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गुप्तकाशी से दिल्ली (Guptkashi to Delhi)

चौथा दिन

सुबह जल्दी ही नींद खुल गयी और हम सभी तैयार हो कर बस स्टैंड पर पहुँच गये। यहाँ स्वप्निल ने देहरादून वाली बस में 7 सीटें पहले से रोक रखी थी। उसने अच्छा ही किया, किन्तु मेरी इच्छा देहरादून से होते हुए जाने की नहीं थी।

बस वाले ने कहा के वह हमें ऋषिकेश से दूसरी बस दिलवा देगा। लेकिन मै जानता था की ऋषिकेश से जो बस हरिद्वार के लिए चलती है वह मुख्य हाइवे से होते हुए ही जाती है और उस मार्ग पर लगने वाले जाम के बारे में मै जानता ही था। इसलिए मै चाहता था की गुप्तकाशी से हरिद्वार की बस में ही बैठा जाए क्योंकि वह चीला डैम से होते हुए जाएगी। चीला डैम वाला मार्ग बिलकुल खाली होता है। यहाँ भी बस को लेकर हम दोनों के बीच विवाद हो गया। छोटी – बड़ी बातों को लेकर हमारा विवाद बढ़ता ही जा रहा था और यह आगे भी जारी रहा।

यहाँ से हरिद्वार की बस 6:30 बजे चल पड़ी। मन्दाकिनी की सुन्दर घाटी से होते हुए हम आगे बढ़ते जा रहे थे।

मुझे याद है की जब पहली बार यहाँ मै और देबासीस यहाँ आये थे, तब देबासीस का मन ऐसा लगा की उसने यही बसने का मन बना लिया।

कहते हैं न की ये पहाड़ दूर से ही देखने में ख़ूबसूरत लगते हैं। यहाँ बसना यदि इतना ही आसान होता तो उत्तराखंड आज पलायन का दंश न झेल रहा होता। आज पहाड़ों में गांव के गांव खाली हो रहें हैं। गांवों में बच गये हैं तो केवल बुज़ुर्ग। उत्तराखंड के गठन के वक़्त यहाँ के लोगों के मन में एक उम्मीद जगी थी की अब रोज़गार और उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली जैसे शहरों के धक्के नहीं खाने पड़ेंगे। ऐसा नहीं है की यहाँ सुविधाएँ बिलकुल नहीं पहुंची हैं, पहले से काफ़ी सुधार हुआ है लेकिन विकास अनियंत्रित है। अब तो पलायन की समस्या विकराल रूप लेती जा रही है।

ऐसे में मुझे कुमाउनी लोक गायिका कबूतरी देवी की कुछ पंक्तियाँ याद आ रही थी –

‘आज पनी ज्यों – ज्यों, भोल पनी ज्यों – ज्यों, पोर्खिन त न्हें जोंला
स्टेशन सम्मा पुजा दें मलय, पछिल वीरान हवें ज्योंल’
(आज और कल जाने की जल्दी में निकल जायेंगे और परसो तो चले ही जाना है।
मुझे स्टेशन पहुंचा दे फिर सब वीरान हो ही जाना है)।

Towards Rudraprayag
रुद्रप्रयाग की ओर

ख़ैर… चंद्रापुरी, तिलवाड़ा, अगत्स्यमुनि, रुद्रप्रयाग, श्रीनगर और देव प्रयाग होते हुए हम देवप्रयाग पहुंचे। यहाँ बस को आधे घंटे तक रुकना था। आधे घंटे बाद बस हरिद्वार की ओर बढ़ चली। अब मौसम में गर्मी हो गयी थी। लगभग एक बजे तक हम लोग ऋषिकेश पहुंच चुके थे। यहाँ से बस मुख्य हाइवे छोड़ कर चीला डैम वाले रास्ते पर चल पड़ी। यह मार्ग ख़ूबसूरत है। एक ओर बहती हुई गंगा नहर और दूसरी ओर राजा जी नेशनल पार्क। मेरी और लगभग सभी की इच्छा हरिद्वार में भोजन और खरीदारी करने की थी, लेकिन स्वप्निल अधिक थकान के कारण सीधे बस अड्डे जाना चाहता था।हर की पौड़ी वाले घाट पर हम लोग उतर गये। वहां मुझे, रोहित और देबासीस को गंगा जल लेना था। इस बात पर स्वप्निल ने देबासीस पर तंज कसा और उसका मज़ाक उड़ाया। वह गंगा जल को भी अंधविश्वास का ही दर्जा दे रहा था और यह बात मै सहन नही कर सकता था। इस बात को लेकर मैने भी स्वप्निल को काफ़ी सुना दिया।

ख़ैर.. थोड़ी – बहुत ख़रीदारी के बाद हम सभी ने खाना खाया और बस द्वारा दिल्ली की ओर बढ़ चले।

आप भी क्या सोच रहे होंगे की कैसे लोग हैं ये ? लड़ते ही रहते हैं। यात्रा में विवाद किसी को पसंद नहीं और मुझे तो बिलकुल भी नहीं, लेकिन परिस्थितियां ही कुछ ऐसी बन गयी थी। यहाँ बात सही या गलत होने के साथ – साथ मेरी ज़िम्मेदारी की भी थी। चूँकि यात्रा में मै मुख्य था, मुझे अपनी ज़िम्मेदारी सही से निभानी चाहिये थी जो की मै नहीं निभा पाया और इसका दुःख मुझे आज भी है।

अब हालात ऐसे हैं की एक ऑफिस में में होने के बावज़ूद मुझमें और स्वप्निल में बात-चित नही के बराबर होती है। ख़ैर जो होना था वह तो हो गया गया। बीता हुआ बदलना किसके हाँथ में होता है ?

हरिद्वार

अब इस यात्रा में होने वाले व्यय की बात की जाये। इस यात्रा में हम कुल सात लोग थे। मै केवल स्वयं द्वारा किये गए व्यय का वर्णन दे रहा हूँ।

किराया रुपये
ऑफिस से कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन (ऑटो किराया सम्मिलित) 55
कश्मीरी गेट ISBT से ऋषिकेश ( वातानुकूलित बस) 493
ऋषिकेश से गोपेश्वर (बस) 300
गोपेश्वर से चोपता (टैक्सी) 200
चोपता से गुप्तकाशी (टैक्सी) 234
गुप्तकाशी से हरिद्वार (बस) 300
हरिद्वार से दिल्ली (बस) 240
दिलशाद गार्डन से नवादा मेट्रो स्टेशन (मेट्रो) 45
होटल
चोपता 100
गुप्तकाशी 300
भोजन एवं चाय आदि 566
अन्य 32
कुल व्यय 2865

यदि आपके मन में कोई भी प्रश्न या सुझाव है तो कृपया कमेंट बॉक्स में लिखें।

 

इस यात्रा के अन्य भागों को पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें।

चोपता – तुंगनाथ – चंद्रशिला यात्रा भाग 1 (तैयारी)
चोपता – तुंगनाथ – चंद्रशिला यात्रा भाग 2 (दिल्ली से ऋषिकेश)
चोपता – तुंगनाथ – चंद्रशिला यात्रा भाग 3 (ऋषिकेश से चमोली)
चोपता – तुंगनाथ – चंद्रशिला यात्रा भाग 4 (चमोली से चोपता)
चोपता – तुंगनाथ – चंद्रशिला यात्रा भाग 5 (चोपता से श्री तुंगनाथ मंदिर)
चोपता – तुंगनाथ – चंद्रशिला यात्रा भाग 6 (तुंगनाथ से चंद्रशिला और फिर गुप्तकाशी)
चोपता – तुंगनाथ – चंद्रशिला यात्रा भाग 7 (गुप्तकाशी से दिल्ली)

admin
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