गर्मियां शुरू हो चुकी हैं और अब तो बढ़ती ही जा रही है। बच्चों की छुट्टियाँ भी शुरू हो चुकी हैं। छुट्टियाँ और वो भी गर्मियों की…. कितना अच्छा लगता है न ये शब्द ? इस मौसम में बहुत से लोग अपने गाँव जाना पसंद करते हैं और जाते भी हैं। अब ये तो हुई अपने गाँव जाने की बात, क्यों न हम इस बार दूसरों के गाँव भी घूम कर आयें। ऐसे गाँव जो सुदूर पहाड़ों में बसे हों, ठंडी – ठंडी हवा बह रही हो, दूर कहीं झरना और उसी झरने से निकलती नदी। क्यों, खो गये न सपनों की दुनिया में ? तो आइये चलते हैं शब्दों की टेढ़ी – मेढ़ी पगडंडियों से होते हुए ऐसे ही गांवो की सैर पर।

1. कालप (उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड) Kalap (Uttarkashi, Uttarakhannd)

Kalap
कालप (स्रोत: गूगल इमेज)

500 की आबादी वाला कालप उत्तराखण्ड के ऊपरी गढ़वाल क्षेत्र में स्थित एक छोटा सा गांव है। 7,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह गांव चीड़ और देवदार जंगलों से घिरा हुआ है। इसके साथ ही सूपिन नदी के किनारे पर स्थित होने के कारण इस गाँव की छटा ही निराली है । सुपिन ही आगे जाकर टोंस में मिल जाती है और टोंस यमुना में । प्रकृति के वरदान के कारण शानदार सुंदरता से घिरा हुआ कालप आज पर्यटकों के आकर्षण के केंद्र के रूप में उभर रहा है। एक बात ध्यान देने वाली है की यहाँ तक पहुँचने का कोई मोटर या रेल मार्ग नहीं है। केवल 6 घंटे की ट्रैकिंग द्वारा ही पहुंचा जा सकता है।

कालप और इसके आस-पास के गांव महाभारत की पौराणिक कथाओं से सम्बंधित हैं। यहाँ का मुख्य मंदिर महाभारत के योद्धा कर्ण को समर्पित है। समय – समय पर कर्ण की मूर्ति इस क्षेत्र के विभिन्न गांवों के बीच स्थानांतरित की जाती है। जब मूर्ति गांव में लायी जाती है, तो इसे कर्ण उत्सव के रूप में मनाया जाता है। यहाँ आखिरी उत्सव वर्ष 2014 में था, और अब यह वर्ष 2024 के बाद ही होगा।

कैसे पंहुचे ?
कालप उत्तराखण्ड की राजधानी देहरादून से 210 किलोमीटर और नई दिल्ली से 450 किमी दूर है। देहरादून में रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा है। देहरादून नई दिल्ली से दैनिक ट्रेनों और उड़ानों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

कालप तक पहुँचने के लिए पहले आपको देहरादून से नैटवाड़ पहुंचना होगा। नैटवाड़ के लिए देहरादून ‘पर्वतीय’ बस अड्डे से बस मिलती है। नैटवाड़ तक पहुँचने में लगभग 8 घंटे लगते हैं। नैटवाड़ से कालप ट्रैकिंग द्वारा 6 घंटे में पहुँचा जा सकता है।

क्या है विशेष ?
फॉरेस्ट ट्रेकिंग, पहाड़ी नदियां, झड़ने, स्थानीय स्वर्ण मंदिर और विलेज वॉक।

कहां ठहरे?
लकड़ी के बने मकानों में। गांव में होम स्टे और सेल्फ कुकिंग की सुविधा भी उपलब्ध है।

 

2. खाती (बागेश्वर, उत्तराखण्ड) Khati (Bageshwar, Uttarakhannd)

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खाती (स्रोत: गूगल इमेज)

यदि आप इस गर्मी में ब्रेक लेना चाहते हैं और खो जाना चाहते हैं प्रकृति की गोद में, तो मुझे विश्वास है कि खाती की हवायें आपको निराश नहीं करेंगी। भारत में अनछुए प्राकृतिक स्थलों में से एक खाती तक ट्रेकिंग द्वारा पहुंचा जा सकता है। हर ओर फैली हरियाली, नायाब स्थल और विशिष्ट संस्कृति इस छोटे से गांव को धरती पर स्वर्ग बनाती है। यह गाँव पिंडारी ग्लेशियर ट्रेक पर स्थित है और यह पिंडारी ग्लेशियर के रास्ते पर आखिरी निवास गांव है। खरकियागाँव, खाती तक पहुँचने के मार्ग पर वह अंतिम गाँव हैं जहाँ तक सड़क जाती है और फ़ीर यहाँ से ट्रेक ट्रेक की शुरुआत होती है । ट्रेक बुरांश और चीड़ के घने जंगलों से होते हुए जाता है। यदि आपके पास 7-8 दिनों का पर्याप्त समय है तो ट्रेक करके पिंडारी ग्लेशियर भी पहुँच सकते हैं। पिंडारी से पिंडर नदी निकलती है जो की कर्णप्रयाग में अलकनंदा से संगम करती है और यही अलकनंदा देवप्रयाग में भागीरथी से संगम करके गंगा बन जाती है।

कैसे पंहुचे ?
खाती उत्तराखण्ड के बागेश्वर जिले में स्थित है और नज़दीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम से 101 किलोमीटर दूर है । यहाँ पहुँचने के लिए निकटम रेलवे स्टेशन काठगोदाम और हवाई अड्डा पंत नगर में है। काठगोदाम के लिए देश के ज़्यादातर प्रमुख शहरों से रेल सेवा उपलब्ध है।

काठगोदाम पहुँच कर आप को वहां से लोहारखेत पहुंचना होगा। लोहार खेत के लिए बस और टैक्सीयाँ उपलब्ध हैं। लोहारखेत पहुँच कर आपको वहां से आपको खरकिया के लिए टैक्सी या जीप मिल जायेगी। लोहार खेत से खरकिया का सफर लगभग 5 घंटे का है। खरकिया से खाती तक पहुँचने का एकमात्र मार्ग 5 किलोमीटर की ट्रैकिंग का है।

क्या है विशेष ?
फॉरेस्ट ट्रेकिंग, पहाड़ी नदियां, झरने और एकांत में समय बिताने लायक स्थान।

कहां ठहरे?
गाँव में होम स्टे और रेस्ट हाउस की कोई कमी नहीं है।

 

3. अस्कोट (पिथौरागढ़, उत्तराखण्ड) Askot (Pithoragarh, Uttarakhannd)

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अस्कोट (स्रोत: गूगल इमेज)

लगभग 1106 मीटर की ऊंचाई पर स्थित, अस्कोट उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में एक रियासत रह चुकी है । यदि आप गर्मी से राहत पाने के लिए किसी अनजान पहाड़ी गाँव की तलाश में हैं तो अस्कोट भी एक विकल्प हो सकता है। अस्कोट खुद को खो देने के लिए एक आदर्श स्थान है। प्रसिद्ध कैलाश-मानसरोवर यात्रा के रास्ते पर धारचुला और पिथौरागढ़ के बीच एक रिज पर स्थित यह छोटा सा क़स्बा कुमाऊं हिमालय के ऊंचे पर्वत शिखरों से घिरा हुआ है और नदी काली इसके करीब ही बहती है। पंचाचुल्ली पर्वत शिखर के बेस कैम्प तक जाने वाले यात्रियों के लिए भी यह एक पड़ाव है।

कैसे पंहुचे ?
अब जब की अस्कोट उत्तराखण्ड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित है तो आपको पहले पिथौरागढ़ पहुंचना होगा। पिथौरागढ़ से अस्कोट की दूरी 54 किलोमीटर है और टैक्सी आदि सेवायें उपलब्ध हैं।

पिथौरागढ़ के लिए दिल्ली के आनंद विहार बस अड्डे से सीधी बस सेवा है। इसके अतिरिक्त आप दिल्ली से काठगोदाम तक रेल से पहुँच कर वहां से भी पिथौरागढ़ के लिए बस ले सकते हैं। काठगोदाम के लिए देश के प्रमुख शहरों से रेल सेवा उपलब्ध है। हवाई यात्रियों के लिए नज़दीकी हवाई अड्डा पंत नगर में है।

क्या है विशेष ?
यहाँ का मुख्य आकर्षण इस अस्कोट कस्तूरी मृग अभयारण्य है जो की अस्कोट से लेकर 6904 मीटर ऊंचाई तक नजरीकोट, पंचाचुल्ली, छिपलाकोट और नौकाना जैसी चोटियों के बीच फैला हुआ है । गर्मियों में यहाँ बर्फ़बारी तो नहीं होती, किन्तु मौसम ठंडा बना रहता है।

कहां ठहरे?
यहाँ रुकने के लिए होम स्टे और कुछ रेस्ट हाउस अच्छे विकल्प हैं।

 

4. गुनेह (कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश) Guneh (Uttarkashi, Uttarakhannd)

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गुनेह (स्रोत: गूगल इमेज)

हिमालय के कुछ अनदेखे हिस्सों का दीदार करना हो तो चले आइये हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा घाटी के गुनेह गाँव में। भगवान की दी हुई बेहिसाब ख़ूबसूरती समेटे इस गाँव में प्रकृति प्रेमी को वह सब मिलेगा जिसके लिए यह वह जंगल – जंगल भटकता रहता है। जनजातीय परिवेश वाला यह गाँव आज भी पर्यटकों की भीड़ से दूर है। रंग – बिरंगे फूलों के खेतों के बीच बने मड हाउस में रहने का एहसास ही मन को प्रसन्न कर देता है। ऐसा लगता है मानों किसी कलाकार ने फुर्सत में बैठ कर अपने कैनवस पर इस गाँव को बनाया हो।

कैसे पंहुचे ?
कांगड़ा के लिए दिल्ली के कश्मीरी गेट बस अड्डे से बस सेवा उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त रेल यात्री दिल्ली – जम्मू रेल लाइन पर स्थित पठानकोट स्टेशन पहुँच कर वहां से कांगड़ा के लिए दूसरी ट्रेन पकड़ सकते हैं।

क्या है विशेष ?
मंदिर, पैराग्लाइडिंग, मॉनेस्ट्री, बरोट घाटी, जर्मन – इण्डिया आर्ट गैलेरी और विलेज वॉक।

कहां ठहरे?
सभी आधुनिक सुविधाओं से युक्त मड हाउस और होम स्टे।

 

5. मालदेवता (देहरादून, उत्तराखण्ड) Maldevta (Uttarkashi, Uttarakhannd)

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मालदेवता (स्रोत: गूगल इमेज)

ख़ूबसूरत वनों और कल – कल बहती नदी के किनारे बसा मालदेवता देहरादून के प्रसिद्ध पर्यटक स्थलों में से एक है। हरे – भरे खेतों वाला मालदेवता देहरादून के नज़दीक किसी स्वर्ग से कम नहीं। मालदेवता देहरादून के रायपुर के नज़दीक बसा है। वीकेंड में बहुत से शहर वासी यहाँ पिकनिक मनाने चले आते हैं। यदि आपके पास अतिरिक्त समय है तो पास ही स्थित सहस्त्रधारा झरना और तिब्बती मार्किट आदि भी जा सकते हैं।

कैसे पंहुचे ?
मालदेवता, देहरादून के रायपुर के नज़दीक श्रीपुर में स्थित है जो की देहरादून बस अड्डे से 18 किलोमीटर दूर स्थित है। देहरादून देश के सभी बड़े शहरों से बस, रेल और फ्लाइट द्वारा जुड़ा हुआ है। यदि आप दिल्ली –  एन.सी.आर. में रहते हैं और वीकेंड में ऋषिकेश के अलावा कही और जाना चाहते हैं तो मालदेवता आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है।

क्या है विशेष ?
ट्रैकिंग, यमुना नदी, मालदेवता मंदिर, सहस्त्रधारा, तिब्बत्ती मार्केट और पल्टन बाज़ार।

कहां ठहरे?
सभी आधुनिक सुविधाओं से युक्त रेस्ट हाउस यहाँ उपलब्ध हैं।

यह श्रंखला आगे भी जारी रहेगी।

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pandeyumesh265@gmail.com

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Anit
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Anit

wo kehte h na, andhe insan ko kya chahiye, bas do aankh. garmi k mausam me isse acha aur kya hoga, hamare desh ki kuch shandar jagah