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5 Indian treks to introduce your kids to trekking 5 भारतीय ट्रेक जहाँ आपके बच्चे अपनी पहली ट्रैकिंग शुरू कर सकते हैं

जब हम पहली बार ट्रैक करते हैं, तो हमें आश्चर्य होता है कि ऐसा शानदार अनुभव लेने में हमने इतनी देर क्यों कर दी ? क्या आपको ऐसा नहीं लगता की काश हम बचपन में ही यात्राओं पर निकल पड़ते तो घुमक्कड़ी की यह किताब तो अब तक काफी मोटी हो चुकी होती। चलिये जो होना था, हो गया ! लेकिन कम से कम एक अभिभावक होने के नाते आप यह तो सुनिश्चित कर ही सकते हैं की हमारे बच्चे बड़े होकर ऐसा महसूस न करें।

सामान्य धारणा के विपरीत, ट्रेकिंग एक ऐसी चीज है जो बच्चे भी कर सकते हैं। अब इस देश में हर ट्रेक तो मुश्किल नहीं है न ! भारत में बहुत से ऐसे ट्रेक हैं प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर हैं और उन्हें बच्चे भी कर सकते है और ट्रैकिंग की दिशा में पहला कदम बढ़ाने के लिये ये ट्रैक एक दम परफेक्ट हैं।

उल्लेख करने की आवश्यकता नहीं है, बच्चों पर ट्रेकिंग का प्रभाव बहुत गहरा होता है। इस दौरान बच्चों में सहयोग, मेलजोल, नये दोस्त बनाने जैसे बहुत से नये गुणों का विकास होता है। कभी अपने बच्चों को किसी छोटी – मोटी ट्रैकिंग पर ले जाइये, आप स्वयं उनके आत्मविश्वास में वृद्धि का अनुभव करेंगे। जब हम ट्रेकिंग पर बच्चों को लेकर जाने की बात कर रहें है तो समझना होगा की यहाँ कम से कम 10 वर्ष से बड़े बच्चों की बात हो रही है।

तो आइये, जानते हैं वे भारतीय ट्रेक जहाँ आप अपने बच्चों को लेकर जा सकते हैं।

  • चोपता – चंद्रशिला ट्रेक, उत्तराखण्ड

ट्रेक की अवधि : 1 दिन
उपयुक्त मौसम : सभी महीने

Chopta – Chandrashila Trek

हालांकि जो लोग चोपता के बारे में जानते हैं, उनको थोड़ा अजीब सा लग सकता है लेकिन चोपता – तुंगनाथ – चंद्रशिला ट्रेक पर आपको बच्चों को ले जाना चाहिये। यह ट्रेक मात्र 5 किलोमीटर (एक तरफ) लम्बा है और इसमें समय भी कम ही लगता है। थकान तो होती है लेकिन प्रकृति का सौंदर्य ही यहाँ ऐसा है की थकान का अनुभव कम होगा। चोपता शहरों से बहुत दूर है और शांत स्थान है। यहाँ बच्चों को सीखने के लिये पर्याप्त अवसर मिलता है। यह आल वेदर शुरू के दो किलोमीटर तो घने जंगलों से होकर गुज़रता है और उसके बाद ख़ूबसूरत बुग्यालों से हो कर। यह क्षेत्र विभिन्न प्रकार की जीव प्रजातियों और वनस्पतियों से परिपूर्ण है। बच्चे इनकी जानकारी एकत्र कर सकते हैं। इसके अलावा, ट्रेक की मज़िल चंद्रशिला चोटी से आपको विशाल हिमालय का दृश्य दिखाई देता है।

 

  • तडियाण्डमोल, कुर्ग, कर्णाटक

ट्रेक की अवधि : 2 दिन
उपयुक्त मौसम : सितम्बर से फ़रवरी

Tadiandmol
Tadiandmol, Image source: Google Image

तडियाण्डमोल, 5,740 फीट की ऊँचाई पर, कूर्ग की सबसे ऊँची और कर्नाटक राज्य की तीसरी सबसे ऊँची चोटी है। यह ट्रेक थोड़ा थकाऊ है, इसलिए इसे एक दिन में करने का प्रयास न करें, विशेषकर जब बच्चे आपके साथ हों।

पहली बार ट्रैकिंग करने वालों के लिये फ्रेंडली यह ट्रेक शोला के विशाल हरे – भरे घास के मैदानों और जल धाराओं से होकर गुज़रता है। यह ट्रेक बच्चों की किताबों में लिखी परी कथाओं जैसा ही है। आप अपने ट्रेक का कार्यक्रम इस तरह रखें की चोटी से होने वाला सूर्योदय देख सकें जो की बहुत ही अद्भुत होता है। सूर्य की पहली किरण जब यहाँ कॉफी, इलायची और काली मिर्च के बागानों पर पड़ती है, तो यह नज़ारा बेहद शानदार बनता है।

 

  • केदारकांठा, उत्तराखण्ड

ट्रेक की अवधि : 3 दिन
उपयुक्त मौसम : बरसात को छोड़ कर सभी मौसम

Someshwar temple (duryodhan temple)
सोमेश्वर मंदिर (दुर्योधन मंदिर)

वैसे तो केदारकांठा ट्रेक बरसात के मौसम को छोड़ कर सभी मौसमों में करने के लिए अच्छा है लेकिन इसकी पहचान ही विंटर ट्रेक के रूप में अधिक है। यह उन बच्चों के लिये एक दम सही है जो की बर्फ़ से ढके पहाड़ देखने के लिये लालायित रहते हैं। इस ट्रेक पर बहुत सी कैंप साइट हैं जहाँ आप अपना टेंट लगा सकते हैं। बर्फ़ लगे ऐसे कैंप और वहां होने वाला बोन फायर बच्चों को बहुत रोमांचित करते हैं। यद्यपि यह सुनने में मजेदार लगता है, लेकिन बर्फ पर डेरा डालने के लिए अनुशासन और कुछ प्रयासों की आवश्यकता होती है जिसमें आग के लिए लकड़ी एकत्र करना, खाना बनाना सीखना और ठंड की स्थिति में जीवित रहना सीखना शामिल है। ऐसी परिस्थितियों में ऐसे शिविर बच्चों को जीवन के विभिन्न अनुभवों को सीखने का मौका देते हैं। चीड़ और देवदार के वनों से घिरा यह ट्रेक बेहद ख़ूबूसरत है।

 

  • हर की दून, उत्तराखण्ड

ट्रेक की अवधि : 8 दिन
उपयुक्त मौसम : बरसात को छोड़ कर सभी मौसम

Har ki dun
Har ki dun, Image source: Adventure Nation

ज़्यादातर ट्रेकर्स इस तथ्य से अनभिज्ञ है की हर की दून ट्रेक की खोज जैक गिब्सन ने की थी, जो की एक ब्रिटिश पर्वतारोही और दून स्कूल में शिक्षक थे। वे अपने छात्रों को फील्ड ट्रिप के लिए इस ट्रेक पर ले जाते थे। हर की दून एक ऐसा ट्रेक है जो आपके बच्चे के पहले ट्रेक के रूप में परफेक्ट हो सकता है।

इस ट्रेक के बच्चों के लिए दिलचस्प होने के कई कारण हैं। यह ट्रेक विशाल पर्वतों और सुपिन नदी के किनारों से होकर गुज़रता है। मार्ग में बहुत से गाँव भी बसे हुए हैं। बच्चें यहाँ के सीधे – सादे ग्रामीण जीवन से बहुत कुछ सीख सकते हैं और प्रकृति की सुंदरता का आनंद भी ले सकते हैं। बच्चों को सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराने से लेकर उन्हें प्रकृति के आश्चर्यों से अवगत कराने के लिए बहुत से अवसर प्रदान करता है यह ट्रैक।

 

  • भृगु लेक, हिमाचल प्रदेश

ट्रेक की अवधि : 4 दिन
उपयुक्त मौसम : गर्मी और वसंत

Bhrigu Lake
Bhrigu Lake, Image source: Ixigo

यदि आप चाहते हैं कि आपका बच्चा पूरी तरह से हिमालयी ट्रेक का अनुभव प्राप्त करे, तो भृगु झील का ट्रेक उसके लिये एक दम परफेक्ट है। है तो यह मनाली के पास ही, लेकिन जब आप यहाँ जायेंगे तो मनाली का भीड़ भरा शहरी वातावरण भूल जायेंगे।

इस ट्रेक पर बच्चे जो अनुभव कर सकते हैं, उनमें से कुछ अनमोल अनुभव हैं ख़ूबसूरत घास के मैदानों पर लम्बा पैदल सफ़र, उनके अगल – बगल घुमते घोड़े, सेब के बाग़, लाहौल, पीर पंजाल और धौलाधार की पर्वत मालायें और छोटे – बड़े नाले । भृगु झील का ट्रेक आपको 14,000 फीट की ऊँचाई तक ले जाता है, इसलिये इस ट्रैक को पूरा करने में आपके बच्चों को चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा और कड़ी मेहनत करनी होगी। यही अनुभव उनका आत्मविश्वास बढ़ायेंगे।

तो कब लेकर जा रहे हैं बच्चों को ट्रैक पर ?

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Pravesh
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