बेहतर है। चार धाम की यात्रा हरिद्वार में गंगा स्नान करके आरम्भ करें तो सबसे अच्छा।
  • ऐसी लम्बी यात्राओं में जो सबसे पहली और बड़ी समस्या सामने आती है, वो है यातायात के साधनों की। दिल्ली से हरिद्वार और ऋषिकेश के लिये पर्याप्त मात्रा में बसें उपलब्ध हैं। रेल यात्री रेल द्वारा हरिद्वार पहुँच सकते हैं।
  • हरिद्वार और ऋषिकेश दोनों ही शहरों से श्री बद्रीनाथ धाम के लिये सुबह बसें चलती हैं। चूँकि उत्तराखण्ड में रात में यातायात नहीं चलता, इसलिये यहाँ बस सेवायें सीमित मात्रा में ही हैं।
  • मई – जून में चारो धामों के लिये पर्याप्त मात्रा में हरिद्वार और ऋषिकेश से बसों का संचालन किया जाता है लेकिन फिर भी आप को सलाह दी जाती है बसों की बुकिंग पहले ही ऑनलाइन कर लें क्योंकि इन दो महीनों में यहाँ बहुत ज़्यादा भीड़ हो जाती है।
  • यदि आप सार्वजनिक परिवहन से यात्रा करना चाहते हैं तो उत्तराखण्ड परिवहन की बसें सबसे बेहतर हैं किन्तु वे सीमित मात्रा में ही उपलब्ध हैं। इसलिये प्राइवेट बसें भी बहुत अच्छा विकल्प है। इनके अतिरिक्त आप टैक्सी / टैम्पो ट्रैवलर भी बुक कर सकते हैं। यदि आप अपने वाहन द्वारा जा रहें हैं तो बहुत ही अच्छा।
  • ध्यान दें की इन चारो धामों में इंटरनेट की विशेष समस्या है। इसलिये यदि आप बस से जा रहे हैं तो पहले ही टिकट ऑनलाइन करवा ही लें। टिकट बुक करवाने के लिये लिंक है https://utconline.uk.gov.in/
  • यदि आप अपने वाहन से जा रहे हैं तो तो पहाड़ी मार्गों पर विशेष ध्यान रखें और यदि आप पहाड़ी मार्गों पर गाड़ी चलाने के अभ्यस्त नहीं तो बेहतर होगा की एक किसी स्थानीय ड्राइवर को किराये पर ले लें।
  • यदि आपके साथ बुज़ुर्ग भी हैं तो बेहतर रहेगा की एक दिन पहले ही हरिद्वार / ऋषिकेश पहुँच कर आराम करें और अगले दिन यात्रा आरम्भ करें। हरिद्वार और ऋषिकेश में पर्याप्त मात्रा में होटल और धर्मशालायें उपलब्ध हैं। एक विकल्प रेलवे स्टेशन स्थित रिटायरिंग रूम भी है। रिटायरिंग रूम बुकिंग के लिये लिंक है https://www.rr.irctctourism.com/#/accommodation/in/ACBooklogin
  • पहाड़ों में AMS (Acute Mountain Sickness) की समस्या होना आम बात है। इसके लक्षण हैं बुखार, तेज़ बदन दर्द, खांसी, सर दर्द, उल्टी आदि। इसके लिये यात्रा आरंभ करने से कुछ दिन पहले शारीरिक गतिविधियों को बढ़ा दें जैसे की सुबह की सैर और कुछ व्यायाम और योग आदि। AMS से बचाव के लिये हमारा विस्तृत लेख यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं।
  • यदि पहाड़ों से अच्छी ख़बरें नहीं आ रही हैं तो यात्रा पर निकलने से पहले सम्बंधित लोकल बॉडी, सरकारी एजेंसी या वहां के किसी होटल आदि से संपर्क कर के स्थिति के बारे में जानकारी ले लेना सही रहेगा। आज कल सभी सरकारी एजेंसियों और होटल आदि के संपर्क सूत्र गूगल पर उपलब्ध हैं।
  • यात्रा के दौरान अपना पहचान पत्र और पर्याप्त मात्रा में कैश रखें। हमेशा कैशलेस ट्रांसेक्शन और ए.टी.एम. के भरोसे रहना सही नहीं रहता। मोबाइल चार्ज करने के लिए पॉवर बैंक, और मोबाइल में पर्याप्त बैलेंस भी रखें। साथ ही आवश्यक कांटेक्ट नंबर्स किसी डायरी में लिख कर रखें।
  • यात्रा के दौरान स्थानीय लोगों के संपर्क में रहें और आगे की स्थिती की जानकारी लेते रहें। किसी भी दुर्घटना या प्राकृतिक आपदा की स्थिती में पुलिस का आदेश माने।
  • पानी और हल्का – फुल्का खाने का सामान जैसे की मेवे, बिस्किट, भुने चने, चिप्स, नमकीन आदि अपने पास अवश्य रखें। यात्रा में यदि छोटे बच्चें साथ हों तो दूध की समस्या होना स्वभाविक है। ऐसी स्थित में यदि किसी दुकान पर दूध मिल जाये तो बहुत अच्छा अन्यथा फ़्लेवर्ड मिल्क (अमूल, आनंदा आदि) भी सहायक है। इसे बच्चे पी भी लेते हैं, स्वाथ्य के लिये भी ठीक – ठाक हैं और यह लगभग सभी दुकानों पर उपलब्ध भी है। बेहतर होगा की आप 5 वर्ष से छोटे बच्चों को न ले जायें।
  • यात्रा में तबियत बिगड़ना स्वाभाविक है। इसलिये कुछ आवश्यक दवायें अवश्य साथ रखें। छाता/ रेनकोट, टॉर्च को अपने बैग में अवश्य स्थान दें।
  • यदि आप मई / जून के अतिरिक्त किसी और महीनें में जा रहें हैं तो होटल ऑनलाइन न बुक करें। ऑनलाइन की अपेक्षा रियल टाइम बुकिंग सबसे बेहतरीन विकल्प है और यह सस्ता भी पड़ता है। ( रेलवे का रिटायरिंग रूम पहले ही बुक करना पड़ता है और यह केवल रेल से हरिद्वार आने वालों को ही मिलता है।)
  • बहुत से यात्रियों की इच्छा चोपता जाने की भी होती है। यह विचार बहुत अच्छा है। केदारनाथ से बदरीनाथ जाते समय चोपता में एक दिन बिता सकते हैं।
  • अन्य तीन धामों की अपेक्षा बद्रीनाथ धाम किसी छोटे शहर जितना बड़ा है और यहाँ सभी सुविधायें जैसे की छोटे – बड़े होटल, हस्पताल, पुलिस थाना और एक बड़ा बाजार आदि उपलब्ध है। इसलिये इंटरनेट को छोड़ कर आपको कोई समस्या नहीं होगी।
  • चारो धामों में गरम पानी के कुण्ड है और इसके साथ ही गरम पानी के मुहाने भी बने हुए हैं। इसलिये बेहतर होगा की स्नान होटल की अपेक्षा तप्त कुण्ड में ही करें। इसका धार्मिक महत्त्व होने के साथ – साथ ही इस पानी में औषधीय गुण भी हैं।
  • चारो धामों के गर्भ गृह में रुकने के लिये आपको अधिक समय नहीं मिलेगा, इसलिये जितना भी समय मिले आप अपना ध्यान भगवान पर ही केंद्रित करें।
  • आपको कैमरा और मोबाइल ले जाने से कोई मना नहीं करेगा लेकिन मंदिर में फ़ोन और कैमरा का इस्तेमाल न कर मंदिर की गरिमा बनाये रखें।
  • यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और, बदरीनाथ में और उनके आस – पास बहुत से तीर्थ और दर्शनीय स्थान हैं। विशेषकर बदरीनाथ में तो बहुत से दर्शनीय स्थल हैं। इसलिये बद्रीनाथ क्षेत्र में कम से कम एक दिन अधिक तो रुकने का कार्यक्रम बना कर जायें। यहाँ आने वाले माणा गांव अवश्य जाते हैं। यदि आप भी माणा जा रहे हैं और कोई शारीरिक समस्या नहीं है तो माणा से वसुधारा झरने तक अवश्य जायें।
  • पहाड़ों में कहीं भी आने – जाने के लिये गाड़ी सुबह ही मिलती है। इसलिये रात में जल्दी सोयें और सुबह जल्दी उठें।
  • यात्रा के दौरान हल्का भोजन करें। तले – भुने से परहेज करें।
  • उत्तराखण्ड में पॉलीथिन पर पूर्ण प्रतिबंध लग चुका है। यद्धपि दुकान वाले रीसाइकल्ड थैलियां देते हैं किंतु उसके भरोसे अधिक न रहें।
  • यात्रा के दौरान किसी भी तरह का नशे जैसे की बीड़ी, शराब और सिगरेट आदि का सेवन न करें। यह आपको समस्या में तो डाल ही सकते हैं, साथ – साथ स्वास्थ्य जाँच में भी बाधा उत्पन्न कर सकते हैं।
  • ध्यान दें की आप चार धाम की यात्रा पर हैं, किसी पिकनिक पर नहीं। इसलिये धामों की गरिमा बनाये रखें।
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कब जायें ?

चार धाम यात्रा जाने के लिये उपयुक्त समय को हम दो भागों में बाट सकते हैं –
पहला : मई – जून अथार्त गर्मी की छुट्टियों का महीना।
दूसरा : सितम्बर से कपाट बंद होने तक का समय (अक्टूबर / नवंबर)।

मई में बच्चों के साथ – साथ बहुत से लोगों की छुट्टियां होती हैं इसलिए बहुत से यात्री मई – जून में जाना चाहते हैं लेकिन यदि बच्चे आपकी यात्रा का भाग नहीं हैं तो बेहतर है की आप अगस्त के बाद ही जायें।

क्यों ?

  • मई – जून में चारो धामों और उनके यात्रा मार्ग पर बहुत ज़्यादा भीड़ हो जाती है। दर्शनों की पंक्ति इतनी लम्बी हो जाती है की कभी – कभी तो आपको 6 – 7 घंटे पंक्ति में ही खड़े रहना पड़ सकता है।
  • आधे रास्ते तक तो आपको गर्मी से मुक्ति मिलेगी ही नहीं मौसम दिल्ली जैसा ही होगा। ऊपर से आल वेदर रोड निर्माण के कारण जगह – जगह रास्ते ख़राब होने से लम्बा जाम मिलेगा।
  • भीड़ के कारण सब – कुछ महंगा ही मिलेगा, होटलों का किराया आम दिनों की तुलना में दोगुना हो जाता है, भोजन महंगा हो जाता है, कई बार तो होटलों में जगह भी नहीं मिलती।
  • इन्ही सब बातों को ध्यान में रखते हुए सितम्बर से कपाट बंद होने तक का समय बेहतरीन है यात्रा के लिये। इस समय भीड़ नहीं के बराबर मिलेगी, होटल सस्ते मिलेंगे और दर्शनों के लिये लम्बी पंक्तियों में नहीं लगना पड़ता। इन महीनो में तो, बदरीनाथ में तो आप दिन में कई बार दर्शन भी कर सकते हैं।
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क्या पंजीकरण अनिवार्य है ?

जी हाँ, यदि आप चारो धाम या केवल केदारनाथ धाम की ही की यात्रा कर रहे हैं, तो पंजीकरण अनिवार्य है, विशेषकर मई और जून के महीने में तो यह बिलकुल अनिवार्य है। यह आप की भलाई के लिये ही है।

चार धाम यात्रा के लिये फोटो पहचान पत्र के साथ बायोमेट्रिक होता है और साथ – साथ स्वास्थ्य जाँच भी होती है। यात्रा का पंजीकरण हरिद्वार, ऋषिकेश के साथ 18 अन्य स्थानों पर कराया जा सकता है। यह पंजीकरण आप चारो धामों के बेस कैंप पर पहुँच कर भी करवा सकते हैं। यह बेस कैंप हैं – जानकी चट्टी (यमुनोत्री), गंगोत्री, गौरी कुंड (केदारनाथ), और बदरीनाथ।

इसके साथ – साथ आप ऑनलाइन पंजीकरण भी करवा सकते हैं। ऑनलाइन पंजीकरण का लिंक मई में प्रभावी होगा, जैसे ही यह होगा हम यह लिंक ब्लॉग में अपडेट कर देंगे।

(वैसे गंगोत्री और बदरीनाथ धाम पर बिना पंजीकरण भी जाया जा सकता है, यह मेरा निजी अनुभव है।)

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क्या स्वास्थ्य जाँच अनिवार्य है ?

हाँ, यदि आप मई – जून में चार धाम की यात्रा पर जा रहे हैं तो जाँच अनिवार्य है। बाकि महीनो में वैसे भी जाया जा सकता है, लेकिन केदारनाथ में हमेशा जाँच होती है। यह सुविधा हरिद्वार, ऋषिकेश और गौरीकुंड जैसे पंजीकरण केन्द्रो पर भी उपलब्ध है।

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रहने की सुविधा ?

सभी धामों में आश्रम, धर्मशाला, होटल, लॉज, गेस्ट हाउस आदि की सुविधा उपलब्ध है। केदारनाथ धाम में तो आप टेंट में भी रुक सकते हैं। यदि आप का बजट थोड़ा भी कम है तो किसी आश्रम या धर्मशाला में ही ठहरें। चार धाम यात्रा के दौरान रुकने का इनसे बेहतर विकल्प और कोई नहीं। कुछ प्रमुख आश्रम हैं बाबा काली कमली आश्रम और परमार्थ निकेतन।

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क्या चार धाम यात्रा सुरक्षित है ?

उत्तराखण्ड राज्य को 2013 में भयंकर त्रासदी का सामना करना पड़ा था जिसके कारण केदारनाथ और यमुनोत्री धामों में भयानक तबाही हुई थी। लेकिन अब सरकार और प्रशाशन पूरी तरह सचेत है। सरकार ने सुरक्षित यात्रा करवाने के लिये समुचित प्रबंध किये हैं।

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कितना खर्च आ सकता है ?

यह निर्भर करता है की आप किस तरह खर्च करते हैं। यदि आप सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करते हैं और दिल्ली से जा रहे हैं तो चार धामों की यात्रा पर लगभग 15000 रुपये (प्रति व्यक्ति) खर्च आ सकता है।

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चार धाम यात्रा का रूट का सर्वश्रेष्ठ रूट (टैक्सी और बस द्वारा)

हरिद्वार – देहरादून – मसूरी बाई पास – बरकोट – स्याना चट्टी – जानकी चट्टी – यमुनोत्री
यमुनोत्री – जानकी चट्टी – बरकोट – धरासू बैंड – उत्तरकाशी – हर्षिल – भैरो घाटी – गंगोत्री
गंगोत्री – उत्तरकाशी – श्री नगर – रूद्र प्रयाग – कुंड – गुप्तकाशी – सोन प्रयाग – गौरी कुंड – केदारनाथ
केदारनाथ से बदरीनाथ जाने के दो मार्ग हैं –
पहला : केदारनाथ – गौरी कुंड – सोन प्रयाग – गुप्तकाशी – कुंड – ऊखीमठ – चोपता – गोपेश्वर – चमोली – पीपल कोटी – जोशीमठ – विष्णु प्रयाग – गोविंद घाट – बदरी नाथ
दूसरा : केदारनाथ – गौरी कुंड – सोन प्रयाग – गुप्तकाशी – कुंड – रूद्र प्रयाग – कर्ण प्रयाग – गोचर – चमोली – पीपल कोटी – जोशीमठ – विष्णु प्रयाग – गोविंद घाट – बदरी नाथ
बदरीनाथ – जोशीमठ – कर्ण प्रयाग – रूद्र प्रयाग – श्री नगर – देव प्रयाग – ऋषिकेश – हरिद्वार।

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आस – पास के दर्शनीय स्थल

यमुनोत्री की ओर

हनुमान चट्टी : हनुमान जी का मंदिर
सप्तऋषि कुंड : सप्तऋषियों को समर्पित कुंड
सूर्यकुंड : यमुनोत्री में गर्म पानी का कुंड
दिव्य शिला : पौराणिक महत्व वाली शिला

गंगोत्री की ओर

उत्तरकाशी : गंगोत्री से पहले पड़ने वाला प्रसिद्ध और सबसे बड़ा शहर जहाँ से आप गोमुख के लिये भी पंजीकरण करवा सकते हैं। इस शहर के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें।
विश्वनाथ मंदिर : भगवान शिव को समर्पित उत्तरकाशी में एक प्रसिद्ध मंदिर।
गंगनानी : उत्तरकाशी – गंगोत्री मार्ग पर गर्म पानी के झरने के लिए प्रसिद्ध।
गंगोत्री से सम्बंधित एक विस्तृत यात्रा वृत्तांत पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें।
गंगोत्री से सम्बंधित एक सम्पूर्ण जानकारियों को पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें।

केदारनाथ की ओर

धारी देवी मंदिर : गढ़वाल के सबसे बड़े शहर श्री नगर में स्थित एक प्रसिद्द मंदिर, उत्तराखण्ड में आयी आपदा को माता के क्रोध का परिणाम माना जाता है।
रूद्र प्रयाग : मंदाकिनी और अलकनंदा का संगम और एक प्रसिद्ध तीर्थ। यहाँ से केदारनाथ और बदरीनाथ का रास्ते अलग हो जाते हैं।
गुप्तकाशी : भगवान शिव को समर्पित एक प्रसिद्ध शहर। यहाँ गुप्तेश्वर / गुप्तनाथ महादेव का मंदिर है। केदारनाथ जाने वाले ज़्यादातर यात्री यहाँ एक रात रुकते हैं। यहाँ एक बड़ा बस अड्डा भी है जहाँ से हरिद्वार, देहरादून आदि के लिये बस चलती हैं।
सोनप्रयाग : मंदाकिनी के किनारे बसा एक छोटा सा क़स्बा और मंदाकिनी – वासुकिगंगा का संगम।
त्रियुगीनारायण : भगवान शिव और माता पार्वती की विवाह स्थली।
गौरी कुंड : केदारनाथ यात्रा के लिये बेस कैंप

बदरीनाथ की ओर

चोपता : (यदि आप चोपता होते हुए जाते हैं) प्रसिद्ध हिल स्टेशन। यहाँ से तुंगनाथ महादेव के लिये पैदल यात्रा होती है जो की आपको 3600 मीटर की ऊंचाई तक ले जाती है।
जोशीमठ : भगवान बदरीनाथ का शीतकालीन प्रवास, आदि गुरु शंकराचार्य का मंदिर, भगवान नृसिंह का मंदिर। यहाँ से एक रास्ता औली की ओर जाता है।
तप्त कुंड (बदरीनाथ धाम) : बदरीनाथ धाम में गर्म जल का प्रमुख कुंड जहाँ आपको दर्शन से पहले स्नान करना होता है।
ब्रह्म कपाल (बदरीनाथ धाम) : यहाँ भगवान शिव को ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति मिली थी और अब यहाँ पिण्डदान किया जाता है।
नारद कुण्ड (बदरीनाथ धाम) : इसी कुण्ड से भगवान बदरीनाथ का विग्रह प्राप्त हुआ था।
माणा गांव : भारत का सीमान्त ग्राम। चीन सीमा से पहले अंतिम गांव।
व्यास गुफा : यहाँ महर्षि वेद व्यास ने 18 पुराणों की रचना की थी।
गणेश गुफा : यहाँ महर्षि वेदव्यास ने भगवान गणेश को महाभारत मौखिक रूप से सुनाई थी और गणेश जी ने लिखी थी।
भीम पुल : एक बड़ी शिला जिसे भीम ने पांडवों को सरस्वती नदी को पार करने के लिये रखा था। सरस्वती नदी के दर्शन यहाँ किये जा सकते हैं।
वसुधारा : एक बड़ा झरना जहाँ 5 किलोमीटर की पैदल यात्रा करके पहुंचा जा सकता है। यहाँ अष्ट वसुओं ने तप किया था।
बदरीनाथ से सम्बंधित एक विस्तृत यात्रा वृत्तांत पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें।
बदरीनाथ से सम्बंधित एक सम्पूर्ण जानकारियों को पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें।

वापसी

देव प्रयाग : प्रसिद्ध हिन्दू तीर्थ और भागीरथी और अलकनंदा का संगम, यहाँ से ही भागीरथी को गंगा के नाम से जाना जाता है।
ऋषिकेश : एक पवित्र धार्मिक नगर। अधिक जानकारी के लिये यहाँ क्लिक करें।
परमार्थ निकेतन : ऋषिकेश का सबसे बड़ा और प्रसिद्ध आश्रम।

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कैसे पहुंचे ?

सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है की कैसे पहुँचे ? यह यात्रा उच्च पहाड़ी क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। गंगोत्री और बदरीनाथ धाम तक मोटर मार्ग है, आपको केवल यमुनोत्री और केदारनाथ में ही पैदल यात्रा करनी है। यहाँ हम आपको चार तरह से पहुँचने के तरीकों के बारे में बताने जा रहे हैं –

  • अपना वाहन जैसे की कार और बाइक।
  • सार्वजानिक वाहन जैसे की बस और शेयर्ड टैक्सी।
  • निजी रूप से बुक करवाया गया वाहन जैसे की कार, टैम्पो ट्रैवेलर आदि।
  • हेलीकॉप्टर सेवा।

यहाँ हम हरिद्वार को आधार के लिये आधार मान कर चल रहे हैं।

अपने वाहन जैसे की कार / बाइक द्वारा यात्रा

(यदि आप के पास बाइक नहीं है और किराये पर लेना चाहते हैं तो कैसे ले सकते हैं और बाइक यात्रा में क्या – क्या सावधानियां बरतनी आवश्यक है, यह जानने के लिये यहाँ क्लिक करें।)

पहला दिन (हरिद्वार)
अक्सर दूसरे शहरों से आने वाले यात्री सुबह – सुबह हरिद्वार पहुँचते हैं। आज का दिन आप हरिद्वार में बितायें। यहाँ आप गंगा स्नान कर सकते हैं, गंगा आरती देख सकते हैं, हरिद्वार के प्रसिद्ध तीर्थ जैसे की हर की पौड़ी, मनसा देवी, कनखल, भीम गोडा, भारत माता मंदिर आदि के दर्शन कर सकते हैं। साथ – साथ ही यहाँ से 25 किलोमीटर दूर ऋषिकेश भी घूम कर आ सकते हैं। पूरा दिन हरिद्वार में बिताने के कारण आपका शरीर अगले दिन की लम्बी यात्रा के लिये अनुकूल हो जायेगा।

दूसरा दिन (हरिद्वार – जानकी चट्टी, 221 किलोमीटर)
हरिद्वार – देहरादून – मसूरी बाई पास – बरकोट – स्याना चट्टी – जानकी चट्टी
आज आपको जानकी चट्टी पहुंचना है। बरकोट इस मार्ग का बड़ा शहर है जहाँ आपको आवश्यकता की सभी वस्तुएं मिल सकती हैं। आज आप जानकी चट्टी में ही रुकें।

तीसरा दिन (जानकी चट्टी – यमुनोत्री – जानकी चट्टी, 12 किलोमीटर X आना – जाना पैदल)
आज आप सुबह ही यात्रा आरम्भ कर दें और 12 किलोमीटर पैदल चल कर यमुनोत्री धाम पहुंचे। खच्चर और पालकी आदि की भी व्यवस्था उपलब्ध है। आज ही आप जानकी चट्टी वापस भी आ जायेंगे। आज आप को जानकी चट्टी में ही रुकना है। आप चाहें तो खरसाली में भी रुक सकते हैं।

चौथा दिन (जानकी चट्टी / खरसाली – गंगोत्री, 220 किलोमीटर)
जानकी चट्टी – बरकोट – धरासू बैंड – उत्तरकाशी – गंगनानी – हर्षिल – भैरो घाटी – गंगोत्री
आज आप सुबह 5 – 6 बजे ही जानकी चट्टी / खरसाली से निकल लें। आपको 220 किलोमीटर की यात्रा करके गंगोत्री पहुंचना है। उत्तरकाशी इस मार्ग का बड़ा शहर है। गंगनानी में गर्म पानी के झरने में स्नान कर सकते हैं। आज आप शाम तक गंगोत्री पहुँच पायेंगे। शाम को ही या अगली सुबह आप गंगा माँ के दर्शन कर सकते हैं। ध्यान दें की यहाँ मुख्य दर्शन माँ गंगा के नदी रूप में ही करने हैं। पूजा आदि कार्य भी नदी किनारे ही होते हैं। यहाँ बहुत से होटल और आश्रम हैं।

पांचवा दिन (गंगोत्री – उत्तरकाशी, 100 किलोमीटर)
गंगोत्री – भैरो घाटी – हर्षिल – गंगनानी – उत्तरकाशी
आज आप उत्तरकाशी तक पहुंचे। यह दूरी बेशक एक दिन के हिसाब से कम है और आपके पास दिन का काफी समय बच जायेगा लेकिन आप बता देना चाहते हैं की हर्षिल इस मार्ग का सबसे ख़ूबसूरत स्थल है। यहाँ आप कुछ समय बिता सकते हैं। साथ – साथ ही उत्तरकाशी की शाम बहुत अच्छी लगती है।

छठा दिन (उत्तरकाशी – गुप्तकाशी)
उत्तरकाशी से गुप्तकाशी वाया घनसाली, 192 किलोमीटर (उत्तरकाशी – भराड़ी देवता – चौरंगी खाल – घनसाली – चिरबटिया – रूद्र प्रयाग – अगस्त्यमुनि – कुंड – गुप्तकाशी)
उत्तरकाशी से गुप्तकाशी वाया श्री नगर, 218 किलोमीटर (उत्तरकाशी – भराड़ी देवता – चौरंगी खाल – नौघर – लंबगांव – लूसी – कीर्ति नगर – श्री नगर – रूद्र प्रयाग – अगस्त्यमुनि – कुंड – गुप्तकाशी)
चूँकि आप अपने वाहन से जा रहें हैं तो पहला मार्ग ही आपके लिये बेहतर है। इस मार्ग पर ट्रैफिक नहीं के बराबर है और रास्ता भी शानदार बना हुआ है। आज आप शाम तक गुप्तकाशी पहुंचेंगे। गुप्तकाशी एक छोटा शहर है लेकिन सभी सुविधाये यहाँ उपलब्ध हैं। आज आप यहाँ गुप्तेश्वर महादेव और कालीमठ के दर्शन कर सकते हैं।

सातवां दिन (गुप्तकाशी – गौरी कुंड – केदारनाथ, 30 किलोमीटर गाड़ी द्वारा + 22 किलोमीटर पैदल)
गुप्तकाशी – सोनप्रयाग – फाटा – गौरीकुंड (यहाँ तक मोटर मार्ग) – जंगल चट्टी – भीमबलि – लिंचौली – केदारनाथ (पैदल)
आज आप सुबह जितनी जल्दी हो सके (5 बजे) गुप्तकाशी से निकल लें। गुप्तकाशी से गौरी कुंड तक आप लगभग एक घंटा तीस मिनट में पहुँच जायेंगे। ध्यान दें के गौरीकुंड में पार्किंग नहीं है। इसलिये आपको गाड़ी सोनप्रयाग में ही खड़ी करनी पड़ेगी और फिर वहां से शेयर्ड टैक्सी लेनी पड़ेगी। यदि आप हेलीकाप्टर में जाना चाहते हैं तो फाटा से हेलीकाप्टर ले सकते हैं।

गौरी कुंड पहुँच कर आपने यदि पंजीकरण नहीं कराया है तो पहले पंजीकरण करायें और फिर शीघ्र ही पैदल यात्रा आरम्भ कर दें। 22 किलोमीटर की पैदल यात्रा करके आप शाम तक केदारनाथ पहुँच जायेंगे। खच्चर और पालकी आदि की सुविधा उपलब्ध है। आज रात आप केदारनाथ में ही रुकेंगे। यहाँ रुकने की पर्याप्त व्यवस्था है। आप होटल या टेंट में रुक सकते हैं।

आठवां दिन (केदारनाथ – गौरीकुण्ड – गुप्तकाशी, 22 किलोमीटर पैदल + 30 किलोमीटर गाड़ी द्वारा)
आज आप सुबह ही भगवान भोले नाथ के दर्शन करके वापसी कर लें। चूँकि उतरने में कम समय लगता है तो आप शाम तक गुप्तकाशी पहुँच जायेंगे।

नवां दिन (गुप्तकाशी – बदरीनाथ, 179 किलोमीटर)
गुप्तकाशी – कुंड – उखीमठ – चोपता – गोपेश्वर – चमोली – पीपलकोटी – द्विंग – जोशीमठ – विष्णुप्रयाग – गोविंदघाट – बदरीनाथ
आज आप दोपहर 3 बजे तक बदरीनाथ पहुँच सकते हैं। यहाँ होटल और सभी तरह की पर्याप्त सुविधायें उपलब्ध हैं। चूँकि यह अंतिम धाम है तो आपको सलाह दी जाती है की आप यहाँ के सभी तीर्थों के दर्शन आराम से करें।

यदि आप के पास एक दिन अतिरिक्त है तो चोपता – तुंगनाथ – चंद्रशिला की यात्रा भी कर सकते हैं। चोपता यात्रा के बारे में आप यहाँ विस्तार से पढ़ सकते हैं।

दसवां दिन (बदरीनाथ, माणा – जोशीमठ, 46 किलोमीटर)
आज आप बदरीनाथ भगवान के दर्शन करें। आस पास बहुत से तीर्थ जैसे की चरण पादुका, नारद कुंड, ब्रह्म कपाल, माणा गाँव, व्यास और गणेश गुफा, भीम पुल, सरस्वती नदी। भीम पुल से पांच किलोमीटर की पैदल दूरी पर है वसुधारा झरना। आप वहां भी जा सकते हैं। बदरीनाथ धाम के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें। आप आज ही शाम तक जोशीमठ पहुँच सकते हैं।

ग्यारहवां दिन (जोशीमठ – ऋषिकेश, 250 किलोमीटर)
बदरीनाथ – जोशीमठ – कर्ण प्रयाग – रूद्र प्रयाग – श्री नगर – देव प्रयाग – ऋषिकेश – हरिद्वार
यह दूरी लम्बी अवश्य है लेकिन यदि आप सुबह पांच बजे निकल पड़ें तो शाम तक ऋषिकेश पहुँच सकते हैं। रात ऋषिकेश में ही बिताकर आप अगले दिन वापसी कर सकते हैं। यदि आप में हिम्मत बची हुई है तो रात में ही वापसी भी कर सकते हैं।

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सार्वजनिक परिवहन (बस, शेयर्ड टैक्सी) द्वारा यात्रा

सार्वजनिक परिवहन द्वारा यात्रा करने से पहले यह जान लेना आवश्यक है की बसों और टैक्सी आदि की व्यस्था कैसी है उत्तराखण्ड में ?
मई – जून में सभी धामों के लिये सरकार बसों का संचालन करती है। हरिद्वार से चारो धाम और उनके बीच भी सरकारी बसों की उपलब्धता मई जून में होती है। किन्तु यात्रियों की भारी संख्या होने के कारण आप को उत्तराखण्ड परिवहन की बस मिल ही जाये, इसकी गारंटी नहीं।
आप https://utconline.uk.gov.in/ पर क्लिक करके ऑनलाइन बुकिंग सकते हैं।
जून के बाद उत्तराखण्ड परिवहन की बसों की उपलब्धता हरिद्वार से बरकोट, देहरादून से बरकोट, हरिद्वार से उत्तरकाशी, हरिद्वार से गौरी कुंड / गुप्तकाशी, हरिद्वार से बदरीनाथ तक ही होती है। इन धामों के बीच भी कहीं – कहीं सरकारी बसें मिल जाती हैं।

प्राइवेट बसें आपको निराश नहीं करेंगी और पर्याप्त मात्रा में हरिद्वार से चारो धाम और उनके बीच उपलब्ध होती हैं। किन्तु ध्यान दें की बसें सुबह (लगभग 7 – 8 बजे तक) ही मिलती हैं।

पहला दिन (हरिद्वार)
आज का दिन आप हरिद्वार में बितायें। यहाँ आप गंगा स्नान कर सकते हैं, गंगा आरती देख सकते हैं, हर की पौड़ी, मनसा देवी, कनखल, भीम गोडा, भारत माता मंदिर आदि के दर्शन कर सकते हैं। साथ – साथ ही यहाँ से 25 किलोमीटर दूर ऋषिकेश भी घूम कर आ सकते हैं। हरिद्वार में एक दिन बिताना शरीर अगले दिन की लम्बी यात्रा के लिये अनुकूल बनाने में मदद करेगा।

दूसरा दिन (हरिद्वार – जानकी चट्टी, 221 किलोमीटर)
हरिद्वार – देहरादून – मसूरी बाई पास – बरकोट – स्याना चट्टी – जानकी चट्टी
आज आपको जानकी चट्टी पहुंचना है। बरकोट इस मार्ग का बड़ा शहर है जहाँ आपको आवश्यकता की सभी वस्तुएं मिल सकती हैं। हरिद्वार से आपको जानकी चट्टी की डायरेक्ट बस मिल सकती है, या फिर आप बरकोट से बस बदल कर भी जा सकते हैं। आज आप जानकी चट्टी में ही रुकें।

तीसरा दिन (जानकी चट्टी – यमुनोत्री – जानकी चट्टी, 12 किलोमीटर X आना – जाना पैदल)
आज आप सुबह ही यात्रा आरम्भ कर दें और 12 किलोमीटर पैदल चल कर यमुनोत्री धाम पहुंचे। खच्चर और पालकी आदि की भी व्यवस्था उपलब्ध है। आज ही आप जानकी चट्टी वापस भी आ जायेंगे। आज आप को जानकी चट्टी में ही रुकना है। आप चाहें तो खरसाली में भी रुक सकते हैं। खरसाली, जानकी चट्टी की अपेक्षा थोड़ा सस्ता है।

चौथा दिन (जानकी चट्टी / खरसाली – उत्तरकाशी, 122 किलोमीटर)
जानकी चट्टी – बरकोट – धरासू बैंड – उत्तरकाशी
आज आप सुबह 5 – 6 बजे ही जानकी चट्टी / खरसाली से निकल लें। आपको 122 किलोमीटर की यात्रा करके उत्तरकाशी पहुंचना है। उत्तरकाशी इस मार्ग का बड़ा शहर है। जानकी चट्टी / खरसाली से उत्तरकाशी के लिये बसें मिल जाती हैं। आज आप के पास उत्तरकाशी शहर की सैर के लिये पर्याप्त समय होगा।

पांचवा दिन (उत्तरकाशी – गंगोत्री – उत्तरकाशी, 100 X 2 किलोमीटर आना – जाना)
उत्तरकाशी – गंगनानी – हर्षिल – भैरो घाटी – गंगोत्री
उत्तरकाशी से गंगोत्री के सुबह 6:30 से बसें चलनी शुरू हो जाती हैं और अंतिम बस सुबह 7:30 बजे की है। बेहतर है की पहली बस ही पकड़ लें। शेयर्ड टैक्सी भी उपलब्ध हैं। दोपहर 12 बजे तक आप गंगोत्री पहुँच जायेंगे। ध्यान दें की ज़्यादातर यही होता है की जो बस वाला आपको गंगोत्री तक लेकर आता है वही आपको वापस उत्तरकाशी लेकर भी जाता है। आपके पास गंगोत्री में गंगा स्नान और पूजा के लिये 2 घंटे का समय होगा। दोपहर 2 – 2:30 बजे वही बस आपको वापस उत्तरकाशी लेकर जायेगी। चूँकि आप सार्वजनिक परिवहन से यात्रा कर रहे हैं, आपके लिये गंगोत्री की बजाय उत्तरकाशी में ही रुकना सही है।

छठा दिन (उत्तरकाशी – गुप्तकाशी)
उत्तरकाशी से गुप्तकाशी वाया घनसाली, 192 किलोमीटर (उत्तरकाशी – भराड़ी देवता – चौरंगी खाल – घनसाली – चिरबटिया – रूद्र प्रयाग – अगस्त्यमुनि – कुंड – गुप्तकाशी)
उत्तरकाशी से गुप्तकाशी वाया श्री नगर, 218 किलोमीटर (उत्तरकाशी – भराड़ी देवता – चौरंगी खाल – नौघर – लंबगांव – लूसी – कीर्ति नगर – श्री नगर – रूद्र प्रयाग – अगस्त्यमुनि – कुंड – गुप्तकाशी)
आप बस से जा रहे हैं, इसलिये यह बस वाले पर ही निर्भर करता है की वो आपको कौन से रूट से लेकर जाता है। आज आप शाम तक गुप्तकाशी पहुंचेंगे। गुप्तकाशी एक छोटा शहर है लेकिन सभी सुविधाये यहाँ उपलब्ध हैं। आज आप यहाँ गुप्तेश्वर महादेव और कालीमठ के दर्शन कर सकते हैं।

सातवां दिन (गुप्तकाशी – गौरी कुंड – केदारनाथ, 30 किलोमीटर गाड़ी द्वारा + 22 किलोमीटर पैदल)
गुप्तकाशी – सोनप्रयाग – फाटा – गौरीकुंड (यहाँ तक मोटर मार्ग) – जंगल चट्टी – भीमबलि – लिंचौली – केदारनाथ (पैदल)
आज आप सुबह जितनी जल्दी हो सके (5 बजे) गुप्तकाशी से निकल लें। गुप्तकाशी से गौरी कुंड तक आप लगभग एक घंटा तीस मिनट में पहुँच जायेंगे। गौरी कुंड पहुँच कर आपने यदि पंजीकरण नहीं कराया है तो पहले पंजीकरण करायें और फिर शीघ्र ही पैदल यात्रा आरम्भ कर दें। 22 किलोमीटर की पैदल यात्रा करके आप शाम तक केदारनाथ पहुँच जायेंगे। खच्चर और पालकी आदि की सुविधा उपलब्ध है। आज रात आप केदारनाथ में ही रुकेंगे। यहाँ रुकने की पर्याप्त व्यवस्था है। आप होटल या टेंट में रुक सकते हैं।

आठवां दिन (केदारनाथ – गौरीकुण्ड – गुप्तकाशी, 22 किलोमीटर पैदल + 30 किलोमीटर गाड़ी द्वारा)
आज आप सुबह ही भगवान भोले नाथ के दर्शन करके वापसी कर लें। उतरने में कम समय लगता है तो आप शाम तक गुप्तकाशी पहुँच जायेंगे।

नवां दिन (गुप्तकाशी – बदरीनाथ, 199 किलोमीटर)
गुप्तकाशी – कुंड – अगत्स्यमुनि – रूद्र प्रयाग – कर्ण प्रयाग – चमोली – पीपलकोटी – द्विंग – जोशीमठ – विष्णुप्रयाग – गोविंदघाट – बदरीनाथ
गुप्तकाशी से बद्रीनाथ की सीधी बस तो है लेकिन कम ही है। इसलिए आपको पहले गुप्तकाशी से 45 किलोमीटर दूर रुद्रप्रयाग तक बस से जाना होगा और फिर वहां से बस बदल कर बदरीनाथ। आज आप शाम तक बदरीनाथ पहुँच सकते हैं। यहाँ होटल और सभी तरह की पर्याप्त सुविधायें उपलब्ध हैं। चूँकि यह अंतिम धाम है तो आपको सलाह दी जाती है की आप यहाँ के सभी तीर्थों के दर्शन आराम से करें।

(यदि आप चोपता – तुंगनाथ – चंद्रशिला भी जाना चाहते हैं तो आपको एक दिन अतिरिक्त लेकर चलना होगा। आपको पहले गुप्तकाशी से उखीमठ और फिर वहां से टैक्सी बुक करके चोपता तक जाना होगा। उसके अगले दिन चोपता से टैक्सी बुक करके गोपेश्वर और फिर वहां से बस द्वारा बदरीनाथ। चोपता यात्रा के बारे में आप यहाँ क्लिक करके विस्तार से पढ़ सकते हैं।)

दसवां दिन (बदरीनाथ, माणा)
आज आप बदरीनाथ भगवान के दर्शन करें। आस पास बहुत से तीर्थ जैसे की चरण पादुका, नारद कुंड, ब्रह्म कपाल, माणा गाँव, व्यास और गणेश गुफा, भीम पुल, सरस्वती नदी। भीम पुल से पांच किलोमीटर की पैदल दूरी पर है वसुधारा झरना। आप वहां भी जा सकते हैं। बदरीनाथ धाम के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें। आप आज ही बदरीनाथ में ही रुकें।

एक बात और, यदि आप ने बदरीनाथ से ऋषिकेश / हरिद्वार के लिये बस ऑनलाइन बुक नहीं की है तो, आज शाम 4 बजे ही बस अड्डे से अगले दिन की बस की टिकट ले लें। यह काम बहुत ही जरुरी है अन्यथा आपको एक दिन और बदरीनाथ में ही रुकना पड़ेगा।

ग्यारहवां दिन (बदरीनाथ – ऋषिकेश, 300 किलोमीटर)
बदरीनाथ – जोशीमठ – कर्ण प्रयाग – रूद्र प्रयाग – श्री नगर – देव प्रयाग – ऋषिकेश – हरिद्वार
बदरीनाथ से ऋषिकेश के लिये सुबह 3:30 (AM) बजे बस चलती है। यह बस मिस न करें। यदि बस छूट भी जाती है तो पहले जोशीमठ चले जायें और फिर वहां से बस या शेयर्ड टैक्सी द्वारा ऋषिकेश / हरिद्वार चले जायें।) आप शाम तक ऋषिकेश पहुँच सकते हैं। ऋषिकेश से दिल्ली आदि शहरों के लिये रात 11 बजे तक बस मिलती रहती है। आप चाहें तो उसी दिन वापसी कर सकते हैं या फिर एक दिन ऋषिकेश में बिता कर अगले दिन निकल सकते हैं।

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निजी रूप से बुक करवाये गये वाहन जैसे की कार, टैम्पो ट्रैवेलर आदि द्वारा यात्रा

यह यात्रा भी ऊपर दिये गये मार्गों से ही होकर ही गुजरेगी और उतना ही समय लगेगा। हरिद्वार, ऋषिकेश में बहुत एजेंट हैं जो की आपकी यात्रा का प्रबंध कर देंगे। आप को उनकी जानकारी गूगल पर भी मिल जायेगी।

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हेलीकॉप्टर सेवा

यदि आप मात्र दो धाम यमुनोत्री और केदारनाथ ही हेलीकाप्टर से जाना चाहते हैं तो आपको खरसाली और फाटा से हेलीकाप्टर मिल जायेंगे। इनकी बुकिंग एजेंट के माध्यम से और डायरेक्ट भी (वहीं पर) होती है।

यदि आप चारो धाम हेलीकाप्टर से जाना चाहते हैं तो किसी ट्रेवल एजेंट से संपर्क करें। वे सभी हेलिपैड तक टैक्सी और वहां से हेलीकाप्टर सेवा का प्रबंध आपके लिये कर देंगे।

इस लेख में चार धाम यात्रा से सम्बंधित सभी जानकारियां देने का प्रयास किया गया है। यदि आपके मन में कोई प्रश्न है तो कमेंट बॉक्स में अवश्य लिखें।

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