Gushaini

10 treks every trekker would love to go on

घुमक्कड़, यात्री, पर्यटक, बैकपैकर, ट्रैकर…. ना जाने कितने ही नाम से जाने जाते हैं हम यात्राओं पर निकलने वाले। इन्ही शब्दों में से एक शब्द है ट्रैकर, जहाँ तक मेरा मानना है आप में से कोई भी ऐसा नहीं होगा जिसे ट्रेक करना पसंद नहीं होगा। हम सभी ट्रेक करना चाहते हैं लेकिन कई बार समय की कमी तो कई बार पैसे की… और जब यह दोनों ही हों तो समझ नहीं आता की कौन से ट्रेक पर जायें ?

ऐसे में हम आपके लिये लेकर आयें हैं कुछ ऐसे ट्रेक्स जिन्हें अधिकतम 3 से 5 दिन की छुट्टियों में निपटाया जा सकता है।

नाग टिब्बा, टिहरी गढ़वाल, उत्तराखण्ड

Nag Tibba
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दिल्ली के करीब होने के कारण, अधिकांश पर्वत प्रेमी एक ऐसी जगह पर जाने के लिए तरसते हैं, जहाँ से वे हिमालय की चोटियों के शानदार नज़ारे देख सकें, ऐसे में नाग टिब्बा उनके लिए पूरी तरह से अनुकूल हैं। यह मसूरी के पास अपेक्षाकृत कम ज्ञात ट्रेल्स में से एक है और और आपको घने जंगलों के बीच लेकर जाता है। यह ट्रेक विभिन्न प्रकार की हिमालयी वनस्पतियों और जीवों में समृद्ध हैं। बन्दरपूँछ, गंगोत्री, केदारनाथ सहित हिमालय की कुछ प्रमुख चोटियों के शानदार दर्शन यहाँ से होते हैं।

कहाँ से : दिल्ली
सर्वाधिक ऊँचाई: 9,915 फीट
कुल पैदल यात्रा: 10 किलोमीटर (एक तरफ)
अवधि: 4 से 5 दिन (दिल्ली से दिल्ली)
कठिनाई: आसान-मध्यम
बेस कैंप: पंतवारी (मसूरी के पास; देहरादून से 90 किमी)

त्रिउंड, कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश

Triund
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दिल्ली वालों और पहली बार आने वालों के लिए सबसे लोकप्रिय ट्रेक्स में से एक, त्रिउंड ट्रेक एक दिन में पूरा किया जा सकता है। मैक्लोडगंज के पास भागसू से शुरू होकर, घने जंगलों के बीच से होते हुए जाने वाला यह ट्रेक कांगड़ा घाटी के कुछ सबसे अद्भुत दृश्यों के दर्शन करवाता है।
जब अब पीक पर बैठे हुए पहाड़ों को बादलों के बीच अठखेलियां करते हुए देखते हैं, तो ऐसा लगता है की जन्नत तो यही है। यदि आप के पास एक या दो दिन का अतिरिक्त समय है, तो आप आगे लाहेश गुफा तक ट्रेकिंग कर सकते हैं और साथ ही इंद्राहार दर्रे के नीचे घास के मैदानों में कुछ समय बिता सकते हैं।

कहाँ से : दिल्ली
सर्वाधिक ऊँचाई: 9,760 फीट
कुल पैदल यात्रा: 9 किलोमीटर (एक तरफ)
अवधि: 4 दिन (दिल्ली से दिल्ली)
कठिनाई: आसान
बेस कैंप: भागसू / धर्मकोट (मैकलोडगंज के पास)

भृगु ताल / लेक, कुल्लू, हिमाचल प्रदेश

Bhrigu Lake
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हम में से अधिकांश लोग (विशेषकर दिल्ली एनसीआर में रहने वाले) आसानी से कह सकते हैं कि हमने मनाली का चप्पा – चप्पा छान रखा है… कुछ रोहतांग पास तक भी गए हैं लेकिन मनाली के आस – पास कुछ और भी जगहें हैं जिन्हें हम यूँ ही छोड़ देते हैं। पर्वत प्रेमी और बैकपैकिंग के लिये दीवानगी रखने वाले मनाली से भृगु झील तक आसानी से ट्रेक कर के जा सकते हैं। मनाली से 24 किलोमीटर दूर एक गुलाबा से ट्रेक शुरू होता है और घास के मैदानों के बीच से होते हुए आपको भृगु लेक तक ले जाता है। ट्रेक शुरू करने के 10 मिनट के भीतर ही घास का मैदान बन जाता है। जब आप शीर्ष पर पहुंचेंगे तो आप पायेंगे एक शानदार हिमाच्छादित झील और आस – पास विशाल हिमालयी चोटियां।

कहाँ से : दिल्ली
सर्वाधिक ऊँचाई: 14,100 फीट
कुल पैदल यात्रा: 13 किलोमीटर (एक तरफ)
अवधि: 5-6 दिन (दिल्ली से दिल्ली)
कठिनाई: मध्यम
बेस कैंप: गुलाबा (मनाली से 24 किलोमीटर दूर)

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बिजली महादेव, कुल्लू, हिमाचल प्रदेश

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पार्वती, गर्सा, भुंतर और कुल्लू घाटियों से घिरी एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित, बिजली महादेव एक प्राचीन मंदिर है जो भगवान शिव को समर्पित है और रहस्यों और किवदंतियों के लिये प्रसिद्ध है। हर साल मंदिर में शिव लिंग पर आसमानी बिजली गिरती है जिससे शिवलिंग कई खंडो में बट जाता है। तब मंदिर का पुजारी तब सभी टुकड़ों को इकट्ठा करने की प्रक्रिया को अंजाम देता है और एक मक्खन की सहायता से उन्हें जोड़ देता है। अगली सुबह शिवलिंग अपनी पहले जैसी अवस्था में बरकरार पाया जाता है। ट्रेल घने जंगलों और विशाल घास के मैदानों के बीच से होते हुए जाता है जो चारों ओर की चोटियों के आश्चर्यजनक 360 डिग्री दृश्य प्रस्तुत करता है।

कहाँ से : दिल्ली
सर्वाधिक ऊँचाई: 8,060 फीट
कुल पैदल यात्रा: 14 किलोमीटर (एक तरफ)
अवधि: 5 दिन (दिल्ली से दिल्ली)
कठिनाई: आसान
बेस कैंप: गुलाबा (मनाली से 24 किलोमीटर दूर)

करेरी झील, कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश

Kareri Lake
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ट्रेक हाइलाइट्स: करेरी झील धौलाधार पर्वत श्रृंखला पहाड़ियों के बीच स्थित एक ग्लेशियर झील है। इसे त्रिउंड ट्रेक के विकल्प के रूप में भी जाना जाता है। त्रिउंड ट्रेक के अपेक्षा यहाँ गिने – चुने लोग ही जाते हैं। ब्लेनी दर्रा और मिनकीआनी दर्रा भी झील के पास ही है।

कहाँ से : दिल्ली
सर्वाधिक ऊँचाई: 9,678 फीट
कुल पैदल यात्रा: 17 किलोमीटर (एक तरफ)
अवधि: 5-6 दिन (दिल्ली से दिल्ली)
कठिनाई: मध्यम
बेस कैंप: घेरा गाँव (धर्मशाला के पास)

(5 Indian treks to introduce your kids to trekking 5 भारतीय ट्रेक जहाँ आपके बच्चे अपनी पहली ट्रैकिंग शुरू कर सकते हैं)

दूधसागर ट्रेक, गोवा

Dudhsagar
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यदि घुमक्कड़ों को छोड़ दें तो आप में से बहुत से लोगों ने चेन्नई एक्सप्रेस फिल्म में पहली बार इस झरने पर गौर किया होगा, लेकिन यह हमेशा लंबे समय से यात्रियों के बीच सबसे अधिक मांग वाले ट्रेक्स में से एक है, और यहाँ की ट्रेकिंग जीवन भर का अनुभव हो सकता है। झरने तक ट्रेकिंग पश्चिमी घाट के हरे-भरे सौंदर्य के बीच होती है और ट्रेक के शीर्ष पर पहुँचते ही आपका सामना होता है दूध के सामान का सफेद झरने से जो मंत्रमुग्ध कर देता है।

कहाँ से : गोवा
सर्वाधिक ऊँचाई: 1,017 फीट
कुल पैदल यात्रा: 17 किलोमीटर (एक तरफ)
अवधि: 3-4 दिन (गोवा से गोवा)
कठिनाई: आसान-मध्यम
बेस कैंप: दूधसागर रेलवे स्टेशन

चोपता – तुंगनाथ – चंद्रशिला, रुद्रप्रयाग, उत्तराखण्ड

Chandrashila Peak

देश के सबसे खूबसूरत ट्रेक्स में से एक यह ट्रेक मात्र 5 किलोमीटर (एक तरफ) लम्बा है और इसमें समय भी कम ही लगता है। थकान तो होती है लेकिन प्रकृति का सौंदर्य ही यहाँ ऐसा है की थकान का अनुभव कम होगा। चोपता शहरों से बहुत दूर है और शांत स्थान है। यहाँ आप बच्चों को भी ले जा सकते हैं। यह सदाबहार ट्रेक शुरू के दो किलोमीटर तो घने जंगलों से होकर गुज़रता है और उसके बाद ख़ूबसूरत बुग्यालों से हो कर। यह क्षेत्र विभिन्न प्रकार की जीव प्रजातियों और वनस्पतियों से परिपूर्ण है। सर्दियों में यहाँ खूब बर्फ़बारी होती है।

कहाँ से : दिल्ली
सर्वाधिक ऊँचाई: 13,123 फीट
कुल पैदल यात्रा: 5 किलोमीटर (एक तरफ)
अवधि: 4 दिन (दिल्ली से दिल्ली)
कठिनाई: मध्यम
बेस कैंप: चोपता (ऊखीमठ के पास)

(Char Dham Trip Guide चार धाम यात्रा गाइड)

तडियाण्डमोल, कुर्ग, कर्णाटक

Tadiandmol
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तडियाण्डमोल, 5,740 फीट की ऊँचाई पर, कूर्ग की सबसे ऊँची और कर्नाटक राज्य की तीसरी सबसे ऊँची चोटी है। यह ट्रेक थोड़ा थकाऊ है, इसलिए इसे एक दिन में करने का प्रयास न करें। पहली बार ट्रैकिंग करने वालों के लिये फ्रेंडली यह ट्रेक विशाल हरे – भरे घास के मैदानों और जल धाराओं से होकर गुज़रता है। आप अपने ट्रेक का कार्यक्रम इस तरह रखें की चोटी से होने वाला सूर्योदय देख सकें जो की बहुत ही अद्भुत होता है। सूर्य की पहली किरण जब यहाँ कॉफी, इलायची और काली मिर्च के बागानों पर पड़ती है, तो यह नज़ारा बेहद शानदार बनता है।

कहाँ से : कुर्ग
सर्वाधिक ऊँचाई: 5,740 फीट
कुल पैदल यात्रा: 6 किलोमीटर (एक तरफ)
अवधि: 3 दिन (कुर्ग से कुर्ग)
कठिनाई: मध्यम
बेस कैंप: कक्काबे (कूर्ग के पास)

केदारकांठा, उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड

Kedarkantha trek
Kedarkantha trek

वैसे तो केदारकांठा ट्रेक बरसात के मौसम को छोड़ कर सभी मौसमों में करने के लिए अच्छा है लेकिन इसकी पहचान ही विंटर ट्रेक के रूप में अधिक है। इस ट्रेक पर बहुत सी कैंप साइट हैं जहाँ आप अपना टेंट लगा सकते हैं। बर्फ़ में लगे ऐसे कैंप और वहां होने वाला बोन फायर बहुत अच्छा लगता है। यद्यपि यह सुनने में मजेदार लगता है, लेकिन बर्फ पर डेरा डालने के लिए अनुशासन और कुछ प्रयासों की आवश्यकता होती है जिसमें आग के लिए लकड़ी एकत्र करना, खाना बनाना सीखना और ठंड की स्थिति में जीवित रहना सीखना शामिल है। चीड़ और देवदार के वनों से घिरा यह ट्रेक बेहद ख़ूबूसरत है।

कहाँ से : दिल्ली
सर्वाधिक ऊँचाई: 12,500 फीट
कुल पैदल यात्रा: 20 किलोमीटर (एक तरफ)
अवधि: 5 दिन (दिल्ली से दिल्ली)
कठिनाई: मध्यम
बेस कैंप: सांकरी (मोरी के पास)

तोरणा किला ट्रेक, पुणे, महाराष्ट्र

Torna Fort
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हरियाली से भरपूर पहाड़ी पर स्थित तोरणा किला पहला किला था जिसे 16 साल की उम्र में छत्रपति शिवाजी ने जीता था। किले तक की पगडंडी ट्रेकर को सह्याद्री पर्वत श्रृंखला के कुछ सबसे खूबसूरत घास के मैदानों से होकर ले जाती है और रास्ते में मंदिरों, वीरान इमारतों और पानी की टंकियों की एक श्रृंखला सामने आती है। यह ट्रेक काफी मुश्किल माना जाता है।

कहाँ से : पुणे
सर्वाधिक ऊँचाई: 4,603 फीट
कुल पैदल यात्रा: 20 किलोमीटर (एक तरफ)
अवधि: 2 दिन (पुणे से पुणे)
कठिनाई: कठिन
बेस कैंप: वेल्हे गांव (पुणे के पास)

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