रिकी मार्टिन की भारत में आध्यात्मिक यात्रा Ricky Martin’s spiritual journey in India

आप सभी की तरह मुझे भी यात्रा वृत्तांत Travel Blog पढ़ना बहुत अच्छा लगता है लेकिन उससे भी अधिक दिलचस्पी मुझे यह जानने में रहती है की आखिर ऐसा क्या हुआ जिसने की एक आम दैनिक दिनचर्या में व्यस्त व्यक्ति को घुमक्कड़ बना दिया ? उस यात्रा के दौरान क्या हुआ ? उस यात्रा ने उसके जीवन पर क्या प्रभाव डाला और उससे उसने जीवन में क्या अलग सीखा ?

ऐसी बहुत सी यात्रायें होती रही  हैं जिन्होंने कुछ लोगों का जीवन ही बदल कर रख दिया, उसके सोचने की दिशा बदल दी और फिर वे दुनिया के सामने एक अलग ही रूप में निकल कर आये। उदाहरण के हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को ही देख लीजिए, हिमालय यात्रा Himalaya Travel के दौरान जो योगी जीवन उन्होंने जीया उसने आजीवन उनके जीवन पर प्रभाव डाला। एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स तो अपनी कामयाबी का श्रेय अपनी भारत यात्रा को देते हैं। मार्क ज़ुकरबर्ग भी उत्तराखण्ड के नीम करौली आश्रम Neem Karoli Ashram में समय बिता चुके हैं।

ऐसे ही बहुत से लोग हैं जिनके जीवन को यात्राओं ने विशेषकर भारत यात्रा ने रूपांतरित कर दिया…. इन्हीं लोगों में से एक हैं प्रसिद्ध गायक रिकी मार्टिन Ricky Martin। उन्होंने अपनी आत्मकथा (Autobiography) ‘मी’ (‘Me’ by Ricky Martin) में अपनी भारत यात्रा का विशेष रूप जिक्र किया है। एक विश्व विख्यात पॉप स्टार का झुकाव आध्यात्मिक यात्रा की ओर कैसे हुआ और इस यात्रा के दौरान उनका अनुभव कैसा रहा, यह आप इस पोस्ट में पढ़ेंगे। उनकी ऑटोबायोग्राफी इंग्लिश में है लेकिन हिंदी पाठकों का ध्यान रखते हुए मैंने उनकी भारत यात्रा का अनुवाद हिंदी में किया है।

Ricky Martin image source Google Image
Ricky Martin image source Google Image

अब रिकी मार्टिन Ricky Martin के शब्दों में –

छोटा योगी (The Little Yogi)

यह साल 1998 का अंत रहा होगा जब मैं अपनी आने वाली एल्बम “ला कोपा दे ला विदा” La copa la de vida की तैयारियों की व्यस्तता के बीच भी बैंकॉक में एक म्यूजिक कॉन्सर्ट की तैयारियां कर रहा था। इन्ही व्यस्तताओं के बीच मूड को थोड़ा रिफ्रेश करने के लिये यूँही आस – पास थोड़ा सा घूमने चला गया। ज़्यादा दूर नहीं, बस यहीं होटल में… एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी हिस्सा लेना था। प्रेस कॉन्फ्रेंस निपटा कर मैं किचन से होते हुए अपने कमरे में जा रहा था की तभी एक आदमी को देखा…. एक विशेष सी आभा थी उसके आस – पास, वो कहते हैं न Different aura। वह छोटे से  गाँधी जैसा दिख रहा था। सामान्यत मैं ऐसे ही किसी की ओर ध्यान नहीं देता और शायद इस व्यक्ति को भी अनदेखा करता हुआ मैं निकल जाता, लेकिन… लेकिन कुछ था उसमे कुछ ऐसा जिसने मेरा ध्यान खींचा।
”हेलो” – उसकी ओर देखते हुए मैंने इंग्लिश में कहा।
और उसने स्पेनिश में जवाब दिया – ”होला !”
”होला?” – “तुम स्पेनिश बोलते हो?”
“बेशक, मैं भी प्यूर्तो रिकन हूँ।”
“क्या आप भी यहाँ भी घूमने – फिरने आयें हैं?” – मैंने उससे पूछा।

इधर बातें चल रही थी और उधर शेफ ढेर सारे व्यंजन मेरे कमरे में सर्व करके चले गये। सुरक्षा गार्ड लिफ्ट में मेरी प्रतीक्षा कर रहे थे ताकि मैं अपने कॉन्सर्ट से पहले भोजन करके थोड़ा आराम कर लूँ लेकिन उस खास पल में मुझे लगा कि समय ठहर सा गया है। सभी के होते हुए भी वहां इतनी शांति थी की ऐसा लग रहा था की वहां मेरे और उस आदमी के अलावा कोई और नहीं हो।

“नहीं, नहीं,” उन्होंने जवाब दिया। “मैं प्यूर्तो रिकन हूं और मैं पिछले अठारह वर्षों से बैंकॉक में रह रहा हूँ।”
उसने मुझे बताया कि वह एक बौद्ध भिक्षु (Ex Monk) हुआ करता था और वह भारत में रहता था। एक भिक्षु के रूप में उन्होंने नेपाल और तिब्बत की यात्रा की थी, और बाद में उन्होंने थाईलैंड के पहाड़ों में कई साल बिताये। लेकिन एक दिन उसे एक चीनी महिला से प्यार हो गया और उसने एक बौद्ध भिक्षु का जीवन त्यागने का फैसला कर लिया ताकि वह शादी करके अपना परिवार बना सके। इसलिये उसने होटल में काम करना शुरू कर दिया था।

“बन्दर जन्म से ही बन्दर होते हैं और उनका जीवन पेड़ों पर रहने लिये और उछल – कूद करने के लिये बना होता है। मनुष्य प्रजनन के लिये और परिवार बसाने के लिये पैदा हुए हैं और इसलिये उन्हें वही करना चाहिये।” इसलिए मैंने एक भिक्षु का जीवन त्याग दिया। अब मैं शादीशुदा हूं और मेरी दो सुंदर बेटियां हैं। भले ही मैं अब भिक्षु नहीं हूं, लेकिन इस भिक्षु जीवन के दौरान मिले अनुभव ने मुझे अपना रास्ता खोजने में मदद की।” – उसने कहा।

जागेश्वर धाम यात्रा पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें।

उसकी बातें ने मानों मेरी आत्मा को छू गईं। उसकी कहानी ने मुझे प्रभावित किया, लेकिन इन सबसे बढ़के मुझे इस आदमी की मौजूदगी में कुछ खास लगा और मैं नहीं चाहता था कि वह इतनी शीघ्र मुझसे दूर चला जाये। मैं उनसे और सवाल पूछना चाहता था और उनकी बाकी की कहानी सुनना चाहता था। मुझे नहीं पता कि क्या ऐसा मात्र इसलिए है क्योंकि वह भी मेरी तरह प्यूर्तो रिकन था या फिर उसके चारों और फैली आभा मुझे ऐसा सोचने पर मजबूर कर रही थी, लेकिन मुझे ऐसा लगा कि हमारे बीच बहुत मजबूत संबंध है। शायद यह केवल एक आकर्षण हो, लेकिन इतना तो था की मैं गलत नहीं था।

Ricky Martin in india image source Google Image
Ricky Martin in india image source Google Image

“एक मिनट रुको!” – मैंने उससे कहा।
“मुझे आपसे और बातें करनी है। क्या आपके पास मेरे साथ चलने के लिये थोड़ा समय है? मैं आपके साथ कुछ और देर बातें करना चाहता हूँ।”
उसने मुस्कुराहट के साथ जवाब दिया – “हाँ” और लिफ्ट में मेरे साथ, मेरे कमरे में आया। हमारी बातें जारी रही।
मुझे अब एहसास हुआ की मेरे आस – पास तो अध्यात्म की एक पूरी दुनिया हमेशा साथ रहती थी जिसे मैं अब तक अनदेखा करता आया था। मेरा एक मित्र, जो उस समय मेरे बैकअप गायकों में से एक था, उसे अध्यात्म के बारे में अच्छी जानकारी थी और वह भी मुझे इस अध्यात्म की अनदेखी दुनिया से परिचित कराता रहता था। उस समय मेरे सामने “योग” या “कर्म” या “ध्यान” शब्दों का की बात करना भी मुझे आकर्षित करने के लिये पर्याप्त था।

आदि कैलाश यात्रा पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें।

“यह तो वाकई अमेजिंग है। अभी, मुझे अध्यात्म में दिलचस्पी है, और आप मुझे ठीक वैसे ही जान पड़ते हैं जैसी छवि मैंने एक भिक्षु की अपने मन में बनाई हुई है”
– मैंने उस पूर्व भिक्षु (Ex Monk) से कहा।

थोड़ी देर साथ में बैठने के बाद, मैंने अपने बैकअप गायक दोस्त को फोन करके बुला लिया… हम अपने जीवन से जुड़ी बातों पर चर्चा कर रहे थे। हमने बहुत सी चीजों के बारे में बातें की, जिनमे से अधिकतर अब मुझे याद नहीं लेकिन इतना तो मैं जनता हूँ की इन बातों का मुझ पर पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा। अभी हम बातें कर ही रहे थे की मुझे साउंड चेक के लिये बुलाया गया।

”तुम लोग बातें करों, मैं अभी साउंड चेक करके आता हूँ” – ऐसा कह के मैं वहां से कुछ देर के लिये गया और वापस आकर फिर से बातों का दौर चल पड़ा।

मैं अपने दोस्त और पूर्व भिक्षु (Ex Monk) के साथ हो रही बातचीत से इतना आकर्षित था कि मैंने उनके द्वारा कहे गए प्रत्येक शब्द और उनके द्वारा समझे गए प्रत्येक शब्द को आत्मसात करने की कोशिश की। भले ही मैं आध्यात्मिक ज्ञान के बारे में थोड़ा बहुत जानता था, लेकिन ज्ञान के जिस रूप की बातें कर रहे थे, अथार्त जिस गंभीरता से बातें कर रहे थे वह मेरे लिए पूरी तरह से नया था। उनके बातें करते – करते रात के खाने का समय हो गया। मैंने भिक्षु से पूछा – “आप खाने नहीं जा रहे हैं?”

“मुझे इसकी चिंता नहीं है,” उन्होंने मुझसे कहा।“ मुझे यहां बैठकर बात करने में ही काफी संतुष्टि का अनुभव हो रहा है।

वह पूर्व भिक्षु (Ex Monk) जो की अब यहाँ शेफ का काम करता रहा था, एक असाधारण व्यक्ति था जिसने मुझे एक अलग ही दुनिया से परिचित कराया। एक ऐसी दुनिया जिसका मुझे पहले से कोई विशेष ज्ञान नहीं था। उसने ही सिखाया की व्यक्ति को जीवन में अधिक से अधिक सीखने के लिए क्या करना चाहिए।

कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिये यहाँ क्लिक करें।

हम जितना एक दूसरे को अधिक से अधिक जानते और समझते जा रहे थे, हमारे बीच एक आध्यात्मिक सम्बन्ध बढ़ता जा रहा था। मुझे ऐसा लगा जैसे की हम एक दूसरे को बहुत पहले से जानते हैं। ठीक पहली नज़र के प्यार की तरह ही हमारी यह दोस्ती थी। आज मैं उन्हें छोटे योगी के रूप में केवल इसलिए सम्बोधित नहीं करता हूँ की उनके नाम में ”योगी” उपनाम के रूप में जुड़ा था अपितु इसलिये की उन्होंने उस छोटी सी भेंट में मुझे बहुत कुछ सिखा दिया था। वे अब मेरे लिए एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक बन चुके थे।

मुझे लगता है कि अपने जीवनकाल के दौरान अधिकांश समय मैं आध्यात्मिक यात्रा पर ही रहा हूं। मैंने हमेशा से आंतरिक शांति और ईश्वर की तलाश करने की कोशिश की है – चाहे उस ईश्वर का नाम कुछ भी हो मैंने हमेशा उसे अपने आस – पास पाया है। इसलिए जब मैं उस पूर्व भिक्षु (Ex Monk) से मिला, तो उन्होंने अध्यात्म के ज्ञान की छाप इतनी अच्छी तरह छोड़ दी थी की मुझे यह समझाने में देर नहीं लगी कि मुझे और मेरे बैकअप गायक को उस पूर्व भिक्षु के साथ ज्ञान के स्रोत की तलाश के लिये एक लम्बी यात्रा पर निकलना चाहिये, या ऐसा कहें की आध्यात्मिक यात्रा को आरम्भ करने का समय आ चुका है।

इस भाग में इतना ही… अगला भाग पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें। आपको यह भाग कैसा लगा, कमेंट करके अवश्य बतायें।

Leave a Reply

avatar
  Subscribe  
Notify of