Mehandipur Balaji

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर की यात्रा Mehandipur Balaji Temple

भारत में हनुमान जी के अनेक मंदिर हैं जिनमे से कुछ बहुत ही प्रसिद्ध हैं और इन्हे हनुमान जी के प्रमुख मंदिरों के रूप में जाना जाता है। इन्हीं में से एक है राजस्थान के दौसा जिले के मेहंदीपुर में बालाजी जी अथार्त हनुमान जी का मंदिर जिन्हें ‘मेहंदीपुर बालाजी’ (Mehandipur Balaji Temple) के नाम से प्रसिद्ध हैं। उत्तर भारत में इस धाम की ख्याति किसी से छुपी हुई नहीं है। ‘भूत – पिशाच निकट नहीं आवैं, महावीर जब नाम सुनावैं’, बालाजी धाम पर आने वाले अधिकतर भक्तों के आने का मुख्य कारण हनुमान चालीसा की इसी पंक्ति में छुपा हुआ है।

Mehandipur Balaji Image source: Google Image
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आज आधुनिक विज्ञान ने इतनी तरक्की कर ली है की वो मानव मस्तिष्क को भी चुनौती दे रहा है। लगभग सभी प्रकार की व्याधियों का उपचार आज उपलब्ध है फिर चाहे वे शारीरिक हों या मानसिक किन्तु आज भी कुछ समस्याएं ऐसी हैं जहाँ आधुनिक विज्ञान भी बौना सा पड़ता दिखाई देता है, डॉक्टरों को या तो केस समझ ही नहीं आता या फिर वे हाँथ खड़े कर देते हैं, हम सोचने लगते हैं की अब क्या किया जाये ? ऐसी स्थिति में केवल एक ही उपाय नज़र आता है और वो है अपने ईस्ट की शरण में जाना।

एक ब्लॉगर होने के नाते मैं अपनी सोच बता दूँ की मैं विज्ञान और धर्म दोनों में ही विश्वास करता हूँ और मेरा मानना है की व्यक्ति को ऐसी जटिल समस्याओं में दोनों का ही सहारा लेना चाहिये और मैं स्वयं भी करता हूँ किंतु भूल कर भी किसी ओझा, तांत्रिक, मौलाना और उपाय के बहाने धर्मान्तरण करने वाले पादरियों के पास नहीं जाता। मेरा मानना है की यदि कोई समस्या है तो डॉक्टर के साथ – साथ अपने धर्म स्थल में जाकर स्वयं प्रार्थना करनी चाहिये न की किसी तीसरे को बीच में लाना चाहिये।

खैर, बतकही बहुत हो गयी। अब बात करते हैं की मेहंदीपुर बालाजी धाम (Mehandipur Balaji Temple) के बारे में और वहां तक पहुँचने के तरीकों आदि के बारे में।

 

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर (Mehandipur Balaji Temple)

राजस्थान के दौसा जिले के करोली के मेहंदीपुर में स्थित है बाला जी का मंदिर। ‘बाला’ हनुमान जी का बचपन का नाम है और यहाँ वे बाल रूप में स्थित हैं। मंदिर का इतिहास लगभग एक हजार साल का बताया जाता है। यह दो पहाड़ियों के बीच एक घाटी में स्थित है और इसीलिए इसे घाटा मेहंदीपुर भी कहा जाता है। कभी यहाँ घने वन थे। कहा जाता है की मंदिर के पहले महंत श्री गोसाई जी को बालाजी ने स्वप्न में दर्शन दिये और कहा की यहाँ पहाड़ी में मैं मूर्ती रूप में स्थित हूँ, तुम मेरी पूजा का भार ग्रहण करो, मैं भक्तों का कल्याण करूँगा। गोसाईं जी ने मंदिर की स्थापना की और बालाजी की सेवा करने लगे और इस प्रकार स्थापित हुआ मेहंदीपुर बालाजी धाम।

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मंदिर की दिनचर्या

श्री बालाजी महाराज के मंदिर की दिनचर्या प्रतिदिन सुबह पांच / छः बजे मुख्यद्वार खुलने के साथ शुरू होती है। सर्वप्रथम श्री बालाजी महाराज का पांच पुजारियों द्वारा गंगाजल से अभिषेक होता है। तत्पश्चात बाद चोले की बारी आती है है। चोला श्री बालाजी महाराज के श्रृंगार का मुख्य हिस्सा है। यह सप्ताह में तीन बार सोमवार, बुधवार एवं शुक्रवार को चढ़ाया जाता है। इसके बाद बालाजी की आरती आरम्भ होती है जो की लगभग चालीस मिनट तक चलती है। आरती सम्पन्न होते ही दर्शन आरम्भ हो जाते हैं जो की रात्रि लगभग नौ बजे तक अवरत चलते रहते हैं। केवल दोपहर एवं रात्री भोग के समय आधा-आधा घंटे के लिए श्री बालाजी महाराज के पट बंद होते हैं।

सुबह आरती के बाद पहले बालाजी का बाल भोग लगता है जिसमें बेसन की बूंदी होती है। फिर राज-भोग का भोग लगता है। श्री बाला जी महाराज जी का भोग मंदिर में स्थित बालाजी रसोई में ही तैयार किया जाता है। इसमें चूरमा मेवा, मिष्ठान आदि होता है। भोग बाद में दर्शनार्थी भक्तों में वितरित किया जाता है। भक्तों को दिया जाने वाला भोग डिब्बो में पैक होता है। जबकि अभिषेक का गंगाजल भक्तों को चरणामृत के रूप में वितरित किया जाता है। दोपहर के समय श्री बालाजी महाराज का विशेष भोग लगाया जाता है। इसे दोपहर का भोजन भी कहा जा सकता है। बालाजी के भोग से पहले उनके प्रभु श्री राम और माता सीता जी अर्थात मुख्य मंदिर के सामने सड़क पार बने श्री सीताराम मंदिर में भोग लगता है, तत्पश्चात बालाजी का भोग लगता है।

 

बालाजी का भोग अथार्त प्रशाद

बहुत से लोग जानना चाहते हैं की बालाजी महाराज के दरबार में प्रशाद अथार्त भोग चढ़ाने की प्रकिया क्या है ? दरखास्त क्या होती है ? अर्जी क्या होती है ? सवामणि क्या होती या प्रसाद घर लाना चाहिए या नही?

तो आइये जानते श्री बाला जी महाराज जी के भोग के विषय में-

1. दरखास्त 

यह मुख्य प्रशाद है। मेहंदीपुर बालाजी धाम में हर भक्त को दरखास्त लगानी चाहिए ये दरखास्त आपको मंदिर परिसर के पास किसी भी दुकान से मिल जाती है। 10 रुपये की इस दरखास्त में लड्डू, बतासे ओर घी होते हैं। दरखास्त का सर्व-प्रथम भोग श्री बाला जी महाराज जी को लगता है और उसके बाद फिर भैरो बाबा और प्रेतराज सरकार को लगता है। तत्पश्चात दरखास्त का वह दोना भक्तों को अपने उपर से वार कर मंदिर परिसर के बाहर एक स्थान है वहां पशुओं के लिये डाल देना होता है।

2. अर्जी

यदि आप किसी विशेष मनोकामना से आयें हैं या किसी प्रेत बाधा / बीमारी आदि से पीड़ित हैं श्री बाला जी महाराज जी के मंदिर में अर्जी लगानी होती है। अर्जी 181 रुपये की लगती है जिसमे बाला जी महाराज का लड्डू का भोग, भैरो बाबा का काली उड़द का भोग और प्रेतराज सरकार का चावल का भोग लगाया जाता है। ऐसी मान्यता है की जब अर्जी स्वीकार हो जाती है तो कुछ भक्त बाबा के दरवार में सवामणि करते है ओर कुछ भक्त हर बार सवामणि करते है। खैर, सवामणी करना या न करना आपकी इच्छा पर निर्भर करता है। अर्जी लगाने का समय प्रातः 7:00 बजे से 12:00 बजे तक होता है।

ध्यान दें की एकादशी के दिन श्री बाला जी मंदिर मे अर्जी का भोग नही लगता। यदि आपका अर्जी लगाना बेहद आवश्यक है तो आप लाल कपड़े में 281 रुपये बाँधकर श्री बाला जी महाराज के मंदिर मे अर्पित कर सकते हैं।

3. सवामणि (यह आपकी इच्छा पर निर्भर करता है)

श्री बालाजी महराज से मांगी कामना पूरी होने पर सवामणि का भोग लगाया जाता है। सवामणि के प्रसाद में हलुआ पूड़ी एवं लड्डू पूड़ी का भोग लगता है । सवामणि के भोग लगने का समय दिन में 11.30 बजे से लगभग 2.00 बजे तक होता है । सवामणि का भोग तीनो देव श्री बाला जी महाराज जी, श्री भैरव बाबा जी और श्री प्रेतराज सरकार जी का लगता है । सवामणि श्री राम दरबार में स्थित श्री राम दूत प्रसाद समिति द्वारा अथवा मंदिर के बहार किसी भी दूकान पर आर्डर करने पर आपको प्राप्त हो जाएगी । सवामणि का भोग स्वयं दरबार आकर लगवाना चाहिए। एक बात और की सवामणी का प्रशाद वहां किसी भक्त को न बाटें और यह कोई लेगा भी नहीं। यदि आपकी इच्छा है तो साधु – सन्यासियों को वितरित कर सकते हैं।

4. राज भोग (मंदिर से प्राप्त होने वाला मुख्य प्रशाद)

राजभोग मंदिर परिसर मे ट्रस्ट द्वारा श्री बाला जी महाराज को लगाया जाता है, फिर सभी भक्तो को दर्शनोपरान्त राजभोग का प्रसाद मिलता है। राजभोग सभी भक्तो को प्रेम पूर्वक खाना चाहिए एवं घर ले जाना चाहिए।

5. श्री बालाजी महाराज का जल

श्री बालाजी के मंदिर की विशेषता है कि बालाजी मंदिर में सुबह और शाम को आरती के बाद बाबा के जल के छींटे मिलते है। जिस किसी व्यक्ति को इस जल के छींटे मिलते है वह बहुत भाग्यशाली होते है, क्योंकि बालाजी का जल अमृत समान है। श्री बालाजी महाराज की बाई ओर हृदय के नीचे से एक बारीक जलधारा निरन्तर बहती रहती है जो पर्याप्त चोला चढ जाने पर भी बंद नही होती। वैसे जल का वितरण मंदिर के सामने गली में आगे जाकर समाधी के पास भी सुबह 8 बजे से 10 बजे के बीच होता है। आप वहां यह जल ले सकते हैं।

श्री प्रेतराज सरकार के दरबार में दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक भजन कीर्तन होता है । भक्त अपना समय व्यर्थ न करके भजन कीर्तन का आनंद ले सकते है। श्री बालाजी महाराज जी की आरती के ठीक बाद समाधी वाले बाबा की आरती होती है । समाधी वाले बाबा का दिन में 12 बजे जलेबी का भोग लगता है। दिन में 12 बजे समाधी वाले बाबा के ठीक सामने हवन स्थली पर हवन होता है तथा आरती होती है भक्त वहां जाकर आरती के छींटे तथा परिक्रमा लगा सकते है।

 

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर के नियम (Rules of Mehandipur Balaji Temple)

वैसे तो बालाजी की भक्ति किसी नियम से नहीं बंधी हुई है, वे केवल आपके दिल में प्रेम देखते हैं। फिर मंदिर द्वारा स्थापित कुछ आवश्यक नियम हैं जिनका पालन आपको करना चाहिये।

  • समस्त श्रध्दालुओ को वहाँ रहते हुए दूसरे यात्रियो व श्रध्दालुओ के साथ स्नेह्पूर्ण व सहानभूति का व्यवहार रखना चाहिए। बहुत से भक्त भयंकर स्थिति में भी आते हैं जिनका स्वयं पर कोई नियंत्रण नहीं होता, उनके प्रति सहानुभूति का व्यव्हार रखें।
  • यदि आप किसी विशेष समस्या से ग्रसित हैं और बालाजी के दरबार में अर्जी लगाना चाहते हैं तो बेहतर है की एक दिन पहले ही मेहंदीपुर पहुँच जायें और किसी धर्मशाला / होटल में रुक जायें। अगले दिन सुबह चार बजे मंदिर की पंक्ति में लग जायें। ध्यान दें की भक्तों की यहाँ भारी भीड़ होती है, इसीलिये घबरायें नहीं। मंदिर में दर्शन सुबह 7 बजे आरम्भ होते हैं। दर्शन आरम्भ होते है फटाफट पंक्ति को आगे बढ़ाया जाता है। पीने के पानी की बोतल अपने साथ रखें।
  • पंक्ति में आपको बहुत से ऐसे भक्त मिलेंगे जो की विचित्र व्यव्हार कर रहे होंगे, जैसे चीखना – चिल्लाना, रोना, सर पटकना, दौड़ते हुए आगे जाना। इनके प्रति प्रेम भाव रखें और इन्हें आगे जाना का रास्ता दें।
  • किसी से बात न करें और भगवान में ध्यान लगायें। श्रध्दालुओ को अपने हाथ से कोई भी पूजन सामग्री छूनी नही चाहिए। श्रध्दालुओ को चाहिए कि वे जब तक वहाँ रहे पूर्णतः ब्रह्मचर्य का पालन करे तथा माँस, मदिरा, प्याज आदि का सेवन न करे।
  • मेहंदीपुर बालाजी दरबार मे (मुख्य मंदिर) के अन्दर बालाजी महाराज का प्रसाद (राजभोग) प्रत्येक भक्त को श्रध्दापूर्वक दिया जाता है। यात्री उसे स्वयं ग्रहण करे तथा घर ले जाकर केवल परिवार मे बाँट सकते है।
  • श्री मेहंदीपुर बाला जी धाम में किसी भी पंडित, ओझा या व्यक्ति विशेष के द्वारा संकट नही काटा जाता है, यहाँ संकट श्री बाला जी महाराज ही काटते है। इसलिये किसी के भी बहकावे में आकर अपना धन एवं समय नष्ट न करे।
  • दर्शनोपरांत मंदिर से निकलने के बाद पीछे मुड़कर मंदिर को न देखें, केवल अपने प्रशाद वाले के अतिरिक्त किसी अंजान व्यक्ति से बात न करें। किसी से भी न कुछ लें और न कुछ दें। बहुत सी महिलायें (भिखारी) वहां आपको बालक की मनोकामना के नाम पर पैसे मांगती दिखेंगी, उन्हें कुछ न दें।
  • मंदिर में मोबाइल ले जाने पर पाबन्दी नहीं है, किन्तु मंदिर के अंदर फोटो न लें।

 

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर और उसके आस – पास अन्य दर्शनीय स्थल

मेहंदीपुर में आने के बाद सर्वप्रथम श्री बाला जी महाराज के दर्शन करने के लिए जाना चाहिए। श्री बाला जी महाराज का भवन बस स्टैंड से 1 KM की दूरी पर है। श्री बाला जी महाराज के भवन में, श्री बाला जी महाराज जी के बायीं तरफ श्री राधा कृष्णा भगवान जी और दांयी तरफ माता पावर्ती – शिव शंकर जी विराजमान है। शिव जी की विग्रह के बराबर में माता अंजनी जी की विग्रह है। जब हम श्री बाला जी महाराज के भवन में जाते है तो सभी भक्तो का ध्यान श्री बाला जी महाराज के दर्शन में होता है। इसलिए कुछ भक्त गण श्री अंजनी माता के दर्शन नही कर पाते है। माता अंजनी जी विग्रह श्री बाला जी भवन में ही विराजमान है। श्री बाला जी महाराज के दर्शनोपरांत भक्तों को श्री भैरो बाबा के दर्शन करने होते हैं जोकि मंदिर परिसर में ही विराजमान है। तत्पश्चात श्री प्रेतराज सरकार के दर्शन किये जाते है।

बालाजी मंदिर परिसर के सामने विराजमान श्री सीताराम जी के दर्शन भी करने चाहिए। अति मनमोहक एवं अलौकिक दर्शन है हमारे सीताराम जी भगवान के। सीताराम जी भगवान का भवन, श्री बाला जी महाराज के भवन के ठीक सामने बना हुआ है मानो ऐसा लगता है कि बाला जी महाराज जी निरंतर श्री सीताराम जी के दर्शन कर रहे हैं।

यदि आप भक्तो का श्री मेहंदीपुर धाम में कुछ अन्य पावन मंदिरों के दर्शन करने की अभिलाषा है तो श्री बाला जी भवन से कुछ कदम दूरी पे श्री पहाड़ वाले बाबा जो 3 पहाड़ पे विराजमान है। जब आप तीन पहाड़ वाले बाबा की यात्रा शुरू करते है तो सर्वप्रथम 20-30 सीडियां चढ़ने के बाद श्री भोले नाथ का भव्य मंदिर आता है सभी भक्त वहां पूजा अर्चना करते है। उसके बाद माता अंजनी का मंदिर , श्री राम दरवार , श्री विष्णु भगवान- माता लक्ष्मी का मंदिर , भैरव जी का मंदिर , गणेश जी का मंदिर , हनुमान जी के मंदिर एवं अन्य मंदिर आपकी 3 पहाड़ की यात्रा में आते है। 3 पहाड़ वाले बाबा की पूरी यात्रा में 1 से 2 घंटे लगते हैं।

 

मेहंदीपुर बालाजी धाम कैसे पहुंचे ? (How to reach Mehandipur Balaji Temple ?)

हवाई यात्रा

निकटतम हवाई अड्डा जयपुर के पास है जहाँ से बस या टैक्सी द्वारा धाम तक पहुंचा जा सकता है। जयपुर से बाला जी धाम की दूरी 100 किमी है, जबकि दिल्ली से यह दूरी 260 किमी है।

रेल द्वारा

निकटतम रेलवे स्टेशन बांदीकुई (BKI) है जो की यहाँ से 36 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मेहंदीपुर धाम आने का सबसे सुगम्य साधन रेल ही है। यहाँ से आपको बहुत आराम से शेयर्ड टैक्सी मिल जायेगी जो की 25 रूपये प्रति सवारी लेते हैं। दिल्ली से बांदीकुई के लिये बहुत सी रेलें हैं और उनमें भी सबसे अच्छी है आश्रम एक्सप्रेस जो की दिल्ली रेलवे स्टेशन (DLI) से दोपहर 3:20 पर चलती है और ठीक शाम 6:58 पर बांदीकुई पहुंचा देती है।

बस द्वारा

यदि आप बस से आना चाहते है तो मेहंदीपुर धाम के लिए मथुरा, जयपुर, हिंडौन, करौली, दिल्ली, नॉएडा, गुरुग्राम, रेवाड़ी, अलवर, अलीगढ, बरेली, एवं अन्य शहरों से डायरेक्ट बस सेवा है उपलब्ध हैं। बस आपको श्री मेहंदीपुर धाम से 2 KM पहले श्री बाला जी मोड़ पे छोड़ देती है और श्री बाला जी मोड़ से 24 घंटे जीप सेवा उपलब्ध रहती है |

 

कहाँ ठहरें ? (Stay near Mehandipur Balaji Temple)

श्री मेहंदीपुर बालाजी धाम में बहुत से होटल एवं धर्मशालाएं है। इन धर्मशालाओं में आपको सभी सुविधा मिल जाती है। किसी प्रकार की अग्रिम बुकिंग की आवश्यकता नहीं हैं।

यह तो हुई मेहंदीपुर बालाजी मंदिर और उससे जुडी महत्वपूर्ण जानकारियों की बात। अगले भाग में आप पढ़ेंगे मेरा यात्रा अनुभव। अगला भाग शीघ्र।

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