National War Memorial Delhi

राष्ट्रीय समर स्मारक की सैर Trip to National War Memorial

दिल्ली में जब भी कहीं घूमने जाने की बात होती है तो आम तौर पर दिमाग में जो जगहें सबसे पहले आती हैं वे हैं – लाल किला, क़ुतुब मीनार, पुराना किला, चिड़िया घर, हुमायु का मकबरा, कनॉट प्लेस, अक्षरधाम मंदिर, छतरपुर मंदिर, राष्ट्रपति भवन, इंडिया गेट…. यही न ? अब इसी इंडिया गेट के पास तैयार हो गया है एक स्मारक जो की स्वतंत्रता से लेकर अब तक की लड़ाइयों में शहीद हुए सैनिकों के सम्मान में बनाया गया है, और इसे राष्ट्रीय समर स्मारक अथार्त National War Memorial के नाम से जाना जाता है।

राष्ट्रीय समर स्मारक की यात्रा पर निकलने से पहले जान लेते हैं कुछ बातें इसके बारे में।

National War Memorial Delhi
National War Memorial Delhi

राष्ट्रीय समर स्मारक के बारे में परिकल्पना तो वर्ष 1960 में ही की जा चुकी थी लेकिन विभिन्न कारणों के चलते इसका निर्माण टलता जा रहा था। आखिर वर्ष 2015 में भारत सरकार ने स्मारक के निर्माण को हरी झंडी दिखा दी। वर्ष 2016 सरकार ने वॉर मेमोरियल के डिज़ाइन को लेकर एक प्रतियोगिता का आयोजन किया जिसे नाम दिया गया ”Global Design Competition for National War Memorial”। इस प्रतियोगिता में मुंबई के sP+a Studio’s के डिज़ाइन को सबसे अधिक पसंद किया गया और उसी डिज़ाइन के आधार पर राष्ट्रीय समर स्मारक का निर्माण आरम्भ हुआ।

  • एक लम्बे इंतज़ार के बाद आखिर 1 जनवरी 2019 को स्मारक का निर्माण संपन्न हुआ और 25 फ़रवरी 2019 के दिन भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा राष्ट्रीय समर स्मारक राष्ट्र को समर्पित किया गया।
  • सरकार द्वारा निर्मित यह देश का पहला और सबसे बड़ा सैन्य स्मारक है। सरकार द्वारा निर्मित इसलिये कहा क्योंकि चंडीगढ़ में भी एक सैन्य स्मारक है जो की आम जनता के सहयोग से बना है। यहाँ उन 25942 सैनिकों को सम्मान दिया गया है जिन्होंने देश की रक्षा में अपने प्राण त्याग दिये।
  • चक्रव्यूह रचना से प्रेरणा लेते हुए, 40 एकड़ के क्षेत्र में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का निर्माण किया गया। स्मारक के केंद्र में एक स्तम्भ है जिसमें अमर जवान ज्योति हमेशा प्रज्वलित रहती है। इस स्तम्भ का निर्माण अशोक स्तम्भ की शैली में किया गया है और इसके शीर्ष पर अशोक चक्र की स्थापना की गयी है।
  • इस स्मारक के लेआउट में एक के बाद एक चार चक्र बनाये गये हैं – जिनमे पहला चक्र ‘अमर चक्र’, दूसरा चक्र ‘वीरता चक्र’, तीसरा चक्र ‘त्याग चक्र’ और चौथा चक्र ‘रक्षक चक्र’ है।
  • प्रसिद्ध मूर्तिकार श्री राम सुतार द्वारा कांस्य निर्मित छः भित्ति चित्र यहाँ वीरता चक्र की गैलरी में लगाये गये हैं जो की अब तक लड़ी गयी छः प्रमुख लड़ाइयों को दर्शाते हैं।
  • इसी तरह, 25942 शहीद सैनिकों को सम्मान देने के लिए चक्रव्यूह शैली में छः दीवारों का निर्माण किया गया है जिन पर लगे ग्रेनाइट पर उन शहीदों के नाम लिखे गये हैं। इनके नाम के साथ – साथ इनका पद और रेजिमेंट भी दर्शाया गया है।
  • सबसे बाहरी चक्र अथार्त रक्षक चक्र में 600 से अधिक घने वृक्षों की पंक्तियाँ हैं, जो देश की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने वाले सैनिकों का प्रतिनिधित्व करती हैं।
  • मुख्य परिसर के अलावा इंडिया गेट के सी-हेक्सागन क्षेत्र के उत्तरी किनारे पर एक परम योद्धा स्थल पार्क भी बनाया गया है। इस पार्क में 21 परमवीर चक्र विजेताओं की कांस्य प्रतिमायें लगी हुई हैं।
  • यहाँ उन सैनिकों को भी सम्मान दिया गया है जिहोने संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों में अपने प्राण गंवा दिये।

राष्ट्रीय समर स्मारक (National War Memorial) के खुलने और बंद होने का समय

National War Memorial Delhi Entrance
National War Memorial Delhi Entrance

अप्रैल से अक्टूबर: सुबह 9 बजे से शाम 7:30 बजे तक
नवंबर से मार्च: सुबह 9 बजे से शाम 6:30 बजे तक
स्मारक में प्रवेश निःशुल्क है।

कैसे पहुंचे ?

राष्ट्रीय समर स्मारक इंडिया गेट के पीछे है। अतः यहाँ पहुंचना आसान है। नज़दीकी मेट्रो स्टेशन केंद्रीय सचिवालय है जिसके गेट नंबर तीन से बाहर आकर आप ऑटो द्वारा इंडिया गेट पहुँच सकते हैं। वैसे मेट्रो स्टेशन से दूरी मात्र 2 किलोमीटर ही है। इसलिये आप पैदल भी राजपथ पर सैर करते हुए जा सकते हैं।

इसके अतिरिक्त नेशनल वॉर मेमोरियल अब दिल्ली पर्यटन की होहो बस सर्किट (Hop On Hop Off Bus (HOHO Bus)) का भी भाग बन चुका है। अतः आप दिल्ली के 24 अन्य स्थलों की सैर के साथ – साथ स्मारक की सैर भी इस सेवा के माध्यम से कर सकते हैं। आप होहो बस सेवा की बुकिंग यहाँ क्लिक करके कर सकते हैं।

Rakshak Chakra National War Memorial Delhi
Rakshak Chakra National War Memorial Delhi

अब आते हैं यात्रा पर।

14 फ़रवरी 2019 का मनहूस दिन था जब जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में एक बर्बर आतंकी हमले में देश ने अपने 44 जवानों को खो दिया। केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल का लगभग 70 गाड़ियों का काफिला पुलवामा के अवंतीपुरा से होकर गुज़र रहा था की तभी आतंकियों ने आत्मघाती हमला करते हुए काफिले में शामिल एक बस को बारूद से भरी गाड़ी द्वारा टक्कर मार दी। इस धमाके में 44 जवान शहीद हो गये और बहुत से जवान घायल हो गये। यह हमला पाकिस्तान समर्थित आतंकियों का था।

इस हमले से पुरे देश में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्से की लहर थी, हर देशवासी बदला चाहता था। बदले की भावना के साथ ही थे हम सभी की आँखों में आंसू उन शहीदों के लिये। देश में जगह – जगह जुलूसों का आयोजन किया जा रहा था और सरकार से सबकी एक ही मांग थी की पकिस्तान से बदला लिया जाये। जिसको जिस भी मंच पर मौका मिला वहां उसने अपने गुस्से की अभिव्यक्ति की।

इसी गुस्से के बीच देश को इंतज़ार था उस सैन्य स्मारक के उद्घाटन का जिसका निर्माण 25942 शहीदों की याद में इंडिया गेट के पीछे किया गया था। 25 फ़रवरी को इसका उद्घाटन किया जाना था। उस दिन शाम के समय ऑफिस के कैफेटेरिया में बैठे हुए टीवी पर प्रधानमंत्री को समर स्मारक में अमर जवान ज्योति प्रज्वलित करते हुए देखना और ऊपर से हेलीकाप्टर द्वारा पुष्प वर्षा देखना बहुत अच्छा लग रहा था। सोचा लिया था की एक बार जाना तो है यहाँ।

26 फ़रवरी को सुबह 8 बजे नींद खुली। एक आम भारतीय की तरह मेरा भी पहला हाँथ मोबाइल पर ही गया। फेसबुक पर डॉक्टर सुभाष शल्य की पोस्ट देख कर मैं हैरान हो गया। पोस्ट में लिखा था की भारत ने पाकिस्तान से बदला ले लिया है, पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर बम बरसाये गये हैं। तुरंत टीवी ऑन किया। वहां भी वही न्यूज़ चल रही थी की भारत ने बालाकोट, मुजफ्फराबाद और चकोटी के आतंकी कैम्प्स पर जम कर बम बारी की है। बहुत शांति मिली यह न्यूज़ देख कर की चलो कुछ तो बदला तो पूरा हुआ।

एक भारतीय होने के नाते ख़ुशी होनी स्वाभाविक ही थी। छुट्टी का दिन भी था और देशभक्ति भी हवाओं में छायी हुई थी। सोचा की आज ही राष्ट्रीय समर स्मारक देख लिया जाये। शाम चार बजे वहाँ अकेले ही पहुँच गया।

ऐसा लग रहा था की मानो पूरी दिल्ली ही वहाँ उमड़ आयी हो। भारी भीड़ थी और इसी भीड़ के कारण मोबाइल नेटवर्क भी बुरी तरह बाधित हो रहा था। खैर…. यह समस्या यहाँ आम है। अधिक भीड़ के कारण नेटवर्क सही से नहीं आता यहाँ।

बहुत से लोग फोटो सेशन करने में व्यस्त थे। कुछ लोग यूट्यूब वीडियो बनाने में लगे पड़े थे। टिकटोक वाले भी पीछे कहाँ थे, अपनी अजीबों – गरीब हरकतों को ऐमज़ॉन से आर्डर किये हुए 300 रुपये वाले ट्राइपॉड पर मोबाइल फिट करके रिकॉर्ड करने में लगे हुए थे।

शहीदों के नाम दीवारों पर पढ़ने में व्यस्त था की तभी पीछे जयकारे की आवाज आयी – ‘भारत माता की जय’, शाम के समय सैनिकों द्वारा तिरंगे को सलामी दी जाती है। सैनिकों द्वारा जोश भरी तेज़ आवाज में दी जा रही सलामी को देख कर गर्व से सर ऊँचा गया। सभी लोग सलामी के दौरान भारत माता की जय के नारे लगा रहे थे।

Martyr wall National War Memorial Delhi
Martyr wall National War Memorial Delhi

यह स्मारक बहुत ही शानदार बना है। सबसे बाहरी चक्र अथार्त रक्षक चक्र में बहुत सारे पेड़ और फव्वारे लगाये गये हैं। अमर चक्र सबसे मुख्य चक्र है जहाँ अमर जवान ज्योति प्रज्वलित रहती है। अमर चक्र के बाद वीरता चक्र नाम की एक गैलरी है जिसमें 6 युद्धों से सम्बंधित भित्ति चित्र लगाये गये हैं। सभी लोग उनके बारे में पढ़ रहे थे, फोटो ले रहे थे, सेल्फी ले रहे थे। अमर चक्र और वीरता चक्र के बीच में कोई बाड़ नहीं है लेकिन लोग स्वनुशाशन का पालन करते हुए अमर चक्र में नहीं जाते हैं।

स्मारक की सैर के बाद मैं चल पड़ा इंडिया गेट की ओर। इंडिया गेट से राजपथ पर आगे बढ़ते ही देखा की य्ये बड़े – बड़े न्यूज़ चैनल्स के होर्डिंग लगे हुए हैं। लगभग 6 न्यूज़ चैनल्स की राजपथ के बगल वाले पार्कों में सार्जनिक बहस चल रही थी। ऐसी ही रिपब्लिक भारत की बहस में मैं भी शामिल हो गया। बहस का शीर्षक था – “सबसे बड़ा बदला”। सभी लोगों के हांथो में तिरंगा थमा दिया गया था। न्यूज़ एंकर जोर – जोर से चिल्ला कर लोगों में जोश भरने में लगा हुआ था लेकिन बहस में शामिल होने वाले नेता लोग नदारद थे। आखिर आधे घंटे तक बैठने के बाद वापसी कर ली।

यहाँ से केन्द्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन अधिक दूर नहीं था। पैदल ही जाते हुए सूर्यास्त की कुछ तस्वीरें कैमरे में कैद कर ली, आप भी देखिये…

National War Memorial Entry Gate
National War Memorial Entry Gate

India gate and National War Memorial
India gate and National War Memorial
Sunset view on the Rajpath
Sunset view on the Rajpath
Sunset on the Rajpath
Sunset on the Rajpath

अब तक राष्ट्रीय समर स्मारक दो बार जा चुका हूँ (इसलिये तस्वीरें दोनों यात्राओं की मिलाकर हैं)। आप कब आ रहे हैं सैनिकों की वीरता को सम्मान देने के लिये ?

Leave a Reply

avatar
  Subscribe  
Notify of