ghushmeshwar

ज्योतिर्लिंग’ एक ऐसा शब्द जिसको सुनते ही भगवान शिव की तस्वीर हमारी आँखों के सामने उभर आती है। ज्योतिर्लिंगों की स्थापना स्वयं भगवान शिव ने की थी। भगवान शिव का निवास कैलाश पर्वत पर है, जो की चीन के तिब्बत क्षेत्र में स्थित है। हर किसी के लिए कैलाश मानसरोवर जा पाना संभव नहीं है। इसके कई कारण हैं, जैसे यात्रा पर होने वाला लाखों रुपयों का व्यय, शारीरिक स्थिति और दूरी आदि। सभी भक्तों को भगवान शिव के सुलभ दर्शन प्राप्त हो सकें इसलिए उन्होंने समय – समय पर 12 ज्योतिर्लिंगों की स्थापना की।

सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्। उज्जयिन्यां महाकालमोङ्कारममलेश्वरम्॥
परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशङ्करम्। सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥
वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे। हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥
एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः। सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति॥
एतेशां दर्शनादेव पातकं नैव तिष्ठति। कर्मक्षयो भवेत्तस्य यस्य तुष्टो महेश्वराः॥

आइये दर्शन करते हैं सभी ज्योतिर्लिंगों के।

1. श्री सोमनाथ  (प्रभास पाटन, सौराष्ट्र, गुजरात)
Shri Somnath (Prabhas Patan Saurashtra, Gujarat)

Somnath
श्री सोमनाथ

श्री सोमनाथ को 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे पहले स्थापित किया गया था। 12 ज्योतिर्लिंगों की यात्रा सोमनाथ से ही आरंभ होती है। गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र स्थित है प्रभास तीर्थ। प्रभास तीर्थ में स्थित है सोमनाथ। सोमनाथ मंदिर को सोलह बार लूटा गया और नष्ट किया गया, किन्तु मंदिर की आभा आज भी कम नहीं हुई है। मंदिर का वर्तमान स्वरुप चालुक्य राजाओं द्वारा निर्मित किया गया है।

 

2. श्री मल्लिकार्जुन स्वामी (श्री शैलम, आन्ध्र प्रदेश )
Shri Mallikarjuna Swami (Srisailam, Andhra  Pradesh)

mallikarjun
श्री मल्लिकार्जुन स्वामी

कुर्नूल जिले की रॉयलसीमा क्षेत्र में स्थित श्री शैल पर्वत पर स्थित पर विराजते हैं श्री मल्लिकार्जुन स्वामी। यह मंदिर शैव और शक्ति दोनों संप्रदायों के लिए श्रद्धा का केंद्र है। सम्पूर्ण भारत में यह एक मात्र ज्योतिर्लिंग है जो की एक शक्तिपीठ भी है। मंदिर के बारे में एक कथा प्रचलित है। कहा जाता है की एक बार भगवान शिव ने अपने पुत्रों गणेश और कार्तिकेय का विवाह करने का निश्चय किया और दोनों से कहा जो भी पृथ्वी की 7 परिक्रमा करके सबसे पहले आएगा उसका विवाह सबसे पहले होगा। जब तक कार्तिकेय पृथ्वी की परिक्रमा पूर्ण करके आये, गणेश जी अपने माता पिता की 7 परिक्रमा कर चुके थे। पुराणों में माता पिता की परिक्रमा को पृथ्वी की परिक्रमा के समान मन गया है। भगवान शिव ने गणेश जी के विवेक से प्रसन्न हो कर उनका विवाह पहले कर दिया, किन्तु इससे कार्तिकेय जी रुष्ट हो गए और कैलाश छोड़ कर दक्षिण भारत की और चले गए। वहां उन्हें कुमार ब्रह्मचारी / मुरुगन स्वामी के नाम से जाना गया। जब भगवान शिव और माता पार्वती उन्हें मनाने के लिए आये तो वे वहां से जाने लगे। भगवान शिव के आग्रह पर कार्तिकेय वहीँ रुक गए और भगवान शिव माता पार्वती संग वही ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हो गए। माता पार्वती को मल्लिका और भगवान शिव को अर्जुन के रूप में जाना गया। इसलिए इस शिवलिंग को मल्लिकार्जुन स्वामी के रूप में जाना जाता है।

3. श्री महाकालेश्वर (उज्जैन, मध्य प्रदेश )
Shri Mahakaleshwar (Ujjain, Madhya Pradesh) 

mahakaleshwar
श्री महाकालेश्वर

उज्जैन की रूद्र सागर झील के तट पर स्थित है श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग। उज्जैन एक प्राचीन शहर है जिसे प्राचीन भारत में अवन्ती के नाम से जाना जाता था। मंदिर दक्षिणामूर्ति है अथार्त मंदिर का मुख दक्षिण की ओर है, जिसके कारण बहुत से तांत्रिक तंत्र साधना के लिए आते हैं। यहाँ की एक विशेषता है चिता भस्म से होने वाला भगवान शिव का श्रृंगार। मंदिर का इतिहास 7वीं शताब्दी का है।

 

4. श्री ओम्कारेश्वर (खंडवा, मध्य प्रदेश)
Shri Omkareshwar (Khandwa, Madhya Pradesh)

Omkareshwar
श्री ओम्कारेश्वर

मध्य प्रदेश की नर्मदा नदी के बीच स्थित शिवपुरी द्वीप पर स्थित हैं भगवान श्री ओम्कारेश्वर। इन्हे श्री ममलेश्वर के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ भगवान् शिव के दो मंदिर स्थित हैं। एक हैं श्री ओम्कारेश्वर जो की शिवपुरी द्वीप पर स्थित हैं और दूसरे हैं नर्मदा के दक्षिणी तट पर स्थित श्री अमरेश्वर। मंदिर के बारे में कथा प्रचलित है की इक्ष्वाकु वंश के राजा मानधाता ने अपने पुत्र अम्ब्रीश सहित भगवान को प्रसन्न करने के लिए यहाँ तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव यहाँ ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापीत हो गए।

 

5. श्री केदारनाथ (रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड)
Shri Kedarnath (Rudraprayag, Uttarakhand)

kedarnath
श्री केदारनाथ

श्री केदारनाथ को भगवान शिव को पांचवे ज्योतिर्लिंग के रूप में जाना जाता है। इसके अतिरिक्त श्री केदारनाथ उत्तराखंड के छोटे चार धामों में से एक है। ये चार धाम हैं यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ। उत्तराखंड में पांच केदार स्थित हैं, जिनमे से एक हैं श्री केदारनाथ। ज्योतिर्लिंग की स्थापना की कथा महाभारत काल से जुडी हुई है। यहाँ भगवान शिव के भैसें रूप के पृष्ठ भाग की पूजा की जाती है। यहाँ पहुँचने के लिए लगभग 22 किलोमीटर की एक दुर्गम पैदल यात्रा करनी होती है जो की हिमालय की सुन्दर वादियों से होकर जाती है।

 

6. श्री भीमाशंकर (पुणे, महाराष्ट्र )
Shri Bheemashankar (Pune, Maharashtra)

Bheemashankar
श्री भीमाशंकर

महाराष्ट्र में पुणे के नजदीक स्थित है श्री भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग। यह क्षेत्र कभी डाकिनी देश के नाम से प्रचलित था। यहाँ एक और भीमशंकर मंदिर सयाद्री पहाड़ियों में स्थित है। श्री भीमाशंकर पुणे से लगभग 127 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। भीमा नदी का उद्गम स्थल भी यही है।

 

7. श्री काशी विश्वनाथ (वाराणसी, उत्तरप्रदेश )
Shri Kashi Vishwanath (Varanasi, Uttar Pradesh)

Kashi Vishwanath
श्री काशी विश्वनाथ

पवित्र सप्त पुरियों में से एक है वाराणसी। इस वाराणसी में स्थित है श्री काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग। वाराणसी अथवा काशी को एक पवित्र नगर के रूप में जाना जाता है। कहा जाता है की काशी में शरीर का त्याग करने वाले को मोक्ष की प्राप्ति होती है। ज्योतिर्लिंग की स्थापना हजारों वर्ष पूर्व भगवान शिव द्वारा की गयी थी। भगवान शिव एक बार माता पार्वती के साथ काशी के भ्रमण पर आये थे। उन्हें यह स्थान इतना प्रिय लगा की उन्होंने इसे अपने निवास स्थान के रूप में चुन लिया। कई प्रयत्नो के बाद भोलेनाथ कैलाश वापस जाने के लिए माने। जाने से पहले उन्होंने ज्योतिर्लिंग की स्थापना की। प्राचीन मंदिर को मुग़ल शाषक औरंगज़ेब द्वारा नष्ट कर दिया गया था। वर्तमान मंदिर का निर्माण महारानी अहिल्या बाई द्वारा 18वीं शताब्दी में करवाया गया था।

 

8. श्री त्रयंबकेश्वर (नासिक, महाराष्ट्र )
Shri Triambkeshwar (Nasik, Maharashtra)

Triambkeshawar
श्री त्र्यंबकेश्वर

गोदावरी नदी के उद्गम स्थल पर स्थित है श्री त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग। मंदिर महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट की सुन्दर पहाड़ियों में स्थित है। मंदिर का इतिहास श्री गौतम ऋषि से जुड़ा हुआ है। गौतम ऋषि और उनकी पत्नी अहिल्या की बढ़ती प्रसिद्धि से नाराज़ होकर कुछ ब्राह्मणो ने उन्हें बदनाम करने के लिए षड्यंत्र रचा। उनके षड्यंत्र में फंस कर गौतम ऋषि के बहुत बदनामी हुई। इससे मुक्ति पाने के लिए उन्होंने भगवान शिव की तपस्या की। भगवान शिव ने प्रसन्न होकर वह गंगा की एक धारा को प्रकट किया जिसे कालांतर में गोदावरी के नाम से जाना गया। भगवान शिव वहीँ ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हो गए। प्राचीन काल से भगवान शिव के भक्तो की श्रद्धा का केंद्र रहा है यह मंदिर।

 

9. श्री नागेश्वर (जामनगर, गुजरात )
Shri Nageshvara (Jamnagar, Gujarat)

Nageshwar
श्री नागेश्वर

शिव पुराण के अनुसार दारुका वन में दारुकि दैत्य के अत्याचारों से तंग होकर सुप्रिय नामक शिव भक्त ने भगवान शिव की आराधना की। जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने सुप्रिय और अन्य मनुष्यों को अत्याचार से मुक्ति दिलायी और स्वयं ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हो गए। भगवान को यहाँ नागेश्वर के नाम से जाना गया।

 

10. श्री बैद्यनाथ (देवघर, झारखण्ड )
Shri Baidyanath (Devghar, Jharkhand)

Baidyanath
श्री बैद्यनाथ

शिव पुराण के अनुसार एक बार रावण ने भगवान शिव को अपने देश लंका ले जाने के लिए तपस्या की। शिव जी ने कहा मै शिवलिंग रूप में तुम्हारे साथ चलने के लिए तैयार हूँ, किन्तु यदि मार्ग में कहीं भी शिव लिंग रखा तो मैं वहीं का होकर रह जाऊंगा। इसका कारण यह था की शिव जी स्वयं नहीं जाना चाहते थे। मार्ग में रावण को लघुशंका लगी तो उसने शिव लिंग एक चरवाहे को देकर कहा की जब तक मै ना आ जाऊं इसे नीचे मत रखना। ऐसा कह कर रावण चला गया। भगवान शिव अपना वजन बढ़ाने लगे जिसके कारण चरवाहे ने शिव लिंग को भूमि पर रख दिया। रावण ने शिवलिंग को उठाने का बहुत प्रयास किया किन्तु नहीं उठा पाया। अंतत रावण ने क्रोधित होकर शिवलिंग पर प्रहार किया और वापस चला गया। भगवान वहीं ज्योतिर्लिंग रूप में स्थापित हो गए। श्रावण मास में यहाँ विशाल मेला लगता है।

 

11. श्री रामेश्वरम (रामेश्वरम, तमिलनाडू )
Shri Rameshwaram (Rameshwaram, Tamilnadu)

Rameshwaram
श्री रामेश्वरम

यह भगवान शिव का एकमात्र ज्योतिर्लिंग तीर्थ है जहाँ शिव और राम दोनों विराजते हैं। युद्ध में रावण को मारने के बाद ब्राह्मण हत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए श्री राम ने पत्नी सीता सहित यहाँ भगवान शिव की आराधना की थी जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव यहाँ ज्योतिर्लिंग रूप में स्थापित हो गए।

 

12. श्री घृष्णेश्वर (औरंगाबाद, महाराष्ट्र )
Shri Ghushmeshwar, Aurangabad, Maharashtra)

ghushmeshwar
श्री घृष्णेश्वर

श्री घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग को 12 ज्योतिर्लिंजो में अंतिम ज्योतिर्लिंग माना जाता है। मुगल – मराठा युद्ध में यह मंदिर कई बार क्षतिग्रस्त हुआ और फिर से निर्मित किया गया। एलोरा गुफाओं से मंदिर की दूरी लगभग 1 किलोमीटर है।

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