Thachi Valley Image source: Thachi Valley

थाची वैली की यात्रा Trip to Thachi Valley

एकांत जब खूबसूरत नज़ारों और ताज़ा हवा के झोंके के साथ आता है, तो जीवन शैली में परिवर्तन आना तो स्वाभाविक ही है। इसी बात को चरितार्थ करती है हिमाचल प्रदेश के मंडी में एक छोटी सी घाटी थाची वैली जो की किसी जन्नत से कम नहीं है। गूगल मैप का दावा है कि यह स्थान दिल्ली से 480 किलोमीटर की दूरी पर है।

Thachi Valley
Bithu Narayan Temple Thachi Valley

थाची वैली, मंडी जिले का एक गांव हैं जो की अभी शहरी सभ्यता से बहुत दूर है। यदि आप वीकेंड पर किसी ऐसे ऑफबीट डेस्टिनेशन की तलाश में है जो की बजट के अनुकूल हो, बाहरी दुनिया से पूरी तरह से कटा हुआ हो, एक ऐसा स्थान जो चारों ओर खूबसूरत बर्फीले पहाड़ों से घिरा हो, जगह – जगह झरने हों, हरे – भरे घास के मैदान हों, व्यवसायीकरण न के बराबर हो और प्राकृतिक सुंदरता से संपन्न हो तो थाची वैली आकर आपकी यह तलाश पूरी हो जायेगी।

आपने बहुत से ऐसे लोगों को देखा होगा जो की सप्ताह के पांच तो दिन दिल्ली जैसे शहरों के शोर – शराबे, प्रदूषण को कोसते रहते हैं और सपने देखते रहते हैं की इस बार तो छुट्टियों में किसी ऑफबीट हिल स्टेशन पर अवश्य चलेंगे। वे सोचते हैं की किसी खूबसूरत सी पहाड़ी पर बने छोटे से गेस्ट हाउस में खिड़की के पास बैठ कर बाहर हो रही बारिश को देखते हुए चाय की चुस्कियां लेंगे…. लेकिन जब छुट्टियां आती हैं तो वे फिर से उसी नैनीताल, ऋषिकेश, शिमला, मसूरी में चले जाते हैं जहाँ वे पहले भी 8 बार जा चुके होते हैं…. और फिर फेसबुक पर स्टेटस लिखते हैं “Mountains are Calling”

नैनीताल, ऋषिकेश, शिमला, मसूरी जैसी जगहों पर आम तौर पर वीकेंड में हमेशा ही भीड़ लगी रहती है और फिर बार – बार इन्ही स्थानों पर जाकर घुमक्कड़ी की आत्मा ही दम तोड़ देती है।

Thachi Valley
Thachi Valley
Thachi Valley
Thachi Valley

यदि आप ऐसे शांत स्थान की तलाश में हैं जो की अभी भी भयंकर ट्रैफिक, जगह – जगह दारु पीकर उल्टी करने वाले लोगों, चरस फूंकते युवा, प्रदूषण और होटलों की भरमार आदि से बचा हुआ हो, एक ऐसा स्थान जहाँ केवल पहाड़, प्रकृति और आप हों तो थाची वैली आपको निराश नहीं करेगी।

थाची वैली, हिमाचल प्रदेश के मंडी में एक छोटा सा और अंजाना सा गांव हैं,। थाची घाटी उन दुर्लभ स्थानों में से एक है, जो पूरी तरह से दुनिया से कटे हुए हैं और यह उन स्थानों में से एक है जिसे आपको अपनी लिस्ट में शामिल करना ही चाहिये। यह वैली बहुत से झरनों, धाराओं, नदियों के साथ – साथ हरे – भरे घास के मैदानों किनारे पर स्थित है।

कई ट्रेक्स का बेस कैंप है थाची

थाची वैली से कई ट्रेक शुरू होते हैं जैसे की थाची – सपोनी धार ट्रेक, थाची ​​गांव – बीड पठार पीक ट्रेक आदि। इसके अतरिक्त आप यहाँ पैराग्लाइडिंग भी कर सकते हैं।

अपनी थाची वैली की यात्रा के दौरान आप बाकि ट्रेक करें या न करें लेकिन थाची – सपोनी ट्रेक को न मिस करें। थाची की असली सुंदरता इस ट्रेक पर ही अधिक दिखती है।

(ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के बारे पढ़ने के लिए क्लिक करें)

यात्रा कार्यक्रम और कैसे पहुंचे ?

पहला दिन
दिल्ली से औट की ओर प्रस्थान

दिल्ली से मंडी, कुल्लू और मनाली के लिये बहुत सी बसें शाम के समय (6-7 बजे) कश्मीरी गेट ISBT और मजनू का टीला से चलती हैं। मंडी, कुल्लू या मनाली की किसी भी बस में बैठ जायें और अगली सुबह कुल्लू के औट (Aut) नामक स्थान पर उतर जायें। आप सुबह 8 बजे से पहले औट पहुँच जायेंगे।

दूसरा दिन
औट – बर्छड – रोपा तालाब – पनाला गांव

  • औट से बर्छड के लिये बस और टैक्सी आदि उपलब्ध हैं। बर्छड आप सुबह 10 बजे तक पहुँच जायेंगे। बर्छड पहुँच कर आप नाश्ता आदि करें और अपने पहले ट्रेक की तैयारी भी
  • पहला ट्रेक रोपा तालाब और पनाला गांव को कवर करेगा। इस ट्रेक में 4 घंटे लगते हैं।
  • रोपा तालाब पर कुछ देर रुकें। यहाँ पास ही जंगल में एक मंदिर है जहाँ कुंड के किनारे कुछ देर शांति से बिता सकते हैं। यह मंदिर देवदार के पेड़ों से घिरा हुआ है।
  • रोपा तालाब पर कुछ समय बिताने के बाद पनाला गांव की ओर ट्रेकिंग शुरू करें। पनाला गांव ऊंचाई पर है, अतः ट्रेक थोड़ा सा मुश्किल होगा।
  • आज रात आप पनाला गांव में ही रुकें। यहाँ छोटे – छोटे से गेस्ट हाउस और कैंप उपलब्ध हैं।

तीसरा दिन
पनाला गांव – थाची गांव और बिठु नारायण मंदिर – हिडिम्बा पीक – चुंजवाला पीक

  • आज आप नाश्ता करके के सुबह ही थाची और थाची में स्थित बिठु नारायण मंदिर ट्रेकिंग शुरू कर दें।
  • थाची के नारायण मंदिर में दर्शन के बाद हिडिम्बा पीक की ओर बढ़ चलें।
  • हिडिम्बा पीक पर आप दोपहर तक पहुँच जायेंगे।
  • हिडिम्बा पीक पर कुछ समय बिताने के बाद चुंजवाला पीक की ओर बढ़ चलें।
  • यहाँ एक शिव मंदिर भी है जिसे चुंजवाला महादेव कहते हैं।
  • आप चाहें तो चुंजवाला पीक पहुँच कर कैंप लगा सकते हैं या फिर वापस थाची गांव में आकर किसी कैंप या गेस्ट हाउस में रात बिता सकते हैं।

चौथा दिन
चुंजवाला पीक – सपोनी धार या थाची – सपोनी धार

  • सुबह के नाश्ते के बाद आप सपोनी धार के लिये ट्रेक शुरू कर दें।
  • यह एक छोटा और आसान ट्रेक ही है। अतः आप शीघ्र ही पहुँच जायेंगे।
  • आज आप सपोनी धार से शाम तक औट पहुँच सकते हैं।
  • औट से आपको दिल्ली की बस आसानी से मिल जायेगी।

ध्यान दें की यदि आप रोपा तालाब और पनाला नहीं जाना चाहते हैं और केवल थाची गांव और बिठु नारायण मंदिर – हिडिम्बा पीक – चुंजवाला पीक – सपोनी धार देखना चाहते हैं, तो औट से थाची के लिये सीधी टैक्सी भी ले सकते हैं।

कब जायें ?

आप पूरे वर्ष में कभी भी यहाँ जा सकते हैं। हाँ, यदि आप बर्फ़बारी देखने के शौक़ीन हैं तो नवंबर से मार्च के बीच कभी भी जा सकते हैं। जनवरी और फ़रवरी में कभी – कभी भयंकर बर्फ़बारी के कारण रास्ते बंद भी हो जाते हैं।

(आदि कैलाश यात्रा पढ़ें)

कहाँ ठहरें ?

थाची और पनाला में कैंपिंग और छोटे गेस्ट हाउस उपलब्ध हैं लेकिन इनकी संख्या कम ही हैं। ऐसे में The Hill Camping Thachi एक अच्छा विकल्प है। यहाँ आप को 600 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से कैंपिंग की सुविधा मिल जाती है। संगीत और बोन फायर आदि का भी प्रबंध है। आप इनसे +91 7807600403 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अतिरक्त इनसे फेसबुक पर भी यहाँ क्लिक करके संपर्क साधा जा सकता है।

यदि आपके मन में थाची वैली को लेकर को प्रश्न है तो कमेंट करें।

और इसी के साथ आपकी थाची वैली यात्रा संपन्न हुई।

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S. Mishra

Ha bhai. Shahar me pradushan kafi hai shor sharaba kafi hai to ab aisi jagah ki khoj ki jaye jo shant sunder ho. Aur fir WEEKEND ka naam dekar un jagaho ka v wahi haal kar de. Waah re insaan! Jo Mila wo sambhal nahi sake bachi hue duniya ko v barbadi ke kagar par pahucha hi do.