वाराणसी यात्रा Varanasi Trip

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मैं बनारस से हूँ और अब तक बहुत से यात्रा ब्लॉग लिख चुका हूँ लेकिन जब भी कोई मुझसे वाराणसी यात्रा (Varanasi Trip) के बारे में सलाह मांगता है तो बड़ी विचित्र स्थिती हो जाती है क्योंकि इस पवित्र शहर बनारस (Holy City Varanasi) के बारे में तो आज तक मैंने कुछ लिखा ही नहीं। फिर वही काम चलाऊ सलाह देनी पड़ती है और सोचता हूँ काश कोई वाराणसी से संबंधित कोई ब्लॉग लिखा होता तो कितना अच्छा होता।

खैर…
बीती ताहि बिसारि दे, आगे की सुधि लेइ।
जो बनि आवै सहज में, ताही में चित देइ॥

इसी को ध्यान में रखते हुए पेश है वाराणसी यात्रा (Varanasi Travel) से सम्बंधित एक सम्पूर्ण गाइड। मैंने इसमें वाराणसी के लगभग सभी स्थानों जैसे की धर्म स्थल, घाट, त्यौहार, मेला, खरीदारी और खाने से जुड़े स्थानों को ध्यान में रखते हुए जानकारी देने का प्रयास किया है। फिर भी यदि कोई प्रश्न हो तो कमेंट करें। आगे बढ़ते हैं…

वाराणसी Varanasi, जिसे बनारस (Banaras) और काशी (Kashi) के नाम से भी जाना जाता है, भारत का एक ऐतिहासिक और पवित्र शहर है। यह शहर न केवल हिंदुओं के लिये, अपितु जैनियों और बौद्धों के लिये भी पवित्र है और इसे विश्व के सबसे पुराने लगातार बसे हुए शहर के रूप में जाना जाता है, जहां कुछ बस्तियां तो 11 वीं शताब्दी ईसा पूर्व की भी हैं।

सनातन धर्म के अनुसार वाराणसी में देह त्यागने से मोक्ष प्राप्त होता है और इसलिए जब लोगों को एहसास होता है की अब वे मृत्यु के निकट हैं तो शीघ्र अति शीघ्र वाराणसी पहुँच जाना चाहते हैं। मणिकर्णिका घाट (Manikarnika Ghat) पर अग्नि में भस्म होते हुए शवों को देखना भी यहाँ अलग एहसास है, जो यह बताता है की कुछ आपके साथ नहीं जाने वाला। सदियों पुराने मंदिरों पर सुबह की पहली धूप और सामने गंगा नदी में स्नान करते हुए लोगों का दृश्य बहुत खूबसूरत बन पड़ता है। यहाँ आकर आप जान पायेंगे की क्यों भगवान शिव ने इस शहर को अपना ठिकाना बनाया।

  • वाराणसी यात्रा का सर्वश्रेष्ठ समय Best time to visit Varanasi
  • कैसे पहुंचे वाराणसी How to reach Varanasi ?
  • शहर में सफ़र
  • वाराणसी में दर्शनीय स्थल Places to visit in Varanasi
  • वाराणसी के प्रसिद्ध मंदिर Famous temples in Varanasi
  • अन्य दर्शनीय स्थल Other famous sites in Varanasi
  • वाराणसी में और क्या – क्या करें ? What to do Varanasi ?
  • वाराणसी के प्रमुख त्यौहार और मेले Festivals in Varanasi
  • सीखने योग्य कार्य Learning in Varanasi
  • वाराणसी में खान – पान Eating in Varanasi
  • वाराणसी में कहाँ ठहरें ? Stay in Varanasi
  • खरीदारी (Shopping in Varanasi)
  • वाराणसी यात्रा के दौरान कुछ ध्यान देने योग्य बातें Do and don’ts in Varanasi

वाराणसी यात्रा का सर्वश्रेष्ठ समय Best time to visit Varanasi

वैसे तो वाराणसी की यात्रा कभी भी की जा सकती है लेकिन अप्रैल से जुलाई तक यहाँ भयंकर गर्मी पड़ती है, इसलिये आप इस दौरान न जायें तो अच्छा।

यदि आप मानसून में यात्रा के शौक़ीन हैं तो अगस्त का महीना सर्वोत्तम है, तब यहाँ हर ओर हरियाली फैली रहती है, गंगा में पानी बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है और और यहाँ से लगभग 65 किलोमीटर दूर राजदरी और देवदरी झरने Rajdari and Devdari waterfalls जोरों पर होते हैं।

खैर… वाराणसी यात्रा का सर्वोत्तम समय अक्टूबर से मार्च तक होता है। इस दौरान मौसम में गुलाबी से थोड़ी तेज़ सर्दी होती है। वाराणसी का विशेष मिष्ठान मलइयो भी इसी मौसम में मिलता है और साथ ही साइबेरियन पक्षियों का भी गंगा में भारी मात्रा में जमावड़ा लगता है।

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कैसे पहुंचे वाराणसी How to reach Varanasi ?

वाराणसी, सड़क, रेल और वायुमार्ग से पूर्ण से जुड़ा हुआ है।

वायु मार्ग द्वारा

लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डा Lal Bahadur Shashtri Airport Varanasi (IATA: VNS) शहर के केंद्र से 25 किमी उत्तर – पश्चिम में स्थित है। यहाँ से आप शहर के केंद्र में आप बस / टैक्सी / ऑटो द्वारा मात्र एक घंटे में पहुँच सकते हैं। यहां से बसें पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। यह हवाई अड्डा एयर इंडिया, स्पाइसजेट, और इंडिगो की रेगुलर फ्लाइट्स द्वारा देश के लगभग शहरों से जुड़ा हुआ है।

रेल द्वारा

वाराणसी देश के सभी बड़े शहरों से रेल द्वारा बेहतर तरीके से जुड़ा हुआ है। दिल्ली से आप यहाँ मात्र 12 घंटे में पहुँच सकते हैं और यदि वंदे भारत एक्सप्रेस Vande Bharat Express में हैं तो मात्र 8 घंटे में पहुंच सकते हैं।

वाराणसी और उसके आस – पास तीन बड़े रेलवे स्टेशन हैं:

वाराणसी जंक्शन Varanasi Junction (स्टेशन कोड: BSB)
मंडुआडीह रेलवे स्टेशन Manduadih Railway Station (स्टेशन कोड: MUV)
पं. दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन Pt. Deen Dayal Upadhyay Junction (स्टेशन कोड: DDU): सबसे अधिक रेलें इसी स्टेशन के लिये उपलब्ध हैं।

रेलवे में आरक्षण के लिये https://www.irctc.co.in/nget/train-search पर क्लिक करें।

बस द्वारा

वाराणसी के लिये दिल्ली, लखनऊ, प्रयागराज कानपुर, काठमांडू (नेपाल), बोधगया, गोरखपुर, खजुराहो, अयोध्या, आगरा आदि शहरों से बसें उपलब्ध हैं।

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चार धाम यात्रा गाइड पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें
कैलाश मानसरोवर यात्रा गाइड पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें
जागेश्वर धाम यात्रा गाइड पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें
गंगोत्री यात्रा पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें)

शहर में सफ़र

ध्यान दें कि वाराणसी में मुख्य सड़कों को छोड़ कर ज़्यादातर गलियां ऑटो-रिक्शा और कार द्वारा पहुंचने के लिए बहुत संकीर्ण हैं और इसलिए आपको अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए थोड़ा पैदल चलना पड़ सकता है।

पैदल यात्रा

वाराणसी के खूबसूरत घाटों की यात्रा के लिये पैदल चलना ही सर्वोत्तम है। रास्ता भूलने – भटकने जैसी किसी समस्या का सामना आपको नहीं करना होगा क्योंकि यहाँ के लोग बहुत ही मिलनसार हैं, जो की स्वयं आपकी मदद के लिये तैयार रहते हैं, बाकी गूगल मैप तो है ही। दुकानों के बोर्ड आपको हिंदी और इंग्लिश दोनों ही भाषाओं में दिखेंगे। बहुत सी टूर कंपनियां वॉकिंग टूर भी आयोजित करती हैं। वैसे मुझे नहीं लगता की वॉकिंग टूर के लिये भी आपको किसी एजेंसी की आवश्यकता पड़ेगी।

रिक्शा और ऑटो-रिक्शा द्वारा

वाराणसी की भीड़ भाड़ से भरी सड़कें कई बार पैदल यात्रा के लिहाज़ से जटिल हो जाती हैं। इसलिए बेहतर है की घाटों पर टहलने के अतिरिक्त बाकि यात्रा के लिए साइकिल रिक्शा या ऑटो-रिक्शा द्वारा यात्रा करना सुविधाजनक होगा। यहाँ रिक्शा, ऑटो रिक्शा, ई-रिक्शा आसानी से उपलब्ध हैं।

कार या टैक्सी द्वारा यात्रा

आप टैक्सी या कार भी बुक कर सकते हैं।

वाराणसी टैक्सी कैब सर्विस: + 91- 9839239496 (varanasitaxicabs@gmail.com)
गोजो कैब्स (टैक्सी कैब सर्विस): + (+91) 90518-77-000 (info@gozocabs.com)
विनायक ट्रेवल्स (टैक्सी कैब सर्विस):-+ 91- 9450301573 (abhinavpandey.1996@gmail.com)
ओला कैब (Ola cab in Varanasi): https://book.olacabs.com/outstation-cabs?utm_source=googlesearch_brand_non_pilot_p2_non_route_city_bmm&gclid=EAIaIQobChMI0Jf84O7c4wIVioRwCh0Rog1PEAAYASAAEgIZxvD_BwE

साइकिल द्वारा

कुछ एजेंसियां साइकिल भी उपलब्ध कराती हैं जिनकी जानकारी आपको आपके होटल से मिल जाएगी।

 

वाराणसी के दर्शनीय स्थल (Places to visit in Varanasi)

जब बात वाराणसी में दर्शनीय स्थलों की आती है तो आपके सामने होती है एक लम्बी – चौड़ी लिस्ट क्योंकि वाराणसी कोई छोटा शहर तो नहीं। इसलिये हम यहाँ जानकारी दे रहें हैं उन चुने हुए स्थलों की जहाँ आपको जाना ही चाहिये।

घाटों और गंगा नदी की सैर

गंगा नदी भारतियों के लिए एक पवित्र नदी है। यहाँ आप दिन भर नदी किनारे बहुत से लोगों को धार्मिक अनुष्ठान और स्नान करते दिखाई देंगे। गंगा के पूर्वी तट पर, 300 मीटर चौड़ी रेत की बेल्ट फैली हुई है जो की कछुआ प्रजनन क्षेत्र के रूप में भी जानी जाती है। गंगा नदी के पश्चिमी अर्धचंद्राकार किनारे पर एक के बाद एक 84 घाटों श्रृंखला फैली हुई है। यह घाट 7 किमी तक में फैले हुए हैं। ये घाट उन हिंदू राजाओं द्वारा बनाए गए थे, जो गंगा के किनारे मुक्ति चाहते चाहते थे। इन्हीं राज्यों ने नदी किनारे भव्य महलों और हवेलियों का भी निर्माण करवाया। इनमें से अधिकांश अब होटल का रूप ले चुके हैं।

आप यहाँ पैदल चलते हुए घाटों की सैर कर सकते हैं किन्तु इससे भी बेहतर विकल्प है नाव द्वारा सफर। नाव में बैठे हुए जब आप वाराणसी के घाटों की ओर देखते हैं तो अध्यात्म की ऐसी अनुभूति होती है जिसे शब्दों में नहीं लिखा जा सकता। घाटों पर हो रही गंगा आरती, मंत्रोच्चार, घंटो की ध्वनि आदि जब कानों में पड़ती है तो आप अपनी चिंताओं को भूल कर एक विशेष प्रकार की शांति अनुभव करेंगे। आइये डालते हैं वाराणसी के प्रमुख घाटों पर एक नज़र।

वाराणसी के प्रमुख घाट (Famous ghats in Varanasi)

दशाश्वमेध घाट Dasaswamedh Ghat : यह वाराणसी के मुख्य घाट के रूप में जाना जाता है और यहाँ से काशी विश्वनाथ मंदिर की दूरी मात्र 200 मीटर है। यहाँ की संध्या आरती बहुत भव्य होती है।
अस्सी घाट Assi Ghat : वाराणसी का सबसे प्रसिद्ध घाट और युवाओं के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय। यहाँ बहुत से होटल, रेस्तरां और इंटरनेट कैफे आदि उपलब्ध हैं।
मणिकर्णिका घाट Manikarnika Ghat : विश्व का सबसे बड़ा श्मशान घाट। यहाँ प्रतिदिन लगभग 200-250 शवों का दाह संस्कार होता है। ध्यान दें की यहाँ फोटोग्राफी निषेध है।
पंचगंगा घाट Panchganga Ghat : पाँच नदियों का मिलन
केदार घाट Kedar Ghat : बेहद खूबसूरत चित्रकारियों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ आप केदारनाथ मंदिर के भी दर्शन कर सकते हैं। फोटोग्राफी के लिये एक आदर्श स्थान है।
नारद घाट Narad Ghat : यहाँ पति – पत्नी का साथ में स्नान करना वर्जित है।
हरिश्चंद्र घाट Harishchandra Ghat : यहाँ महान सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ने अपने पुत्र का अंतिम संस्कार किया था।
हनुमान घाट एवं शिवाला घाट Hanuman Ghat and Shivala Ghat : हनुमान और शिव मंदिरों के लिये प्रसिद्ध है।
तुलसी घाट Tulsi Ghat : यहाँ शहर का सबसे बड़ा जल शोधन संयंत्र है।

वाराणसी के प्रमुख धार्मिक स्थल Famous temples in Varanasi

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर Kashi Vishwanath Temple

काशी विश्वनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह मंदिर हजारों वर्षों से वाराणसी में स्थित है। वाराणसी यात्रा का आरम्भ आप इस मंदिर से कर सकते हैं। काशी विश्‍वनाथ मंदिर का हिंदू धर्म में एक विशिष्‍ट स्‍थान है। मान्यता है कि एक बार इस मंदिर के दर्शन करने और पवित्र गंगा में स्‍नान कर लेने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस मंदिर में दर्शन करने के लिए आदि शंकराचार्य, सन्त एकनाथ रामकृष्ण परमहंस, स्‍वामी विवेकानंद, महर्षि दयानंद, गोस्‍वामी तुलसीदास सभी का आगमन हो चुका हैं। महाशिवरात्रि की मध्य रात्रि में प्रमुख मंदिरों से भव्य शोभा यात्रा ढोल नगाड़े इत्यादि के साथ बाबा विश्वनाथ जी के मंदिर तक जाती है।

वर्तमान मंदिर का निर्माण इंदौर की महारानी अहिल्या बाई होल्कर द्वारा वर्ष 1780 में करवाया गया था। बाद में महाराजा रणजीत सिंह द्वारा 1853 में 1000 कि.ग्रा शुद्ध सोना मंदिर पर लगवाया गया था।

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग दो भागों में है। दाहिने भाग में शक्ति के रूप में मां भगवती विराजमान हैं। दूसरी ओर भगवान शिव वाम रूप (सुंदर) रूप में विराजमान हैं। इसीलिए काशी को मुक्ति क्षेत्र कहा जाता है। विश्वनाथ दरबार में गर्भ गृह का शिखर है। इसमें ऊपर की ओर गुंबद श्री यंत्र से मंडित है।

बाबा विश्वनाथ के दरबार में तंत्र की दृष्टि से चार प्रमुख द्वार इस प्रकार हैं :- 1. शांति द्वार। 2. कला द्वार। 3. प्रतिष्ठा द्वार। 4. निवृत्ति द्वार। इन चारों द्वारों का तंत्र में अलग ही स्थान है। पूरी दुनिया में ऐसा कोई जगह नहीं है जहां शिवशक्ति एक साथ विराजमान हों और तंत्र द्वार भी हो।

भौगोलिक दृष्टि से बाबा को त्रिकंटक विराजते यानि त्रिशूल पर विराजमान माना जाता है। मैदानी क्षेत्र जहां कभी मंदाकिनी नदी और गौदोलिया क्षेत्र जहां गोदावरी नदी बहती थी। इन दोनों के बीच में ज्ञानवापी में बाबा स्वयं विराजते हैं। मैदागिन-गौदौलिया के बीच में ज्ञानवापी से नीचे है, जो त्रिशूल की तरह ग्राफ पर बनता है। इसीलिए कहा जाता है कि काशी में कभी प्रलय नहीं आ सकता।

आतंकवादी हमलों को देखते हुए यहाँ सुरक्षा बेहद कड़ी है।

दुर्गा मंदिर, दुर्गा कुंड Durga Temple, Durga Kund

यह मंदिर देवी दुर्गा को समर्पित है। इसे बंगाली महारानी भवानी ने नागर शैली में बनवाया था। वानरों की अधिकता के कारण इसे वानर मंदिर भी कहा जाता है। दुर्गा मंदिर काशी के पुरातन मंदिरॊ मॆ सॆ एक है। यह मंदिर वाराणसी कैन्ट से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर है। लाल पत्थरों से बने अति भव्य इस मंदिर के एक तरफ “दुर्गा कुंड” है। इस मंदिर में माँ दुर्गा “यंत्र” रूप में विरजमान है। यहाँ मांगलिक कार्य मुंडन इत्यादि भी किये जाते है। दुर्गा मंदिर के नजदीक आनंद पार्क है, जहाँ पर आर्य समाज का प्रथम सास्त्रार्थ काशी के विद्वानों के साथ हुआ था।

गौरी मठ मंदिर Gauri Math Mandir

इस मंदिर में विराजमान देवी को भगवान काशी विश्वनाथ की बहन माना जाता है। काशी छोड़ने से ठीक पहले यहां आने की परंपरा है।

काल भैरव मंदिर Kaal bhairav Mandir Varanasi

भगवान शिव के अवतार काल भैरव को यह मंदिर समर्पित है। यहाँ काला धागा खरीद कर बाबा को चढ़ाया जाता है और फिर उसे बांह या गले पर धारण किया जाता है। मान्यता है की यह धागा तमाम बुराइयों से रक्षा करता है।

काल भैरव को काशी का ‘कोतवाल’ कहा जाता है। मान्‍यता है कि बिना इनकी इच्छा के बिना कोई भी काशी की सीमा में न प्रवेश कर सकता है और न ही यहां रह सकता है। यहां तक कि कोई भी प्रशासनिक अधिकारी चार्ज लेने के बाद सबसे पहले यहीं मत्था टेकने आता है। वर्तमान मंदिर को साल 1715 में दोबारा बनवाया गया था। इसे बाजीराव पेशवा ने बनवाया था। वास्तुशास्त्र के मुताबिक, ये मंदिर आज तक वैसा ही है। इसकी बनावट में कभी कोई बदलाव नहीं किया गया। मान्‍यता है कि कालभैरव के दर्शन मात्र से साढ़े-साती, अढ़ैया जैसे दंडों से बचा जा सकता है। बाबा को सरसों के तेल का दीप, ऊर्द की दाल का बड़ा, बेसन के लड्डू चढ़ते हैं। व्‍यवसाय में तरक्‍की के लिए चीनी का घोड़ा और मदिरा चढ़ाई जाती है। मदिरा उन्‍हें बहुत प्रिय है।

नेपाली हिंदू मंदिर Nepali Hindu Mandir काठ वाला मंदिर

एक छोटा सुनहरा मंदिर, जिसे नेपाली वास्तुकला में बनाया गया है। नेपाली मंदिर की कहानी बहुत ही दिलचस्प है और ये आपको सीधे 19 वीं सदी में ले जाती है। 19वीं सदी में नेपाल के राजा राणा बहादुर शाह ने वाराणसी में निर्वासन ले लिया। उन्होंने ही निश्चय किया कि वह नेपाल की राजधानी काठमांडू में स्थापित पशुपतिनाथ मंदिर की ही तरह हूबहू एक शिव मंदिर यहाँ भी बनवाएंगे। हालाँकि उनके निर्वासन के दौरान मंदिर का निर्माण कार्य शुरू तो हो गया पर इसे पूरा होने में पूरे 30 सालों का समय लगा।

लकड़ी का बना होने के कारण इसे ‘कांठवाला मंदिर’ भी कहा जाता हैं। यह मंदिर टैराकोटा,लकड़ी और पत्थर के इस्तेमाल से नेपाली वास्तुशैली में बनाया गया है। यह रचना नेपाली कारीगरों की उत्कृष्ट शिल्प कौशल को बखूबी दर्शाती है। इसलिए यह वाराणसी के कुछ खास मंदिरों में से एक है।

संकट मोचन मंदिर Sankat Mochan Temple

संकट मोचन मंदिर हनुमान जी के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक हैं। यह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय कॆ नजदीक दुर्गा मंदिर और नयॆ विश्वनाथ मंदिर के रास्ते में स्थित हैं। इस मंदिर की रचना बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के स्थापक श्री मदन मोहन मालवीय जी द्वारा 1900 ई० में हुई थी। इस मंदिर की स्थापना वही हुईं हैं जहाँ महाकवि तुलसीदास को पहली बार हनुमान जी का स्वप्न आया था। हर मंगलवार और शनिवार, हज़ारों की तादाद में लोग भगवान हनुमान को पूजा अर्चना अर्पित करने के लिए कतार में खड़े रहते हैं।

सारनाथ (वाराणसी से 13 किमी) Sarnath

ऐसा माना जाता है कि सारनाथ में भगवान बुद्ध आत्मज्ञान प्राप्त करने के बाद ने अपने शिष्यों को पहला उपदेश दिया था। सारनाथ में एक संग्रहालय भी है। इस स्थान को डियर पार्क के रूप में भी जाना जाता है। सारनाथ वाराणसी से 13 किलोमीटर दूर है और बहुत शांत है। कई एशियाई देशों ने अपनी प्राचीन वास्तु परंपराओं का पालन करते हुए वहां बौद्ध कई मंदिरों का निर्माण किया है।

तुलसी मानस मंदिर Tulsi Manas Mandir

तुलसी मानस मन्दिर वाराणसी के आधुनिक मंदिरों में एक बहुत ही मनोरम मन्दिर है। यह मन्दिर वाराणसी कैन्ट से लगभग 5 किलोमीटर दूर दुर्गा मन्दिर के समीप में है। पूरी तरह संगमरमर से बने इस मंदिर का उद्घाटन भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति महामहिम सर्वपल्ली राधाकृष्णन द्वारा सन 1964 में किया गया।

इस मन्दिर के मध्य मे श्री राम, माता जानकी, लक्ष्मणजी एवं हनुमानजी विराजमान है। इनके एक ओर माता अन्नपूर्णा एवं शिवजी तथा दूसरी तरफ सत्यनारायणजी का मन्दिर है। इस मन्दिर के सम्पूर्ण दीवार पर रामचरितमानस लिखा गया है। इसके दूसरी मंजिल पर संत तुलसी दास जी विराजमान है, साथ ही इसी मंजिल पर स्वचालित श्री राम एवं कृष्ण लीला होती है। मंदिर के प्रथम तल पर रामचरित मानस की विभिन्न भाषाओं में दुर्लभ प्रतियों का संग्रह मौजूद है।

अन्य दर्शनीय स्थल

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय Banaras Hindu University

एक बहुत ही हरा भरा और शांतिपूर्ण परिसर जो की एशिया के सबसे बड़े आवासीय विश्वविद्यालय के रूप में जाना जाता है। कभी इसे पूर्व का ऑक्सफ़ोर्ड भी कहा जाता था। इसका निर्माण भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने चंदे की राशि से करवाया था। यह 124 विभागों के साथ एशिया का सबसे बड़ा आवासीय विश्वविद्यालय है। आप यहाँ भारत कला भवन, कला और पुरातत्व संग्रहालय देख सकते हैं। नया विश्वनाथ मंदिर भी विश्वविद्यालय परिसर में ही स्थित है।

मान मंदिर ऑब्ज़र्वेटरी अथवा वाराणसी का जंतर मंतर Man Mandir Observatory

मान मंदिर घाट के समीप स्थित मान मंदिर ऑब्ज़र्वेटरी का निर्माण जयपुर के राजा जय सिंह ने सन 1737 में वेधशाला के रूप में करवाया था। यह ग्रह – नक्षत्र, सूर्य, तारों आदि पर अध्यन किया जाता था।

रामनगर किला Ramnagar Fort

रामनगर का किला वाराणसी के रामनगर तुलसी घाट के सामने गंगा के पूर्वी तट पर स्थित है। इस किले का निर्माण सन 1750 में काशी नरेश राजा बलवंत सिंह द्वारा मुगल शैली में कराया गया था। एक ऐतिहासिक स्थल होने के साथ – साथ यह काशी के शाही परिवार का निवास स्थान भी है। वर्तमान में महाराजा अनंत नारायण सिंह किले में निवास कर रहे हैं। किले तक जाने के लिए पोंटून पुल बनाया गया है। मानसून के मौसम के दौरान किले में जाने के लिए केवल नौका सेवा उपलब्ध है।

रामनगर किले के बारे में रोचक तथ्य Interesting Facts About Ramnagar Fort In Hindi

महाभारत काल के दौरान रामनगर ही वह स्थान था जहाँ वेद व्यास रहकर तपस्या किया करते थे।
रामनगर किले में एक मंदिर और मैदान के भीतर एक संग्रहालय है और वेद व्यास को समर्पित एक मंदिर भी है। संग्रहालय के अंदर विंटेज कारें, रॉयल पालकी, तलवारों का एक शस्त्रागार और पुरानी बंदूकें, हाथी दांत का काम और प्राचीन घड़ियां रखी गई हैं।
रामनगर किले की दीवारों पर एक विशाल घड़ी लगी है। यह घड़ी न केवल वर्ष, महीना, सप्ताह और दिन प्रदर्शित करती है बल्कि सूर्य, चंद्रमा और सितारों के नक्षत्रों के बारे में खगोलीय तथ्य भी बताती है।
किले में राज मंगल नामक एक प्रसिद्ध त्योहार भी फाल्गुन के महीने में मनाया जाता है। इसके अलावा यहां नौका परेड, नृत्य और गायन भी होता है।

 

वाराणसी यात्रा के दौरान महत्वपूर्ण गतिविधियां (Things to do in Varanasi)

गंगा स्नान (Bathing in Ganga)
वाराणसी में प्रतिदिन लगभग 60000 श्रद्धालु गंगा में डुबकी लगाते हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय तो यह नज़ारा देखने लायक होता है और यही समय फोटोग्राफी के लिये परफेक्ट है। एक समय था जब गंगा में प्रदूषण की मात्रा भी बहुत बढ़ चुकी थी लेकिन अथक प्रयासों का परिणाम है की गंगा वाराणसी में वापस स्वच्छता की ओर लौट आई है।

नौका विहार Boat ride in Varanasi

वाराणसी आये नौका विहार न किया तो क्या किया। खासकर सूर्योदय और सूर्यास्त के समय तो नौका विहार बहुत प्रसिद्ध है। यहाँ विभिन्न श्रेणियों में नौका विहार की सेवा उपलब्ध है जैसे की साझा आधार पर (Shared Basis) और पूरी नाव। यहाँ चप्पू वाली, मोटर बोट, स्टीमर आदि उपलब्ध हैं। सुबह और शाम के समय तो कुछ मंडली वाले भी नाव पर लोक गीत गाते हैं। बहुत ही आनंदमय दृश्य होता है।

अलकनंदा क्रूज सेवा भी अब उपलब्ध है। यह सेवा सुबह और शाम के समय उपलब्ध रहती है। सुबह वाला क्रूज सूर्यास्त के समय गंगा नदी के किनारों के शानदार दृश्यों के दर्शन कराता है। शाम वाला क्रूज़ आपको सूर्यास्त की रौशनी में नहीं हुई गंगा नदी की सैर करवाता है।

यह सेवा अलकनंदा जेट्टी (संत रविदास घाट, रविदास पार्क के पीछे, नागवा (अस्सी घाट के पास)से आरम्भ होती है और क्रूज पर ही चाय / कॉफी, बोतलबंद पानी और बिस्किट निःशुल्क उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त आपको यहाँ खालिस बनारसी स्वाद का ज़ायका भी मिलेगा।

आप अपनी सीट की बुकिंग यहाँ क्लिक http://nordiccruiseline.com/ करके कर सकते हैं।

घाटों की सैर Walking on ghat

बनारस के घाटों पर चहलकदमी करना भी अच्छा है। छोटे – बड़े मंदिरों और किनारों पर हो रहे विभिन्न कार्यक्रमों को देखते हुए सैर करना आपको बहुत अच्छा लगेगा।

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Hiten Bhatt
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Hiten Bhatt

chand dino pahele bataya hota to kitna achchha hota…me 10 din pahele hi Banarasme tha…..achchha vivran…