हम में से बहुत से लोग ऐसे हैं जिनके अंदर घुमक्कड़ी की इच्छा तो गाहे – बगाहे उठती तो रहती है लेकिन जब भी वे अपने दोस्तों – रिश्तेदारों से चलने के लिये पूछते हैं तो उन्हें निराशा ही हाँथ लगती है। कभी समय की कमीं, कभी पैसे की और कभी इच्छा की। दोस्तों – रिश्तेदारों की ना – नुकुर करने की आदत एक दिन ऐसे लोगों को एक बैकपैकर या सोलो घुमक्कड़ में बदल देती है। बस फ़िर तो मन करता है की दो जोड़ी कपड़े, मोबाईल और कैमरा बैग में रख कर निकल जाये अकेले ही कहीं। यदि आपने आज तक ऐसी घुमक्कड़ी नहीं की है तो यह लेख आपके लिये ही है।

 

1. मनाली से लेह वाया रोड (Manali to Leh via road)

Manali to Leh
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भारत में सभी सड़क यात्राओं का ‘मक्का’ कहा जाने वाला मनाली – लेह राजमार्ग हमेशा से बैकपैकर्स के सूची में सबसे ऊपर रहा है। चाहे आप अकेले हों या समूह में, यह ट्रिप देश – दुनिया की अन्य सड़क यात्राओं की चमक को धूमिल कर देता है। आपको बस इतना करना है की आप अपने दिल और दिमाग को साहस और रोमांच से भर लें और चल पड़ें एक ऐसी यात्रा पर जो आपको कहीं नहीं ले जाती हो सिवाय एक ख़ूबसूरत सफ़र के। यह एक ऐसी यात्रा है जिसमें आपको मंज़िल तक पहुँचने की ज़रा भी जल्दी नहीं होगी क्योंकि यहाँ मंज़िल से ज़्यादा खूबसूरत सफ़र है। एक बात और, आप यहाँ सफ़र में अकेले नहीं हैं, भयंकर आवाज़ करती सैकड़ों की संख्या में क्रूज़र बाइक्स आपके अगल – बगल से होकर निकलती दिखेंगी। कुछ ऐसे भी महानुभव हैं जो की रोहतांग ला, बारालाचा ला और तंगलंग ला जैसे दुरूह दर्रों को लांघने साइकिल पर ही निकल पड़ते हैं ।

कैसे पहुंचे ?

हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा भुंतर (कुल्लू) में है जो की यहाँ से लगभग 50 कि.मी. दूर है। यह हवाई अड्डा दिल्ली और चंडीगढ़ से घरेलू उड़ानों द्वारा जुड़ा हुआ है । यहाँ से मनाली के लिए टैक्सी / कैब और बस सेवायें उपलब्ध हैं।

रेल मार्ग: निकटतम जंक्शन चंडीगढ़ में लगभग 310 किमी दूर है और अंबाला भी इतनी ही दूरी पर स्थित है, जहां आप भारत के किसी भी हिस्से से ट्रेन द्वारा पहुंच सकते हैं।

सड़क मार्ग: बस द्वारा मनाली पहुंचने के लिए, हिमाचल राज्य सड़क परिवहन निगम (एचएसआरटीसी), दिल्ली, चंडीगढ़, देहरादून, अंबाला और जयपुर जैसे सभी प्रमुख शहरों से नियमित बस सेवायें प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त निजी बसें भी चलती हैं।

 

2. दूधसागर फॉल्स ट्रेक (Dudhsagar Falls Trek)

Dudhsagar
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वैसे तो गोवा किसी परिचय का मोहताज़ नहीं है। समुद्री किनारों पर टहलने की चाह रखने वालों की लिए यह किसी स्वर्ग से कम नहीं लेकिन जब दूधसागर झरने से निकलते हुए अथाह पानी के सामने से गुज़रती हुई ट्रेन को देखेंगे तो आप शायद अंजुना के समुद्री किनारे भी भूल जायें । सुदूर दुधसागर झरने तक पहुंचने वाला ट्रेक आपको प्रकृति का सानिध्य पाने का अवसर देता है। सोलो घुमक्क्ड़ी करते हुए भी जब ऊबड़ – खाबड़ रास्तों और आकर्षक जंगलों के बीच से गुज़रेंगे तो पक्षियों का संगीत आपको ऐसा लगने ही नहीं देगा की आप अकेले हैं।

कैसे पहुंचे ?

यहाँ पहुँचने के लिये सबसे पहले आपको मोल्लम गाँव पहुँचना होगा जो की यहाँ से लगभग 40 किलोमीटर दूर है। मोल्लम पहुँच कर आप वहां से जीप किराये पर ले सकते हैं। मोल्लम तक पहुँचने के लिये निकटतम हवाई अड्डा और रेलवे स्टेशन गोवा एक पणजी में स्थित है।

 

3. गोकर्ण में समय बितायें (Spend time in Gokarna)

Gokarna
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बंगलुरु वासियों के लिये गोकर्ण किसी स्वर्ग से कम नहीं। अब तो शेष भारत से भी यहाँ लोग पहुँचने लगे हैं। यहाँ के समुद्री किनारों पर फैली शांति को खुद में समां लेने का अनुभव बहुत ही खूबसूरत होता है। यहाँ आकर आप सभी चिंतायें भूल जायेंगे। बहुत से लोग गोकर्ण में स्वयं को तलाशने जाते हैं। कोई नहीं है यहाँ आप पर प्रतिबन्ध लगाने वाला, रोक – टोक करने वाला, अपनी मर्ज़ी आप पर थोपने वाला, झगड़ा करने वाला। तो केवल सागर की शांत हवायें और आप ।

कैसे पहुंचे ?

हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा गोवा में दाबोलिम है। दाबोलिम हवाई अड्डा भारत के सभी प्रमुख शहरों और साथ – साथ कुछ विदेशी शहरों से भी जुड़ा हुआ है। दाबोलिम से आप गोकर्ण, टैक्सी, बस या ट्रेन से पहुँच सकते हैं ।

रेल मार्ग: यहाँ से निकटतम रेलवे स्टेशन गोकर्ण रोड है लेकिन यह एक बहुत ही छोटा स्टेशन है जो की ज़्यादातर शहरों से जुड़ा हुआ नहीं है। इसलिये यहाँ से 20 किलोमीटर दूर स्थित अंकोला एक बड़ा स्टेशन है जो की सभी बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है।

सड़क मार्ग: हालांकि गोकर्ण में रिक्शा और टैक्सी आदि उपलब्ध हैं लेकिन यदि आप इसे अच्छे से एक्स्प्लोर करना चाहते हैं तो पैदल चलना ही सर्वोत्तम है

 

4. सुंदरबन में नाव की सवारी (Boat ride in Sundarban)

Sundarban
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यदि आप चाहते हैं की आपके सफर में सब कुछ परफेक्ट, रोमांचक और मज़ेदार हो तो नाव से सुंदरबन के जंगलों की यात्रा एक अच्छा विकल्प है। विशाल जंगल, गहरी नदियाँ, विभिन्न प्रकार के जीव और जन शून्य वातावरण, यही है यहाँ की पहचान। हाँ, भयंकर जंगली जीवों के कारण थोड़ा सा खतरनाक सफ़र है लेकिन यात्रा का आनंद भी तो इसी में है की आपने क्या विशेष देखा ?

कैसे पहुंचे ?

हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा कोलकाता स्थित दम दम हवाई अड्डा है जो की यहाँ से लगभग 166 किमी की दूरी पर स्थित है।

रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन कोलकाता में स्थित है जो की यहाँ से लगभग 166 किमी की दूरी पर स्थित है और वहां से टैक्सी और बस आदि उपलब्ध हैं।

जल मार्ग: जल मार्ग अपेक्षाकृत कम समय में सुंदरबन तक पहुंचने का एक शानदार तरीका है। वैसे भी सुंदरबन में आपको नाव द्वारा ही घूमना होता है।

 

5. हिमालय पार की दुनिया लद्दाख (Trans Himalayan world Ladakh)

Laddakh
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जुले – जुले..
जी हाँ, यही बोलकर एक आम लद्दाखी आपका अभिनंदन करता है। लद्दाख, एक ऐसी दुनिया जहाँ आप हज़ारों मीटर ऊँचे दर्रे पार करके पहुंचते है। हिमालय पार की यह दुनिया शेष भारत और दुनिया से बिलकुल अलग है। वनस्पति विहीन पहाड़, बर्फीली हवायें, ऑक्सीज़न की कमीं, भिन्न संस्कृति और, बौद्ध मठ आदि ही इसे बाकी दुनिया से अलग बनाते हैं। आप यह भी कह सकते हैं की यहीं से मध्य एशिया का क्षेत्र आरंभ हो जाता है। मोबाइल में नेटवर्क की कमी, यहाँ एक आम समस्या है, लेकिन जब चारो ओर इतनी सुंदरता फैली हुई हो तो मोबाइल चाहिये भी किसे ? कैसे पहुंचे ?

कैसे पहुंचे ?

हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा लेह में है जो की भारत के सभी बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है।

रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन जम्मू तवी में स्थित है। वहां से आप टैक्सी या बस द्वारा लद्दाख पहुँच सकते हैं। इसके अतिरिक्त आप शिमला तक ट्रेन और उसके बाद बस द्वारा भी वहां से लद्दाख पहुँच सकते हैं।

सड़क मार्ग: कहतें हैं न की कई बार मंज़िल से अधिक खूबसूरत सफ़र होता है। यही बात लद्दाख पर भी लागू होती है। लद्दाख पहुँचने के लिए दो रास्ते हैं। बेहतर है के आप एक रास्ते से जायें और दूसरे से वापसी करें। लद्दाख के प्रमुख शहर लेह के लिये दिल्ली से हिमाचल राज्य सड़क परिवहन निगम (एचएसआरटीसी) बस सेवायें प्रदान करता है। दिल्ली से प्रतिदिन चलने वाली बस आपको लगभग 34 घंटों का सफ़र तय करके लेह पहुंचा देगी। सफ़र लंबा अवश्य है किन्तु आनंद भी बस के सफ़र में ही है।

 

6. राजस्थान में ऊंट सफारी (Camel safari in Rajasthan)

Camel ride in Rajasthan
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दूर – दूर तक फैला रेगिस्तान और उस पर रेगिस्तान के जहाज ऊंट की सवारी आपको किसी शाही सवारी जैसा अनुभव अवश्य करायेगी। साथ ही आप देख सकते हैं रेत पर कालबेलिया नृत्य करते नर्तकों को। यदि आपके पास कुछ समय अतरिक्त हो तो आप यहाँ के शाही किलों में भी समय बिता सकते हैं। पधारो म्हारे देश की दुनिया में आप अपने जीवन की पहली बैकपैकिंग ट्रिप का आनंद ले सकते हैं।

कैसे पहुंचे ?

रेगिस्तान तो राजस्थान में जगह – जगह है और सड़कों और रेल का जाल भी अच्छी तरह बिछा हुआ है। इसलिये आप अपने गंतव्य तक या जयपुर तक हवाई और रेल मार्ग से पहुँच सकते हैं और इससे आगे का सफ़र आप बस या टैक्सी द्वारा तय कर सकते हैं।

 

7. ट्रैकिंग के साथ – साथ अध्यात्म की खोज : सिक्किम में ट्रैकिंग और मठ यात्रा (Trekking in Sikkim)

Sikkim
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वैसे तो 20-21 वर्ष की उम्र में हर किसी का झुकाव अध्यात्म की ओर नहीं होता है लेकिन हम में कुछ होते हैं ऐसे लोग जिनका बहुत कम उम्र में ही अध्यात्म की ओर झुकाव हो जाता है और जब यह धुन लगती है तो फिर इंसान सभी सुविधाओं को त्याग कर निकल पड़ता है प्रकृति में छुपे अध्यात्म को तलाशने। पहाड़ों में चहलकदमी करते हुए अध्यात्म की तलाश सिक्किम में आकर पूरी हो सकती है। सिक्किम की हरी – भरी और बर्फीली वादियों घूमते हुए कुछ समय यहाँ के बौद्ध विहारों में बिता सकते हैं। सिक्किम ही भारत का एकमात्र राज्य है जहाँ पूर्ण रूप से जैविक खेती होती है। इसलिये यदि आपके पास कुछ अतिरिक्त समय है तो आप जैविक खेती भी सीख सकते हैं।

कैसे पहुंचे ?

हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा बागडोगरा में है जो की यहाँ से 124 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह हवाई अड्डा भारत और बैंकॉक के प्रमुख हवाई अड्डों से जुड़ा हुआ है।

रेल मार्ग: सिक्किम की राजधानी गंगटोक का निकटतम रेलवे स्टेशन यहाँ से 188 किलोमीटर दूर जलपाईगुड़ी और 145 किलोमीटर दूर स्थित सिलीगुड़ी में हैं। ये रेलवे स्टेशन भारत के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़े हुए हैं। आप यहाँ सिक्किम पहुंचने के लिए बस बस या टैक्सी किराए पर ले सकते हैं।

सड़क मार्ग: सिक्किम आस पास के सभी शहरों से सार्वजनिक और निजी बस सेवाओं जुड़ा है ।

 

8. वृंदावन में होली मनायें (Celebrate Holi in Vrindavan)

Holi in Vrindavan
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भगवान श्री कृष्ण की क्रीणा स्थली रहा वृंदावन अपने होली उत्सव के लिए पूरी दुनिया में विख्यात है। यहाँ होली एक माह पूर्व ही आरंभ हो जाती है जिसमें भाग लेने देश – विदेश से लोग आते हैं। पुरे फाल्गुन मास में वृंदावन रंगो से नहाया रहता है और रंग भी पूरी तरह से फूल – पत्तियों से बने होते हैं, किसी रसायन से नहीं। ‘गोविंदा आला रे’ की धुन पर रंगो में सराबोर विदेशियों को नाचते देखना यहाँ आम बात है।

कैसे पहुंचे ?

हवाई मार्ग: वृंदावन सड़क, वायु और रेल के माध्यम से देश के बाकी हिस्सों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। तो, वृंदावन पहुंचना बच्चों के खेल जैसा ही है। हवाई मार्ग के माध्यम से वृंदावन आने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्री दिल्ली में इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का उपयोग कर सकते हैं। यह वृंदावन से 150 किलोमीटर की दूरी पर निकटतम हवाई अड्डा है। हवाई अड्डे से वृंदावन की यात्रा करीब साढ़े चार घंटे लग जाएगी। इसके अतिरिक्त आगरा में भी हवाई अड्डा है किन्तु वहां से कम ही उड़ने संचालित होती हैं।

रेल मार्ग: वृंदावन में कोई लंबी दूरी पर चलने वाली रेल का स्टेशन नहीं है। इसलिए, यदि आप रेल मार्ग के माध्यम से अपने वृंदावन टूर की योजना बना रहे हैं, तो आपको मथुरा में निकटतम प्रमुख रेल हेड का उपयोग करने की आवश्यकता होगी। मथुरा स्टेशन वृंदावन से लगभग 14 किमी दूर है जहाँ से वृंदावन के लिये टैक्सी और बस उपलब्ध हैं । वैसे एक लोकल ट्रेन मथुरा और वृंदावन के बीच भी चलती है।

सड़क मार्ग: वृंदावन पहुंचने के लिए आप सड़क मार्ग भी अपना सकते हैं । दिल्ली से मथुरा के लिए भरपूर मात्रा में बसें उपलब्ध हैं। तो आप मथुरा तक बस में पहुंच कर छटीकरा रोड पर उतर सकते हैं और फिर वृंदावन पहुंचने के लिए ऑटो-रिक्शा या बस ले सकते हैं।

 

9. सिलीगुड़ी से दार्जिलिंग तक टॉय ट्रेन की सवारी (Travelling to Darjiling from Siliguri by Toy Train)

Toy Train Darjiling
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हम सभी के अंदर एक बच्चा अवश्य होता है। हमेशा जिम्मेदारियों से घिरे रहने के कारण कभी – कभी ऐसा लगता है की काश लौट आये वो पुराने दिन, वो बचपना। सिलीगुड़ी से दार्जिलिंग के बीच चलने वाली टॉय ट्रेन आपकी इन्ही इच्छाओं को पूरा करने में सक्षम हैं। जब घने वनों, घुमावदार रास्तों, चाय के बागानों और झरने के पास से होती हुई निकलती है तो ऐसा लगता है मानों हम उन्ही चित्रों की दुनिया में सैर कर रहे हैं जो कभी हमारी दूसरी कक्षा की किताबों में छपे होते थे। दार्जिलिंग पहुँच कर आप यहाँ के बेपनाह ख़ूबसूरती को निहार सकते हैं। यहाँ के लोगों का मिलनसार व्यवहार आपको ऐसा लगने ही नहीं देगा की आप अपने घर से दूर हैं।

कैसे पहुंचे ?

हवाई मार्ग: सिलीगुड़ी का अपना हवाई अड्डा बागडोगरा हवाई अड्डे के रूप में जाना जाता है। यह मुख्य शहर से लगभग 15 मिनट दूरी पर स्थित है और। यह दिल्ली, कोलकाता और बैंगलोर जैसे शहरों से बहुत अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

रेल मार्ग: शहर में दो रेल हेड हैं। एक सिलीगुड़ी जंक्शन है और दूसरा न्यू जलपाईगुड़ी जंक्शन (एनजेपी) है। एनजेपी पर्यटकों का पसंदीदा रेलवे स्टेशन है और देश के सभी प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

सड़क मार्ग: नियमित रूप से कई सरकारी और निजी बसें चलती हैं। यह दार्जिलिंग जैसे पश्चिम बंगाल के कई शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है ।

 

10. दुनिया के सबसे बड़े नदी द्वीप माजुली की यात्रा (Trip to world’s biggest Island Majuli)

Majuli
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दुनिया के सबसे बड़े नदी द्वीप माजुली जिसे की जिले का दर्जा प्राप्त है, की यात्रा आपके जीवन की एक अविस्मरणीय यात्रा बन सकती है। ब्रह्मपुत्र नदी पर बना यह द्वीप इतना बड़ा है की यहाँ हजारों लोगों आबादी रहती है। इतना ही नहीं यहाँ पुलिस थाना, स्कूल, हस्पताल, सामूहिक केंद्र और अन्य सभी सुविधायें हैं। यहाँ की कला, संस्कृति, सभ्यता मनमोहक है। यहाँ नाव द्वारा पहुंचा जा सकता है। माजुली में सैर – सपाटे के लिए साइकिल किराये पर लेना ही सबसे अच्छा रहता है। जब साइकिल पर बैठे, गले में असमिया गमछा और सर पर असमिया हैट लगाये आप अपनी फोटो फेसबुक पर शेयर करेंगे, आपके मित्र भी यहाँ आने की योजना बनाने में देर नहीं करेंगे।

कैसे पहुंचे ?

हवाई मार्ग: माजुली का निकटतम हवाई अड्डा असम के जोरहाट में है। वहां से, आप माजुली की यात्रा शुरू कर सकते हैं।

रेल मार्ग: माजुली के लिए कोई ट्रेन उपलब्ध नहीं है। यदि आप ट्रेन से यात्रा करना चाहते हैं, तो आप जोरहाट तक ट्रेन से पहुंच कर वहां से टैक्सी या बस द्वारा आगे का सफ़र तय कर सकते हैं ।

सड़क मार्ग: चूंकि माजुली एक नदी द्वीप है, इसलिए इसमें सड़क मार्गों यहाँ तक पहुँचने के लिये सड़क नहीं है । इसलिए इस खूबसूरत द्वीप तक पहुँचने के लिये आपको नाव आदि का ही सहारा लेना होगा।

यह लेख आगे भी जारी रहेगा …..

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