Malooti Temple

क्या आप जानते हैं की हमारे देश में एक ऐसा भी गांव है जहाँ घरों से अधिक मंदिर हैं और इन्हे बनवाने वाला कोई सेठ – महाजन या राजा नहीं, अपितु एक किसान था।

हम बात कर रहें हैं झारखण्ड राज्य के दुमका जिले एक छोटे से गाँव मलूटी की। यह छोटा सा गाँव दुमका जिले के शिकारीपाड़ा क्षेत्र में स्थित है। यहाँ कोई एक – दो नहीं, पुरे 108 मंदिर हैं। संख्या में माला के मनकों के बराबर इन मंदिरों वाले गाँव को झारखण्ड का गुप्तकाशी भी कहा जाता है।

Temples of Malooti
मलूटी के मंदिर (Image source: Google)
मलूटी के मंदिर (Image source: Google)

एक बार यहाँ के सुल्तान अलाउद्दीन हसन शाह की बेगम का बाज़ कहीं लापता हो गया। इस पर उस क्षेत्र के एक किसान बसंत ने उसे पकड़ कर सुल्तान को वापस लौटा दिया। सुल्तान उस किसान की बहादुरी से बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने मलूटी नामक गाँव उसे बतौर ईनाम दे दिया और साथ – साथ उन्होंने बसंत को राजा बाज़ बसंत के नाम से नवाज़ा।

किसान से राजा बने बसंत ने वहां कोई किले या महल का निर्माण न करवा 108 मंदिरों का निर्माण करवा दिया। इन मंदिरों का निर्माण वर्ष 1720 में शुरू हुआ और वर्ष 1840 तक इनके वंशजों ने इनका निर्माण पूरा करवाया। देख – रेख के आभाव में बहुत से मंदिर अब खंडर हो गये हैं और अब केवल 72 ही ठीक – ठाक हालत में बचे हुए हैं।

 

मलूटी के अतिरिक्त और क्या ?

यहाँ मलूटी के अतिरिक्त देखने के लिए बहुत कुछ है। जैसे मसनजोर बांध, बाबा बासुकीनाथ धाम, कुमराबाद, बाबा सुमेश्वर नाथ मंदिर और मयूराक्षी नदी।

मसनजोर बांध: मयूराक्षी नदी पर बना यह बांध और झील पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है।
बाबा बासुकीनाथ धाम: महादेव को समर्पित यह धाम देवघर – दुमका मार्ग पर स्थित है। श्रावण माह में यहाँ विशाल मेले का आयोजन होता है।
कुमराबाद: ऊँची पहाड़ियों से घिरा और मयूराक्षी नदी के किनारे पर बसा कुमराबाद एक खूबसूरत पिकनिक स्थल के रूप में उभरा है।
बाबा सुमेश्वर नाथ मंदिर: यह मंदिर भी भगवान शिव को समर्पित है।

Massanjor Dam Lake Dumka
मसनजोर बांध झील (Image source: Google)

कब जायें ?
झारखण्ड एक गर्म प्रदेश है। इसलिये यहाँ जाने के लिए अक्टूबर से मार्च की बीच का मौसम सबसे अच्छा है।

कैसे पहुंचे ?
वैसे तो दुमका में भी रेलवे स्टेशन है लेकिन वहां के लिए देश के अधिकतर शहरों से रेल उपलब्ध नहीं हैं। इसलिये आप जसीडीह तक देश के किसी भी भाग रेल द्वारा पहुँच सकते हैं। जसीडीह से एक छोटी रेलवे लाइन है जिस पर दुमका के लिए पैसेंजर रेल चलती हैं। इसके अतिरिक्त आप जसीडीह से बस द्वारा भी पहुँच सकते हैं।

हवाई यात्रीयों के लिये नज़दीकी हवाई अड्डा दुर्गापुर में है जो की यहाँ से 72 किलोमीटर दूर है।

कहाँ रुकें ?
दुमका में रुकने की कोई समस्या नहीं हैं। ज़्यादा नहीं तो कम भी नहीं हैं यहाँ होटल। इनमें से कुछ होटलों के बारें आप यहाँ क्लिक करके जानकारी ले सकते हैं।

यदि आप भी इतिहास और धर्म में रूचि रखते हैं तो एक बार यहाँ अवश्य पधारें।

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Mukesh Pandey
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बहुत ही रोचक जानकारी । थोड़ा और विस्तार देना था ।

Mukesh Pandey
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बहुत बढ़िया