घुमक्कड़ी के प्रमुख प्रकारों में एक है सोलो घुमक्कड़ी या कहें की बैकपैकिंग। अक्सर बहुत से लोग ऐसी ही घुमक्कड़ी के सपने देखते रहते हैं लेकिन फिर यह सोच कर चुप बैठ जाते हैं की कहाँ जायें ? कैसे जायें आदि ! आपके ऐसे ही सवालों के जवाब छुपे हैं इस लेख में। इस पोस्ट का पहला भाग आप यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

1. देहरादून से नैनीताल तक बाइक की सवारी (Bike trip from Dehradun to Nainital)

Lansdowne

अक्सर लोग शिमला – मनाली टाइप पहाड़ी स्थलों पर घूमते – घूमते उन स्थानों पर ध्यान ही नहीं देते जो उनकी पहुँच से अधिक दूर भी नहीं और ख़ूबसूरती की अपार संभावनायें लिये होते हैं। ऐसे ही रुट्स में से एक है देहरादून से नैनीताल तक बाइक की यात्रा। यह यात्रा आपको लेकर जाती है उत्तराखण्ड के एक कोने से दूसरे कोने तक, जौनसार से कुमाउ तक, दून घाटी से झीलों के शहर नैनीताल तक।

देहरादून से नैनीताल तक पहुँचने के कई रास्ते हैं जिनमे से एक है देहरादून – ऋषिकेश – नजीबाबाद – नगीना – जसपुर – काशीपुर – रामनगर – नैनीताल और इस मार्ग की दूरी है लगभग 286 किलोमीटर, लेकिन यह मार्ग ज़्यादातर मैदानी क्षेत्र से होकर ही गुज़रता है। यदि आप अपनी बाइक पहाड़ी रास्तों पर दौड़ाना चाहते हैं तो दूसरे मार्ग जो की लगभग 400 किलोमीटर लम्बा है लेकिन ख़ूबसूरत पहाड़ों से होकर गुज़रता है, का चुनाव करें। यह मार्ग है देहरादून – ऋषिकेश – दुगड्डा – मनकोट – लैंसडाउन – रिखणीखाल – धुमाकोट – कालाढूंगी – खुर्पाताल – नैनीताल। यह मार्ग बहुत से प्रसिद्ध – अप्रसिद्ध पर्यटक स्थलों से होकर जाता है। इसलिये यदि आप बाइक से किसी लम्बी यात्रा की योजना बना रहे हैं तो देहरादून से नैनीताल तक सफ़र इस दूसरे मार्ग से कर सकते हैं।

कैसे पहुंचे ?

सड़क मार्ग: देहरादून सड़क मार्ग द्वारा देश के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। दिल्ली से आने वाले यात्री गाज़ियाबाद, मेरठ, मुज़फ्फरनगर, रुड़की होते हुए देहरादून पहुँच सकते हैं।

हवाई मार्ग और रेल मार्ग: देश के सभी प्रमुख शहरों देहरादून दैनिक उड़ानों और रेलों द्वारा जुड़ा हुआ है।

 

2. कन्याकुमारी की यात्रा (Trip to Kanyakumari)

Kanyakumari
Image source: Google image

कभी आपने सोचा है की दुनिया के अंतिम छोर से कैसा दीखता होगा ? ऐसा सोचना ही मन को रोमांच से भर देता है। कुछ ऐसा ही अनुभव आप कर सकते हैं भारत के अंतिम छोर कन्याकुमारी के तट पर जहाँ तीन बड़े सागर मिलते हैं। आप यहाँ देख सकते हैं संगम अरब सागर, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी का। यहाँ के तटों पर फैली रंग – बिरंगी रेत इसे अन्य समुद्री तटों से अलग बनाती है।

कैसे पहुंचे ?

हवाई मार्ग: लगभग 67 किलोमीटर की दूरी पर स्थित त्रिवेंद्रम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा यहाँ का नज़दीकी हवाई अड्डा है जो की भारत के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़े रहने के अलावा, कुछ खाड़ी देशों से भी जुड़ा हुआ है।

बस: तमिलनाडु और कन्याकुमारी रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन दक्षिण भारत के लगभग सभी प्रमुख शहरों से बसों की नियमित सेवा प्रदान करता है ।

रेल मार्ग: कन्याकुमारी में रेलवे स्टेशन स्थित है और भारत के प्रमुख शहरों से ट्रेनें इस जंक्शन पर रुकती हैं। कन्याकुमारी एक्सप्रेस मुंबई और बैंगलोर से अच्छी तरह से जुड़ी हुई है। इसके अतिरिक्त दूसरा निकटतम स्टेशन त्रिवेंद्रम सेंट्रल रेलवे स्टेशन है, जो लगभग सभी भारतीय शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

 

3. केरल के बैक वाटर का अनुभव लें (Experience Kerala’s back water)

Kerala's back water
Image source: Tour My India

जब भी आपको मौका मिलें प्रकृति की ओर लौटने का प्रयास करें। केरल के बैकवाटर टूर आपको प्रकृति की ओर वापस लौटने का मौका देते हैं। यहाँ आप शांति से आराम कर सकते हैं, यहाँ के अनुभवी विशेषज्ञों द्वारा दी जाने वाली विशेष आयुर्वेदिक मसाज आपकी इन्द्रियों को फिर से जीवंत कर देगी। नारियल के पेड़ों से घिरा आपका ठिकाना हो और उसके पीछे बहती नदी…. सोच कर भी कितना अच्छा लगता है। अब तो बहुत से नवविवाहित जोड़े हनीमून के लिये यूरोप की अपेक्षा केरल को वरीयता देने लगे हैं।

कैसे पहुंचे ?

हवाई मार्ग: त्रिवेंद्रम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा यहाँ का प्रमुख हवाई अड्डा है जो की भारत के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है ।

बस: तमिलनाडु और कन्याकुमारी रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन दक्षिण भारत के लगभग सभी प्रमुख शहरों से बसों की नियमित सेवा प्रदान करते हैं ।

रेल मार्ग: बैक वाटर का आनंद केरल में बहुत से स्थानों पर लिया जा सकता है, इसलिये आप अपनी सुविधा अनुसार रेलों का चयन कर सकते हैं। यहाँ का प्रमुख रेलवे स्टेशन त्रिवेंद्रम सेंट्रल रेलवे स्टेशन है, जो लगभग सभी भारतीय शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

 

4. नाव द्वारा वाराणसी के घाटों का सफ़र (Journey to Varanasi’s banks by boat) Varanasi

नाव में बैठे हुए जब आप वाराणसी के घाटों की ओर देखते हैं तो अध्यात्म की ऐसी अनुभूति होती है जिसे शब्दों में नहीं लिखा जा सकता। घाटों पर हो रही गंगा आरती, मंत्रोच्चार, घंटो की ध्वनि आदि जब कानों में पड़ती है तो आप अपनी चिंताओं को भूल कर एक विशेष प्रकार की शांति अनुभव करेंगे। केवल घाट ही क्यों, यहाँ घूमने के लिये और भी बहुत कुछ है जैसे काशी विश्वनाथ मंदिर, संकटमोचन मंदिर, मणिकर्णिका घाट, दसाश्वमेध घाट, सारनाथ आदि ।

कैसे पहुंचे ?

हवाई मार्ग: वाराणसी हवाई अड्डा दिल्ली और मुंबई जैसे भारत के कुछ प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। अंतरराष्ट्रीय पर्यटक दिल्ली हवाई अड्डे से वाराणसी के लिये फ्लाइट ले सकते हैं ।

बस: राज्य संचालित बसों द्वारा वाराणसी उत्तर प्रदेश और पड़ोसी राज्यों के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। निजी वातानुकूलित बसें पास के शहरों से वाराणसी तक भी उपलब्ध हैं।

रेल मार्ग: वाराणसी रेलवे स्टेशन रेल के माध्यम से भारत के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। इसके अतिरिक्त दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन (मुग़ल सराय) यहाँ पहुँचने के लिये एक अच्छा विकल्प है।

 

5. शिलांग से चेरापूंजी तक बाइक की सवारी (Bike trip from Shillong to Cherrapunji)

Cherrapunji
Image source: Holiday Travel Zone

वो शहर जिसे अंग्रेजों ने पूर्व का स्कॉटलैंड की उपमा दी थी अथार्त शिलोंग से उस शहर की यात्रा जिसे कभी दुनिया में सबसे अधिक वर्षा वाले स्थान का दर्जा प्राप्त था अथार्त चेरापूंजी, और वो भी बाइक पर.. है न रोमांचकारी ? प्रदुषण रहित यह स्थान आपके यादगार बाइक ट्रिप्स में से एक हो सकता है।

कैसे पहुंचे ?

हवाई मार्ग: शिलोंग से लगभग 35 किमी दूर उमरोई में एक छोटा हवाई अड्डा है। वर्तमान में, एयर इंडिया इस मार्ग पर अपनी सेवायें प्रदान करता है । इसके अतिरिक्त गोपीनाथ बारदोलोई हवाई अड्डा जो की यहाँ से 128 किलोमीटर दूर स्थित है, एक महत्वपूर्ण विकल्प है।

बस: राष्ट्रीय राजमार्ग 40 (ऑल वेदर रोड), गुवाहाटी के साथ शिलोंग को जोड़ता है। राज्य परिवहन निगम और निजी परिवहन ऑपरेटर मेघालय के लिये बस सेवायें उपलब्ध कराते हैं । मेघालय परिवहन निगम (एम टी सी) और असम राज्य परिवहन निगम (ए एस टी सी) शिलांग से गुवाहाटी और गुवाहाटी से शिलोंग तक रोजाना बस सेवायें उपलब्ध कराते हैं । पर्यटक टैक्सियां, टाटा सुमो टैक्सी, शिलांग से गुवाहाटी के बीच यात्रा के लिए उपलब्ध हैं ।

रेल मार्ग: मेघालय में कोई रेल लाइन नहीं है। निकटतम रेलवे स्टेशन गुवाहाटी है। यह शिलोंग से 104 किमी दूर है और भारत के सभी प्रमुख शहरों से बहुत अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है

 

6. दार्जिलिंग में टाइगर हिल्स से सूर्योदय का नज़ारा (Watching sunrise from Tiger hills in Darjeeling)

Tiger hills Darjeeling
Image source: Travelomiles

दार्जिलिंग किसी परिचय का मोहताज़ नहीं है। उत्तरी बंगाल का यह हिस्सा बहुत खूबसूरत है। बौद्ध मठ, टॉय ट्रैन, पहाड़ी रास्तों के अलावा कुछ और भी है जिसे आपको अपने दार्जिलिंग ट्रिप में शामिल करना चाहिये और वह है टाइगर हिल्स से दिखने वाला सूर्योदय का नज़ारा। देश के सबसे सुन्दर सूर्योदय के नज़ारों में से एक यह भी है।

कैसे पहुंचे ?

हवाई मार्ग: बागडोगरा हवाई अड्डा निकटतम हवाई अड्डा है जो की दार्जिलिंग से 96 किलोमीटर दूर है। दिल्ली, गुवाहाटी और कोलकाता से दार्जिलिंग तक सीधी उड़ानें उपलब्ध कराते हैं। दिल्ली और कोलकाता हवाई अड्डे दुनिया भर के अंतरराष्ट्रीय शहरों से अच्छी तरह से जुड़े हुए हैं। एक बार जब आप हवाई अड्डे पर पहुंच जाते हैं, तो आप दार्जिलिंग पहुंचने के लिए टैक्सी ले सकते हैं ।

बस: दार्जिलिंग से सिलिगुड़ी (जो लगभग 70 किलोमीटर दूर है) के लिये नियमित बस सेवा उपलब्ध है। इसी तरह की बस सेवाएं कुर्सियोंग और कलीम्पोंग जैसे पड़ोसी शहरों से भी उपलब्ध हैं जो क्रमश: 31 और 50 किलोमीटर दूर है।

रेल मार्ग: दार्जिलिंग रेलवे स्टेशन, दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे (डीएचआर) द्वारा प्रशासित है। दार्जिलिंग का निकटतम रेलवे स्टेशन न्यू जलपाईगुड़ी (मुख्य शहर से 62 किलोमीटर) में है जो की कोलकाता, दिल्ली, गुवाहाटी, चेन्नई, मुंबई, बैंगलोर, भुवनेश्वर और कोचीन जैसे प्रमुख भारतीय शहरों से जुड़ा हुआ है।

यदि आप की नज़र में भी ऐसे स्थान हैं तो हमें कमेंट बॉक्स में अवश्य बतायें ।

admin
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